Category: उत्तराखंड

  • Politics: धामी सरकार का मंत्रिमंडल अपने अंदाज का, सतपाल, डॉ धन सिंह को भी अहम जिम्मेदारी

    Politics: धामी सरकार का मंत्रिमंडल अपने अंदाज का, सतपाल, डॉ धन सिंह को भी अहम जिम्मेदारी

    देहरादून। मंत्रिमंडल में विभाग बंटवारे को लेकर धामी-2 सरकार में कुछ विशेष ही हुआ है। लिहाजा इसे धामी का जलवा ही कहेंगे। सूत्रों के अनुसार जेपी नड्डा ने भी इन पर अपनी सहमति जताई है। वंही धामी-2 सरकार में मंत्री सतपाल महाराज और डॉ. धन सिंह रावत कद्दावर होकर उभरे हैं। मंत्रियों के विभागों की सूची मंगलवार रात 9:15 बजे मीडिया को जारी कर दी गई थी, लेकिन फौरन बाद इसे मौखिक रूप से रोकने के लिए कहा गया। दो घंटे 26 मिनट बाद दोबारा वही सूची जारी की गई। हालांकि, इस बात का खुलासा नहीं हो सका कि ढाई घंटे तक सूची को रुकवाने का कारण क्या था? महाराज को उनके महकमों के साथ ही ग्रामीण निर्माण एवं पंचायतीराज नया विभाग मिला।

    धन सिंह को उत्तराखंड के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण विद्यालयी शिक्षा विभाग की नई जिम्मेदारी मिली। उनके पुराने सहकारिता, स्वास्थ्य विभाग नई सरकार में भी बहाल रखे गए हैं। वहीं, नए मंत्रियों में प्रेमचंद अग्रवाल वजनदार विभाग पाने में कामयाब रहे हैं। संसदीय कार्यमंत्री का अहम विभाग सीएम ने उन्हें पहले ही दे दिया था। अब शहरी विकास-आवास जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी उन्हें मिली है। पहले ये विभाग मदन कौशिक के पास थे। गणेश जोशी का जलवा इस सरकार में भी कायम है। उन्हें सैनिक कल्याण विभाग तो मिला ही है, ग्राम्य विकास, कृषि एवं कृषि शिक्षा जैसे अहम विभागो की जिम्मेदारी भी सीएम ने जोशी को सौंपी। वहीं, रेखा आर्य से पशुपालन, दुग्ध विकास सरीखे विभाग हटाकर उन्हें खाद्य विभाग जैसा अहम विभाग दिया गया। महिला सशक्तिकरण बाल विकास विभाग दोबारा मिला है।

    सुबोध को झटका: सुबोध उनियाल को जरूर बड़े विभाग के रूप में वन और तकनीकी शिक्षा मिले हैं। लेकिन, उनकी पसंद के कृषि और उद्यान विभाग उनसे ले लिए गए हैं। नए विभाग के रूप में सुबोध को अपेक्षाकृत कम महत्व के भाषा एवं निर्वाचन मिले। धामी-एक सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री का जिम्मा डॉ. हरक सिंह रावत के पास था, लेकिन इस बार सीएम ने वन तो सुबोध को दे दिया, लेकिन पर्यावरण अपने पास ही रखा है।

    चंदन को भी बड़ी जिम्मेदारी: पहली बार मंत्री बने चंदन रामदास को समाज कल्याण विभाग जैसा बड़ा महकमा मिला है। वो परिवहन विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण, एमएसएमई विभाग का दायित्व भी संभालेंगे।

    हाईकमान के भरोसे पर खरे उतरे सीएम धामी
    सीएम पुष्कर धामी लगातार भाजपा हाईकमान का विश्वास जीत रहे हैं। चुनाव हारने के बावजूद हाईकमान ने सीएम के रूप में उन्हें दोबारा बागडोर सौंपी। अब विभाग आवंटन में धामी का सिक्का चला। माना जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनकी पसंद पर मुहर लगाई। सूत्रों ने बताया कि, कुछ मंत्री विभागों को लेकर खुश नहीं हैं।

    समान प्रकृति के विभाग विभिन्न मंत्रियों के हिस्से
    समान प्रकृति के विभाग अलग-अलग मंत्रियों के हिस्से आएं हैं। इसे तालमेल की कमी के तौर पर देखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर सीएम ने पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन अपने पास रखा। वन विभाग मंत्री सुबोध उनियाल के पास है। श्रम विभाग भी सीएम के पास है तो कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री सौरभ बहुगुणा देखेंगे। तकनीकी शिक्षा सुबोध देखेंगे, लेकिन विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी धन सिंह को दी गई। पर्यटन विभाग महाराज देखेंगे, नागरिक उड्डयन धामी खुद संभालेंगे।

    विभाग बंटवारे को लेकर असमंजस में रहे मंत्री
    विभागों के बंटवारे की सूची को लेकर ज्यादातर मंत्री असमंजस में रहे। कई मंत्री काफी देर तक लिस्ट कन्फर्म कराने में जुटे रहे। हालांकि, काफी देर तक सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट न किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी रही। मंगलवार रात सोशल मीडिया में सूची जारी होने के बाद मंत्रियों को फोन पर बधाई का सिलसिला शुरू हो गया। लिस्ट आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुई थी। इस कारण, मंत्री अपने सोर्सेज से लिस्ट कन्फर्म कराने में जुट गए। जब आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई तो समर्थकों ने इसी सूची को शेयर करना शुरू कर दिया।

  • Politics: धामी सरकार का मंत्रिमंडल अपने अंदाज का, सतपाल, डॉ धन सिंह को भी अहम जिम्मेदारी

    Politics: धामी सरकार का मंत्रिमंडल अपने अंदाज का, सतपाल, डॉ धन सिंह को भी अहम जिम्मेदारी

    देहरादून। मंत्रिमंडल में विभाग बंटवारे को लेकर धामी-2 सरकार में कुछ विशेष ही हुआ है। लिहाजा इसे धामी का जलवा ही कहेंगे। सूत्रों के अनुसार जेपी नड्डा ने भी इन पर अपनी सहमति जताई है। वंही धामी-2 सरकार में मंत्री सतपाल महाराज और डॉ. धन सिंह रावत कद्दावर होकर उभरे हैं। मंत्रियों के विभागों की सूची मंगलवार रात 9:15 बजे मीडिया को जारी कर दी गई थी, लेकिन फौरन बाद इसे मौखिक रूप से रोकने के लिए कहा गया। दो घंटे 26 मिनट बाद दोबारा वही सूची जारी की गई। हालांकि, इस बात का खुलासा नहीं हो सका कि ढाई घंटे तक सूची को रुकवाने का कारण क्या था? महाराज को उनके महकमों के साथ ही ग्रामीण निर्माण एवं पंचायतीराज नया विभाग मिला।

    धन सिंह को उत्तराखंड के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण विद्यालयी शिक्षा विभाग की नई जिम्मेदारी मिली। उनके पुराने सहकारिता, स्वास्थ्य विभाग नई सरकार में भी बहाल रखे गए हैं। वहीं, नए मंत्रियों में प्रेमचंद अग्रवाल वजनदार विभाग पाने में कामयाब रहे हैं। संसदीय कार्यमंत्री का अहम विभाग सीएम ने उन्हें पहले ही दे दिया था। अब शहरी विकास-आवास जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी उन्हें मिली है। पहले ये विभाग मदन कौशिक के पास थे। गणेश जोशी का जलवा इस सरकार में भी कायम है। उन्हें सैनिक कल्याण विभाग तो मिला ही है, ग्राम्य विकास, कृषि एवं कृषि शिक्षा जैसे अहम विभागो की जिम्मेदारी भी सीएम ने जोशी को सौंपी। वहीं, रेखा आर्य से पशुपालन, दुग्ध विकास सरीखे विभाग हटाकर उन्हें खाद्य विभाग जैसा अहम विभाग दिया गया। महिला सशक्तिकरण बाल विकास विभाग दोबारा मिला है।

    सुबोध को झटका: सुबोध उनियाल को जरूर बड़े विभाग के रूप में वन और तकनीकी शिक्षा मिले हैं। लेकिन, उनकी पसंद के कृषि और उद्यान विभाग उनसे ले लिए गए हैं। नए विभाग के रूप में सुबोध को अपेक्षाकृत कम महत्व के भाषा एवं निर्वाचन मिले। धामी-एक सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री का जिम्मा डॉ. हरक सिंह रावत के पास था, लेकिन इस बार सीएम ने वन तो सुबोध को दे दिया, लेकिन पर्यावरण अपने पास ही रखा है।

    चंदन को भी बड़ी जिम्मेदारी: पहली बार मंत्री बने चंदन रामदास को समाज कल्याण विभाग जैसा बड़ा महकमा मिला है। वो परिवहन विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण, एमएसएमई विभाग का दायित्व भी संभालेंगे।

    हाईकमान के भरोसे पर खरे उतरे सीएम धामी
    सीएम पुष्कर धामी लगातार भाजपा हाईकमान का विश्वास जीत रहे हैं। चुनाव हारने के बावजूद हाईकमान ने सीएम के रूप में उन्हें दोबारा बागडोर सौंपी। अब विभाग आवंटन में धामी का सिक्का चला। माना जा रहा है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनकी पसंद पर मुहर लगाई। सूत्रों ने बताया कि, कुछ मंत्री विभागों को लेकर खुश नहीं हैं।

    समान प्रकृति के विभाग विभिन्न मंत्रियों के हिस्से
    समान प्रकृति के विभाग अलग-अलग मंत्रियों के हिस्से आएं हैं। इसे तालमेल की कमी के तौर पर देखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर सीएम ने पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन अपने पास रखा। वन विभाग मंत्री सुबोध उनियाल के पास है। श्रम विभाग भी सीएम के पास है तो कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री सौरभ बहुगुणा देखेंगे। तकनीकी शिक्षा सुबोध देखेंगे, लेकिन विद्यालयी एवं उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी धन सिंह को दी गई। पर्यटन विभाग महाराज देखेंगे, नागरिक उड्डयन धामी खुद संभालेंगे।

    विभाग बंटवारे को लेकर असमंजस में रहे मंत्री
    विभागों के बंटवारे की सूची को लेकर ज्यादातर मंत्री असमंजस में रहे। कई मंत्री काफी देर तक लिस्ट कन्फर्म कराने में जुटे रहे। हालांकि, काफी देर तक सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट न किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी रही। मंगलवार रात सोशल मीडिया में सूची जारी होने के बाद मंत्रियों को फोन पर बधाई का सिलसिला शुरू हो गया। लिस्ट आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुई थी। इस कारण, मंत्री अपने सोर्सेज से लिस्ट कन्फर्म कराने में जुट गए। जब आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई तो समर्थकों ने इसी सूची को शेयर करना शुरू कर दिया।

  • एक्शन में धामी सरकार, दो बड़े आदेश जारी कर राज्यवासियों और पुलिसकर्मियों को दी सौगात

    एक्शन में धामी सरकार, दो बड़े आदेश जारी कर राज्यवासियों और पुलिसकर्मियों को दी सौगात

    देहरादूनः उत्तराखंड में धामी सरकार दोबारा सत्ता में आने के बाद फुल एक्शन में है। बुधवार को एक के बाद एक तीन बड़े आदेश जारी किए है। इन आदेशों में आमजन, शिक्षक और पुलिस विभाग के लिए निर्देश दिए गए है। सीएम धामी ने वृद्धाजनों को बड़ी सौगात देते हुए चुनावी वादे को पूरा कर दिया है। अब उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पति और पत्नी दोनों को लाभ मिल सकेगा। इतना ही नहीं अब 1200 रुपये मिलने वाली पेंशन 1400 रुपये प्रतिमाह मिलेगी। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए वर्दी भत्ता का आदेश जारी किया गया है।

    मीडिया रिपोर्टस के अनुसार मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव से पहले वृद्धजनों के हित में किया अपना वादा निभाया है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। जिसके तहत उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पति और पत्नी दोनों को लाभ मिल सकेगा। इतना ही नहीं अब 1200 रुपये मिलने वाली पेंशन 1400 रुपये प्रतिमाह मिलेगी। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार विकल्प रहित संकल्प के ध्येय वाक्य पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जो घोषणा पूर्व में की गई हैं उनका शासनादेश भी समय से किया जाए।

    वहीं उत्तराखंड सरकार ने पुलिस कार्मियों को भी राहत देते हुए वर्दी भत्ते का आदेश जारी कर दिया है। आदेश के अनुसार इस वर्ष से हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल श्रेणी के कार्मियों को 2250 और वहीं चतुर्थ श्रेणी कार्मियों को 1500 रूपए प्रदान किए जाने व वर्दी भत्ते के अतिरिक्त धुलाई भत्ता बादस्तूर भी दिया जाएगा। आगामी वर्षों में मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए इस वर्दी भत्ते में और भी वृद्धि की जाएगी। प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु ने कहा कि सभी कर्मियों को अपनी मनपसंद, माप के अनुसार वर्दी खरीदने की छूट भी दी जाएगी। पुलिस, सीपीसी कैंटीन में वर्दी का कपड़ा उपलब्ध कराया जाएगा।

  • एक्शन में धामी सरकार, दो बड़े आदेश जारी कर राज्यवासियों और पुलिसकर्मियों को दी सौगात

    एक्शन में धामी सरकार, दो बड़े आदेश जारी कर राज्यवासियों और पुलिसकर्मियों को दी सौगात

    देहरादूनः उत्तराखंड में धामी सरकार दोबारा सत्ता में आने के बाद फुल एक्शन में है। बुधवार को एक के बाद एक तीन बड़े आदेश जारी किए है। इन आदेशों में आमजन, शिक्षक और पुलिस विभाग के लिए निर्देश दिए गए है। सीएम धामी ने वृद्धाजनों को बड़ी सौगात देते हुए चुनावी वादे को पूरा कर दिया है। अब उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पति और पत्नी दोनों को लाभ मिल सकेगा। इतना ही नहीं अब 1200 रुपये मिलने वाली पेंशन 1400 रुपये प्रतिमाह मिलेगी। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों को राहत देते हुए वर्दी भत्ता का आदेश जारी किया गया है।

    मीडिया रिपोर्टस के अनुसार मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने विधानसभा चुनाव से पहले वृद्धजनों के हित में किया अपना वादा निभाया है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। जिसके तहत उत्तराखंड में वृद्धावस्‍था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पति और पत्नी दोनों को लाभ मिल सकेगा। इतना ही नहीं अब 1200 रुपये मिलने वाली पेंशन 1400 रुपये प्रतिमाह मिलेगी। सीएम ने कहा कि हमारी सरकार विकल्प रहित संकल्प के ध्येय वाक्य पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जो घोषणा पूर्व में की गई हैं उनका शासनादेश भी समय से किया जाए।

    वहीं उत्तराखंड सरकार ने पुलिस कार्मियों को भी राहत देते हुए वर्दी भत्ते का आदेश जारी कर दिया है। आदेश के अनुसार इस वर्ष से हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल श्रेणी के कार्मियों को 2250 और वहीं चतुर्थ श्रेणी कार्मियों को 1500 रूपए प्रदान किए जाने व वर्दी भत्ते के अतिरिक्त धुलाई भत्ता बादस्तूर भी दिया जाएगा। आगामी वर्षों में मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए इस वर्दी भत्ते में और भी वृद्धि की जाएगी। प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु ने कहा कि सभी कर्मियों को अपनी मनपसंद, माप के अनुसार वर्दी खरीदने की छूट भी दी जाएगी। पुलिस, सीपीसी कैंटीन में वर्दी का कपड़ा उपलब्ध कराया जाएगा।

  • Big breaking: कल से कांग्रेसियों की केंद्र और राज्य की सरकार पर गरजना शुरू,एक अभियान के तहत होगा विरोध…

    Big breaking: कल से कांग्रेसियों की केंद्र और राज्य की सरकार पर गरजना शुरू,एक अभियान के तहत होगा विरोध…

    देहरादून। बढ़ती महंगाई के विरोध में कांग्रेस की ओर से तीन चरणों में देशभर में ‘महंगाई मुक्त भारत अभियान’ के तहत विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसी कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड में भी जिला, विधानसभा और ब्लाक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    प्रदेश महामंत्री संगठन एवं वरिष्ठ प्रवक्ता मथुरादत्त जोशी ने बताया कि कांग्रेस की ओर से देशभर में दिनांक 31 मार्च को सुबह 11 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता व आम लोग अपने-अपने घरों के बाहर एवं सार्वजनिक स्थानों पर गैस सिलिंडर को माला पहनाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही ढोल-घंटियां एवं अन्य उपकरण बजाकर भाजपा सरकार का ध्यान गैस-पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि की ओर आकर्षित करेंगे। इसके बाद दो से चार अप्रैल के बीच जिला स्तर पर ‘महंगाई मुक्त भारत धरना एवं मार्च’ आयोजित किए जाएंगे।

    तीसरे चरण में सात अप्रैल को प्रदेश मुख्यालयों में राज्य स्तरीय ‘महंगाई मुक्त भारत धरना एवं मार्च’ का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने वर्ष 2014 एवं 2019 के लोकसभा चुनाव सहित देशभर में हुए विधानसभा चुनावों में जनता से पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कम करने और महंगाई पर अकुंश लगाने का वादा किया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में 75 प्रतिशत की कमी होने के बाद भी पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की दरों में लगातार वृद्धि कर आम आदमी की जेब पर डाका डाला गया है।

  • अच्छी खबर: प्रदेश में हवा में उड़ेगा 72 सीटर जहाज, सर्वे की तैयारी,,

    अच्छी खबर: प्रदेश में हवा में उड़ेगा 72 सीटर जहाज, सर्वे की तैयारी,,

    देहरादून। उत्तराखंड में उड़ान योजना के तहत अब पिथौरागढ़ के लिए 72 सीटर हवाई जहाज के संचालन की तैयारी है। इस क्रम में शासन ने एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया (एएआइ) से सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए 22 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। एएआइ से हरी झंडी मिलने के बाद यहां हवाई सेवा शुरू करने के लिए विभिन्न कंपनियों से संपर्क साधा जाएगा।

    हवाई सेवा को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में उड़ान योजना के तहत देहरादून-पिथौरागढ़ हवाई मार्ग पर हवाई सेवा शुरू की थी। पहले यहां केवल नौ सीटर हवाई जहाज को संचालित करने की अनुमति थी। इस आधार पर सरकार ने नौ सीटर हवाई जहाज का संचालन शुरू किया। यह सेवा देहरादून से पंतनगर और पिथौरागढ़ के बीच संचालित की गई। यह काफी सफल भी रही। कुछ समय तक सुचारू सेवा देने के बाद हवाई जहाज में तकनीकी खराबी के कारण यह सेवा पहले तो बाधित हुई और फिर मार्च 2020 में इसे बंद कर दिया गया। कारण यह कि नौ सीटर विमान बेहद सीमित संख्या में हैं। कंपनी को इस मार्ग के लिए वैकल्पिक विमान नहीं मिल पाया।

    इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण लागू लाकडाउन की अवधि में इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया। लाकडाउन समाप्त होने पर प्रदेश सरकार ने इस हवाई सेवा को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया। पिछले वर्ष सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और फिर पुष्कर सिंह धामी ने भी यह मसला केंद्र के समक्ष उठाया। बताया गया कि देश में नौ सीटर विमान बेहद कम हैं। ऐसे में कंपनियां इसमें बहुत अधिक रुचि नहीं दिखा रही हैं।

    ऐसे में यह निर्णय हुआ कि यहां बड़े हवाई जहाज के संचालन पर विचार किया जा सकता है। इस पर यहां 23 सीटर विमान उतारने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। उसमें भी यही बात सामने आई कि ये हवाई जहाज भी सीमित संख्या में हैं। इनकी उपलब्धता में भी कठिनाई आ रही है। ऐसे में यहां अब 72 सीटर विमान उतारने पर विचार किया जा रहा है।

    प्रदेश सरकार ने केंद्र को बताया है कि पंतनगर एयरपोर्ट की हवाई पट्टी पिथौरागढ़ की हवाई पट्टी से छोटी है। बावजूद इसके यहां 72 सीटर विमान उतर रहे हैं। ऐसे में पिथौरागढ़ में भी 72 सीटर विमान उतारा जा सकता है। हवाई पट्टी के निकट एक भवन है, जिसे स्थानांतरित करने के लिए वार्ता चल रही है। सचिव नागरिक उड्डयन दिलीप जावलकर ने बताया कि पिथौरागढ़ में अब 72 सीटर विमान उतारने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। यहां सर्वे के लिए 22 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जल्द ही एएआइ इसका सर्वे करेगा।

  • अच्छी खबर: प्रदेश में हवा में उड़ेगा 72 सीटर जहाज, सर्वे की तैयारी,,

    अच्छी खबर: प्रदेश में हवा में उड़ेगा 72 सीटर जहाज, सर्वे की तैयारी,,

    देहरादून। उत्तराखंड में उड़ान योजना के तहत अब पिथौरागढ़ के लिए 72 सीटर हवाई जहाज के संचालन की तैयारी है। इस क्रम में शासन ने एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया (एएआइ) से सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए 22 लाख रुपये की व्यवस्था की गई है। एएआइ से हरी झंडी मिलने के बाद यहां हवाई सेवा शुरू करने के लिए विभिन्न कंपनियों से संपर्क साधा जाएगा।

    हवाई सेवा को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में उड़ान योजना के तहत देहरादून-पिथौरागढ़ हवाई मार्ग पर हवाई सेवा शुरू की थी। पहले यहां केवल नौ सीटर हवाई जहाज को संचालित करने की अनुमति थी। इस आधार पर सरकार ने नौ सीटर हवाई जहाज का संचालन शुरू किया। यह सेवा देहरादून से पंतनगर और पिथौरागढ़ के बीच संचालित की गई। यह काफी सफल भी रही। कुछ समय तक सुचारू सेवा देने के बाद हवाई जहाज में तकनीकी खराबी के कारण यह सेवा पहले तो बाधित हुई और फिर मार्च 2020 में इसे बंद कर दिया गया। कारण यह कि नौ सीटर विमान बेहद सीमित संख्या में हैं। कंपनी को इस मार्ग के लिए वैकल्पिक विमान नहीं मिल पाया।

    इस बीच कोरोना संक्रमण के कारण लागू लाकडाउन की अवधि में इस ओर ध्यान ही नहीं दिया गया। लाकडाउन समाप्त होने पर प्रदेश सरकार ने इस हवाई सेवा को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया। पिछले वर्ष सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद सत्ता संभालने वाले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और फिर पुष्कर सिंह धामी ने भी यह मसला केंद्र के समक्ष उठाया। बताया गया कि देश में नौ सीटर विमान बेहद कम हैं। ऐसे में कंपनियां इसमें बहुत अधिक रुचि नहीं दिखा रही हैं।

    ऐसे में यह निर्णय हुआ कि यहां बड़े हवाई जहाज के संचालन पर विचार किया जा सकता है। इस पर यहां 23 सीटर विमान उतारने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। उसमें भी यही बात सामने आई कि ये हवाई जहाज भी सीमित संख्या में हैं। इनकी उपलब्धता में भी कठिनाई आ रही है। ऐसे में यहां अब 72 सीटर विमान उतारने पर विचार किया जा रहा है।

    प्रदेश सरकार ने केंद्र को बताया है कि पंतनगर एयरपोर्ट की हवाई पट्टी पिथौरागढ़ की हवाई पट्टी से छोटी है। बावजूद इसके यहां 72 सीटर विमान उतर रहे हैं। ऐसे में पिथौरागढ़ में भी 72 सीटर विमान उतारा जा सकता है। हवाई पट्टी के निकट एक भवन है, जिसे स्थानांतरित करने के लिए वार्ता चल रही है। सचिव नागरिक उड्डयन दिलीप जावलकर ने बताया कि पिथौरागढ़ में अब 72 सीटर विमान उतारने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। यहां सर्वे के लिए 22 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जल्द ही एएआइ इसका सर्वे करेगा।

  • बॉलीवुड: सदी के महानायक, शूटिंग के लिए निकले, नीली कार में आये नजर…

    बॉलीवुड: सदी के महानायक, शूटिंग के लिए निकले, नीली कार में आये नजर…

    देहरादून। महानायक अमिताभ बच्चन बुधवार को देहरादून की सड़कों पर नीली कार की सवारी करते दिखे। दरअसल वह देहरादून के थानो में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे।

    इन​ दिनों उत्तराखंड प्रवास पर हैं अमिताभ

    अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म ‘गुड बाय’ की शूटिंग के लिए इन​ दिनों उत्तराखंड प्रवास पर हैं। फिल्म की शूटिंग के लिए अमिताभ बच्चन बुधवार सुबह तड़के ऋषिकेश से जौलीग्रांट पहुंचे। जौलीग्रांट के निर्वाणा रेस्टोरेंट में उन्होंने अपनी टीम के साथ नाश्‍ता किया। जिसके बाद वह अपनी टीम के साथ थानो में शूटिंग के लिए रवाना हुए। सुरक्षा की दृष्टि से अमिताभ बच्चन ने मीडिया और फैंस से दूरी बनाये रखी। वही फ़िल्म के दृश्य फिल्माए जाने के दौरान पुलिस को ट्रैफिक भी रोकना पड़ा, जिससे कई वाहन चालकों ने अपनी नाराजगी भी जताई।

    प्रशंसकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी

    अमिताभ बच्चन बीती 25 मार्च को मुंबई से जौलीग्रांट फिल्म की शूटिंग के लिए पहुंचे थे। प्रशंसकों को उनकी एक झलक देखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसी क्रम में अमिताभ बच्चन फिल्म की शूटिंग के लिए डोईवाला के थानो पहुंचे और फिल्म की पूरी यूनिट डोईवाला के पद्मनी होटल के आसपास दिखाई दी।

    बता दें कि अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘गुड बाय’ के कुछ शाट थानो रोड पर स्थित भुइया मंदिर के पास फिल्माए जा रहे हैं। जहां पर अमिताभ एक नीली कार में सवार थे। अमिताभ की एक झलक पाने को उनके प्रशंसकों की भीड़ शूटिंग स्‍थल के आसपास रही। फिल्म की शूटिंग ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला, राम झूला, सीता घाट, जानकी सेतु, रानीपोखरी चौक, प्रकाश पंत मार्ग, थानो रोड और जौलीग्रांट एयरपोर्ट के समीप सहित कई स्थानों पर की गई है।

  • शर्मनाक: ऋषिकेश अस्पताल में पढ़ी लिखी फौज का अनपढ़ प्रबंधन, मेन गेट पर लगा दिया अशुद्ध लिखा बोर्ड…

    शर्मनाक: ऋषिकेश अस्पताल में पढ़ी लिखी फौज का अनपढ़ प्रबंधन, मेन गेट पर लगा दिया अशुद्ध लिखा बोर्ड…

    ऋषिकेश। राजकीय चिकित्सालय में पढ़े लिखे डॉक्टर,प्रबंधन की अनपढों वाली हरकत तीर्थनगरी को शर्मसार कर रही है। कारण अस्पताल के मेन गेट पर opd के बोर्ड पर इंग्लिश स्पेलिंग का गलत होना है। General की जगह Genreal कर दिया गया है।

    दरअसल,अगर बात बोर्ड लगाने वाले की बात करें तो कहा जा सकता है कि उससे जैसे बनाने के लिए कहा गया होगा,उसने वैसे ही बना दिया,लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इतनी बड़ी बड़ी डिग्री हासिल किए हुए यंहा के चिकित्सक,प्रबंधन विभाग को यह मिस्टेक नजर नही आ सकी,शर्म और हया की हदों को पार कर रही ये तस्दीक कंही न कहीं अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही को बयां कर रही है।

    यह कोई पहला मामला नहीं है। यंहा के ट्रामा सेंटर में ड्यूटी बोर्ड पर भी ड्यूटी पर तैनात कोई और होता है और बोर्ड पर किसी और का नाम होता है। यही कारण हैं कि ऋषिकेश राजकीय अस्पताल हमेशा से सुर्खियों में रहता है।

  • शर्मनाक: ऋषिकेश अस्पताल में पढ़ी लिखी फौज का अनपढ़ प्रबंधन, मेन गेट पर लगा दिया अशुद्ध लिखा बोर्ड…

    शर्मनाक: ऋषिकेश अस्पताल में पढ़ी लिखी फौज का अनपढ़ प्रबंधन, मेन गेट पर लगा दिया अशुद्ध लिखा बोर्ड…

    ऋषिकेश। राजकीय चिकित्सालय में पढ़े लिखे डॉक्टर,प्रबंधन की अनपढों वाली हरकत तीर्थनगरी को शर्मसार कर रही है। कारण अस्पताल के मेन गेट पर opd के बोर्ड पर इंग्लिश स्पेलिंग का गलत होना है। General की जगह Genreal कर दिया गया है।

    दरअसल,अगर बात बोर्ड लगाने वाले की बात करें तो कहा जा सकता है कि उससे जैसे बनाने के लिए कहा गया होगा,उसने वैसे ही बना दिया,लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इतनी बड़ी बड़ी डिग्री हासिल किए हुए यंहा के चिकित्सक,प्रबंधन विभाग को यह मिस्टेक नजर नही आ सकी,शर्म और हया की हदों को पार कर रही ये तस्दीक कंही न कहीं अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही को बयां कर रही है।

    यह कोई पहला मामला नहीं है। यंहा के ट्रामा सेंटर में ड्यूटी बोर्ड पर भी ड्यूटी पर तैनात कोई और होता है और बोर्ड पर किसी और का नाम होता है। यही कारण हैं कि ऋषिकेश राजकीय अस्पताल हमेशा से सुर्खियों में रहता है।