देहरादून। उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा और गति देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार को पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) द्वारा राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और नवाचारों के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है।
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर सुधार की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य में टेलीमेडिसिन सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है, साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के लिए एयर एम्बुलेंस सेवा भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने यह सम्मान मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व और स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम को समर्पित किया।
डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में बीते वर्षों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग किया गया है। इसके साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि, नई नियुक्तियां, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना तथा आधारभूत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
विशेष रूप से टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार ने उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जहां पहले विशेषज्ञ चिकित्सा पहुंच से बाहर थी। इन नवाचारों के चलते उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है और यह राष्ट्रीय सम्मान इसी सतत प्रयासों की सार्थक स्वीकृति है।
देहरादून। उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा और गति देने में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार को पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (पीआरएसआई) द्वारा राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा प्रदान किया गया। यह सम्मान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और नवाचारों के लिए उनके उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है।
सम्मान प्राप्त करने के उपरांत स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर सुधार की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य में टेलीमेडिसिन सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है, साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के लिए एयर एम्बुलेंस सेवा भी प्रारंभ की गई है। उन्होंने यह सम्मान मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व और स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीम को समर्पित किया।
डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में बीते वर्षों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए डिजिटल तकनीक का प्रभावी उपयोग किया गया है। इसके साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि, नई नियुक्तियां, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना तथा आधारभूत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
विशेष रूप से टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार ने उन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, जहां पहले विशेषज्ञ चिकित्सा पहुंच से बाहर थी। इन नवाचारों के चलते उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है और यह राष्ट्रीय सम्मान इसी सतत प्रयासों की सार्थक स्वीकृति है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित करने के लिए स्नो लेपर्ड साइटिंग, हेली-स्कीइंग तथा हिमालयन कार रैली को तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आगामी 20 दिसंबर तक शीतकालीन यात्रा के दृष्टिगत केएमवीएन एवं जीएमवीएन की सभी व्यवस्थाओं और सुविधाओं को दुरुस्त करने तथा होटल मालिकों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिलों के प्रमुख पर्यटक स्थलों से संबंधित सड़क, होटल एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं पूर्ण रूप से दुरुस्त होनी चाहिए। मुख्यमंत्री स्वयं सड़क मार्ग से यात्रा कर व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। इसके साथ ही शीतकालीन यात्रा के प्रोत्साहन से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “वन डिस्ट्रिक्ट–वन फेस्टिवल” के तहत राज्य के प्रत्येक जनपद में एक-एक भव्य महोत्सव आयोजित करने के निर्देश दिए, जो संबंधित जनपद की विशिष्ट पहचान बने। उन्होंने निर्देश दिए कि इन महोत्सवों में उस जनपद के विशिष्ट महानुभावों, प्रवासियों, ग्राम प्रधानों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही राज्य स्तर पर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का भव्य महोत्सव आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए, जिसमें देश-विदेश से विशिष्ट व्यक्तियों और प्रवासियों को आमंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इन आयोजनों में आम जनता की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार देर रात्रि मुख्यमंत्री आवास में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के संबंध में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सभी जिलों के जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे थे।*
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बागेश्वर में सरयू कॉरिडोर के विकास के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने गंगोत्री की तर्ज पर सरयू नदी के उद्गम स्थल पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल विकसित करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने बागेश्वर में ट्राउट मछली, कीवी एवं लाल चावल के उत्पादन की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए इनके प्रोत्साहन पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार, निजी संस्थानों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का भव्य योग महोत्सव आयोजित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि राज्य में पर्यटन स्थलों के विकास से संबंधित कार्य योजनाओं में पर्यटकों, टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों एवं अन्य हितधारकों का फीडबैक सम्मिलित किया जाए, ताकि पर्यटकों की अपेक्षाओं के अनुरूप सुविधाओं का विकास किया जा सके।
बैठक में मुख्यमंत्री ने पौड़ी के पैठाणी स्थित राहु मंदिर एवं लाखामंडल मंदिर के सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना को शीघ्र एवं प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने के निर्देश दिए। साथ ही देवप्रयाग सहित राज्य के विभिन्न प्रयागों एवं घाटों में आयोजित आरती का संज्ञान लेते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक प्रयागों एवं घाटों में भव्य आरती आयोजित की जाए तथा नए घाटों का भी विकास किया जाए।
बैठक में सचिव पर्यटन ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार लद्दाख मॉडल पर “स्नो लेपर्ड टूर” प्रारंभ करने जा रही है। इसके तहत शीतकाल में गंगोत्री जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों को नियंत्रित रूप से पर्यटकों के लिए खोला जाएगा तथा उत्तरकाशी स्थित गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में प्रायोगिक तौर पर हिम तेंदुआ पर्यटन संचालित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। स्नो लेपर्ड टूर से होमस्टे, स्थानीय गाइड, साहसिक पर्यटन एवं अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सचिव पर्यटन ने यह भी बताया कि शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में शीतकालीन चारधाम यात्रा, साहसिक पर्यटन, सांस्कृतिक उत्सव एवं वन्यजीव पर्यटन से संबंधित एक व्यापक कार्ययोजना लागू की जा रही है। इसके अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों में रोड शो, डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया अभियान, गद्दी स्थलों से सायंकालीन आरती का लाइव प्रसारण, विशेष टूर पैकेज तथा शीतकाल में होटल-रिसॉर्ट्स को शुल्क में रियायत जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
कार्ययोजना के तहत औली, खलिया टॉप, बेदनीधार सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्कीइंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग एवं रैपलिंग जैसे साहसिक आयोजन किए जाएंगे। मसूरी, नैनीताल एवं उत्तरकाशी में विंटर कार्निवल, ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव तथा जिम कॉर्बेट, नंधौर एवं गंगोत्री क्षेत्र में वन्यजीव एवं स्नो लेपर्ड पर्यटन गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को वर्षभर पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, पंकज कुमार पांडे, शैलेश बगौली, सचिन कुर्वे, धीराज गब्र्याल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी जिलों के जिलाधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।
रुद्रप्रयाग: उत्तरी जखोली रेंज अंतर्गत धरियांज, थाती – बड़मा क्षेत्र में भालू की सक्रियता के मध्यनजर रेंज अधिकारी उत्तरी जखोली सुरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में 18 सदसीय टीम का गठन किया गया। टीम द्वारा आस पास के क्षेत्रों में भालू की सघन निगरानी की जा रही है।
वन विभाग की टीम द्वारा ग्राम सभा धरियांज, थाती बड़मा, मुन्ना देवल में ग्रामीणों के साथ बैठक कर भालू से सावधानी हेतु जागरूकता किया गया। साथ ही महिलाओं को घास लेने हेतु अकेले न जाने हेतु हिदायत दी गयी है तथा अतिआवश्यक होने पर समूह में जाने हेतु अपील की गयी है ।
टीम द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज सिदसौड़, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दिकधार में छात्रों व शिक्षकों से संवाद कर वन्य जीव से सावधानी हेतु जागरूक किया गया तथा बच्चों को स्कूल समूह में आने हेतु कहा गया है । टीम द्वारा बच्चों को किरोड़ा से सिदसौड स्कूल वन विभाग के वाहन से पहुंचाया गया।टीम द्वारा महिलाओं को घास के लिए अकेले न जाने की हिदायत दी जा रही तथा महिलों को समूह में ही जाने हेतु अपील की जा रही है।
प्रभागीय वनाधिकारी, रुद्रप्रयाग रजत सुमन द्वारा बताया गया कि क्षेत्र में भालू की निगरानी ड्रोन से तथा 10 कैमरा ट्रैप से की जा रही है तथा टीम दिन व रात्रि में लगातार गस्त कर रही है।प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा लोगों से अपील की गयी की घरों के आस पास की झाड़ियों साफ रहे, घरेलु कचरा को खुले में न फेंके, घरों के आस पास उजाले की उचित व्यवस्था रखे तथा लोग सावधान रहे सतर्क रहे।
देहरादून:
राजधानी देहरादून में नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में जिला प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। गांधी शताब्दी जिला अस्पताल में संचालित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) को अब और अधिक सुदृढ़ व आधुनिक बनाया गया है, जिससे गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को उन्नत उपचार मिल पा रहा है।
मा० मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। जिलाधिकारी सविन बंसल स्वयं एसएनसीयू की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं। डीएम ने नवजात शिशुओं को अस्पताल तक सुरक्षित रूप से लाने और ले जाने के लिए एक डेडिकेटेड वाहन भी तैनात किया गया है, जिससे समय पर उपचार सुनिश्चित हो सके।
नवजात शिशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पहले सिंगल वार्ड में संचालित 6 बेड के एसएनसीयू को अब डबल वार्ड में विस्तारित कर 12 बेड कर दिया गया है। बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था, प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता के चलते अब तक 492 से अधिक नवजात शिशुओं को सफल उपचार प्रदान किया जा चुका है।
देहरादून के गांधी शताब्दी जिला अस्पताल में नवंबर 2024 में प्रारंभ हुई इस यूनिट को अब आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। एसएनसीयू में दो मदर बोर्ड, स्टाफ रूम सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। सुरक्षा और सुव्यवस्थित संचालन को ध्यान में रखते हुए पूरे वार्ड में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। यह यूनिट जिले में सुदृढ़ होती स्वास्थ्य सेवाओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।
अस्पताल में भर्ती नवजात शिशुओं के माता-पिता ने भी जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि यहां डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ 24 घंटे पूरी तत्परता से बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, जिससे उन्हें संतोष और भरोसा मिला है। उन्होंने मा० मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मीता श्रीवास्तव ने बताया कि हाल ही में दो नवजात शिशुओं को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज किया गया है, जबकि आज ही एक नवजात को हरिद्वार से रेफर कर यहां लाया गया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से एसएनसीयू में अब नवजातों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल रहा है।
देहरादून का यह एसएनसीयू न केवल नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि जनकल्याण की दिशा में जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शा रहा है।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखण्ड महक क्रांति नीति-2026-36 का शुभारम्भ किया। उन्होंने सेटेलाइट सेन्टर भाऊवाला का लोकार्पण एवं सगन्ध पौधा केन्द्र, सेलाकुई स्थित ए.एम.एस (C-14) प्रयोगशाला का भी शिलान्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुल 5 सेटेलाइट सेन्टरों का भी शिलान्यास किया। यह सेटेलाइट सेंटर – परसारी ( चमोली ), रैथल ( उत्तरकाशी), भैसोड़ी ( अल्मोड़ा), खतेड़ा ( चंपावत) एवं विषाड ( पिथौरागढ़) में स्थापित किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान सुगंध पौधा केन्द्र और डाबर इंडिया लिमिटेड के बीच एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य एक्सटेंशन (विस्तार), अनुसंधान एवं विकास, मानव संसाधन विकास, मार्केटिंग आदि के क्षेत्र में कैप और डाबर के बीच सहयोग के लिए एक रूपरेखा तैयार करना है। एम.ओ.यू के दौरान कैप की ओर से निदेशक कैप श्री नृपेन्द्र सिंह चौहान, एवं डाबर की अधिशासी निदेशक डाबर डा. सौरभ लाल मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कैप के फाउण्डर वैज्ञानिकों एवं लेमनग्रास – तुलसी की खेती करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने परफ्यूमरी प्रयोगशाला का भी भ्रमण किया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड महक क्रांति नीति के शुभांरभ को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस नीति के अंतर्गत 7 एरोमा वैलियों को विकसित करने की शुरुआत होगी। प्रथम चरण में पिथौरागढ़ में तिमूर वैली, चमोली एवं अल्मोड़ा में डैमस्क रोज वैली, ऊधमसिंह नगर में मिन्ट वैली, चम्पावत और नैनीताल में सिनेमन वैली तथा हरिद्वार और पौड़ी में लेमनग्रास एवं मिन्ट वैली विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा इस नीति के अंतर्गत पौधशाला विकास सहयोग, खेती हेतु अनुदान, प्रशिक्षण एवं क्षमता-विकास, फसल बीमा, तथा पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी आवश्यकताओं की व्यवस्था की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति के अंतर्गत राज्य में लगभग 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सुगंधित फसलों की खेती को विकसित कर करीब 1 लाख किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। आगामी दस वर्षों में राज्य में सुगंधित फसलों की खेती के टर्नओवर को सौ करोड़ रुपये से बढ़ाकर लगभग ₹ 1200 करोड़ तक पहुंचाने में सफलता मिलेगी। जिससे किसानों के साथ राज्य की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व राज्य सरकार, प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में किसानों को 3 लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उपकरण खरीदने के लिए फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। राज्य में गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं। गन्ने के रेट में भी 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई है। किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण के लिए 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। जिसके तहत राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सहायता प्रदान करने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया गया है। राज्य में सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई योजनाओं को लागू किया है। इन नीतियों के तहत किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सुगंध उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए काशीपुर में 40 एकड़ में एरोमा और परफ्यूमरी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ₹ 300 करोड़ से एरोमा पार्क भी विकसित किया जा रहा है। हाउस ऑफ हिमालयाज के माध्यम से सुगंध तेलों को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। धौलादेवी, मुन्स्यारी और बेतालघाट के चाय बागानों को जैविक चाय बागान के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, मिलेट उत्पादन में निवेश पर 80 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान कर रही है। पंक्ति बुआई करने पर प्रति हेक्टेयर 4 हजार रुपये और अन्य विधियों से बुआई करने पर प्रति हेक्टेयर 2 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, मिलेट उत्पाद की खरीद पर किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी किया है। हमारे इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज हमने किसानों की आय में वृद्धि करने में भी देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड हर क्षेत्र में नंबर वन आ रहा है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसले देश के लिए नज़ीर बन रहे हैं। राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सतत् विकास की सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करना, समान नागरिक संहिता लागू होना एवं मदरसा एक्ट समाप्त करने जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पादों को उपहारों के रूप में दिए जा रहे हैं। सरकारी आयोजनों में भी स्थानीय उत्पादों को खरीदने को कहा गया है।
कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि एरोमा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड में अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिकी को सुदृढ़ करने में एग्री, हॉर्टीकल्चर एवं कैप की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में जहां इस क्षेत्र का टर्नओवर मात्र 1 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
इस अवसर पर विधायक श्री सहदेव पुंडीर, उपाध्यक्ष जड़ी बूटी सलाहकार समिति श्री भुवन विक्रम डबराल, जिला अध्यक्ष भाजपा श्री मीता सिंह, श्री गिरीश डोभाल, सचिव श्री सुरेंद्र नारायण पांडे, एसेंशियल ऑयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव श्री पी.के जैन, अध्यक्ष नगर पंचायत श्री सुमित चौधरी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रपुर के स्थानीय होटल में आयोजित कुमाऊँ उदय सम्मान समारोह में बतौर मुख्यातिथि प्रतिभाग किया । मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने सम्मान समारोह में सम्मानित हुए व्यक्तियों को बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अमर उजाला समाचार पत्र 1948 से संचालित है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला के संस्थापक डोरीलाल जी ने 1948 में जो एक पौधा लगाया था आज वो एक बहुत बड़ा वट वृक्ष बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी रजत जयंती वर्ष मनाया है, प्रदेश में अनेक उत्कृष्ट कार्य हुए हैं। सरकार प्रदेश को देश मे अग्रणी बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारा राज्य विकास और समृद्धि के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा आज राज्य के शहरों से लेकर सुदूर पर्वतीय गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। हमारी सरकार द्वारा ऊधमसिंह नगर जनपद और रूद्रपुर क्षेत्र के विकास के लिए भी विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।
हमारी सरकार द्वारा रुद्रपुर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है। हम जहां एक ओर लगभग 590 करोड़ रुपए की लागत से रूद्रपुर बाईपास निर्माण करा रहे हैं, वहीं, रूद्रपुर को खटीमा-टनकपुर एवं गदरपुर-जसपुर से जोड़ने वाली चार लेन सड़कों का निर्माण भी करा रहे हैं। इसके साथ ही, हम लगभग 55 करोड़ रुपये की लागत से मानूनगर-गदरपुर से दिनेशपुर-मटकोटा होकर सीधे हल्द्वानी को जोड़ने वाले मोटर मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य भी करा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रुद्रपुर रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण के साथ-साथ नई सिग्नल लाइनें और दो रेल ओवरब्रिज का निर्माण भी कराया जा रहा है। जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए रुद्रपुर के मास्टर ड्रेनेज प्लान को मंजूरी प्रदान की गई है, साथ ही सार्वजनिक स्थानों में महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट्स का निर्माण भी प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर में 15 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड के पहले कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का भी निर्माण कराया जा रहा है, साथ ही, 17 करोड़ रुपये की लागत से एक एडवांस कूड़ा प्रबंधन प्लांट भी स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि आज यदि हम उधमसिंह नगर जनपद की बात करें तो, किच्छा में 351 करोड़ रूपए की लागत से 100 एकड़ भूमि पर एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। साथ ही, हम पंतनगर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हवाईअड्डा का निर्माण भी करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने जहां एक ओर गदरपुर और खटीमा में बाईपास का निर्माण कार्य कराया है, वहीं खटीमा और किच्छा में बस अड्डों का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, हमने रूद्रपुर, गदरपुर और चकरपुर में खेल स्टेडियम, बहुउद्देश्यीय हॉल, साइकिलिंग ट्रैक और एथलेटिक्स ट्रैक सहित विभिन्न प्रकार की खेल सुविधाओं का निर्माण कार्य भी कराया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने जहां एक ओर काशीपुर में अरोमा पार्क, सितारगंज में प्लास्टिक पार्क, काशीपुर में इलैक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग क्लस्टर, पंतनगर में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क की स्थापना की है। वहीं, हम खुरपिया में इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी की स्थापना के माध्यम से इस पूरे क्षेत्र के विकास को गति देने का प्रयास भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण पुनः प्रारंभ कर पूरे तराई क्षेत्र की पेयजल और सिंचाई की समस्या का समाधान करने की दिशा में कार्य कर रहे है। इसके साथ ही, हमारी सरकार ने गन्ना किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से हाल ही में गन्ने के समर्थन मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। जिससे हमारे गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार तराई क्षेत्र के समग्र विकास और लोगों की समृद्धि के लिए अपने “विकल्प रहित संकल्प” के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी और हम सभी मिलकर तराई को एक आधुनिक और विकसित क्षेत्र बनाने के स्वप्न को अवश्य साकार करेंगे।
इस अवसर पर विधायक शिव अरोरा, मेयर विकास शर्मा, अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी मणिकांत मिश्रा शाहिद अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
टिहरी/दिनांक: 12 दिसंबर, 2025: आज शुक्रवार को जिला कार्यालय के वीसी कक्ष में खेल महाकुंभ–2025 के सफल आयोजन हेतु समीक्षा बैठक अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
बैठक में जिला युवा कल्याण अधिकारी पंकज तिवारी द्वारा अवगत कराया कि 20 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होगा, खेल महाकुंभ प्रतियोगिता का न्याय पंचायत स्तर और विधान सभा स्तर से शुभारंभ किया जाएगा। साथ ही विभिन्न विभागों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया।
अपर जिलाधिकारी द्वारा स्वास्थ्य विभाग को स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, सूचना विभाग को व्यापक प्रचार-प्रसार, नगर पालिका एवं संबंधित निकायों को सभी चारों विधानसभा तथा संसदीय क्षेत्र में मैदान/स्थल चयन, पुलिस एवं महिला पीआरडी को सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सभी खंड शिक्षा अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही पंचायत एवं ग्राम्य विकास विभाग से अधिकाधिक पंजीकरण बढ़ाने तथा विद्यालय स्तर पर बैठकें आयोजित कर प्रतिभाग बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
एडीएम द्वारा खंड विकास अधिकारियों को निमंत्रण पत्र समय से जारी करने एवं जनप्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने हेतु भी निर्देशित किया गया।
बैठक में युवा कल्याण विभाग से अजयपाल, पंकज, संजय, चातरलाल, शुभम, व्यायाम प्रशिक्षक ममता भट्ट, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बृजेश डोभाल तथा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से डॉ. पी.सी. पैन्यूली उपस्थित रहे।
देहरादून: जनपद देहरादून में बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा एक बुजुर्ग विधवा कमलेश तथा उनकी नामिनी असहाय पुत्री प्रीति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने तथा बीमित ऋण पर क्लेम प्राप्त होने के बावजूद अतिरिक्त धनराशि जमा कराने के मामले में जिलाधिकारी सविन बंसल के हस्तक्षेप से पीड़िता को न्याय मिला है। जिला प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए बैंक की 3.30 लाख की आरसी काटी गई, जिसके उपरांत बैंक ने 24 घंटे के भीतर 3.30 लाख रुपये का चेक नामिनी पुत्री प्रीति के नाम जारी कर दिया।
विगत दिवस जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में प्रीति सिंह ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनके पिता स्व0 राजेन्द्र पाल ने वर्ष 2023 में बैंक ऑफ बड़ौदा से रू0 13 लाख का ऋण लिया था। बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कहने पर ऋण को सुरक्षित करने के लिए इसका बीमा कराया गया। वर्ष 2023 से अप्रैल 2025 तक उनके पिता द्वारा रू0 22,295 प्रतिमाह की नियमित किस्तें जमा की गईं। अप्रैल 2025 में उनके पिता का निधन हो गया, जिसकी सूचना तत्काल बैंक और बीमा कंपनी को दे दी गई। जून 2025 में बीमा कंपनी द्वारा ऋण क्लेम की राशि बैंक में जमा कर दी गई। इसके बावजूद बैंक द्वारा न तो नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा था, बल्कि प्रीति सिंह पर रू0 3,30,980 अतिरिक्त जमा कराने का दबाव बनाया जा रहा था, तथा सम्पति को जबरन जब्त करने की धमकी दी जा रही थी।
जिलाधिकारी का हस्तक्षेप पीड़िता की शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी को तत्काल जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिला प्रशासन द्वारा जांच में पाया गया कि बीमा क्लेम राशि प्राप्त होने के बाद भी बैंक द्वारा अनुचित रूप से धनराशि की मांग की जा रही थी। इस पर बैंक की रू0 3,30,980 की आरसी काटी गई। आरसी कटते ही बैंक ने 24 घंटे के भीतर नामिनी प्रीति सिंह के नाम 3.30 लाख रुपये का चेक जारी कर दिया, जिसे आज जिलाधिकारी द्वारा प्रीति सिंह को सौंप दिया गया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ वित्तीय संस्थान द्वारा की जाने वाली मनमानी और अनुचित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनपद प्रशासन हर पीड़ित व्यक्ति की शिकायत का त्वरित समाधान सुनिश्चित करता रहेगा।” तथा भविष्य में भी इस प्रकार के मामलो पर कठौर एक्शन लिया जाएगा।
विगत दिवस जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में प्रीति सिंह ने अपनी व्यस्था सुनाते हुए जिलाधिकारी से गुहार लगाई कि उनके पिता द्वारा वर्ष 2023 में बैंक ऑफ बड़ोदा से 13 लाख ऋण लिया था तथा बैंक के अधिकारियों कर्मचारियों के कहने पर ऋण सिक्योर करने हेतु ऋण का बीमा कराया था उनके पिता द्वारा वर्ष 2023 से अपै्रल 2025 तक 22295 प्रतिमाह किस्त भरी थी किन्तु अपै्रल 2025 में पिता की मृत्यु हो जाने पर बैंक जिसकी सूचना उनके द्वारा बैंक व इंश्योरेंश कम्पनी को दी गई तथा इंश्योरेंश कम्पनी द्वारा जून में ऋण के क्लेम की धनराशि बैंक में जमा करा दी किन्तु बैंक द्वारा उनको न तो नो ड्यूज दे रहा है तथा 330980 धनराशि जमा कराने का दबाव बनाते हुए समपति जब्त करने की धमकी दे रहे हैं। जिला पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी को कार्यवाही के निर्देश दिए। जहां जिला प्रशासन द्वारा बैंक की धनराशि रू0 330980 की आरसी काट दी। बैंक की आरसी कटते ही बैंक 24 घंटे के भीतर प्रीति के नाम 3.30 धराशि का चैक काट दिया, जिसे आज जिलाधिकारी ने प्रीति सिंह को उपलब्ध करा दिया।
रुद्रप्रयाग: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के दक्षिणी जखोली रेंज में शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल का आज सफल समापन हुआ। R.D.F. (Restoration of Degraded Forest) योजना के अंतर्गत दरमोला ग्राम सभा में ग्रामीणों के लिए आयोजित “वन उपज से आजीविका संवर्धन” विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 9 दिसंबर से 11 दिसंबर 2025 तक चली, जिसमें स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों को पिरूल, छेंती, बांस और घास जैसी स्थानीय वन उपज से उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार करने की कला सिखाई गई। इसका उद्देश्य उन्हें स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए अवसर प्रदान करना है।
स्थानीय उत्पादों से आय सृजन का नया मार्ग
उप प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. दिवाकर पन्त ने बताया कि बदलती जीवनशैली और बाजार की मांग को देखते हुए स्थानीय वन उपज पर आधारित हस्तशिल्प उत्पादों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए यह प्रशिक्षण एक सशक्त अवसर है, जिससे वे अपने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वरूप देकर वित्तीय रूप से सशक्त बन सकते हैं।कार्यशाला में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को राखी, सजावटी वस्तुएँ, टोकरी, पेन होल्डर, फ्लावर पॉट और विभिन्न कलाकृतियों का निर्माण व्यावहारिक रूप से सिखाया गया। तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर नए कौशल सीखे और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए।
महिलाओं में उत्साह, आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद
प्रशिक्षण में शामिल ग्रामीण महिलाओं ने इस पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। प्रतिभागी संगीता कुमेठी और अनिता देवी ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें नई संभावनाएँ और आत्मविश्वास मिल रहा है। वन उपज आधारित हस्तशिल्प न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि भविष्य में आय का स्थायी स्रोत भी बन सकता है।
यह पहल न केवल ग्रामीणों को कौशल आधारित आजीविका प्रदान कर रही है, बल्कि वन संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के संतुलित उपयोग की दिशा में भी एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रही है।