मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पंचम राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के क्रम में समस्त शहरी स्थानीय निकायों को वित्तीय वर्ष 2025-26 की चतुर्थ त्रैमासिक किश्त हेतु कुल ₹ 315 करोड़ तथा 15वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के क्रम में वित्तीय वर्ष 2024-25 की प्रथम एवं द्वितीय किश्त हेतु भारत सरकार से प्राप्त कुल ₹ 94 करोड की धनराशि वित्तीय वर्ष 2025-26 में संबंधित त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं को हस्तान्तरित किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम लिमिटेड के अन्तर्गत राज्य पोषित सरकारी भ्योल रूपसियाबगड जल विद्युत परियोजना (120 मे०वा०) के लिए कैट प्लान मद में एन०पी०वी०, क्षतिपूरक वनीकरण सहित वन भूमि की लीज हेतु ₹15 करोड़ की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना विकास बोर्ड के अन्तर्गत “Development of Ecological Corridor at Naik Goth for Disaster Resilience (Formerly Known as Development of Road From Kiroda Nallah to River Front and Reclamation of Land along Kiroda Nallah” के निर्माण हेतु ₹ 84 करोड़ की योजना स्वीकृत किये जाने के साथ कृषि एवं कृषक कल्याण के अन्तर्गत मिशन फोर आत्मनिर्भरता इन पल्सेस योजनान्तर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में वित्तीय एवं प्रशासिनक स्वीकृति का अनुमोदन प्रदान किया गया है।
सीएम धामी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जन-जन की सरकार जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत दिव्यांगों, बुजुर्गों, महिलाओं एवं कमजोर वर्ग के ऐसे लाभार्थी जो शिविरों तक नहीं आ सकते, उनके घर तक अधिकारी स्वयं पहुँचें, मौके पर ही आवेदन भरवाएँ और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि यह अभियान किसी भी स्थिति में औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस समीक्षा का उद्देश्य कार्यक्रम को और अधिक गति देना, उसे परिणाम-केंद्रित बनाना और जनता तक वास्तविक लाभ पहुँचाना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम निरीक्षण का नहीं बल्कि सेवा और समाधान का मंच है। बैठक में सचिव श्री विनोद कुमार सुमन एवं अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविरों की सूचना पूर्व से व्यापक स्तर पर दी जाए और इन्हें उत्सव के स्वरूप में आयोजित किया जाए। स्थानीय भाषाओं-गढ़वाली, कुमाऊँनी एवं अन्य स्थानीय बोलियों-में प्रचार-प्रसार अनिवार्य किया जाए, ताकि आमजन सहजता से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि लोगों को आवेदन के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े और प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए स्पष्ट समयसीमा तय हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल समस्याएँ सुनने तक सीमित न रहे, बल्कि समाधान की पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बने। जहाँ समाधान तत्काल संभव हो, वहाँ मौके पर ही कार्रवाई की जाए। जहाँ समय लगे, वहाँ स्पष्ट समय सीमा और उत्तरदायित्व तय कर लाभार्थी को जानकारी दी जाए। यदि किसी क्षेत्र से फीडबैक संतोषजनक न आए तो वहाँ पुनः शिविर लगाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने महिला मंगल दलों, स्वयं सहायता समूहों, युवक मंगल दलों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बार-बार सामने आ रही समस्याओं की सूची बनाकर शासन के समक्ष रखी जाए। साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाए और धीमी गति से कार्य करने वाले विभागों को चिन्हित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत अब तक 56,550 से अधिक लोग प्रतिभाग कर चुके हैं। उन्होंने हाल ही में बिना पूर्व सूचना अल्मोड़ा के एक शिविर में पहुँचकर स्वयं जनता से फीडबैक लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे आगे भी शिविरों का औचक निरीक्षण करेंगे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि भी मैदान में सक्रिय भूमिका निभाएँ। मंच तक सीमित न रहकर स्टॉल स्तर पर जाकर नागरिकों से संवाद करें। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और कमजोर वर्ग को आवेदन, दस्तावेज़ एवं पात्रता से जुड़ी प्रक्रियाओं में प्रत्यक्ष सहायता दी जाए। केवल समाधान, सहयोग और संवाद पर केंद्रित रहें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविरों का व्यापक प्रचार किया जाए। स्थानीय बोलियाँ जानने वाले अधिकारियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। डीएम/सीडीओ बिना पूर्व सूचना के भी शिविरों में पहुँचें।
बड़े न्याय पंचायतों में एक से अधिक कैंप तथा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिविर लगाए जाएँ। आधार कार्ड अपडेशन, आयुष्मान कार्ड निर्माण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। प्रत्येक कैंप के बाद फीडबैक सर्वे और रिपोर्टिंग प्रणाली लागू हो। लाभार्थियों से ैडै/कॉल के माध्यम से समाधान की पुष्टि की जाए और यह चिन्हित किया जाए कि कौन-सी समस्या बार-बार आ रही है तथा कौन-सा विभाग अपेक्षित गति से कार्य नहीं कर रहा।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार अभियान का उद्देश्य शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाना है और जनता को यह स्पष्ट अनुभव होना चाहिए कि सरकार उनकी सुविधादाता है, बाधा नहीं।
1. राज्य में नैचुरल गैस पर वैट की दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किये जाने का कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
उत्तराखण्ड राज्य में पर्यावरण संवर्द्धन एवं वर्तमान परिदृश्य में हरित (Green) तथा स्वच्छ (Clean) ऊर्जा की अवधारणा लागू होने के कारण राज्य की विभिन्न औद्योगिक विकास योजनाओं के अन्तर्गत प्रदूषण मुक्त औद्योगिक इकाईयों को स्थापित किये जाने को प्राथमिकता दिये जाने एवं कर संवर्द्धन की सम्भावना के दृष्टिगत् राज्य में पी०एन०जी० एवं सी०एन०जी० पर वर्तमान में लागू 20 प्रतिशत कर की दर को घटाकर 5 प्रतिशत किये जाने का निर्णय कैबिनेट द्वारा लिया गया है।
2. आपदा से प्रभावित धराली / आसपास के क्षेत्र (उत्तरकाशी) के रॉयल डिलीशियस सेब का ₹ 51 / प्रति किलोग्राम तथा रेड डिलीशियस सेब एवं अन्य सेब का ₹ 45 / प्रति किलोग्राम की दर पर (ग्रेड-सी सेब को छोड़कर) उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा उपार्जन करने तथा इसकी धनराशि घोषणा मद से स्वीकृत किए जाने के संबंध में मुख्यमंत्री की घोषणा को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया।
3. उत्तराखण्ड वृद्ध एवं विपन्न कलाकारों तथा लेखकों को मासिक पेंशन बढ़ाने का कैबिनेट ने लिया निर्णय।
प्रदेश की सांस्कृतिक परम्पराओं एवं ऐतिहासिक क्षेत्रीय लोक कलाओं, गीतों, नृत्यों, वाद्ययंत्रों एवं साहित्य को जीवित रखने एवं इनका प्रचार-प्रसार करने वाले प्रदेश के कलाकारों तथा लेखकों को वृद्धावस्था में जीवीकोपार्जन हेतु वर्ष 2010 में मासिक पेंशन की धनराशि ₹ 3000 निर्धारित करते हुए उत्तराखण्ड वृद्ध एवं विपन्न कलाकारों तथा लेखकों को मासिक पेंशन नियमावली, 2010 प्रख्यापित की गयी थी। वर्तमान में वर्ष 2010 की अपेक्षा मंहगाई दर कहीं अधिक हो चुकी है। जिसे देखते हुए संस्कृति विभाग के द्वारा वृद्ध एवं विपन्न कलाकारों तथा लेखकों को दी जा रही मासिक पेंशन ₹ 3000 से बढ़ाकर ₹ 6000 किये जाने हेतु उत्तराखण्ड वृद्ध एवं विपन्न कलाकारों तथा लेखकों को मासिक पेंशन (संशोधन) नियमावली, 2025 के प्रख्यापन को कैबिनेट ने दी मंजूरी।
4. भारत सरकार द्वारा प्रयोजित Ease of doing Business (EoDB) के अधीन भवन मानचित्र स्वीकृत की प्रक्रिया में संशोधन किये जाने की व्यवस्था का कैबिनेट ने दिया अनुमोदन।
भारत सरकार द्वारा प्रयोजित Ease of doing Business (EoDB) के अधीन भवन मानचित्र स्वीकृत की प्रक्रिया में ऐसे भवन, जो भवन निम्न जोखिम वाले हैं (जैसे सिंगल रेसिडेंशियल हाउस, छोटे व्यवसाय भवन ), उन भावनो को इंपैनल आर्किटेक्चर द्वारा स्वप्रमाणित करते हुए नक्शा पास कराए जा सकते हैं।
भवन मानचित्र स्वीकृत की प्रक्रिया में ऐसे भवन जिनमें जोखिम की सम्भावना कम है, में Empanalled Architect द्वारा स्वप्रमाणित किए जाने के संबंध में की गई व्यवस्था का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। इसके अंतर्गत सम्बन्धित निर्माणकर्ता द्वारा भवन का निर्माण/पुनर्निर्माण के आवेदन के साथ SC-1, SC-2 Form सहित समस्त अभिलेख सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अनुमोदन हेतु सूचना प्रस्तुत करेगा कि भवन प्लान न्यून जोखिम श्रेणी के भवन के रूप में Empanalled Architect द्वारा स्वप्रमाणित किया गया है। जिसमें सभी प्रकार के शुल्क भी देय होंगे।
05. उत्तराखण्ड सामान्य औद्योगिक विकास नियंत्रण (संशोधन) विनियमावली, 2025 प्रख्यापित किये जाने के निर्णय का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन।
कंप्लायंस बर्डन को कम करने, व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने तथा इसे और अधिक स्पष्ट करने के लिए औद्योगिक भूखण्डों के सम्बन्ध में आवश्यक संशोधन विलोपन और परिवर्द्धन के उद्देश्य से उत्तराखण्ड सामान्य औद्योगिक विकास नियंत्रण (संसोधन) विनियम-2022 यथासंशोधित, 2024 में संशोधन किये जाने के संबंध में कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके अंतर्गत एम.एस.एम.ई यूनिट और इंडस्ट्री यूनिटों के ग्राउंड कवरेज को बढ़ाया गया है
6 . उत्तराखण्ड बांस एवं रेशा विकास परिषद् के संगठनात्मक ढांचे के पुनर्गठन के सम्बन्ध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
उत्तराखण्ड बांस एवं रेशा विकास परिषद् की परियोजनायें एक निश्चित समयावधि के अन्तर्गत क्रियान्वित की जानी होती है। इसमें बदलती परिस्थितियों में विशेषज्ञता की भी आवश्यकता होती है तथा इसके ढांचे में व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रकृति के पद के 13 स्थाई पद पूर्व से सृजित हैं। जिन्हें खुले बाजार या आउटसोर्स पर रखे जाने की आवश्यकता को देखते हुए 13 पदों का संशोधित ढांचा स्वीकृत किया गया है।
7. सिंचाई एवं लोक निर्माण विभाग के वर्कचार्ज कार्मिकों की वर्कचार्ज सेवा अवधि को पेंशन हेतु आगणित किये जाने का कैबिनेट में लिया निर्णय।
8. राज्य में आयुष्मान एवं अटल आयुष्मान योजना को 100% इंश्योरेंस मोड में और गोल्डन कार्ड को हाइब्रिड मोड में संचालित किए जाने पर कैबिनेट द्वारा निर्णय लिया गया है। हाइब्रिड मोड में गोल्डन कार्ड को संचालित किए जाने पर ₹ 5 लाख से कम के क्लेम इंश्योरेंस मोड एवं 5 लाख से ऊपर का क्लेम ट्रस्ट मोड में किया जाएगा। इसके साथ ही गोल्डन कार्ड का बकाए करीब 125 करोड़ को राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
9. उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 के प्रख्यापन को कैबिनेट ने दी मंजूरी।
इसके अंतर्गत प्रोफेसर एवं एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति के उम्र को बढ़ाकर 50 से बढ़ाकर 62 कर दिया गया है। सुपर स्पेशलिटी सर्विसेज एवं नए NMC के नियमों के अनुसार सुपर स्पेशलिटी सर्विसेज के लिए भी डिपार्टमेंट बनाए गए हैं। इसके अतिरिक स्वामी राम कैंसर संस्थान, हल्द्वानी के लिए 4 पदों का सृजन किया गया है।
10. राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में कार्यरत संविदा, दैनिक वेतन, नियत वेतन एवं प्रबन्धन समिति आदि के माध्यम से कार्यरत कुल 277 कार्मिकों को समान कार्य-समान वेतन प्रदान किए जाने का प्रकरण कैबिनेट ने मंत्रिमंडल की उपसमिति को भेजा ।
11. पी०एम०एच०एस० संवर्ग के अन्तर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों को पर्वतीय/दुर्गम/अति दुर्गम क्षेत्रों में सेवायें दिये जाने हेतु तथा उनकी उपस्थिति सुनिश्चित किये जाने हेतु 50 प्रतिशत् अतिरिक्त भत्ता अनुमन्य किये जाने के संबंध में कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय।
उत्तराखण्ड राज्य पर्वतीय क्षेत्रों / दुर्गम क्षेत्रों के चिकित्सालयों में क्लीनिकल कार्य करने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों / दुर्गम क्षेत्रों में सेवायें देने तथा वहां ठहराव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 50 प्रतिशत् अतिरिक्त भत्ता (वेतन मैट्रिक्स लेवल में न्यूनतम वेतनमान का 50 प्रतिशत) अनुमन्य किए जाने का फैसला लिया गया है। उक्त भत्तें को सेवानिवृत्ति के उपरान्त पेंशनरी लाभों की गणना में सम्मिलित नहीं किया जायेगा। उक्त भत्ता पर्वतीय / दुर्गम क्षेत्र के चिकित्सालयों में क्लीनिकल कार्य करने वाले विशेषज्ञ चिकित्सकों ही अनुमन्य होगा। उक्त चिकित्सकों को शासनादेश दिनांक 19.9.2014 के द्वारा मूल वेतन (ग्रेड पे को छोड़कर) का 20 प्रतिशत् अतिरिक्त अनुमन्य रूप से प्राप्त देय भत्ता समाप्त माना जायेगा। राज्य के पर्वतीय / दुर्गम क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्रों में सम्बद्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों को उक्त भत्ता देय नहीं होगा।
इसके अतिरिक्त प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा देहरादून में परेड ग्राउंड स्थित प्रेस क्लब के लिये भूमि को सूचना विभाग को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।उक्त प्रेस क्लब का भवन नजूल भूमि पर स्थित है। जिस वजह से उक्त भूमि पर नक्शा पास करने में दिक्कतें आ रही हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सूचना विभाग भूमि हस्तांतरण के बाद प्रेस क्लब की बिल्डिंग बना कर देगा।
जिलाधिकारी ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जन औषधि केंद्र, दिव्यांगजन योजनाएं तथा विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण को लेकर उन क्षेत्रों (पॉकेट्स) की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां पंजीकरण कम हो रहे हैं। उन्होंने शत-प्रतिशत एएनसी (एंटीनैटल केयर / गर्भावस्था पूर्व प्रसव जांच) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (उच्च जोखिम गर्भावस्था) मामलों की एसीएमओ (अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी) स्तर पर नियमित एवं प्रभावी समीक्षा के निर्देश दिए।
उन्होंने पिछले पांच वर्षों में हुए स्किल्ड बर्थ (प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कराए गए प्रसव) एवं उनसे संबंधित मृत्यु के आंकड़े प्रस्तुत करने को कहा तथा संस्थागत प्रसव (इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी) को बढ़ाने के लिए निरंतर एवं प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा पीसीपीएनडीटी एक्ट (गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम) के तहत प्रभावी प्रवर्तन करने के निर्देश दिए। साथ ही आगामी एक माह के भीतर सभी जन औषधि केंद्रों को पूर्ण रूप से संचालित कराने तथा “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के अंतर्गत 30 जनवरी तक शत-प्रतिशत एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज / असंक्रामक रोग) स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी को समाज कल्याण विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर रोस्टर बनाते हुए दिव्यांग बच्चों का चिन्हीकरण, दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि कोई भी दिव्यांग ऐसा न रहे जिसका प्रमाण पत्र न बना हो।
बैठक में सीएमओ डॉ. आदित्य तिवारी, एसीएमओ दीपक कुमार, समाज कल्याण अधिकारी जस्मीत कौर, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनय कुमार सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
दून मेडिकल कॉलेज में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, वेतन भुगतान में देरी और अस्पताल व्यवस्थाओं से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों का प्रबंधन स्तर पर समाधान न होने पर स्वास्थ्य सचिव ने कड़ा संज्ञान लिया। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाकर दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई और नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनस्वास्थ्य से जुड़े संस्थानों में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
हड़ताल, वेतन देरी और सफाई व्यवस्था पर जवाब-तलब
स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में सचिवालय स्थित कक्ष में आयोजित बैठक में दून मेडिकल कॉलेज की प्रशासनिक और कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई। बैठक में निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अजय आर्य, प्राचार्य गीता जैन, अपर निदेशक डॉ. आर.एस. बिष्ट, उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ. नंदन सिंह बिष्ट सहित कॉलेज प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सफाई व्यवस्था से जुड़े प्रकरण को लेकर ठेकेदार फर्म अजमीरा फर्म के प्रतिनिधि को भी बैठक में बुलाया गया। बैठक की पृष्ठभूमि में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, वेतन भुगतान में देरी, सफाई व्यवस्था में कमी और मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें रहीं। स्वास्थ्य सचिव ने एक-एक बिंदु पर अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए कहा कि इस तरह की स्थिति न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ भी खिलवाड़ है।
वेतन भुगतान के लिए स्पष्ट और अलग व्यवस्था के निर्देश
स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिए कि उपनल के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों के लिए वेतन भुगतान की पृथक और समयबद्ध व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके तहत उपनल कर्मचारियों के भुगतान के लिए शासन को शीघ्र पत्र भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही अजमीरा फर्म से जुड़े सफाई कर्मचारियों को टेंडर की शर्तों के अनुसार पूर्ण वेतन समय पर देने के सख्त निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों और त्वरित निर्णय के बाद अजमीरा फर्म के सफाई कर्मचारियों ने शाम की पाली से अपनी हड़ताल वापस ले ली। उपचिकित्सा अधीक्षक नंदन सिंह बिष्ट और फर्म प्रतिनिधि मेहुल कुमार ने बताया कि अस्पताल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह सुचारू हो चुकी है और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है ।
भविष्य के लिए सख्त चेतावनी और निगरानी के निर्देश
बैठक के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने दो टूक कहा कि सफाई, कर्मचारियों के हित और मरीजों की सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। भविष्य में यदि किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में इस प्रकार की लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारी और एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निगरानी तंत्र को मजबूत करने और अस्पताल व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि दून मेडिकल कॉलेज राज्य का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है और यहां आने वाला प्रत्येक मरीज स्वच्छ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकारी है। इस जिम्मेदारी में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को अल्मोड़ा में सांसद खेल महोत्सव का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने फुटबॉल और बैडमिंटन प्रतियोगिता का उद्घाटन किया तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी श्रीमती एकता बिष्ट और खेल प्रशिक्षकों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि जनपद अल्मोड़ा में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जी.आई.सी. ग्राउंड में हॉकी एवं फुटबॉल के लिए दिन एवं रात्रि उपयोग हेतु बहुउद्देशीय आर्टिफिशियल टर्फ मैदान का निर्माण किया जाएगा। नगर निगम क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने और स्वच्छ व हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु 200 सोलर लाइटें उपलब्ध कराई जाएंगी। हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम, अल्मोड़ा में 50 बिस्तरों की क्षमता वाला छात्रावास बनाया जाएगा। वहीं, हेमवती नंदन बहुगुणा स्टेडियम का बैडमिंटन कोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पुनर्निर्मित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है, जो अपने परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प के बल पर सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति मानकर ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उनकी प्रेरणा से “फिट युवा फॉर विकसित भारत” की थीम पर आयोजित हो रहा यह “सांसद खेल महोत्सव” केवल एक सामान्य खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने का एक महाभियान है। यह हमारे गाँव-गाँव में छिपी खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का सशक्त मंच प्रदान करने के साथ ही युवा शक्ति में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और संघर्षशीलता जैसे गुणों को विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी “खेलो इंडिया” और “फिट इंडिया मूवमेंट” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश में खेल संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन से उत्तराखंड “देवभूमि” के साथ-साथ “खेलभूमि” के रूप में भी स्थापित हुआ है। राष्ट्रीय खेलों में हमारे खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर एक नया इतिहास रचा है। उत्तराखंड अब विश्वस्तरीय “स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर” के मामले में भी देश के प्रमुख राज्यों में गिना जाने लगा है और अब प्रदेश में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होने लगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य में शीघ्र ही एक “स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान” लागू करने जा रही है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों की स्थापना की जाएगी। हल्द्वानी में उत्तराखंड का प्रथम खेल विश्वविद्यालय तथा लोहाघाट में एक महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। प्रदेश में खेलों के समग्र विकास और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नई खेल नीति भी लागू की गई है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता खिलाड़ियों को ‘आउट ऑफ टर्न’ सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। ‘मुख्यमंत्री खेल विकास निधि’, ‘मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’, ‘मुख्यमंत्री उदियमान खिलाड़ी योजना’ तथा ‘खेल किट योजना’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य के उभरते युवा खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्मोड़ा के समग्र विकास के लिए पर्यटन, रोजगार और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने हेतु भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत पिछले चार वर्षों में अल्मोड़ा जनपद में ढाई सौ किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया गया है। साथ ही करोड़ों रुपये की लागत से विभिन्न मोटरमार्गों का निर्माण एवं नवीनीकरण भी किया गया है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से अल्मोड़ा- पौड़ी गढ़वाल-रुद्रप्रयाग को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण कराया गया है। लगभग 922 करोड़ रुपये की लागत से अल्मोड़ा-बागेश्वर सड़क के चौड़ीकरण को भी मंजूरी दी गई है। ‘उड़ान योजना’ के अंतर्गत अल्मोड़ा में पर्यटन को बढ़ावा देने और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से हेली सेवाएं प्रारंभ की गई हैं। फलसीमा में हेलीपोर्ट का निर्माण किया जा रहा है, जो क्षेत्र को बेहतर हवाई सेवाओं से जोड़ते हुए आवागमन को और अधिक सुलभ बनाएगा। क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को सशक्त बनाने के लिए गगास नदी पर 31.27 करोड़ रुपये की लागत से जलाशय परियोजना का कार्य किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए शोभन सिंह जीना मेडिकल इंस्टीट्यूट में 100 नई एमबीबीएस सीटें बढ़ाने के साथ-साथ 36 आईसीयू बेड भी जोड़े गए हैं, जिससे भविष्य में चिकित्सा सुविधाएं और अधिक बेहतर होंगी।
कार्यक्रम के दौरान सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री भारत सरकार श्री अजय टम्टा, मेयर नगर निगम श्री अजय वर्मा, जागेश्वर विधायक श्री मोहन सिंह मेहरा, उपाध्यक्ष महिला उद्यमिता परिषद श्रीमती गंगा बिष्ट, अध्यक्ष जिला पंचायत श्रीमती हेमा गैड़ा, पूर्व विधायक श्री कैलाश शर्मा, पूर्व विधायक श्री रघुनाथ सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भाजपा श्री महेश नयाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सरस्वती शिशु मंदिर, ताड़ीखेत में अध्ययनरत स्कूली बच्चों से आत्मीय संवाद किया। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर विद्यालय के छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह और प्रसन्नता देखने को मिली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों का स्नेहपूर्वक अभिवादन करते हुए कहा कि आप सभी उत्तराखंड और देश का भविष्य हैं।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए वर्ष 2047 का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होंगे और तब देश की बागडोर आज के बच्चों के हाथों में होगी। उन्होंने कहा कि “विकसित भारत 2047” केवल एक सरकार का नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी का सामूहिक संकल्प है, जिसकी सिद्धि सभी के साझा प्रयासों से ही संभव है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को अनुशासन और समय पालन का महत्व समझाते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए समय का सदुपयोग और अनुशासित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बच्चों से उनके स्कूल आने-जाने की दिनचर्या पर सहज प्रश्न करते हुए संवाद को रोचक बनाया और मुस्कराते हुए अनुशासन को सफलता की कुंजी बताया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को पौष्टिक भोजन एवं अच्छे स्वास्थ्य का महत्व बताते हुए कहा कि आगे बढ़ने के लिए शरीर और मन दोनों का स्वस्थ होना आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को संतुलित आहार लेने और नियमित रूप से खेलकूद में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों को बताया कि आज का दिन विशेष है, क्योंकि आज महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती है, जिसे राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने शिक्षा को व्यक्ति, समाज और राज्य के सर्वांगीण विकास की सबसे मजबूत नींव बताते हुए बच्चों से खूब पढ़ने, खूब खेलने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ के बच्चे कठिन परिस्थितियों में पलकर संघर्ष करना सीखते हैं, जिससे उनमें आगे बढ़ने की विशेष क्षमता होती है। उन्होंने बच्चों को लक्ष्य निर्धारण, अच्छे नागरिक बनने और अपने कर्तव्यों के निर्वहन का संदेश दिया। साथ ही नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए नशा मुक्त उत्तराखंड के संकल्प को मजबूत करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से अपनी भाषा, बोली और संस्कृति पर गर्व करने का आह्वान करते हुए कहा कि जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, वही ऊँचाइयों तक पहुँचता है। संवाद के अंत में उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में उत्तराखंड का हर बच्चा देश को दिशा देने वाला नागरिक बनेगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से मेहनत, ईमानदारी और बड़े सपने देखने का संदेश देते हुए कहा कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है।
देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यातायात व्यवस्था, पार्किंग, निकासी मार्ग एवं अव्यवस्थित गतिविधियों का गहन जायजा लिया तथा संबंधित विभागों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने हरिद्वार बाईपास की तरफ आईएसबीटी फ्लाई ओवर के समीप सड़क किनारे खाली बड़ी खाली जगह पर टाइल्स लगाकर सुव्यवस्थित पार्किंग विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे यात्रियों एवं आमजन को जाम की समस्या से राहत मिल सके। दिल्ली जाने वाली बसों के लिए बनाए गए निकासी गेट के बंद पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की तथा एमडीडीए को तत्काल गेट खोलने के निर्देश दिए। पूर्व में दिए गए निर्देशों का अनुपालन न होने पर उन्होंने संबंधित एआरएम के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने फ्लाईओवर के नीचे अवैध कट बंद करते हुए सुरक्षित क्रॉसओवर बनाए जाने के निर्देश दिए। साथ ही फ्लाईओवर के नीचे व्यवस्थित पार्किंग विकसित करने तथा निकासी गेट के समीप बनी पुलिस चौकी को अन्यत्र स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आईएसबीटी गेट के पर किए गए निर्माण को ध्वस्त कर निकासी गेट को पूर्ण रूप से सुचारू करने के निर्देश भी दिए गए। ताकि यातायात सुचारू रूप से संचालित हो सके। जिलाधिकारी ने आरटीओ को सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएच) के अधिकारियों को आईएसबीटी के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे टाइल्स लगाकर पार्किंग विकसित करने के निर्देश दिए। इसके लिए जिलाधिकारी द्वारा मौके पर ही आवश्यक धनराशि की स्वीकृति भी प्रदान की गई।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि आईएसबीटी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, अतिक्रमण अथवा यातायात बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और निर्देशों के अनुपालन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान मुख्य नगर आयुक्त नगर निगम नमामी बंसल, पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार, नगर मजिस्टेªट प्रत्युष सिंह, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिरि, संभागीय परिवहन अधिकारी अनिता चमोला, एमडीडीए, एनएच के अधिकारी उपस्थित रहे।
रुद्रप्रयाग: जनपद में आम जनमानस को केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने तथा जनसामान्य की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के अंतर्गत बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन चरणबद्ध रूप से किया जा रहा है।
इसी क्रम में दिनांक 24 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी प्रतीक जैन की अध्यक्षता में विकास खण्ड अगस्त्यमुनि की न्याय पंचायत मयकोटी के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज मयकोटी में प्रातः 11:00 बजे से बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
इस शिविर के माध्यम से विभिन्न विभागों द्वारा अपने-अपने विभागीय स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से पात्र लाभार्थियों को केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ मौके पर ही आवेदन, शिकायत एवं समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। शिविर में राजस्व, समाज कल्याण, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पशुपालन, बाल विकास, विद्युत, जल संस्थान सहित अन्य विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे।
शिविर के दौरान वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, राशन कार्ड, आधार से संबंधित सेवाएं, विभिन्न प्रमाण पत्रों (आय, जाति, निवास) के आवेदन, स्वरोजगार एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं सहित अन्य जनसमस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसके साथ ही जनमानस से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना जाएगा तथा मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जाएंगे।
जिला प्रशासन द्वारा न्याय पंचायत मयकोटी एवं आसपास के क्षेत्र के समस्त नागरिकों से अपील की गई है कि वे अधिक से अधिक संख्या में दिनांक 24.12.2025 को प्रातः 11:00 बजे राजकीय इंटर कॉलेज मयकोटी में आयोजित होने वाले “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करें और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी दिशा-निर्देशों और चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के सतत मार्गदर्शन में उत्तराखंड का चिकित्सा शिक्षा विभाग तेज़ी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है राज्य के प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना, साथ ही युवाओं को उच्चस्तरीय चिकित्सा शिक्षा के अवसर देना। इस लक्ष्य को धरातल पर उतारने में चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ आर राजेश कुमार की प्रभावी प्रशासनिक भूमिका निर्णायक साबित हो रही है। वर्ष 2025 चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए उपलब्धियों का वर्ष रहा है। मानव संसाधन की कमी को दूर करने, मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों को सशक्त बनाने, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार करने और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने की दिशा में विभाग ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। ये प्रयास न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए भी मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।
चिकित्सा शिक्षा की रीढ़ को मिली मजबूती
चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सीधे तौर पर उपलब्ध मानव संसाधन से जुड़ी होती है। इसे ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में नियुक्तियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इस वर्ष राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 07 स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति की गई, जिससे लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक अस्थिरता समाप्त हुई। प्राचार्यों की स्थायी नियुक्ति से नीतिगत निर्णयों में तेजी और अकादमिक वातावरण में स्थिरता आई है। संकाय सदस्यों की कमी को दूर करने के लिए 18 प्रोफेसर और 36 एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति की गई। इसके साथ ही 439 असिस्टेंट प्रोफेसर के सापेक्ष 142 असिस्टेंट प्रोफेसर का चयन पूर्ण किया गया है। यह कदम मेडिकल छात्रों के लिए बेहतर शिक्षक-छात्र अनुपात सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
नर्सिंग सेवाओं को सशक्त बनाने पर विशेष फोकस
स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली नर्सिंग सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी सरकार ने बड़े कदम उठाए। वर्ष 2025 में 1248 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इससे न केवल अस्पतालों में कार्यभार संतुलित हुआ, बल्कि रोगियों को बेहतर देखभाल भी सुनिश्चित हुई। इसके अतिरिक्त 14 सीएसएसडी/ओटी टेक्नीशियन और 73 फार्मासिस्ट के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया गतिमान है। इन नियुक्तियों से ऑपरेशन थिएटर, दवा वितरण और संक्रमण नियंत्रण जैसी सेवाओं में सुधार देखने को मिल रहा है।
नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षा का विस्तार
राजकीय नर्सिंग कॉलेजों में वर्ष 2025 में मानव संसाधन और शैक्षणिक ढांचे दोनों को मजबूत किया गया। एक प्रोफेसर, छह एसोसिएट प्रोफेसर और 26 नर्सिंग ट्यूटर की नियुक्ति पूरी की गई। इसके साथ ही विभाग ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए पदों का सृजन किया, जिनमें उप प्राचार्य, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और ट्यूटर शामिल हैं। चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा और हल्द्वानी नर्सिंग कॉलेजों में एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम की शुरुआत से राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त नर्सिंग पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा।
मेडिकल कॉलेजों को मिला आधुनिक स्वरूप
वर्ष 2025 में अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, देहरादून में 750 सीटों और राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में 1000 सीटों की क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम का लोकार्पण किया गया। ये ऑडिटोरियम शैक्षणिक कार्यक्रमों, सेमिनार और राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों के लिए उपयोगी साबित होंगे। दून चिकित्सालय में 04 नए इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर शुरू किए गए, जिससे आपातकालीन सर्जरी सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार
विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देहरादून और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए गए हैं। इन विभागों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करने के लिए वेतनमान में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है—प्रोफेसर को ₹5 लाख, एसोसिएट प्रोफेसर को ₹3 लाख और असिस्टेंट प्रोफेसर को ₹2 लाख प्रतिमाह। संविदा पर कार्यरत फैकल्टी के वेतन में भी वृद्धि की गई है, जिससे अनुभवी चिकित्सकों की राज्य में निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने की पहल
राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए पीजी सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2025 में कुल 68 पीजी सीटों की वृद्धि हुई है। इनमें अल्मोड़ा में 35, हल्द्वानी में 13, देहरादून में 10 और श्रीनगर में 10 सीटें शामिल हैं। इस कदम से आने वाले वर्षों में राज्य को अधिक संख्या में प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे।
अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में नेत्र रोग विभाग के अंतर्गत आई बैंक और कॉर्निया प्रत्यारोपण केंद्र की शुरुआत कर दी गई है। इससे नेत्र प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को अब राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं, दून चिकित्सालय में हाइपरबारिक ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा शुरू की गई है, जो गंभीर रोगों के उपचार में अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
भविष्य की स्वास्थ्य आवश्यकताओं की मजबूत नींव
राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी में 150 शैयाओं का पृथक चिकित्सालय तैयार किया गया है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पुरुष छात्रावास और 60 फैकल्टी के लिए ट्रांजिट हॉस्टल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। राज्य के पहले कैंसर संस्थान, हल्द्वानी का निर्माण लगभग 41 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों का निर्माण क्रमशः 40 और 51 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। दून मेडिकल कॉलेज परिसर में पीजी हॉस्टल, इंटर्न हॉस्टल, एसआर/आर हॉस्टल और 500 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर कदम
वर्ष 2026 के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ तैयार की हैं। राज्य में कुल 07 मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है, जिनमें से 05 कार्यशील और 02 निर्माणाधीन हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1000 की आबादी पर एक डॉक्टर उपलब्ध कराना है। सुपर स्पेशियलिटी सेंटर, स्टेट कैंसर संस्थान का विस्तार, रेडियोथेरेपी और ब्रैकीथेरेपी जैसी सुविधाएँ राज्य को चिकित्सा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगी।
चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ आर राजेश कुमार का बयान
चिकित्सा शिक्षा सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दीर्घकालिक और समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करना है जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और आधुनिक चिकित्सा सेवाएँ एक साथ विकसित हों। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन की कमी को दूर करना, सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार करना और नई तकनीकों को अपनाना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। डॉ डॉ आर राजेश कुमार ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के सतत मार्गदर्शन में उत्तराखंड आने वाले वर्षों में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बनाएगा।