रुद्रप्रयाग: जिलाधिकारी सौरभ गहरवार के निर्देश पर मंगलवार को जनपद के ब्रह्मवाड़ी गांव में ‘सरकार जनता के द्वार’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा ने की।
बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में पहुंचे और अपनी समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं।कार्यक्रम के दौरान कुल 17 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 6 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए अपर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी शिकायतों का त्वरित और संतोषजनक समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा ने पंचायत भवन और अटल आवास का भी निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।कार्यक्रम में ग्रामीणों ने मुख्य रूप से सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व संबंधी समस्याएं उठाईं। अपर जिलाधिकारी ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को मौके पर ही निर्देश जारी किए।
अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। ‘सरकार जनता के द्वार’ कार्यक्रम इसी उद्देश्य की पूर्ति का माध्यम है, जहां लोगों की समस्याएं मौके पर दर्ज कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि जन समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण हो सके।
राज्य में कृषकों की आय बढ़ाने के लिए ज्ञान-विज्ञान के साथ परंपरागत खेती को बढ़ावा दिया जाए। जिन क्षेत्रों में किसान अच्छा कार्य कर रहे हैं, उन्हें उसी क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। ४
विभागों द्वारा जो भी कार्य किये जा रहे हैं, उनका परिणाम धरातल पर दिखे। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभागों द्वारा जिन योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, उनकी भौतिक स्थिति, वित्तीय प्रगति, आउटकम और आउटपुट के आधार पर कार्य किये जाएं, ताकि बजट का भी सही तरीके से उपयोग हो और लोगों की आजीविका भी बढ़े। ये निर्देश मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को सचिवालय में कृषि, उद्यान और सहकारिता विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिये।
कृषि और उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि कृषि और उद्यान के क्षेत्र में आर्थिकी बढ़ाने के लिए नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जाए। क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाए। मिलेट को राज्य में और बढ़ावा दिया जाए।
पॉलीहाउस के निर्माण में तेजी लाई जाए। एरोमा, एप्पल मिशन, कीवी मिशन के साथ ही उत्तराखण्ड के पारंपरिक उत्पादों और फलों के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में कार्य किये जाएं। नाशपती, प्लम, माल्टा, नारंगी, आड़ू के उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए। जिन फसलों को जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, उनको बढ़ावा दिया जाए और औषधीय पादपों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए कृषकों को जागरूक किया जाए।
सहकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये सहकारिता के क्षेत्र में लोगों को उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैल्यूचैन सिस्टम को मजबूत बनाया जाए। राज्य में किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को बढ़ाने के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास किये जाएं। आगामी 05 साल में प्रदेश की सभी ग्राम सभाओं को पैक्स से जोड़ा जाए। सहकारी समितियों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ाने के साथ ही विपणन के लिए सुदृढ़ व्यवस्थाएं की जाएं।
बैठक में जानकारी दी गई कि किसानों की सुविधा के लिए ई-रूपी की व्यवस्था की जा रही है। यह सुविधा अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में शुरू की जायेगी। इससे किसानों को त्वरित, सुरक्षित और पारदर्शी भुगतान की सुविधा मिलेगी, जिससे कृषि क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन आयेगा। सगंध फसलों डेमस्क रोज, तिमरू, दालचीनी, लेमनग्रास और मिंट को राज्य में तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। उच्च मूल्य वाली सगंध फसलों के क्षेत्रफल और उत्पादकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। आईटीबीपी और सेना ताजे पदार्थों की बिक्री की व्यवस्था की गई है, इससे किसानों को निश्चित बाजार मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा भी मिलेगा।
बैठक में कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी, अपर मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव श्री शैलेश बगोली, श्री दिलीप जावलकर,श्री एस.एन पाण्डेय, श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव श्रीमती सोनिका, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपीपीजीजी श्री मनोज पंत और संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून: उतराखंड की बागडोर संभाल रहे युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य मे पहले और देश के उन प्रमुख मुख्यमंत्रियों की कतार मे खड़े है जिनके फैसलों और वायदों पर शत प्रतिशत खरा उतरने वालों के रूप मे सर्वाधिक चर्चा होती है।
जनता की नब्ज टटोलकर निर्णय लेने वाले धामी के कार्यकाल मे दर्जनों ऐसे निर्णय सामने आये, जिनका बेमन से विपक्ष ने विरोध जताया, लेकिन जनता ने न केवल उसे सराहा, बल्कि समय समय पर उप चुनाव, निकायों मे इन पर सहमति की मुहर तक लगायी। आज तेजी से आगे बढ़ रहे उत्तराखण्ड मे सीएम धामी और विकास एक दूसरे के पूरक बन गए हैं।
अपने वायदे के अनुसार सीएम धामी के दृढ़ इच्छा शक्ति से राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। मातृ शक्ति को अधिकार संपन्न बनाने और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने की दिशा मे उनकी पहल का देश भर मे स्वागत किया गया। खुद पीएम मोदी ने उनकी इस पहल की मुक्त कंठ से प्रसंसा की, बल्कि नजीर भी बताया।
राज्य मे वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत अब पात्र पति व पत्नी दोनों को लाभ मिल सकेगा। सड़क, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी तथा आम जन तक राहत पहुंचाने वाले फैसले अमल मे लाये गए। वृद्धावस्था, निराश्रित विधवा भरण पोषण अनुदान तथा दिव्यांग पेंशन योजना के अंतर्गत प्रदत्त दर 1200 रूपये प्रतिमाह में 200 रूपये की वृद्धि की गई है। अब इनमें प्रतिमाह 1400 रूपये पेंशन प्राप्त हो रही है ।
चारधाम सर्किट में आने वाले सभी मंदिरों और गुरूद्वारों में भौतिक ढांचे और परिवहन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। कुमायूं के प्राचीन मंदिरों को भव्य बनाने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन की शुरूआत होगी। मिशन मायापुरी के अंतर्गत हरिद्वार को योग की अंतरराष्ट्रीय राजधानी और विश्व में आध्यात्मिक पर्यटन के लिये सबसे बड़े स्थलों के रूप में बदलने के लिये उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे नेटवर्क निर्माण के लिये पर्वत माला परियोजना प्रारम्भ की गई है ।
नगरीय क्षेत्रों में ट्रेफिक समस्या को दूर करने के लिये पार्किंग सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। सर्फेस पार्किंग के साथ ही मल्टीस्टोरी पार्किंग, केविटी पार्किंग व टनल पार्किंग भी विकसित किये जाने की योजना प्रारंभ हुई है।
उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में 4 जी/5 जी मोबाईल नेटवर्क एवं हाई स्पीड ब्राडबैंड व फाइबर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करायी जानी प्रस्तावित है।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना की तर्ज पर एक सीएम किसान प्रोत्साहन निधि की शुरूआत होगी।
हिम प्रहरी योजना के अंतर्गत राज्य के भूतपूर्व सैनिकों एवं युवाओं को अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के निकटवर्ती जिलों में बसने के लिये सभी आवश्यक सहायता प्रदान की गई हैं ।
जीरो टॉलरेंस के तहत भ्रष्टाचार पर रोक लगाने हेतु भ्रष्टाचार मुक्त एप-1064 का शुभारम्भ किया गया है । पर्यावरण मित्रों का एक दिन का मानदेय बढ़ाकर 500 रूपये कर दिया है। प्रदेश के सभी अंत्योदय कार्ड धारकों को प्रति वर्ष तीन गैस सिलेंडर मुफ्त दिया जा रहे हैं । इससे संबंधित लाभार्थियों की संख्या 1 लाख 84 हजार 1 सौ 42 होंगे तथा इस पर कुल 55 करोड़ रू. का व्यय भार होगा। गेंहू खरीद से संबंधित हर वर्ष की तरह कृषकों को प्रति क्विंटल 20 रू. बोनस देने का निर्णय दिया गया है। गन्ना मूल्य भुगतान के लिये गन्ना विभाग को धन की आवश्यकता होगी तो उसकी प्रतिपूर्ति सरकार करेगी। यदि इस शुल्क को देने के लिये धन की आवश्यकता होगी तो सरकार वित्तीय सहायता देने की योजना बनाई गई है ।
धामी सरकार ने वीर सैनिकों सम्मान को बढ़ावा देने का भी कार्य किया इसके उत्तराखण्ड राज्य के वीरता पदक से सम्मानित सैनिकों को देय एकमुश्त अनुदान में वृद्धि की गई। परमवीर चक्र 30 लाख से 50 लाख, अशोक चक्र 30 लाख से 50 लाख, महावीर चक्र 20 से 35 लाख, कीर्ति चक्र 20 लाख से 35 लाख, वीर चक्र और शौर्य चक्र 15 से 25 लाख और सेना गैलेन्ट्री मेडल 07 लाख से 15 लाख, मैन्सइनडिस्पेच 03 लाख से 10 लाख की गयी।
कोविड 19 की अवधि में चिकित्सा विभाग के अंतर्गत आउटसोर्स के माध्यम से स्वीकृत पद से अधिक तैनात कार्मिकों के संबंध में निर्णय लेने हेतु मंत्रीमण्डलीय उपसमिति का गठन किया गया।
सरकारी खर्चे को कम करने की दिशा में कदम उठाते हुए सीएम ने राजधानी में होटल या अन्य निजी स्थानों पर आयोजित होने वाले सरकारी कार्यक्रमों को मुख्य सेवक सदन में आयोजित किए जाने हेतु मुख्य सचिव को निर्देशित किया, साथ ही सभी जनपदों में भी यही कार्यप्रणाली लागू करने के लिए कहा है।
एमएसएमई 2015 की नीति के तहत सब्सिडी प्राप्त करने हेतु पहले से पूर्व पंजीकृत होना जरूरी था, किन्तु जानकारी के अभाव में इससे सम्बन्धित लगभग 100 लाभार्थी सब्सिडी वंचित रह गये थे। इन लाभार्थियों को भी छूट देते हुए सब्सिडी देने की मंजूरी दी गयी है। एमएसएमई के अन्तर्गत प्लॉट ऑफ सैड के बिक्री को सर्कल रेट से लिंक करने की मंजूरी दी गयी है। केदारनाथ पुनर्निर्माण मास्टर प्लान बनाने वाली फर्म को सोनप्रयाग में भी मास्टर प्लान बनाने को मंजूरी दी गयी है।
ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रो में मोबाईल टॉवर से सम्बन्धित टॉवर से सम्बन्धित फीस निर्धारण से सम्बन्धित समस्या का निराकरण किया गया है। अब भारत सरकार द्वारा निर्धारित गाईडलाईन के कारण फीस निर्धारण विलम्ब होने से मोबाईल सेवा बाधित नही होगी।
उत्तराखण्ड की आय को 05 वर्ष में दोगुना करने के लिए विभिन्न विभागों से रिपोर्ट लिया जाएगा एवं उत्तराखण्ड की आय को दोगुना करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कन्संलटेन्सी ऐजेंसी नियुक्त की जाएगी।
यूकेएसएससी की लगभग 7 हजार पदों पर गतिमान भर्ती प्रक्रिया को यूकेपीएससी के माध्यम से संपन्न किया जाएगा। रोजगार के लिए सजग धामी सरकार मे 20 हजार से अधिक युवा सरकारी नौकरियां पा चुके हैं। महिलाओं को सरकारी नौकरियों के क्षैतिज आरक्षण का कानून बनाया गया है। वहीं खेलों को बढ़ावा दे रही धामी सरकार ने खेल पुरस्कार राशि बढायी है।
प्रदेश के सांस्कृतिक सरंक्षण के लिए सरकार प्रदेश में धर्मान्तरण सम्बंधित कानून लायी है। युवाओं के हक पर डाका डालने वाले नकल माफिया को सलाखों के पीछे धकेलकर सरकारी
देश का सबसे सख्त “नकल विरोधी कानून” लायी। दंगारोधी कानून तथा लैंड जिहाद पर कार्रवाई कर 144. 5 हजार एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया गया।
सरकार प्रदेश के धार्मिक स्थलों को दिव्य और भव्य स्वरूप देने के लिए केंद्र के सहयोग से कई योजनाओं पर कार्य कर रही है। यमुनोत्री केदारनाथ और हेमकुंड मे रोपवे के साथ ही आदि कैलाश और ओम पर्वत शिखर के लिए हेलीकॉप्टर सेवा तथा चारधाम के नाम के प्रयोग के विरुद्ध सख्त कानून भी लायी है।
प्रदेश मे मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की गयी है जिसमे 123. DBT से 241 छात्रों के खाते में ₹33 लाख 52 हजार रुपये भेजे गए। पीएचडी करने वाले 100 मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिमाह ₹5000 की छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी।
प्रदेश की जमीन की रक्षा के लिए सख्त भू कानून धामी सरकार ने अपने वायदे के मुताबिक विस से पास करा लिया। अब तक गैर प्रयोजन उपयोग मे लायी गयी भूमि को सरकार मे निहित करने का प्रावधान इस कानून मे किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों मे अब कृषि भूमि को कोई बाहरी व्यक्ति नही खरीद पायेगा।
देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट द्वारा प्रदेश में सख्त भू-कानून को मंजूरी दिए जाने पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रदेश सरकार और माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी को हार्दिक बधाई और आभार व्यक्त किया।
डॉ. निशंक ने कहा कि, “उत्तराखंड की जनता की वर्षों पुरानी मांग और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया यह निर्णय प्रदेश के स्वाभिमान, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर की रक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह केवल एक भू-कानून नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ियों के उज्जवल भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है।”
उन्होंने आगे कहा कि डबल इंजन की सरकार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि उत्तराखंड के विकास, आत्मनिर्भरता और मूल पहचान को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्र सरकार के सहयोग और मार्गदर्शन से यह सपना साकार हो सका है, जिसके लिए वह हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।
डॉ. निशंक ने प्रदेशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि, “हम सब मिलकर अपने राज्य की संस्कृति, परंपरा और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए सतत प्रयासरत रहेंगे और उत्तराखंड को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।”
देहरादून: पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार र दैनिक वेतन/संविदा/विशेष श्रेणी/उपनल/कार्यप्रभारित कार्मिकौ को नियमितीकरण शीघ्र करने व निगमौ का निजीकरण न किये जाने के लिये राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ के आह्वान पर विधायक निवास( ट्रांजिट कैम्प) रेसकोर्स में थाली बजाकर सरकार और शासन को सचेत किया गया ।
संघ द्वारा राज्य के प्रत्येक विधायक के ज्ञापन दिये गये जिसमें अनुरोध किया गया राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ लगातार शासन और सरकार स्तर पर मांग कर रहा है कि माननीय उच्च न्यालय द्वारा दैनिक/संविदा/विशेष श्रेणी/उपनल कार्मिकों के नियमितीकरण हेतु आदेश जारी किये गये लेकिन शासन स्तर से विभागीय प्रमुखौ को आदेश निर्गत नहीं किये जा रहे हैं । नियमावली बनाने के लिये बनी उप समिति अभी तक निर्णय नहीं ले पा रही है ।
महासंघ द्वारा मांग की गयी शीघ्र नियमितीकरण हेतु नियमावली जारी कर आदेश निर्गत किये जाय । महासंघ द्वारा वन विकास निगम में लौगिंग व डिपौ कार्यौ हेतु निजी व्यक्ति/ मालदारी व्यवस्था पर करायें जाने के लिये किये गये आदेशो को नीरस्त करने की मांग की महासंघ द्वारा कहा गया कि वन विकास निगम प्रबन्धन कार्मिकों की भर्ती करने के स्थान पर आरक्षित क्षेत्र में निजी ठेकेदारौ से काम कराने की तैयारी कर रहा है जिससे हजारों आउटसौर्स कार्मिक बाहर होंगे ।
वनों का कार्य पूर्व व्यवस्था ( मालदारी ) से होगा जिससे अवैध कटान, व भ्रष्टाचार को पनाह मिलेगी , साथ माननीय उच्चतम न्यालय द्वारा ( गोडाबर्धन बनाम भारत सरकार) आरक्षित क्षेत्र में निजी संस्थाओं से काम कराने पर उलंघन होगा ।।
महासंघ द्वारा मांग की गयी कि वन विकास निगम प्रबन्धन द्वारा किये गये आदेश जन हित में नहीं है इसलिये इन्हें नीरस्त कराते हुवे खाली पदों पर नयी नियुक्तियां शीघ्र की जाय ।।।
ज्ञापन देने में परिवहन निगम से रोडवेज संयुक्त परिषद से प्रान्तीयता अध्यक्ष मेछपाल, क्षेत्रीय अध्यक्ष राकेश पेटवाल, जी एम बी एस से संगठन के अध्यक्ष राजेश रमौल, महामंत्री ओ पी भट्ट, संघ के अध्यक्ष मनमोहन चौधरी, महासचिव बी एम जुयाल, वन निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष टी एस बिष्ट, महामंत्री दिवाकर शाही , जल संस्थान कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष श्याम सिंह नेगी,व शिशुपाल रावत संदीप मल्होत्त्रा , जीबा नन्द भट्ट के एम बी एन से अरविन्द नेगी, के महासंघ के महासचिव बी एस रावत व विजय खाली, आदि कार्मिक उपस्थित रहे ।
देहरादून: पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार र दैनिक वेतन/संविदा/विशेष श्रेणी/उपनल/कार्यप्रभारित कार्मिकौ को नियमितीकरण शीघ्र करने व निगमौ का निजीकरण न किये जाने के लिये राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ के आह्वान पर विधायक निवास( ट्रांजिट कैम्प) रेसकोर्स में थाली बजाकर सरकार और शासन को सचेत किया गया ।
संघ द्वारा राज्य के प्रत्येक विधायक के ज्ञापन दिये गये जिसमें अनुरोध किया गया राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ लगातार शासन और सरकार स्तर पर मांग कर रहा है कि माननीय उच्च न्यालय द्वारा दैनिक/संविदा/विशेष श्रेणी/उपनल कार्मिकों के नियमितीकरण हेतु आदेश जारी किये गये लेकिन शासन स्तर से विभागीय प्रमुखौ को आदेश निर्गत नहीं किये जा रहे हैं । नियमावली बनाने के लिये बनी उप समिति अभी तक निर्णय नहीं ले पा रही है ।
महासंघ द्वारा मांग की गयी शीघ्र नियमितीकरण हेतु नियमावली जारी कर आदेश निर्गत किये जाय । महासंघ द्वारा वन विकास निगम में लौगिंग व डिपौ कार्यौ हेतु निजी व्यक्ति/ मालदारी व्यवस्था पर करायें जाने के लिये किये गये आदेशो को नीरस्त करने की मांग की महासंघ द्वारा कहा गया कि वन विकास निगम प्रबन्धन कार्मिकों की भर्ती करने के स्थान पर आरक्षित क्षेत्र में निजी ठेकेदारौ से काम कराने की तैयारी कर रहा है जिससे हजारों आउटसौर्स कार्मिक बाहर होंगे ।
वनों का कार्य पूर्व व्यवस्था ( मालदारी ) से होगा जिससे अवैध कटान, व भ्रष्टाचार को पनाह मिलेगी , साथ माननीय उच्चतम न्यालय द्वारा ( गोडाबर्धन बनाम भारत सरकार) आरक्षित क्षेत्र में निजी संस्थाओं से काम कराने पर उलंघन होगा ।।
महासंघ द्वारा मांग की गयी कि वन विकास निगम प्रबन्धन द्वारा किये गये आदेश जन हित में नहीं है इसलिये इन्हें नीरस्त कराते हुवे खाली पदों पर नयी नियुक्तियां शीघ्र की जाय ।।।
ज्ञापन देने में परिवहन निगम से रोडवेज संयुक्त परिषद से प्रान्तीयता अध्यक्ष मेछपाल, क्षेत्रीय अध्यक्ष राकेश पेटवाल, जी एम बी एस से संगठन के अध्यक्ष राजेश रमौल, महामंत्री ओ पी भट्ट, संघ के अध्यक्ष मनमोहन चौधरी, महासचिव बी एम जुयाल, वन निगम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष टी एस बिष्ट, महामंत्री दिवाकर शाही , जल संस्थान कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष श्याम सिंह नेगी,व शिशुपाल रावत संदीप मल्होत्त्रा , जीबा नन्द भट्ट के एम बी एन से अरविन्द नेगी, के महासंघ के महासचिव बी एस रावत व विजय खाली, आदि कार्मिक उपस्थित रहे ।
अपर सचिव सी. रविशंकर ने आज गंगोत्री मार्ग पर शीतकालीन यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेकर अधिकारियों को जरूरी हिदायतें दी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित करना राज्य सरकार की विशेष प्राथमिकता है। गंगा जी के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुजनों को हर्षिल क्षेत्र के मनोरम नैसर्गिक सौंदर्य के साथ ही बर्फबारी और तप्तकुंड के गर्मपानी के अनूठे अहसास से रूबरू होने का सुअवसर भी मिलता है, जो शीतकालीन यात्रा का विशेष आकर्षण है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित कर श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सहूलियतों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
शासन स्तर से जिले के विकासखंड भटवाड़ी एवं डुंडा के निरीक्षण एवं समन्वय के लिए नोडल अधिकारी रूप में नामित अपर सचिव श्री सी. रविशंकर जिले के दो दिन के भ्रमण पर आज उत्तरकाशी पहॅुंचे। अपने भ्रमण की शुरूआत में श्री रविशंकर ने बर्फबारी के बीच गंगोत्री मार्ग पर सुक्खी टॉप क्षेत्र तक का भ्रमण कर शीतकालीन यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने भटवाड़ी एवं गंगनानी तप्तकुंड सहित सुक्खी क्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ ही यात्रियों से भी भेंट कर उनसे शीतकालीन यात्रा के बारे में वार्ता की।
इस दौरान अपर सचिव श्री रविशंकर ने कहा कि हर्षिल क्षेत्र में काफी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं। मॉं गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखवा में काफी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन हो रहा है। उन्होंने कहा शीतकालीन यात्रा पर आने वाले यात्री इन दिनों बर्फबारी का आनंद उठा सकते हैं। रास्ते में गंगनानी स्थित तप्तकुंड के गर्मपानी में स्नान पर्यटकों के लिए एक अनूठा आकर्षण है, जहां पर पहाड़ी से निकलते कर पर्यटकों को अनूठा अनुभव हासिल होगा। सरकार की तरफ से अधिकाधिक लोगों से इस क्षेत्र की यात्रा पर आने की अपील करते हुए श्री रविशंकर ने शीतकालीन यात्रा व्यवस्थाओं को और अधिक बेहतर करने के लिए यात्रियों से अपने फीडबैक साझा करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यात्रा को सुगम, सुरक्षित व सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना सरकार की प्रतिबद्धता और प्राथमिकता है। इस दौरान भटवाड़ी में निवर्तमान प्रमुख विनीता रावत के नेतृत्व में भेंट करने वाले ग्रामीणों से हुई वार्ता में उन्होंने गंगोत्री मार्ग के चौड़ीकरण करने और इसे भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति सुधारे जाने के लिए तत्परता से प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी भटवाड़ी मुकेश चंद रमोला, परियोजना निदेशक डीआरडीए अजय सिंह, जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी, खंड विकास अधिकारी भटवाड़ी अमित मंमगाईं, तहसीलदार भटवाड़ी सुरेश सेमवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार ने सोमवार को राज्य निर्वाचन आयोग मुख्यालय में नागर स्थानीय निकाय सामान्य निर्वाचन 2024 के संबंध में प्रेस वार्ता की। राज्य निर्वाचन आयुक्त ने उत्तराखंड राज्य के 11 नगर निगम, 43 नगर पालिका परिषद एवं 46 नगर पंचायतों के सामान्य निर्वाचन 2024 हेतु निर्धारित कार्यक्रम जारी किया।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि नाम निर्देशन पत्र 27 दिसंबर, 2024 से प्राप्त किए जा सकेंगे, नाम निर्देशन पत्रों को प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 दिसंबर 24 है। उन्होंने कहा कि नाम निर्देशन पत्रों की जांच 31 दिसंबर, 2024 एवं 1 जनवरी, 2025 को की जाएगी। नाम निर्देशन पत्रों की वापसी की तिथि 2 जनवरी, 2025 निर्धारित की गई है। 3 जनवरी 2025 को निर्वाचन प्रतीक आबंटित किए जाएंगे। मतदान की तिथि 23 जनवरी 2025 एवं मतों की गणना की 25 जनवरी, 2025 को की जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि प्रदेश में कुल महिला मतदाताओं की संख्या 14 लाख 93 हजार 519 है, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या 15 लाख 89 हजार 467 है, अन्य मतदाताओं की कुल संख्या 514 है। इस प्रकार कुल मतदाताओं की संख्या 30 लाख 83 हजार 500 है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल संवेदनशील मतदान केंद्र 601 एवं मतदान स्थल 1292 हैं। कुल अति संवेदनशील मतदान केंद्र 422 और मतदान स्थल 1078 है, संवेदनशील एवं अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की संख्या घट बढ़ सकती है।
उत्तराखंड निकाय चुनाव की राज्य चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा कर दी है। राज्य में निकाय चुनाव 23 जनवरी को होंगे जबकि परिणाम 25 जनवरी को घोषित किया जाएगा। नामांकन दाखिल करने की तिथि 27 दिसम्बर से 30 दिसंबर 2024 तक है। 31 दिसम्बर से 1 जनवरी 2025 तक पत्रों की जांच की जायेगी।
नाम वापसी तिथि दो जनवरी 2025 है निर्वाचन प्रतीक आवंटन की तिथि 3 जनवरी 2025 रहेगी। यानि 3 जनवरी को चुनाव चिन्ह मिल जाएगा। इसके बाद 23 जनवरी को पूरे उत्तराखंड में मतदान किया जाएगा और 25 जनवरी को चुनाव का परिणाम घोषित किया जाएगा।
बता दें कि वर्तमान में प्रदेश में निकायों की संख्या 107 है, जिसमें 11 नगर निगम, 45 नगर पालिका और 48 नगर पंचायत हैं। नगर पंचायत बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में निकायों की गठन के बाद निर्वाचन नहीं कराया गया है इस बार भी यहां चुनाव नहीं होंगे। नगर पंचायत पाटी और गढ़ीनेगी परिसीमन उपलब्ध नहीं होने के कारण तथा नगर पालिका परीषद नरेंद्र नगर, और नगर पालिका परिषद किच्छा में परिसीमन उपलब्ध नहीं होने के कारण चुनाव नहीं होंगे, यानी कुल 07 विकायों में चुनाव नहीं होंगे।
बता दें कि चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने के बाद उपरोक्त 07 निकायों को छोड़कर सभी निकायों में आचार संहिता प्रभावी हो गई है जो चुनाव परिणामों की घोषणा तक लागू रहेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरूवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के सदस्यों और पंडा पुजारियों ने भेंट की। उन्होने चारधामों में शीतकालीन दर्शन यात्रा के लिये मुख्यमंत्री द्वारा की गई अभिनव पहल के लिये मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होने 16 दिसम्बर से आरम्भ होने वाली शीतकालीन यात्रा के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री को भी आमंत्रित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकालीन चार धाम यात्रा के सफल संचालन में चार धाम तीर्थ पुरोहित महा पंचायत के साथ अन्य सभी सम्बन्धित संस्थानो एवं संगठनो आदि को भी सहयोगी बनना होगा। उन्होने कहा कि शीतकालीन चार धाम यात्रा सफलता पूर्वक संचालन हो, इसके लिये सभी सम्बधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।
शीतकालीन यात्रा से राज्य की आर्थिकी को भी बढावा देने में मदद मिलेगी तथा स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होगें। पंच बद्री व पंच केदार के साथ ही चारों धामों के शीतकालीन यात्रा प्रवास के आसपास के प्रमुख तीर्थ एवं पर्यटक स्थलों को विकसित करने के भी निर्देश अधिकारियों को दिये गये है। चारधाम यात्रा मार्गों के आबादी वाले क्षेत्रों में सुगम यातायात एवं पार्किंग की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के निर्देश सभी सम्बधित विभागीय अधिकारियों को दिये गये है।
महा पंचायत के सदस्यों और पंडा पुजारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखण्ड के चार धामों, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ एवं बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के बाद इन धामों की शीतकालीन पूजा, मां यमुना की खरसाली (खुशी मठ) मां गंगा की मुखवा (मुखीमठ), केदारनाथ की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ एवं उद्धव व कुबेर की पूजा पांडुकेश्वर तथा शंकराचार्य के गद्दी स्थल ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में की जाती है। चारों धामों के तीर्थ पुरोहित एवं पुजारी समाज द्वारा मुख्यमंत्री से चारों धामों के शीतकालीन पूजा स्थलों का व्यापक प्रचार प्रसार के साथ ही इन पूजा स्थलों में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर चारधाम महा पंचायत के अध्यक्ष एवं गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव श्री सुरेश सेमवाल,महापंचायत के महासचिव बृजेश सती, मीडिया प्रभारी रजनीकांत सेमवाल,गंगा पुरोहित सभा अध्यक्ष संजीव सेमवाल,निखिलेश सेमवाल, अनिरूध उनियाल, जगमोहन उनियाल, उमेश सती, प्रशांत डिमरी आदि अन्य उपस्थित थे।