Category: उत्तराखंड

  • तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे उत्तराखंड, पर्यटन-तीर्थाटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही धामी सरकार की पहलें… 

    तीन साल में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे उत्तराखंड, पर्यटन-तीर्थाटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही धामी सरकार की पहलें… 

     

    देहरादून। उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयास अब रंग ला रहे हैं। बीते तीन वर्षों में राज्य में 23 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है और लाखों लोगों की आजीविका सशक्त हुई है।

    पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, लगातार बढ़ती पर्यटक संख्या ने न सिर्फ चारधाम यात्रा मार्गों को, बल्कि ग्रामीण और सीमांत इलाकों को भी पर्यटन मानचित्र पर ला खड़ा किया है। अब पर्यटक केवल देहरादून, नैनीताल, मसूरी या हरिद्वार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूरस्थ स्थलों तक पहुंच रहे हैं।

    राज्य में राफ्टिंग, ट्रैकिंग, बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग और पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में देश-विदेश के पर्यटकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे, ढाबा संचालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों और परिवहन कारोबारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    फिलहाल प्रदेश में छह हजार से अधिक होमस्टे संचालक पर्यटन गतिविधियों से सीधा लाभ उठा रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि यह न सिर्फ रोजगार सृजन का माध्यम है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा को भी नया जीवन दे रहा है।

    तीर्थाटन में भी नया रिकॉर्ड
    चारधाम यात्रा इस वर्ष एक नया आयाम छू रही है। अब तक 50 लाख से अधिक तीर्थयात्री यात्रा पर पहुंच चुके हैं। केदारनाथ और यमुनोत्री मार्गों पर ही इस साल 4300 से अधिक घोड़े-खच्चर संचालक सक्रिय रहे।

    सरकार अब शीतकालीन यात्रा को भी नई पहचान देने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा से सीमांत पिथौरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में तीर्थाटन को नया आयाम मिला है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि,

    “पर्यटन उत्तराखंड की आर्थिकी का आधार है। पर्यटन और तीर्थाटन से सीधे तौर पर स्थानीय लोगों को लाभ मिल रहा है। सरकार वर्षभर पर्यटन गतिविधियों को जारी रखने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों से भी राज्य में पर्यटन को नई ऊर्जा मिली है।”

    उत्तराखंड अब न सिर्फ देवभूमि, बल्कि एडवेंचर और नेचर टूरिज्म की नई राजधानी के रूप में उभर रहा है।

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘सांसद खेल महोत्सव’ का शुभारंभ, प्रदेश में जल्द खुलेंगी 23 खेल अकादमियां… 

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘सांसद खेल महोत्सव’ का शुभारंभ, प्रदेश में जल्द खुलेंगी 23 खेल अकादमियां… 

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, तपोवन में आयोजित ‘सांसद खेल महोत्सव’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से आयोजित यह महोत्सव गांव-गांव से खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का बड़ा अभियान है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में यह महोत्सव तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य “फिट इंडिया – स्पोर्ट्स इंडिया – स्ट्रॉन्ग इंडिया” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इस पहल से स्थानीय, पारंपरिक और लोक खेलों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    सीएम धामी ने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत खेलों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। हाल ही में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने 103 पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ‘स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान’ के तहत प्रदेश के आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियां स्थापित की जाएंगी। इन अकादमियों में हर साल 920 विश्वस्तरीय एथलीट और 1000 खिलाड़ी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। साथ ही, हल्द्वानी में राज्य का पहला खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है।

    उन्होंने बताया कि राज्य में नई खेल नीति लागू की गई है, जिसके तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं को सरकारी नौकरी में आउट ऑफ टर्न नियुक्ति दी जा रही है। साथ ही मुख्यमंत्री खेल विकास निधि, खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, उदीयमान खिलाड़ी योजना और खेल किट योजना जैसी योजनाओं से युवाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ‘उत्तराखंड खेल रत्न’ और ‘हिमालय खेल रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा रहा है। साथ ही राजकीय सेवाओं में खिलाड़ियों के लिए चार प्रतिशत खेल कोटा पुनः लागू किया गया है।

    राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 2047 के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में खेलों की अहम भूमिका है। उन्होंने घोषणा की कि वे अपनी सांसद निधि से नवोदय विद्यालय, तपोवन में वॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध कराएंगे। साथ ही विद्यालय के मेस के फर्नीचर की व्यवस्था के लिए भी सहायता दी जाएगी।

    कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, खजानदास, मेयर सौरभ थपलियाल, सीडीओ देहरादून अभिनव शाह, सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • उत्तराखंड को विश्व बैंक से मिलेगा 680 करोड़ रुपये का सहयोग

    उत्तराखंड को विश्व बैंक से मिलेगा 680 करोड़ रुपये का सहयोग

    उत्तराखंड सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में भारत सरकार के वित्त मंत्रालय, आर्थिक मामलों के विभाग (एफ.बी. प्रभाग), नई दिल्ली ने राज्य की महत्वाकांक्षी परियोजना “Strengthening Public Financial Management for Improved Service Delivery in Uttarakhand ” को विश्व बैंक के विचारार्थ अनुशंसित किया है।

    इस परियोजना के अंतर्गत उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सक्षम, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने तथा सेवा प्रदाय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्व बैंक से लगभग ₹680 करोड़ (लगभग 80 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की बाह्य सहायता का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।

    भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव को विश्व बैंक भारत कार्यालय, नई दिल्ली के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर श्री पॉल प्रूसी को औपचारिक रूप से प्रेषित किया गया है। पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड सरकार के इस प्रस्ताव की प्रति संलग्न करते हुए इसे विचार एवं स्वीकृति हेतु अनुशंसित किया जा रहा है।

    इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की वित्तीय प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक आधुनिक, कुशल और पारदर्शी बनाना है, ताकि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ जनता तक तेजी, सटीकता और पारदर्शिता के साथ पहुंच सके। परियोजना के तहत वित्तीय प्रबंधन, बजट नियंत्रण, लेखा प्रणाली, व्यय प्रबंधन और सेवा वितरण के क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधार लागू किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यक्त की प्रसन्नता

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अनुशंसा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “ यह उत्तराखंड के वित्तीय सुधार और सुशासन के प्रयासों की बड़ी स्वीकृति है। राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है कि प्रत्येक सरकारी रुपया जनता के हित में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ व्यय हो। विश्व बैंक की यह संभावित सहायता राज्य की वित्तीय प्रणालियों को डिजिटल, सुदृढ़ और परिणामोन्मुख बनाएगी।”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से राज्य में राजकोषीय अनुशासन, वित्तीय डेटा पारदर्शिता, और सेवा प्रदाय तंत्र की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार आएगा।

    उत्तराखंड सरकार के वित्त विभाग के अनुसार, यह परियोजना राज्य की ई-गवर्नेंस और डिजिटल पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट को नई दिशा देगी। इससे राज्य के प्रत्येक विभाग में वित्तीय अनुशासन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।

    यह पहल उत्तराखंड को एक वित्तीय रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और उत्तरदायी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगी। भारत सरकार एवं विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की वित्तीय प्रशासनिक संरचना को सशक्त बनाने के साथ-साथ नागरिकों तक सरकारी सेवाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित की जाएगी।

  • अग्निवीर भर्ती पूर्व निशुल्क प्रशिक्षण के लिए एसओपी तैयार

    अग्निवीर भर्ती पूर्व निशुल्क प्रशिक्षण के लिए एसओपी तैयार

    देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर खेल एवं युवा कल्याण विभाग सेना में अग्निवीर बनकर देश की सेवा करने के इच्छुक युवक- युवतियों को भर्ती पूर्व निशुल्क प्रशिक्षण देगा। इसके लिए विभाग ने एसओपी तैयार कर ली है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते दिनों खेल एवं युवा कल्याण विभाग को प्रदेश के युवाओं को अग्निवीर भर्ती के लिए प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए थे। ताकि वो उत्तराखंड की महान सैन्य परंपरा के अनुसार सेना में अपना करियर बना सके। इसी क्रम में विभाग ने युवाओं को अग्निवीर भर्ती पूर्व निशुल्क प्रशिक्षण देने की तैयारी पूरी कर ली है। जल्द ही 13 जिलों में अग्निवीरों का भर्ती पूर्व प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया जाएगा।

    प्रमुख बातें
    1.अग्निवीर भर्ती पूर्व प्रशिक्षण हेतु इच्छुक युवक- युवतियों के लिए उत्तराखण्ड राज्य का मूल / स्थायी निवासी अथवा उत्तराखण्ड राज्य में किसी संस्थान में अध्ययनरत / सेवारत होना अनिवार्य है।
    2. प्रशिक्षण हेतु हाईस्कूल परीक्षा 45 प्रतिशत या उससे अधिक अंक के साथ उत्तीर्ण तथा प्रत्येक विषय में 33 प्रतिशत अंक अथवा उससे अधिक होना अनिवार्य है।
    3. आयु 16 वर्ष से अधिक होना अनिवार्य है।
    4. जिला खेल कार्यालय/जिला युवा कल्याण अधिकारी कार्यालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
    5. छात्र/छात्रा को चिकित्सक द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य सम्बन्धी प्रमाण पत्र जमा करना होगा।
    6. प्रशिक्षण के समय छात्र/छात्रा को खेल किट (वेशभूषा-टी शर्ट, नेकर, स्पोर्ट्स शूज, मौजा) में उपस्थित होना अनिवार्य है।
    7. छात्र/छात्रा के शरीर पर किसी प्रकार कोई टैटू अथवा किसी प्रकार अप्राकृतिक स्थायी निशान आदि न गुदा हो।
    8. इच्छुक छात्र/छात्रा को खेल स्टेडियम /खेल मैदान में नियुक्त विभागीय प्रशिक्षक द्वारा ही प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

    उत्तराखंड की शानदार सैन्य परंपरा रही है, यहां के प्रत्येक परिवार से कोई ना कोई सदस्य सेना में जाता ही है। इसीलिए सरकार अग्निवीर भर्ती पूर्व प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। ताकि युवा अग्निवीर के जरिए सेना को अपनी सेवाएं दे सके। प्रदेश सरकार अग्निवीरों को सेवाकाल के बाद प्रदेश की सरकारी नौकरियों में आरक्षण भी प्रदान करने का फैसला ले चुकी है।
    पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

  • जयकारों के साथ शीतकाल के लिए बंद हुए मां यमुना मंदिर के कपाट

    जयकारों के साथ शीतकाल के लिए बंद हुए मां यमुना मंदिर के कपाट

    भाईदूज के पावन पर्व पर आज यमुनोत्री धाम में मां यमुना मंदिर के कपाट आज छह माह के लिए बंद कर दिए गए। इसके बाद मां यमुना की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव के लिए रवाना हुई। अब जिसके बाद छह माह तक श्रद्धालु यहीं मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे।

    यमुनोत्री मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल, सचिव सुनील उनियाल, कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल ने बताया कि विशेष पूजाओं के बाद दोपहर 12.30 बजे मां यमुना मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। इससे पहले सुबह करीब 8 बजे खरसाली गांव से यमुना के भाई शनिदेव महाराज की डोली वाद्य यंत्रों के साथ धाम के लिए रवाना हुए थे।

    बता दें कि गंगोत्री धाम में मां गंगा मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए अन्नकूट पर्व पर अभिजीत मुहूर्त में पूर्वाह्न 11.36 बजे विधिविधान के साथ बंद किए गए थे। अब मां गंगा की उत्सव डोली व भोगमूर्ति छह माह तक मुखबा गांव में ही प्रवास करेगी। इस वर्ष गंगोत्री धाम में 758249 यात्री गंगा के दर्शन कर चुके हैं।

  • किसानों की अनुकूलन को मदद कम, सब्सिडी ज़्यादा

    किसानों की अनुकूलन को मदद कम, सब्सिडी ज़्यादा

    दुनिया भर में छोटे किसान – जो आधी से ज़्यादा खाद्य कैलोरी पैदा करते हैं – जलवायु संकट की मार झेल रहे हैं। लेकिन उनकी मदद के लिए जितनी रकम चाहिए, दुनिया उतना पैसा किसी और चीज़ पर नहीं, बल्कि हानिकारक कृषि सब्सिडियों पर खर्च कर रही है।

    नए विश्लेषण के मुताबिक, छोटे किसानों के जलवायु अनुकूलन (adaptation) की वार्षिक लागत 443 बिलियन डॉलर है, जो उस 470 बिलियन डॉलर से भी कम है जो हर साल उन कृषि सब्सिडियों पर खर्च हो रहा है जो
    न तो किसानों के लिए टिकाऊ हैं और न ही धरती के लिए।

    यह शोध Climate Focus ने Family Farmers for Climate Action नामक नई वैश्विक एलायंस के लिए किया है,
    जो 95 मिलियन छोटे किसानों का प्रतिनिधित्व करती है – अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और पैसिफ़िक के परिवारिक किसानों की एक सामूहिक आवाज़।

    कितना खर्च चाहिए, कितना हो रहा है

    रिपोर्ट बताती है कि 10 हेक्टेयर या उससे कम ज़मीन वाले किसानों को हर साल औसतन $952 प्रति हेक्टेयर,
    यानि लगभग $2.19 प्रतिदिन, अपने खेतों को जलवायु प्रभावों से अनुकूल बनाने में लगाने होंगे।

    यह 443 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष की जरूरत बनती है।
    इसके मुकाबले,

    2021 में छोटे किसानों के लिए वैश्विक अनुकूलन फाइनेंस सिर्फ़ 1.59 बिलियन डॉलर रहा,
    यानी ज़रूरत का सिर्फ़ 0.36%।
    छोटे किसान खुद अपनी आय का 20–40% अनुकूलन उपायों पर खर्च कर रहे हैं –
    कुल मिलाकर लगभग $368 बिलियन सालाना।
    दूसरे शब्दों में –
    किसान पहले से अपने अस्तित्व की कीमत चुका रहे हैं, जबकि वैश्विक सहायता अभी भी ऊँगली भर है।

    “ये दान नहीं, निवेश है” – किसानों की आवाज़

    पूर्वी अफ्रीका किसान संघ (EAFF) की अध्यक्ष एलिज़ाबेथ न्सिमादाला ने कहा, “यह कोई दान नहीं, निवेश है –
    पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा में निवेश। छोटे किसान आधी दुनिया का खाना उगाते हैं,
    2.5 अरब लोगों की रोज़ी उनसे जुड़ी है, और चावल, गेहूं, कोको और कॉफ़ी जैसी वैश्विक फसलों की रीढ़ भी वही हैं।”

    दक्षिण ब्राज़ील के एग्रोफॉरेस्ट्री किसान थालेस मेंडोन्सा ने कहा, “छोटे किसानों में निवेश सिर्फ़ आर्थिक नहीं,
    यह एक पारिस्थितिक ज़रूरत है। हम एग्रोइकोलॉजी जैसी प्रणालियाँ अपना रहे हैं जो मिट्टी को, जल स्रोतों को, और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से जीवित कर रही हैं। हमें बस इतना चाहिए कि दुनिया इस प्रयास को विस्तार देने में साथ दे।”

    COP30 पर केंद्र में रहेगा एडेप्टेशन

    रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ब्राज़ील में होने वाले COP30 जलवायु सम्मेलन में एडेप्टेशन (अनुकूलन) को चर्चा का केंद्र बनाया जा रहा है। सम्मेलन में यह तय होना है कि “ग्लोबल गोल ऑन एडेप्टेशन” को मापने के लिए किन संकेतकों (indicators) का इस्तेमाल होगा, लेकिन अभी तक उसमें छोटे किसानों के लिए फाइनेंस फ्लो को मापने का कोई सूचक नहीं है।

    साथ ही, अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि विकसित देश 2025 तक एडेप्टेशन फाइनेंस को दोगुना कर 38–40 बिलियन डॉलर तक पहुँचाने का वादा पूरा करेंगे या नहीं।

    ब्राज़ील की पहल: किसानों की आवाज़ को मंच देने की कोशिश

    ब्राज़ील की अध्यक्षता में COP30 का Action Agenda एग्रोइकोलॉजी जैसी टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसमें “Circle of Peoples” नामक मंच के ज़रिए किसानों की आवाज़ को सीधे वित्त, नुकसान-भरपाई (loss and damage), और just transition की चर्चाओं में शामिल करने की योजना है।

    एशियाई किसान संघ (AFA) की महासचिव एस्थर पेनुनिया ने कहा, “सरकारों को अब एडेप्टेशन फाइनेंस में बड़ा इज़ाफ़ा करना होगा। सूखा, बाढ़, और लू जैसी आपदाओं से हमारे खेत तबाह हो रहे हैं। अगर वित्त सीधे किसानों और उनकी संगठनों तक पहुँचे, तो असर सबसे तेज़ और गहरा होगा।”

    उन्होंने यह भी कहा कि “Farmers Resiliency Fund” नाम का नया कोष बनाया जाना चाहिए, जिसका संचालन खुद किसान संगठनों के हाथ में हो, ताकि पैसा उन तक पहुँचे जो ज़मीन पर असली काम कर रहे हैं।

    निष्कर्ष

    रिपोर्ट एक सीधा सवाल उठाती है – अगर दुनिया हर साल 470 बिलियन डॉलर हानिकारक सब्सिडियों पर खर्च कर सकती है, तो फिर 443 बिलियन डॉलर छोटे किसानों की जलवायु सुरक्षा के लिए क्यों नहीं?

    आख़िरकार, यही किसान हैं जो धरती की आधी भूख मिटाते हैं, और अब उसी धरती के बदलते मौसम से सबसे पहले और सबसे ज़्यादा लड़ रहे हैं।

  • श्री केदारनाथ धाम के कपाट हुए बंद : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी रहे मौजूद

    श्री केदारनाथ धाम के कपाट हुए बंद : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी रहे मौजूद

    रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज, कार्तिक शुक्ल सप्तमी, अनुराधा नक्षत्र) के पावन अवसर पर प्रातः 08:30 बजे विधिवत रूप से बंद हो गए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे।

    कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर को पुष्पों से भव्य रूप में सजाया गया । सेना के बैंड की भक्ति धुनों और “जय बाबा केदार” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर श्रद्धाभाव से गूंज उठा। ठंडे मौसम के बावजूद लगभग 10 हजार श्रद्धालु कपाट बंद होने की ऐतिहासिक घड़ी के साक्षी बने।

    कपाट बंद करने की प्रक्रिया के अंतर्गत ब्रहममुहूर्त में श्री केदारनाथ धाम के मुख्य पुजारी बागेशलिंग एवं आचार्यगणों द्वारा यज्ञ, हवन एवं समाधि पूजन किया गया। तत्पश्चात भगवान केदारनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को स्थानीय पुष्पों—कुमजा, बुकला, राख, ब्रह्मकमल, सूखे पुष्प-पत्रों से ढककर समाधि रूप दिया गया। इसके बाद गर्भगृह के द्वार जय बाबा केदार के उदघोष के साथ शीतकाल हेतु बंद किए गए।

    कपाट बंद होने के पश्चात मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मंदिर के पूर्वी व दक्षिणी द्वार विधिवत बंद किए गए। इसके उपरांत भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली को मंदिर की परिक्रमा कर प्रथम पड़ाव रामपुर के लिए प्रस्थान कराया गया। सेना के बैंड, डोली वाहकों, पुजारियों और श्रद्धालुओं के जयघोषों से संपूर्ण धाम गुंजायमान हो उठा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर देश-विदेश से आए सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप केदारपुरी का भव्य और दिव्य पुनर्निर्माण कार्य हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के अंतर्गत रिकॉर्ड 50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने धामों के दर्शन किए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कपाट बंद होने के पश्चात शीतकालीन यात्रा को भी राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु चार धामों के शीतकालीन गद्दी स्थलों में भी पूजा अर्चना कर सकें। उन्होंने सभी श्रद्धालुओ से शीतकाल में भी चारों धामों के गद्दी स्थलों में आकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किय। शीतकाल में भी श्रद्धालुओं के यात्रा करने से स्थानीय व्यापारियों, होमस्टे एवं होटल चालकों आदि की आजीविका निरंतर गतिमान रहेगी।

    मुख्यमंत्री ने यात्रा से जुड़े सभी विभागों, सुरक्षा बलों, मंदिर समिति, स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया तथा इस वर्ष की यात्रा को सफल, सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस वर्ष केदारनाथ यात्रा का संचालन अत्यंत सुचारु एवं सफलतापूर्वक हुआ। तथा इस वर्ष कुल 17,68,795 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए, जो पिछले वर्ष 2024 के 16,52,076 तीर्थयात्रियों की तुलना में लगभग सवा लाख अधिक है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान प्राकृतिक आपदा को छोड़कर संपूर्ण यात्रा अवधि में व्यवस्थाएं सुचारु रहीं। शीतकालीन अवधि में भी श्री केदारनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रहेगी और शीतकालीन पूजाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    कपाट बंद होने के पश्चात बाबा केदार की पंचमुखी उत्सव डोली आज प्रस्थान कर प्रथम पड़ाव रामपुर में रात्रि विश्राम हेतु पहुंचेगी।
    कल शुक्रवार, 24 अक्टूबर को डोली श्री विश्वनाथ मंदिर, गुप्तकाशी पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम के पश्चात शनिवार, 25 अक्टूबर को शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करेगी।

    कपाट बंद समारोह के अवसर पर विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, कृषि विपणन बोर्ड अध्यक्ष अनिल डब्बू, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • उत्तराखंड की रजत जयंती पर्व, नई ऊर्जा, नए संकल्प, 03 से 09 नवंबर तक मनाएंगे रजत जयंती सप्ताह,

    उत्तराखंड की रजत जयंती पर्व, नई ऊर्जा, नए संकल्प, 03 से 09 नवंबर तक मनाएंगे रजत जयंती सप्ताह,

    उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के परिपेक्ष्य में पूरे जनपद में 03 से 09 नवंबर तक रजत जयंती सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा। राज्य स्थापना रजत जयंती सप्ताह एवं स्थापना दिवस समारोह की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने रजत जयंती सप्ताह में जिला मुख्यालय सहित ब्लाक एवं तहसीलों में प्रतिदिन आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की समयबद्व तैयारी सुनिश्चित करते हुए जन सहभागिता बढ़ाने के निर्देश दिए।

    जिलाधिकारी ने कहा कि रजत जयंती सप्ताह के अवसर पर नारी शक्ति दिवस, सुशासन दिवस, यूथ स्पोर्ट्स, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन, शहीदों को नमन, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत, रोजगार दिवस, स्वदेशी खाद्य, विकास का सफर आदि महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित प्रतिदिन अलग-अलग थीम के साथ पूरे जनपद में भव्य कार्यक्रम का आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि रजत जयंती सप्ताह पर जिला मुख्यालय सहित तहसील एवं ब्लाक स्तरों पर होने वाले सभी कार्यक्रमों की समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। नारी शक्ति दिवस पर स्वयं सहायता समूह व एनआरएलएम समूह द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाए। सुशासन दिवस पर प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर वृहद बहुउद्देशीय शिविर आयोजित करते हुए आम जनता की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जाए। यूथ दिवस पर क्रॉस कंट्री दौड़, पैराग्लाइडिंग, हॉट बैलून सहित अन्य एडवेंचर स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए। आम जनमानस को बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी देने के लिए आरबीआई की वर्कशॉप आयोजित की जाए। नशामुक्ति, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति वृहद स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें। सभी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आयोजित करते हुए अमर शहीदों के बलिदान एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया जाए। जिलाधिकारी ने शिक्षण संस्थाओं में विजन-2050 विषय पर गोष्ठी, निबंध, पेंटिंग आदि प्रतियोगिताएं आयोजित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, सीएमओ डा. मनोज कुमार शर्मा, जिला पर्यटन अधिकारी बृजेन्द्र पांडेय, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित तमाम जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

  • गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल हेतु विधिविधानपूर्वक हुए बंद

    गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल हेतु विधिविधानपूर्वक हुए बंद

    अन्नकूट उत्सव के पावन अवसर पर आज प्रातः 11:35 बजे विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधि-विधानपूर्वक बंद कर दिये गये। इस दौरान गंगा मैया के जयकारों से पूरा धाम गुंजायमान हो उठा। कपाट बंद होने के उपरांत माँ गंगा की उत्सव डोली भक्तों और पुजारियों के सान्निध्य में शीतकालीन प्रवास हेतु मुखीमठ (मुखवा) गांव के लिए रवाना हुई।

    अब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु माँ गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखीमठ (मुखवा) में कर सकेंगे।

    इस पुण्य अवसर पर गंगोत्री क्षेत्र के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण ने प्रदेश एवं देशवासियों को शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए पतित पावनी माँ भगवती गंगा जी से सभी के आरोग्य, सुख-समृद्धि एवं देश-प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

  • मुख्य सचिव  आनन्द बर्द्धन ने केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज बुधवार को पवित्र केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और धाम परिसर में चल रहे पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यों का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने धाम क्षेत्र में विभिन्न फेज़ों में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और कार्य निष्पादन की समीक्षा की।

    मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी प्रतीक जैन से धाम में चल रहे सभी कार्यों की विस्तृत जानकारी ली, उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, सौंदर्य और धार्मिक आस्था का विशेष ध्यान रखा जाए।उन्होंने कहा कि कल, 23 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं, उन्होंने निर्देश दिए कि कपाट बंद होने के बाद भी धाम क्षेत्र में सुरक्षा, सामग्री संरक्षण और बर्फबारी की स्थिति में कार्यों के रखरखाव को लेकर पूरी तैयारी रखी जाए।मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि अब से ही अगले यात्रा सत्र 2026 की तैयारी प्रारंभ कर दी जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाओं की पूर्व योजना (चतम.चसंददपदह) तैयार की जाए ताकि अगले यात्रा सीजन में यात्रियों को और भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, सुरक्षा, और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर बल दिया।।

    इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मुख्य सचिव को अवगत कराया कि केदारनाथ यात्रा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय और सहयोग से कार्य कर रहे हैं।

    मुख्य सचिव ने धाम क्षेत्र में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि केदारनाथ धाम आज पूरे देश में पुनर्निर्माण और पुनरुत्थान का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ,प्रसासन का लक्ष्य केवल भौतिक निर्माण नहीं, बल्कि आस्था और सुविधा का संतुलित संगम सुनिश्चित करना है, ताकि श्रद्धालुओं को एक पवित्र, सुरक्षित और दिव्य अनुभव प्राप्त हो।

    इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मुख्य कार्याधिकारी मंदिर समिति विजय थपलियाल, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला, अधिशासी अभियंता डी.डी.एम. विनय झिंकवाण तथा ए.आर.टी.ओ. रुद्रप्रयाग धर्मेंद्र सिंह बिष्ट एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।