Category: उत्तराखंड

  • मुख्यमंत्री ने किया 20.89 करोड़ रुपये की लागत से खटीमादृमेलाघाट सड़क पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास

    मुख्यमंत्री ने किया 20.89 करोड़ रुपये की लागत से खटीमादृमेलाघाट सड़क पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को जनपद ऊधम सिंह नगर के खटीमादृमेलाघाट राज्य मार्ग (राज्य मार्ग संख्या 107) के पुनर्निर्माण कार्यों का विधिवत पूजा-अर्चना कर शिलान्यास किया। यह परियोजना ₹2089.74 लाख की लागत से बनाई जाएगी।

    इसके अंतर्गत 11.50 किलोमीटर लंबी सड़क का पुनर्निर्माण, केसी ड्रेनेज सिस्टम, सड़क सुरक्षा कार्य, रोड साइनएज की स्थापना, तथा टीबीएम एवं बीसी द्वारा सुदृढ़ीकरण कार्य शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सड़क केवल खटीमा क्षेत्र के विकास की धुरी नहीं है, बल्कि भारत-नेपाल सीमावर्ती संपर्क का भी महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क के सुधारीकरण से खटीमा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को न केवल सुगम यातायात सुविधा मिलेगी, बल्कि सीमावर्ती व्यापार, पर्यटन और शिक्षा से जुड़े अवसरों को भी नई दिशा मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण कार्यों के साथ-साथ भू-कटाव रोकने और स्थानीय जल निकासी व्यवस्था के सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनी रहे। उन्होंने कहा कि खटीमा अब शिक्षा का हब बन चुका है, जहाँ से प्रदेश ही नहीं बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थी भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का हर क्षेत्र सुगम, सशक्त और समृद्ध बने। विकास की हर परियोजना जनता के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। खटीमादृमेलाघाट सड़क परियोजना भी इसी दृष्टि से एक मील का पत्थर साबित होगी।

    उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “कनेक्टिविटी ही विकास की रीढ़” के संकल्प को आगे बढ़ा रही है। इसी भावना के अनुरूप राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में सड़कों का विस्तार और आधुनिकीकरण तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने सड़कों को गढ्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को आगामी दीपावली और अन्य त्योहारों की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पर्वों के अवसर पर राज्य की सुरक्षा, सौहार्द और स्वच्छता बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दायित्वधारी फरजाना बेगम, अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • उत्तराखंड खनन सुधारों में अग्रणी : खनन मंत्रालय ने जारी किया राज्य खनन तत्परता सूचकांक

    उत्तराखंड खनन सुधारों में अग्रणी : खनन मंत्रालय ने जारी किया राज्य खनन तत्परता सूचकांक

    खनन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गुरुवार को जारी राज्य खनन तत्परता सूचकांक (State Mining Readiness Index – SMRI) में उत्तराखंड ने ‘सी’ कैटेगरी में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि राज्य सरकार के खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता, सतत विकास और तकनीकी उन्नयन के प्रति किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।

    केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा के अनुरूप तैयार किया गया यह सूचकांक देश के विभिन्न राज्यों का मूल्यांकन खनन सुधारों, नीतिगत पारदर्शिता, पर्यावरणीय संतुलन, खनिज अन्वेषण क्षमता और प्रशासनिक दक्षता जैसे अनेक मापदंडों के आधार पर करता है।

    इस सूचकांक में मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को ‘ए’ कैटेगरी में, गोवा, उत्तर प्रदेश और असम को ‘बी’ कैटेगरी में तथा उत्तराखंड को पंजाब और त्रिपुरा के साथ ‘सी’ कैटेगरी में अग्रणी स्थान प्रदान किया गया है।

    खनन मंत्रालय के अनुसार, यह सूचकांक राज्यों में खनन क्षेत्र में बेंचमार्किंग और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने का कार्य करेगा, जिससे देशभर में खनन सुधारों की गति और पर्यावरण-अनुकूल नीतियों के क्रियान्वयन को और बल मिलेगा।

    उत्तराखंड के खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार
    राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। ई-नीलामी प्रणाली को और अधिक सशक्त किया गया है, जिससे खनन पट्टों के आवंटन में पारदर्शिता आई है। खनन से संबंधित प्रक्रियाओं को डिजिटाइज कर जनता और उद्यमियों के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाया गया है।

    अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। खनिज परिवहन के लिए ई-रवन्ना प्रणाली को सख्ती से लागू कर राजस्व हानि पर प्रभावी रोक लगाई गई है। पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेस को अपनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उपलब्धि उत्तराखंड सरकार के सशक्त शासन मॉडल, पारदर्शी नीतियों और जन केंद्रित दृष्टिकोण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए खनन क्षेत्र को सतत विकास की दिशा में अग्रसर करना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने खनन क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता को समाप्त करते हुए एक उत्तरदायी और आधुनिक प्रणाली विकसित की है। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका संवेदनशील प्रबंधन ही हमारी प्राथमिकता है।”

    उन्होंने खनन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि टीम उत्तराखंड के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के राजस्व वृद्धि के संदर्भ में विशेष रूप से खनन विभाग ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य के खनन राजस्व में हुई 800 करोड़ की अप्रत्याशित बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार की नवीन खनन नीति प्रभावी, पारदर्शी और सशक्त रूप से लागू की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के प्रतिनिधि व अधिकारी भी उत्तराखण्ड आकर खनन क्षेत्र में क्रियान्वित मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं तथा यहाँ की नीतियों और व्यवस्थाओं को अपने-अपने राज्यों में लागू करने के प्रयास कर रहे हैं।

    खनन विभाग ने बताया कि राज्य में खनन क्षेत्र के समुचित नियमन, सतत निगरानी और स्थानीय जनहितों की सुरक्षा के लिए ठोस कार्ययोजनाएं लागू की जा रही हैं। भविष्य में खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक दोहन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन को और मज़बूती प्रदान की जाएगी। उत्तराखंड सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में खनन क्षेत्र में पारदर्शी प्रक्रियाओं, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के लिए देश में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित हो।

  • उत्तराखण्ङ में पीएमश्री योजना की तर्ज पर बनेगी स्कूलों के लिए योजनाः मुख्य सचिव

    उत्तराखण्ङ में पीएमश्री योजना की तर्ज पर बनेगी स्कूलों के लिए योजनाः मुख्य सचिव

    देहरादून: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में पीएमश्री और लखपति दीदी योजना की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ङ में भी पीएमश्री योजना की तर्ज पर स्कूलों के आधुनिकीकरण के लिए योजना संचालित की जाए।

    मुख्य सचिव ने कहा कि पीएमश्री योजना के तहत् स्कूलों को 5 वर्षों तक 40 – 40 लाख की धनराशि (कुल 2 करोड़ रुपए) उपलब्ध कराई जाती है, जिससे स्कूलों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय एवं खेल सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती हैं।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीएमश्री योजना की तर्ज पर प्रदेश में भी योजना संचालित की जाए जिससे स्कूलों में बच्चों के पठन पाठन के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सकें। इससे प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशालाएं एवं पुस्तकालय आदि से संतृप्त किए जाने में तेजी आएगी। उन्होंने क्लस्टर विद्यालयों से इसकी शुरूआत किए जाने की बात कही।

    स्वयं सहायता समूहों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम किए जाएं संचालित

    मुख्य सचिव ने लखपति दीदी योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के और अधिक कारगर बनाए जाने एवं स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों में तकनीक के अधिकतम उपयोग से गुणवत्ता सुधार के लिए लगातार क्षमता विकास कार्यक्रम संचालित किए जाने के निर्देश दिए हैं। लखपति दीदी योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

    उन्होंने कहा कि लखपति दीदी योजना के अंतर्गत राज्य स्तरीय संचालन समिति और राज्य स्तरीय निगरानी समिति का गठन शीघ्र कर इनकी निरन्तर बैठकें आयोजित की जाएं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, ई-कॉमर्स प्लेटफार्म, रिटेल चेन आदि पर अधिक से अधिक फोकस किया जाए। उन्होंने उत्पादों को हाऊस ऑॅफ हिमालयाज में भी शामिल किए जाने की बात कही।

    इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव विजय कुमार जोगदण्डे, मेहरबान सिंह बिष्ट एवं सुश्री झरना कामठान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • एम्स, ऋषिकेश के तत्वावधान में “एक पेड़ मां के नाम” थीम पर एक सार्थक पौधरोपण अभियान का आयोजन

    एम्स, ऋषिकेश के तत्वावधान में “एक पेड़ मां के नाम” थीम पर एक सार्थक पौधरोपण अभियान का आयोजन

    विशेष 5.0 अभियान के अंतर्गत एम्स, ऋषिकेश के तत्वावधान में “एक पेड़ मां के नाम” थीम पर एक सार्थक पौधरोपण अभियान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान संस्थान की निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. जया चतुर्वेदी और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्याश्री ने संस्थान के बी व सी ब्लॉक (रोगी कैंटीन के समीपवर्ती बाहरी क्षेत्र) में औषधीय गुणों और आध्यात्मिक महत्व के पौधों का रोपण किया।

    बताया गया कि रोपे गए विभिन्न प्रजातियों के औषधीय व धार्मिक महत्व के पौधे माताओं के प्रति एक जीवंत श्रद्धांजलि और एक हरित, स्वच्छ भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।

    कहा गया कि यह पौधरोपण अभियान न केवल एम्स संस्थान परिसर के हरित आवरण को बढ़ाने में योगदान देता है, बल्कि स्वच्छता, स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के अभियान के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप भी है।

    यह अभियान एक सहयोगात्मक प्रयास है, जो पूरे भारत में नागरिकों को पेड़ लगाने और उन्हें प्रकृति से जोड़ने, सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और पर्यावरण की देखभाल के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है। लिहाजा धरा को हरियाली से आच्छादित करने व पर्यावरण संवर्धन की इस पहल में अपनी भूमिका सुनिश्चित कर एम्स संस्थान पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरणीय वातावरण मुहैया कराने को अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
    इस अवसर पर अभियान में प्रोफेसर (डॉ.) राजिंदर सिंह, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर पूजा भदौरिया,सी.एन.ओ डॉ. अनीता रानी कंसल, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर ले. कर्नल राजेश जुयाल सहित अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने विशेष रूप से शिरकत की ।

  • मुख्यमंत्री ने खटीमा में किया 215 फीट ऊँचे तिरंगे का लोकार्पण

    मुख्यमंत्री ने खटीमा में किया 215 फीट ऊँचे तिरंगे का लोकार्पण

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कंजाबाग तिराहा खटीमा में मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत कार्यदायी संस्था लघु सिंचाई विभाग द्वारा 47.42 लाख की लागत से स्थापित किए गए 215 फीट ऊँचे राष्ट्रीय ध्वज का विधिवत पूजा अर्चना कर फीता काटकर व ध्वजारोहण कर लोकार्पण किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राष्ट्रीय ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि हमारे देश की एकता, अखंडता और शौर्य का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज यहां खड़ा होगा और हर नागरिक को देशभक्ति की भावना से प्रेरित करेगा।

    इस अवसर पर लघु सिंचाई विभाग द्वारा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु सोलर प्रदर्शनी भी लगाकर किसानों व जनता को योजना की विस्तृत जानकारियां भी दी गई।

    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दर्जामंत्री फरजाना बेगम, अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, मोहनी पोखरिया, किशन सिंह (किन्ना), जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, उपाध्यक्ष जिला विकास प्राधिकरण जय किशन, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, मुख्य चिकित्साधिकारी के के अग्रवाल, अधिशासी अभियंता लघु सिंचाई विभाग सुशील कुमार एवं जनप्रतिनिधि व जनता मौजूद थी।

  • “महिलाओं की भागीदारी से ही ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का सपना साकार होगा: मुख्यमंत्री

    “महिलाओं की भागीदारी से ही ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का सपना साकार होगा: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को टनकपुर के छीनीगोठ में आयोजित “मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव” में प्रतिभाग कर महिलाओं के आत्मविश्वास, उद्यमशीलता और पारंपरिक कौशल का उत्सव मनाया।

    कार्यक्रम में पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बेटियों के उत्साह को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “महिलाओं की भागीदारी से ही ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का सपना साकार होगा। राज्य सरकार महिलाओं को केवल सहयोग नहीं दे रही, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

    मुख्यमंत्री धामी ने उत्सव स्थल पर लगे विभिन्न लाइव स्टालों का अवलोकन किया और महिलाओं के श्रम व कौशल को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया। उन्होंने न केवल प्रदर्शनी देखी, बल्कि महिलाओं की गतिविधियों में स्वयं भाग लेकर उन्हें प्रेरित किया।

    मुख्यमंत्री धामी ने एक स्टाल पर जाकर महिलाओं के साथ पारंपरिक तरीके से मट्ठा बनाने की प्रक्रिया में भाग लिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खाद्य पदार्थ हमारी संस्कृति और स्वास्थ्य दोनों से जुड़े हैं, इन्हें आधुनिक रूप में बाजार से जोड़ना समय की मांग है।

    इलेक्ट्रिक कार्यों में संलग्न महिलाओं के स्टाल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ दीपावली की लाइटों की सोल्डरिंग करते हुए “लोकल फॉर वोकल” के मंत्र को साकार रूप दिया। उन्होंने कहा कि “महिलाएँ अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और उद्यमी बन रही हैं कृ यही आत्मनिर्भर भारत की असली तस्वीर है।” मुख्यमंत्री ने दीपावली पर महिलाओं द्वारा निर्मित अधिक से अधिक उत्पाद खरीदने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कृषि आधारित गतिविधियों की सराहना करते हुए महिलाओं के साथ ओखल में धान कूटने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ और हस्तनिर्मित खाद्य पदार्थ आज स्वास्थ्य, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ रहे हैं। उन्होंने इस दिशा में महिलाओं के योगदान को प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया और महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड के हर जिले में ऐसे उत्सवों के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को मार्केट लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘महालक्ष्मी किट’ का वितरण लाभार्थी महिलाओं को किया। इसके पश्चात् उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से बाल भोग खिलाया और उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हर बच्चा स्वस्थ और शिक्षित हो कृ यही सशक्त समाज की पहली शर्त है।” उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे जमीनी स्तर पर पोषण अभियान और प्रारंभिक शिक्षा को सफल बनाने की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

    महिलाओं द्वारा संचालित लौह उद्योग स्टाल पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने स्वयं चरखा चलाया, भट्टी गर्म की और लौह उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भी महिलाओं की तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला समूहों को सामूहिक उद्यमों, उत्पाद निर्माण, परिवहन सेवाओं और हस्तशिल्प क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए हर संभव वित्तीय, तकनीकी और विपणन सहयोग प्रदान कर रही है।

    उन्होंने कहा कि “महिलाओं के सशक्तिकरण से ही राज्य सशक्त होगा। जब बहनें आत्मनिर्भर होंगी, तभी उत्तराखण्ड आत्मनिर्भर बनेगा।”

    धामी ने कहा “नारी तू शक्ति है, नारी तू सृष्टि की मुस्कान है; जब नारी सशक्त होगी, तभी उत्तराखण्ड समृद्ध होगा।” उन्होंने सभी लोगों को दीपावली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “महिलाएँ लक्ष्मी स्वरूपा हैं, उनके सशक्त होने से परिवार, समाज और राष्ट्र सब सशक्त होते हैं।”

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी तू नारायणी’ मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मातृशक्ति के कल्याण हेतु निरंतर कार्यरत हैं। उज्ज्वला, जन धन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, बेटी बचाओदृबेटी पढ़ाओ तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी योजनाओं से महिलाओं को सशक्त बनाया गया है।

    उन्होंने कहा प्रदेश में लगभग 70 हजार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 5 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़ी हैं, जिनमें 1.65 लाख ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू कर चुकी है तथा समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का ऐतिहासिक कार्य किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं, माताओं और बहनों के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए पूर्णतः समर्पित है। उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे ‘लोकल फॉर वोकल’ के मंत्र को जन आंदोलन बनाकर आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण में सहभागी बनें।

    कार्यक्रम में दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत, प्रदेश महामंत्री मुकेश कलखुड़िया, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिला पंचायत सदस्य सरस्वती चंद, नगर पालिका अध्यक्ष चंपावत प्रेमा पांडे, टनकपुर नगर पालिका अध्यक्ष विपिन कुमार, बनबसा नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा देवी, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ० जी एस खाती सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, गणमान्य नागरिक व हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

  • “महिलाओं की भागीदारी से ही ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का सपना साकार होगा: मुख्यमंत्री

    “महिलाओं की भागीदारी से ही ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का सपना साकार होगा: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को टनकपुर के छीनीगोठ में आयोजित “मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव” में प्रतिभाग कर महिलाओं के आत्मविश्वास, उद्यमशीलता और पारंपरिक कौशल का उत्सव मनाया।

    कार्यक्रम में पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बेटियों के उत्साह को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “महिलाओं की भागीदारी से ही ‘विकसित उत्तराखण्ड’ का सपना साकार होगा। राज्य सरकार महिलाओं को केवल सहयोग नहीं दे रही, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

    मुख्यमंत्री धामी ने उत्सव स्थल पर लगे विभिन्न लाइव स्टालों का अवलोकन किया और महिलाओं के श्रम व कौशल को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया। उन्होंने न केवल प्रदर्शनी देखी, बल्कि महिलाओं की गतिविधियों में स्वयं भाग लेकर उन्हें प्रेरित किया।

    मुख्यमंत्री धामी ने एक स्टाल पर जाकर महिलाओं के साथ पारंपरिक तरीके से मट्ठा बनाने की प्रक्रिया में भाग लिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खाद्य पदार्थ हमारी संस्कृति और स्वास्थ्य दोनों से जुड़े हैं, इन्हें आधुनिक रूप में बाजार से जोड़ना समय की मांग है।

    इलेक्ट्रिक कार्यों में संलग्न महिलाओं के स्टाल पर पहुंचकर मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ दीपावली की लाइटों की सोल्डरिंग करते हुए “लोकल फॉर वोकल” के मंत्र को साकार रूप दिया। उन्होंने कहा कि “महिलाएँ अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि उत्पादक और उद्यमी बन रही हैं कृ यही आत्मनिर्भर भारत की असली तस्वीर है।” मुख्यमंत्री ने दीपावली पर महिलाओं द्वारा निर्मित अधिक से अधिक उत्पाद खरीदने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कृषि आधारित गतिविधियों की सराहना करते हुए महिलाओं के साथ ओखल में धान कूटने की प्रक्रिया में भी सहयोग किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ और हस्तनिर्मित खाद्य पदार्थ आज स्वास्थ्य, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ रहे हैं। उन्होंने इस दिशा में महिलाओं के योगदान को प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया और महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तराखण्ड के हर जिले में ऐसे उत्सवों के माध्यम से महिलाओं के उत्पादों को मार्केट लिंक उपलब्ध कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘महालक्ष्मी किट’ का वितरण लाभार्थी महिलाओं को किया। इसके पश्चात् उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से बाल भोग खिलाया और उनसे आत्मीय बातचीत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हर बच्चा स्वस्थ और शिक्षित हो कृ यही सशक्त समाज की पहली शर्त है।” उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे जमीनी स्तर पर पोषण अभियान और प्रारंभिक शिक्षा को सफल बनाने की सबसे मजबूत कड़ी हैं।

    महिलाओं द्वारा संचालित लौह उद्योग स्टाल पर मुख्यमंत्री श्री धामी ने स्वयं चरखा चलाया, भट्टी गर्म की और लौह उत्पाद निर्माण की प्रक्रिया में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भी महिलाओं की तकनीकी दक्षता और आत्मनिर्भरता का उदाहरण बन सकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिला समूहों को सामूहिक उद्यमों, उत्पाद निर्माण, परिवहन सेवाओं और हस्तशिल्प क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए हर संभव वित्तीय, तकनीकी और विपणन सहयोग प्रदान कर रही है।

    उन्होंने कहा कि “महिलाओं के सशक्तिकरण से ही राज्य सशक्त होगा। जब बहनें आत्मनिर्भर होंगी, तभी उत्तराखण्ड आत्मनिर्भर बनेगा।”

    धामी ने कहा “नारी तू शक्ति है, नारी तू सृष्टि की मुस्कान है; जब नारी सशक्त होगी, तभी उत्तराखण्ड समृद्ध होगा।” उन्होंने सभी लोगों को दीपावली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि “महिलाएँ लक्ष्मी स्वरूपा हैं, उनके सशक्त होने से परिवार, समाज और राष्ट्र सब सशक्त होते हैं।”

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी तू नारायणी’ मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मातृशक्ति के कल्याण हेतु निरंतर कार्यरत हैं। उज्ज्वला, जन धन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, बेटी बचाओदृबेटी पढ़ाओ तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसी योजनाओं से महिलाओं को सशक्त बनाया गया है।

    उन्होंने कहा प्रदेश में लगभग 70 हजार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 5 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़ी हैं, जिनमें 1.65 लाख ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू कर चुकी है तथा समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का ऐतिहासिक कार्य किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं, माताओं और बहनों के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए पूर्णतः समर्पित है। उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे ‘लोकल फॉर वोकल’ के मंत्र को जन आंदोलन बनाकर आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के निर्माण में सहभागी बनें।

    कार्यक्रम में दर्जा राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडे, जिला अध्यक्ष गोविंद सामंत, प्रदेश महामंत्री मुकेश कलखुड़िया, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद अधिकारी, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिला पंचायत सदस्य सरस्वती चंद, नगर पालिका अध्यक्ष चंपावत प्रेमा पांडे, टनकपुर नगर पालिका अध्यक्ष विपिन कुमार, बनबसा नगर पंचायत अध्यक्ष रेखा देवी, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ० जी एस खाती सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, गणमान्य नागरिक व हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

  • महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम — आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी कार्यक्रम की दो लाभार्थी महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

    महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम — आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी कार्यक्रम की दो लाभार्थी महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

    महिला सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम — आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी कार्यक्रम की दो लाभार्थी महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल

    यह बताते हुए अत्यंत हर्ष का विषय है कि आईटीसी मिशन सुनहरा कल के टीएचपी (Targeting the Hardcore Poor) कार्यक्रम के अंतर्गत दो परिश्रमी एवं जुझारू महिलाएँ — श्रीमती पिंकी, धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की सदस्य, तथा श्रीमती रूबी, सरस्वती स्वयं सहायता समूह की सदस्य — आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं।

    दोनों समूह श्रीराम ग्राम संगठन से संबद्ध हैं, जो आगे स्वागत साहित्य सहकारिता से जुड़ा हुआ है। वर्षों से ये महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपने परिवारों के आर्थिक उत्थान के लिए कार्यरत रही हैं। अब इनकी यह निरंतर साधना श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सहयोग से एक नई दिशा प्राप्त कर रही है।

    ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत दोनों महिलाओं को अल्ट्रा पुअर पैकेज के रूप में ₹35,000 प्रति महिला, अर्थात कुल ₹70,000 की राशि प्रदान की गई है। यह राशि उन्हें लघु उद्यम आरंभ करने एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से दी गई है। इस वित्तीय सहायता से श्रीमती पिंकी एवं श्रीमती रूबी अब स्वयं का छोटा व्यवसाय प्रारंभ कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने के मार्ग पर अग्रसर होंगी।

    इस अवसर पर आयोजित एक सादे परंतु गरिमामय कार्यक्रम में स्वागत समूह की अध्यक्षा श्रीमती विमल जोशी ने दोनों महिलाओं को चेक के माध्यम से यह धनराशि प्रदान की। कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिनिधियों ने दोनों लाभार्थियों के आत्मविश्वास एवं प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    डॉ. पंत, आईटीसी मिशन सुनहरा कल के परियोजना प्रबंधक ने कहा कि —

    “यह पहल न केवल आर्थिक सहायता का वितरण है, बल्कि यह उन महिलाओं में आत्मविश्वास का संचार है जो कभी समाज के हाशिए पर थीं। आज वे अपने श्रम और संकल्प से आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार कर रही हैं।”

    श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम की ओर से यह भी बताया गया कि टीएचपी कार्यक्रम के अंतर्गत ऐसी कई महिलाएँ धीरे-धीरे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। उन्हें उद्यमिता प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता और बाज़ार से जुड़ाव जैसे आवश्यक सहयोग भी प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय को टिकाऊ बना सकें।

    यह पहल वास्तव में महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण पुनर्जागरण की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है — जो इस तथ्य को पुष्ट करती है कि जब नारी को अवसर और मार्गदर्शन मिलता है, तो वह न केवल अपने जीवन को, बल्कि पूरे समाज को समृद्ध बना सकती है।

  • कार्बन बॉर्डर टैक्स: भारत के लिए राहत के संकेत, पर अनिश्चितता बरकरार

    कार्बन बॉर्डर टैक्स: भारत के लिए राहत के संकेत, पर अनिश्चितता बरकरार

    यूरोपीय संघ (EU) के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म (CBAM) को लेकर भारत और यूरोप के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच, एक नई स्टडी ने तस्वीर का एक संतुलित पक्ष दिखाया है।

    ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक Sandbag की नई रिपोर्ट के अनुसार, CBAM के शुरुआती चरण में भारतीय निर्यातकों पर पड़ने वाला वित्तीय असर “काफी सीमित” रहने की संभावना है।
    रिपोर्ट का कहना है कि शुरुआती स्थितियों में EU में भारतीय वस्तुओं के आयातकों को कुल व्यापार मूल्य का लगभग 2.6%, यानी 826 मिलियन यूरो (लगभग ₹7,400 करोड़) का अतिरिक्त लागत भार झेलना पड़ सकता है।

    CBAM क्या है और क्यों विवाद में है
    CBAM, जो जनवरी 2026 से पूरी तरह लागू होगा, यूरोपीय उद्योगों को “कार्बन लीकेज” से बचाने के लिए बनाया गया है।
    इस व्यवस्था के तहत, EU में आयात की जाने वाली कार्बन-गहन वस्तुओं – जैसे स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, फर्टिलाइज़र, बिजली और हाइड्रोजन – पर कार्बन उत्सर्जन के हिसाब से शुल्क लगाया जाएगा।

    EU का तर्क है कि यह “लेवल प्लेइंग फील्ड” बनाता है, ताकि यूरोपीय उद्योगों को उन देशों से अनुचित प्रतिस्पर्धा न झेलनी पड़े, जहाँ जलवायु नियम कम सख्त हैं।
    लेकिन भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील जैसे देशों ने इसे एक “जलवायु के नाम पर व्यापार बाधा” बताया है।

    भारत ने CBAM का लगातार विरोध किया है।
    केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पहले कहा था कि यह “फेयर प्ले की कसौटी पर खरा नहीं उतरता” और इसके खिलाफ “उचित प्रतिक्रिया” देने की बात कही थी।

    भारत की तैयारी: अब आलोचना से सहयोग की ओर?
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रुख अब कुछ बदलता हुआ दिख रहा है।
    हाल ही में EU और भारत के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत
    भारत की प्रस्तावित कार्बन ट्रेडिंग स्कीम को EU द्वारा मान्यता दी गई है।

    इसका अर्थ यह है कि भविष्य में जब CBAM लागू होगा,
    तो भारतीय कंपनियाँ अपने उत्पादों पर पहले से चुकाए गए घरेलू कार्बन क्रेडिट की राशि को CBAM शुल्क से घटा सकेंगी।
    यानी, CBAM का राजस्व सीधे EU को जाने के बजाय भारत में ही रहेगा, जिससे घरेलू उद्योग पर दबाव कुछ कम होगा।

    Sandbag के विश्लेषण के अनुसार, अगर भारत की कार्बन ट्रेडिंग स्कीम EU के आंतरिक कार्बन मूल्य का केवल 25% भी हासिल कर लेती है, तो CBAM का कुल प्रभाव 42% घटकर 480 मिलियन यूरो (करीब ₹4,300 करोड़) रह जाएगा, जो कि EU–भारत वस्तु व्यापार का केवल 1.5% होगा।

    भारत के लिए सबसे बड़ा असर स्टील सेक्टर पर
    भारत की स्टील इंडस्ट्री, जो देश के कुल उत्सर्जन में बड़ी हिस्सेदारी रखती है, CBAM से सबसे ज़्यादा प्रभावित होगी।
    वर्तमान में भारत के लगभग दो-तिहाई स्टील निर्यात यूरोप को जाते हैं।
    CBAM के लागू होने के बाद, इन निर्यातकों को अपने उत्पादों के कार्बन फुटप्रिंट का प्रमाण देना होगा।

    हालांकि, भारत अपनी ओर से उत्सर्जन कम करने के लिए
    ट्रिपल रिन्यूएबल कैपेसिटी (तीन गुना अक्षय ऊर्जा क्षमता) 2030 तक बढ़ाने और राष्ट्रीय कार्बन मार्केट शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।
    इन कदमों से भविष्य में भारतीय उद्योगों को वैश्विक कार्बन मूल्य प्रणालियों के अनुरूप ढालने में मदद मिलेगी।

    CBAM सिम्युलेटर: नीति और उद्योग के लिए नया उपकरण
    Sandbag ने इस रिपोर्ट के साथ ही अपना नया CBAM सिम्युलेटर लॉन्च किया है – एक ऐसा सार्वजनिक टूल जो नीति-निर्माताओं, व्यवसायों और नागरिक समाज को यह समझने में मदद करेगा कि अलग-अलग देशों या सेक्टरों पर CBAM का कितना असर पड़ेगा।

    यह सिम्युलेटर यह भी दिखाता है कि अगर किसी देश की घरेलू कार्बन कीमत बढ़ती या घटती है, या CBAM का दायरा बढ़ाया जाता है, तो व्यापारिक लागत और उत्सर्जन पर क्या प्रभाव होगा।

    पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ
    CBAM, EU – भारत मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत में एक प्रमुख विवाद का बिंदु बना हुआ है।
    भारत का मानना है कि विकसित देशों को, जो ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़े उत्सर्जक रहे हैं,
    जलवायु परिवर्तन से निपटने की ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।

    EU का कहना है कि CBAM का मकसद विकासशील देशों को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन को न्यायसंगत तरीके से कम करना है।

    रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत और EU के बीच अब “विरोध से संवाद” की दिशा में बदलाव दिख रहा है,
    जहाँ भारत अपनी घरेलू नीति को अंतरराष्ट्रीय जलवायु नियमों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

    आगे का रास्ता
    Sandbag की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती असर भले ही सीमित हो, पर यह नीति आने वाले वर्षों में भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर और नई जिम्मेदारियाँ दोनों लेकर आएगी।

    EU और भारत के बीच Free Trade Agreement पर चल रही बातचीत में CBAM अब सिर्फ़ विवाद का विषय नहीं, बल्कि एक संवाद का फ्रेमवर्क बनता जा रहा है —
    जहाँ जलवायु, व्यापार और न्याय तीनों की कसौटी एक साथ रखी जा रही है।

  • प्रदेशभर में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी

    प्रदेशभर में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी

    त्योहारी बाजारों में मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच उत्तराखंड सरकार ने मिलावटखोरों पर सख्ती की रणनीति अपना ली है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में चलाया जा रहा यह व्यापक अभियान न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि मिलावट के कारोबार में लिप्त लोगों को स्पष्ट संदेश दे रहा है “मिलावट पर जीरो टॉलरेंस।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सख्त निर्देशों पर प्रदेशभर में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।

    सचिव स्वास्थ्य व आयुक्त खाघ संरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार के आदेश और अपर आयुक्त खाद्य सुरक्षा ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में राज्यभर में लगातार छापेमारी की जा रही है। सीमाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि बाहरी राज्यों से मिलावटी मावा और मिठाइयाँ उत्तराखंड में प्रवेश न कर सकें।

    सचिव स्वास्थ्य व आयुक्त खाद्य संरक्षा व औषधि प्रशासन विभाग ने बताया कि दीपावली तक पूरे प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स की तर्ज पर निगरानी दल गठित किए गए हैं। जिन क्षेत्रों से मिलावट की शिकायतें मिल रही हैं, वहां सरप्राइज चेकिंग की जा रही है।

    प्रत्येक जिले से रोजाना रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी, ताकि आवश्यकतानुसार अभियान की तीव्रता और जांच के दायरे को और बढ़ाया जा सके। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि सस्ती मिठाइयों और खुले मावे से बचें, और मिठाई खरीदते समय ब्रांड, पैकिंग और एक्सपायरी डेट अवश्य जांचें।

    देहरादून में व्यापक निरीक्षण अभियान
    दीपावली से पहले जनपद देहरादून में भी खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने मिठाई और दुग्ध उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा मनीष सयाना के नेतृत्व में टीमों ने हर्रावाला, मोहकमपुर, हरिद्वार रोड और सहसपुर क्षेत्र में छापेमारी की।

    निरीक्षण के दौरान कलाकंद, घी और दूध उत्पादों के कुल 10 नमूने जांच हेतु लिए गए जिन्हें खाद्य विश्लेषण शाला भेज दिया गया है। इस अभियान में वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश सिंह (नगर निगम क्षेत्र), संजय तिवारी (विकासनगर) और कपिल देव (मसूरी) सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। विभाग ने साफ किया कि आगामी दिनों में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    अमानतगढ़ में बड़ी कार्रवाई: 10 क्विंटल मावा जब्त
    दीपावली से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने थाना बुग्गावाला क्षेत्र स्थित पुलिस चौकी अमानतगढ़ में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने महिंद्रा एसयूवी-500 वाहन (मुज़फ्फरनगर से देहरादून की ओर) को रोककर तलाशी ली, जिसमें लगभग 900 किलो (10 क्विंटल) मावा बरामद किया गया।

    मावा में मिलावट की आशंका के चलते नमूने संग्रह कर रुद्रपुर प्रयोगशाला भेजे गए हैं। वाहन चालक आरिफ पुत्र मोहम्मद नईम और मावा के मालिक छुट्टन लाल प्रमोद कुमार, निवासी मुज़फ्फरनगर से पूछताछ की जा रही है। मावा देहरादून के हनुमान चौक क्षेत्र में सप्लाई किया जाना था। इस कार्रवाई में टीम उपायुक्त FDA गढ़वाल आर.एस. रावत, सहायक आयुक्त FDA हरिद्वार एम.एन. जोशी, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन, तथा अमानतगढ़ पुलिस टीम शामिल रही। विभाग ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    रुड़की में बिना तापमान नियंत्रण के मावा सप्लाई पकड़ा गया
    इसी क्रम में, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं मानक नियंत्रण विभाग की एक अन्य टीम ने रुड़की क्षेत्र में भी बड़ी कार्रवाई की। वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी महिमानंद जोशी के नेतृत्व में टीम ने दिल्ली से आ रहे एक वाहन (मारुति SUV, नंबर DL10CT0544) को रोका।

    वाहन की जांच में लगभग 10 लीटर मावा बरामद हुआ, जिसकी कीमत करीब ₹55,000 आंकी गई। वाहन में न तो तापमान नियंत्रण प्रणाली थी और न ही मावा के परिवहन का लाइसेंस। जांच में यह मावा अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में तैयार किया गया पाया गया। टीम ने मौके से नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। वाहन से प्लास्टिक के कट्टे और पॉलीथीन बैग भी मिले, जो खाद्य भंडारण के लिए प्रतिबंधित हैं। बरामद मावा को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
    राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। दीपावली जैसे त्योहारों पर मिलावटखोरों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई है और हर जिले में निरीक्षण टीमों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान
    त्योहारी सीजन में दूध, मावा और मिठाई जैसे उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावट की आशंका अधिक होती है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध सामग्री या प्रतिष्ठान पर तुरंत कार्रवाई करें। आम जनता से भी अपील है कि वे संदिग्ध खाद्य वस्तुओं की सूचना तुरंत दें।

    स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
    प्रदेशभर में विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। सीमाओं, मंडियों और शहरी क्षेत्रों में गहन निरीक्षण हो रहा है। जो भी व्यक्ति या व्यापारी खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ एफएसएसएआई एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मावा, मिठाई, तेल और घी की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रतिदिन अभियान चलाएं। सीमावर्ती जनपदों—देहरादून हरिद्वार, उधमसिंहनगर,और नैनीताल में विशेष निगरानी रखी जा रही है।