Category: उत्तराखंड

  • राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने रजतोत्सव के क्रम में विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने रजतोत्सव के क्रम में विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य स्थापना, रजतोत्सव के अवसर पर आयोजित, उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया।

    राष्ट्रपति ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए उत्तराखंड विधान सभा के पूर्व और वर्तमान सदस्यों तथा सभी राज्यवासियों को बधाई देते हुए कहा कि, श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में, यहां के जनमानस की आकांक्षा के अनुरूप, बेहतर प्रशासन और संतुलित विकास की दृष्टि से, नवंबर, 2000 में इस राज्य की स्थापना की गई। विगत पचीस वर्षों की यात्रा के दौरान उत्तराखंड के लोगों ने विकास के प्रभावशाली लक्ष्य हासिल किए हैं। पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, स्वास्थ्य-सेवा और शिक्षा के क्षेत्रों में राज्य ने सराहनीय प्रगति की है। इसी तरह डिजिटल और फिजिकल कनेक्टिविटी तथा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलमेंट के क्षेत्रों में भी विकास हुआ है।
    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि विकास के समग्र प्रयासों के बल पर राज्य में मानव विकास सूचकांक के मानकों पर सुधार हुआ है। राज्य में साक्षरता बढ़ी है, महिलाओं की शिक्षा में विस्तार हुआ है, मातृ एवं शिशु-मृत्यु-दर में कमी आई है, राज्य में स्वास्थ्य- सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    राष्ट्रपति ने राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विशेष सराहना करते हुए कहा कि, इससे राज्य में सुशीला बलूनी, बछेन्द्री पाल, गौरा देवी, राधा भट्ट और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी। इसी तरह श्रीमती ऋतु खंडूरी भूषण को राज्य की पहली महिला विधान सभा अध्यक्ष नियुक्त करके उत्तराखंड विधान सभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा वे सभी हितधारकों के सक्रिय प्रयास से उत्तराखंड विधान सभा में महिलाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी होते देखना चाहेंगी।

    राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की इस देव-भूमि से अध्यात्म और शौर्य की परम्पराएं प्रवाहित होती रही हैं। कुमांऊ रेजीमेंट और गढ़वाल रेजीमेंट के नाम से ही यहां की शौर्य परंपरा का परिचय मिलता है। यहां के युवाओं में भारतीय सेना के जरिए मातृ-भूमि की रक्षा करने के प्रति उत्साह दिखाई देता है। उत्तराखंड की यह शौर्य परंपरा सभी देशवासियों के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतान्त्रिक परंपरा को शक्ति प्रदान करने में भी उत्तराखंड के अनेक जन-सेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने ’नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता’ के निर्माण के लिए संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत प्रावधान किया था। संविधान निर्माताओं की इसी भावना के अनुरूप अब उत्तराखंड विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक लागू कर दिया है, जिसकी वो सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधान सभा में 550 से अधिक विधेयक पारित किए गए हैं। उन विधेयकों में उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक, उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था विधेयक तथा नकल विरोधी विधेयक शामिल हैं। इससे पारदर्शिता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की भावना मजबूत हुई है।
    राष्ट्रपति ने कहा कि विधान सभाएं हमारी संसदीय प्रणाली का प्रमुख स्तम्भ हैं। बाबासाहब अंबेडकर ने कहा था कि संविधान निर्माताओं ने संसदीय प्रणाली को अपनाकर निरंतर उत्तरदायित्व को अधिक महत्व दिया था। जनता के प्रति निरंतर उत्तरदाई बने रहना संसदीय प्रणाली की शक्ति भी है और चुनौती भी। विधायक-गण, जनता और शासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जमीनी स्तर पर क्षेत्र की जनता से जुड़कर उनकी सेवा करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है।

    राष्ट्रपति ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक विधायक के रूप उन्हें भी नौ वर्ष जन-सेवा का अवसर मिला है। इसलिए वो अपने अनुभव से कह सकती हैं कि यदि विधायक सेवा-भाव से निरंतर जनता की समस्याओं के समाधान तथा उनके कल्याण में सक्रिय रहेंगे तो जनता और जन-प्रतिनिधि के बीच विश्वास का बंधन अटूट बना रहेगा। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि विकास तथा जन-कल्याण के कार्यों को सभी लोग पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाएं। ऐसे कार्य दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं। सबको समाज के वंचित वर्गों के कल्याण एवं विकास पर विशेष संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की जरूरत है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि उत्तराखंड विधान सभा में इस वर्ष राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन की व्यवस्था का शुभारंभ हुआ है, इसके माध्यम से दो सत्रों का संचालन किया जा चुका है। इस एप्लीकेशन के जरिये सभी विधायक-गण, संसद तथा अन्य विधान-सभाओं एवं विधान परिषदों के बेस्ट प्रेक्टिस को अपना सकते हैं।

    संबोधन में अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड में अनुपम प्राकृतिक संपदा और सौन्दर्य विद्यमान हैं। प्रकृति के इन उपहारों का संरक्षण करते हुए, राज्य को विकास के मार्ग पर आगे ले जाना है। उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास-यात्रा, विधायकों के योगदान से ही संभव हो पाई है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि आगे भी सभी विधायक जन-आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति देते रहेंगे।
    ’राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना के साथ राज्य तथा देश को विकास-पथ पर तेजी से आगे ले जाने की जरूरत है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन उत्तराखंड के सभी निवासियों को भविष्य की मंगलकामना देने के साथ की।

    राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने अपने अभिभाषण में प्रदेश की 25 वर्ष की विकास यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कालखण्ड उत्तराखण्ड के लिए आर्थिक समृद्धि, सुशासन, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत संरचना निर्माण का स्वर्णिम दौर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड “समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखण्ड” की दिशा में निरंतर अग्रसर है।

    राज्यपाल ने माननीय राष्ट्रपति का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सानिध्य एवं मार्गदर्शन से प्रदेशवासियों को नई प्रेरणा मिली है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति महोदया का देवभूमि उत्तराखण्ड के प्रति स्नेह और संवेदना हम सभी के लिए गौरव का विषय है।

    राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि इस विशेष सत्र के माध्यम से राज्य की अब तक की विकास यात्रा पर चर्चा की जाएगी और आगामी वर्षों के लिए नए विकास रोडमैप का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखेगा। उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखण्ड” का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समावेशी और चहुँमुखी विकास से है, जहाँ “प्रकृति और प्रगति दोनों साथ चलें।” उन्होंने प्रदेश के लिए “समृद्ध गाँव, सशक्त युवा, सशक्त नारी और सुरक्षित पर्यावरण” का मंत्र दिया।
    राज्यपाल ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में उत्तराखण्ड को आध्यात्मिकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, जैविक कृषि और हरित ऊर्जा के आदर्श राज्य के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पलायन रोकने, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देने और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में समृद्धि और सम्मान सुनिश्चित करें।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजतोत्सव पर आयोजित इस विशेष सत्र में माननीय राष्ट्रपति का मार्गदर्शन हम सबको प्राप्त हो रहा है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का सम्पूर्ण जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रसेवा का अनुपम उदाहरण है। उनके व्यक्तित्व में मातृत्व की ममता, सेवा का संकल्प और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अद्भुत संगम निहित है। उन्होंने सदैव अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए समाज के वंचित, शोषित एवं पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण हेतु कार्य किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने निजी जीवन में अत्यंत विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए भी हमेशा राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से कार्य करते हुए समाज जीवन में अपना योगदान दिया। झारखंड की राज्यपाल के रूप में भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों का अनुसरण करते हुए उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दूसरा मौका है कि जब उत्तराखंड की विधानसभा में हमारे देश के राष्ट्रपति का अभिभाषण हो रहा है, इससे पूर्व 18 मई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति श्रद्धेय स्वर्गीय प्रणव मुखर्जी जी ने विधानसभा को संबोधित किया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति द्वारा उत्तराखंड की विधानसभा में दिया जाने वाला ऐतिहासिक अभिभाषण हमारे राज्य के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाएगा। उनके प्रेरणादायी शब्द आने वाले 25 वर्षों तक उत्तराखंड की प्रगति के लिए हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड 9 नवंबर को अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर प्रत्येक उत्तराखंडवासी के लिए आत्मगौरव का क्षण होने के साथ ही अत्यंत भावनात्मक क्षण भी है। उत्तराखण्ड राज्य हमारी उन असंख्य माताओं, बहनों, युवाओं और जननायकों के अदम्य साहस और संघर्ष का प्रतीक है, जिनके तप, त्याग और बलिदान के बल पर ये गौरवशाली राज्य अस्तित्व में आया। मुख्यमंत्री ने सभी ज्ञात-अज्ञात राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि अमर आंदोलनकारियों के बलिदान को उत्तराखंड का कोई भी नागरिक कभी नहीं भुला सकता।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माननीय राष्ट्रपति के आशीर्वाद, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उत्तराखंड की जनता के सहयोग से हम उत्तराखंड को एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करने के अपने विकल्प रहित संकल्प में अवश्य सफल होंगे।

    विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु भूषण खंडूडी ने स्वागत संबोधन में कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु राज्य स्थापना दिवस पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रही हैं। प्रदेश की विधानसभा के लिए भी यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति के अजात शत्रु स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के निर्णय से नवंबर 2000 में अस्तित्व में आने के बाद उत्तराखंड विधानसभा की पहली बैठक 12 जनवरी 2001 के दिन आयोजित की गई। तब से अब तक भारतीय लोकतंत्र के उच्च सिद्धांतों और परम्पराओं पर चलते हुए, उत्तराखंड विधानसभा ने कई महत्वपूर्ण आयाम स्थापित किए हैं।
    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का बलिदान हमें, उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए चेष्टावान बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण में मातृशक्ति ने अहम भूमिका निभाई है। उत्तराखंड की महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण, खेती-बाड़ी, समाज सुधार से लेकर राज्य निर्माण आंदोलन में तक सक्रिय भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति के संबोधन से उत्तराखंड की मातृशक्ति गौरवांवित हुई है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के कालखंड में उत्तराखंड विधानसभा ने महिला आरक्षण विधेयक सहित पांच सौ से अधिक विधेयक पारित किए हैं। वर्ष 2001 में अनंतिम विधानसभा से लेकर वर्तमान विधानसभा के सदस्यों ने तक महत्वपूर्ण अवसरों पर दलगत राजनीति से उठकर, प्रदेश के सामने उपस्थित चुनौतियों का सफलता पूर्वक सम्मान करते हुए, अपने ज्ञान, विवेक और परिश्रम से आम जनता की आशा, आकांक्षाओं को मूर्त रूप दिया है। इससे प्रदेश में संसदीय लोकतंत्र की नींव भी मजबूत हुई है।

    विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनभावना के अनुरूप प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में समुचित विकास सुनिश्चित करने के लिए भराडीसैंण – गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है, अब वहां भी एक विधानसभा भवन संचालित किया जा रहा है। उत्तराखंड विधानसभा ने ग्रीन इनिसिटेव के तहत अब पेपरलेस विधायिका की ओर कदम बढ़ दिए हैं। देहरादून के साथ ही भराडीसैंण विधानसभा परिसर में भी नेशनल ई विधान एप्लकेशन लागू किया गया है। विधानसभा में ई लायब्रेरी भी स्थापित की गई है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के विकास में शोध के महत्व पर जोर देते हैं, इसके लिए भराडीसैंण विधानसभा के अंतर्गत, पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रवण मुखर्जी द्वारा स्वीकृत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पार्लियामेंट्री स्टडीज, रिसर्च एंड ट्रेनिंग शुरु किया गया है। जिसे विधायी और संसदीय कार्य के साथ ही पॉलिसी प्लानिंग में उच्चकोटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के संबोधन से सबमें नई उर्जा का संचार होगा, जिससे उत्तराखंडवासी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल की दिशा में संकल्पित होकर कार्य कर सकेंगे।

    इस मौके पर नेता विपक्ष श्री यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड सभी मानकों में विशिष्ट प्रदेश है, उत्तराखंड की सीमाएं तिब्बत और नेपाल से मिलती हैं इस तरह ये हिमालयी राज्य देश की रक्षा में अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने इस राज्य को परोपकारी हिमालय से निकलने वाली सदानीरा नदियां दी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं ने हमेशा राज्य के जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष किया है। विश्व प्रसिद्ध चिपको आंदोलन इसका उदाहरण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति के संबोधन से सदस्यों को नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त होगी।

  • एफआरआई देहरादून में 9 नवम्बर को होगा उत्तराखण्ड रजत जयंती उत्सव का मुख्य कार्यक्रम

    एफआरआई देहरादून में 9 नवम्बर को होगा उत्तराखण्ड रजत जयंती उत्सव का मुख्य कार्यक्रम

    उत्तराखंड राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 9 नवम्बर को प्रदेशभर में भव्य रजत जयंती उत्सव का आयोजन किया जाएगा। मुख्य राज्य स्तरीय कार्यक्रम देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफआरआई) में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को विधानसभा के विशेष सत्र में प्रतिभाग करने के उपरांत सीधे एफआरआई पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शक दीर्घा, यातायात प्रबंधन, सांस्कृतिक मंच और स्वागत तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य स्थापना दिवस का यह ऐतिहासिक अवसर गरिमामय और व्यवस्थित तरीके से मनाया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की 25 वर्ष की विकास यात्रा, संघर्ष और उपलब्धियों का प्रतीक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सान्निध्य में यह रजत जयंती समारोह प्रदेश के लिए प्रेरणादायक अवसर होगा।

    इस अवसर पर सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, गढ़वाल कमिश्नर श्री विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरुप, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी एवं शासन – प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद थे।

  • आदि कैलाश में उत्तराखंड की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का ऐतिहासिक आयोजन*

    आदि कैलाश में उत्तराखंड की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का ऐतिहासिक आयोजन*

    उत्तराखंड के पौराणिक और आध्यात्मिक धरोहर स्थल आदि कैलाश की पवित्र छाया में आज राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित यह आयोजन उत्तराखंड की साहसिक खेल क्षमता, प्राकृतिक धरोहर और पर्यटन संभावनाओं के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

    यह 60 किलोमीटर लंबी अल्ट्रा रन आदि कैलाश से प्रारंभ हुई, जिसमें देश के 22 राज्यों से 700 से अधिक धावकों ने भाग लिया। ऊँचाई, कठोर मौसम और चुनौतीपूर्ण हिमालयी ट्रैक के बीच प्रतिभागियों ने अदम्य साहस, धैर्य और फिटनेस का अद्भुत प्रदर्शन किया।

    प्रतिभागियों ने उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की जमकर प्रशंसा की। धावकों ने कहा कि आईटीबीपी तथा भारतीय सेना का सहयोग और मार्गदर्शन अतुलनीय रहा, जिसने इस कठिन रूट पर आयोजन को सफल और सुरक्षित बनाया।

    प्रतिभागियों एवं स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आदि कैलाश आगमन के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में तेजी आई है। प्रधानमंत्री जी के हिमालयी क्षेत्रों में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से सीमांत क्षेत्र में साहसिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

    कार्यक्रम में सचिव पर्यटन, आईटीबीपी अधिकारी श्, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान स्थानीय जनता में भारी उत्साह देखने को मिला और हजारों लोगों ने धावकों का उत्साहवर्धन किया।

    रजत जयंती वर्ष के अवसर पर यह आयोजन उत्तराखंड की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है, जो राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में एडवेंचर टूरिज़्म और खेल संस्कृति को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। आदि कैलाश जैसे पवित्र और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थल से इस साहसिक पहल की शुरुआत को दूरगामी परिणामों वाला कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदि कैलाश में पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन के सफल आयोजन पर सभी प्रतिभागियों, आयोजनकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि “ यह आयोजन उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण है। आदि कैलाश जैसे पवित्र व आध्यात्मिक धाम में आयोजित यह ऐतिहासिक अल्ट्रा रन न केवल साहस और समर्पण की मिसाल है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन और खेल संस्कृति को नई दिशा देगा। राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह आयोजन उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य और असीम संभावनाओं का प्रतीक है।”

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन और उनके द्वारा आदि कैलाश में किए गए दर्शन के बाद इस संपूर्ण क्षेत्र में पर्यटन और आध्यात्मिक गतिविधियों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। राज्य सरकार भी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हिमालयी और शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु निरंतर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि—-

    “ सीमांत क्षेत्रों का विकास हमारी प्राथमिकता है। अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजन न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं बल्कि युवा पीढ़ी में साहसिक खेलों के प्रति उत्साह भी पैदा करते हैं। आने वाले समय में उत्तराखंड साहसिक खेलों और पर्वतीय पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनेगा।”

  • सहकारिता से आत्मनिर्भर भारत निर्माण का नया अध्याय लिख रहा उत्तराखण्ड : डॉ. धन सिंह रावत

    सहकारिता से आत्मनिर्भर भारत निर्माण का नया अध्याय लिख रहा उत्तराखण्ड : डॉ. धन सिंह रावत

    रुद्रप्रयाग: अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अंतर्गत उत्तराखण्ड में सहकारिता की भावना को जन-जन तक पहुँचाने हेतु प्रदेशभर में सहकारिता मेलों का सफल आयोजन किया जा रहा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा एवं बागेश्वर में सहकारिता मेले सकुशल संपन्न हो चुके हैं, जबकि रुद्रप्रयाग एवं पिथौरागढ़ में यह आयोजन जनसहभागिता के साथ निरंतर जारी है।
    इसी क्रम में रुद्रप्रयाग के गुलाबराय क्रीड़ा मैदान में आयोजित सहकारिता मेला-2025 के पंचम और अंतिम दिवस के अवसर पर डॉ. धन सिंह रावत, सहकारिता, उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार ने वर्चुअल माध्यम से जनसमूह को संबोधित किया।

    “सहकारिता आंदोलन आत्मनिर्भर भारत का सशक्त आधार” डॉ. धन सिंह रावत

    माननीय सहकारिता मंत्री डॉ. रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत में सहकारिता एक जनांदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि “सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामूहिक प्रगति का माध्यम है, जिसके बल पर उत्तराखण्ड आत्मनिर्भर भारत निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”

    डॉ. रावत ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 30 लाख सहकारी सदस्य सक्रिय हैं और सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में इस संख्या को 50 लाख तक विस्तारित करने का है। उन्होंने कहा कि राज्य में सहकारिता के माध्यम से रोजगार सृजन, पलायन रोकथाम, ग्रामीण आजीविका संवर्धन तथा महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं।

    उन्होंने रुद्रप्रयाग एवं पिथौरागढ़ जनपदों में चल रहे सहकारिता मेलों की सराहना करते हुए कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, स्वयं सहायता समूहों तथा सहकारी समितियों को अपने कार्यों का प्रदर्शन करने और विपणन के नए अवसर मिल रहे हैं।

    प्रदेश में सहकारिता की गूंज : हर जनपद में सहभागिता और समृद्धि

    डॉ. रावत ने बताया कि पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा और बागेश्वर में आयोजित सहकारिता मेलों ने व्यापक जनसहभागिता और आर्थिक जागरूकता को जन्म दिया है।
    इन मेलों में किसानों, स्वयं सहायता समूहों, महिला समितियों और युवाओं को विभिन्न योजनाओं जैसे पैक्स कंप्यूटरीकरण, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, किसान कल्याण योजना और माइक्रो एटीएम वितरण कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।

    रुद्रप्रयाग मेला-2025 के पंचम दिवस में श्रीमती पूनम कठैत (अध्यक्ष, जिला पंचायत) एवं मा० श्री भरत चौधरी (विधायक, रुद्रप्रयाग) द्वारा उद्घाटन किया गया।
    अध्यक्षता मा० श्री भारत भूषण (जिला अध्यक्ष, भाजपा) द्वारा की गई।

    सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, महिला समूहों एवं कलाकारों ने पारंपरिक लोकगीतों और नृत्यों की शानदार प्रस्तुतियाँ दीं।
    तकनीकी सत्र में पैक्स कंप्यूटरीकरण एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की विस्तृत जानकारी दी गई।

    मेले में 05 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के माध्यम से 34 कृषकों को ₹39.31 लाख तथा 01 महिला समूह को ₹4 लाख के चेक वितरित किए गए।
    साथ ही नगरासू, नवासू, बरसूड़ी, फाटा एवं उच्छादुगी एमपैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम प्रदान किए गए।

    सांस्कृतिक सत्र में सरस्वती शिशु मंदिर सतेराखाल के विद्यार्थियों द्वारा “जीत बग्डवाल एवं माधो सिंह भंडारी” पर आधारित लोकनाट्य प्रस्तुत किया गया।
    सरस्वती विद्या मंदिर बेलनी की छात्राओं सहित श्रीमती आरती रावत, कुमारी खुशी नेगी एवं श्रीमती अनीता देवी द्वारा प्रस्तुत लोकगीतों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    तकनीकी सत्र में श्री राजेश चौहान (सहायक निबंधक, मुख्यालय), श्री रणजीत सिंह राणा (जिला सहायक निबंधक) एवं श्री सूर्य प्रकाश सिंह (सचिव/महाप्रबंधक) द्वारा पैक्स कंप्यूटरीकरण एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से संबंधित तकनीकी जानकारी साझा की गई।

    कार्यक्रम के अंत में मा० सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया गया तथा सहकारिता विभाग, जिला प्रशासन एवं मीडिया प्रतिनिधियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया।
    कार्यक्रम का संचालन श्री किशन सिंह रावत, अनुदेशक, जिला सेवायोजन कार्यालय, रुद्रप्रयाग द्वारा किया गया।

    श्रीमती विनीता देवी (अध्यक्ष, नगर पंचायत तिलवाड़ा),
    श्री सुबोध बगवाड़ी (जिला पंचायत सदस्य),
    श्रीमती सी.पी. चमोली (लोकपाल, मनरेगा),
    श्री गजेन्द्र रावत (निवर्तमान अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक चमोली),
    श्री बाचस्पति सेमवाल (पूर्व सदस्य, बाल अधिकार संरक्षण आयोग बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रवासी सहकारिता विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • पुस्तक मेले के दूसरे दिन भी हुई पुस्तकों की खरीददारी और बच्चों का हुआ उत्तराखण्ड टैलेंट शो

    पुस्तक मेले के दूसरे दिन भी हुई पुस्तकों की खरीददारी और बच्चों का हुआ उत्तराखण्ड टैलेंट शो

    देहरादून,2 नवम्बर, 2025. राज्य स्थापना रजत जयन्ती समारोह के अंतर्गत दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून में दूसरे दिन विभिन्न रोचक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। उत्तराखंड पुस्तक मेला एवं बाल गतिविधियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
    यह कार्यक्रम राज्य स्थापना दिवस समारोह की दूसरी श्रृंखला का भाग है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड की साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को जन-जन तक पहुँचाना है।

    इन पुस्तकालय में लगे पुस्तक मेले में आज भी लोगों ने पुस्तकों की खरीददारी की. ज्ञातव्य है कि यहां प्रकाशकों ने उत्तराखंड की संस्कृति, समाज, लोक जीवन और इतिहास से जुड़ी पुस्तकें विक्रय हेतु रखी हैं। यह मेला पुस्तक प्रेमियों के लिए ज्ञान, संवाद और सृजन का साझा केन्द्र बना है.जहाँ स्थानीय साहित्य से लेकर नामचीन साहित्यकारों की केंद्रित पुस्तकें उपलब्ध रही.इस दौरान लोगों ने आज भी स्टालों से अलग विषयों पर जमकर पुस्तकों की खरीददारी की.

    आज के कार्यक्रम का विशेष आकर्षण ‘बाल गतिविधियाँ’, रहा. बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और राज्य की लोक संस्कृति के प्रति लगाव विकसित करने की दृष्टि से यह जीवंत और उत्साहपूर्ण हिस्सा रहा. पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने लोक गीतों, नृत्यों और कहानियों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को जीवंत कर दिया जहाँ नन्हें कलाकारों ने अपने हुनर से सभी का दिल जीत लिया । इन गतिविधियों के अंतर्गत आयोजित ‘उत्तराखंड टैलेंट शो’ में बच्चों ने लोक गीत, लोक नृत्य, पारंपरिक परिधान और लोक कथाओं पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं।

    4 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों ने लोक नृत्य और पारंपरिक परिधान प्रदर्शन में भाग लिया, जबकि 7 से 10 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों ने लोक गीत, लोक नृत्य, लोक कहानियाँ, कविता एवं पारंपरिक परिधान प्रदर्शन के माध्यम से उत्तराखंड की परंपराओं को जीवंत किया।
    इन बाल प्रस्तुतियों ने खुलकर यह संदेश दिया कि राज्य की संस्कृति और परंपरा की डोर अब नई पीढ़ी के सुरक्षित हाथों में है।

    इस निर्णायक मंडली में दीपाक्षी गुसाईं, जोहरा निज़ामी और कल्पना बहुगुणा शामिल रहीं। प्रतिभागियों ने एकल, युगल और समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी सृजनात्मकता का परिचय दिया। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले दस प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया । जिसमे प्रथम पुरस्कार – निमिषा सिंह, द्वितीय पुरस्कार – कुशाग्र डोभाल, तृतीय पुरस्कार – अरुण्या तोमर को मिला । इसके अतिरिक्त, अपनी उत्कृष्ट समूह प्रस्तुति से सभी का दिल जीतने वाले “आसरा ट्रस्ट समूह” (बेघर एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का दल) और “रैफेल राइडर समूह” (मानसिक रूप से विशेष बच्चों का दल) को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। दोनों समूहों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और कार्यक्रम के वातावरण को आनंदमय बना दिया।

    इस आयोजन को सफल बनाने में मेघा एन विल्सन, उत्कर्ष रावत,सुमन भारद्वाज, जयभगवान गोयल, मीनाक्षी कुकरेती, स्वीटी, शकुन्तला दरियाल, शैलेंद्र सिंह रौतेला और सुंदर सिंह बिष्ट,राकेश कुमार, विजय बहादुर, पंकज शर्मा योगदान रहा। संचालन मधु डंगवाल ने किया. इस अवसर पर अनेक लोग मौजूद रहे.

  • राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति निकेतन में फुट ओवर ब्रिज और घुड़सवारी क्षेत्र का किया लोकार्पण

    राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति निकेतन में फुट ओवर ब्रिज और घुड़सवारी क्षेत्र का किया लोकार्पण

    देहरादून। माननीय राष्ट्रपति ने आज देहरादून स्थित राष्ट्रपति निकेतन में दो नई आगंतुक- केंद्रित सुविधाओं- पैदल पार पुल (फुट ओवर ब्रिज) और घुड़सवारी क्षेत्र का लोकार्पण किया। इन दोनों परियोजनाओं ने राष्ट्रपति निकेतन परिसर को आधुनिकता, सुरक्षा और विरासत के अद्भुत संगम के रूप में स्थापित कर दिया है।

    राजपुरा रोड पर बने 105 फीट लंबे पैदल पार पुल ने अब राष्ट्रपति निकेतन और आगामी राष्ट्रपति उद्यान (132 एकड़ परिसर) के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित कर दिया है। उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा ₹9 करोड़ की लागत से निर्मित यह पुल स्थानीय हिमालयी वास्तुकला का सुंदर उदाहरण है। रैंप और रेलिंग के साथ यह पूरी तरह सुगम पहुँच (universal access) प्रदान करता है। यह पुल अब व्यस्त राजपुरा रोड पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन गया है।

    वहीं, परिसर में विकसित 0.7 एकड़ का घुड़सवारी क्षेत्र, राष्ट्रपति के अंगरक्षकों (PBG) की ऐतिहासिक परंपरा का प्रतीक है। सीपीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित इस अत्याधुनिक क्षेत्र में 8 घोड़ों की क्षमता वाला अस्तबल, उपचार कक्ष, स्नान व चारा कक्ष, और आगंतुकों के लिए देखने का विशेष गलियारा तैयार किया गया है।

    यह नई सुविधा अब आम आगंतुकों के लिए सोमवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहेगी। यहाँ आगंतुकों को राष्ट्रपति सर्किट का समृद्ध अनुभव देने के लिए निर्देशित भ्रमण (Guided Tours) की भी व्यवस्था की गई है।

    राष्ट्रपति निकेतन में इन दो नई परियोजनाओं के लोकार्पण के साथ, यह परिसर अब न केवल सुरक्षा और संरचना के दृष्टिकोण से उन्नत हुआ है, बल्कि हिमालयी विरासत और राष्ट्रीय गौरव का भी नया प्रतीक बन गया है।

  • पहाड़ के लोकपर्व हमारा गर्व, हमारी आत्मा — सीएम धामी

    पहाड़ के लोकपर्व हमारा गर्व, हमारी आत्मा — सीएम धामी

    मुख्यमंत्री आवास में आज इगास पर्व बड़े हर्ष–उल्लास, पारंपरिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव के साथ भव्य रूप से मनाया गया। देवभूमि की लोक परंपराओं को समर्पित इस विशेष अवसर पर राजयपाल ले. ज. गुरमीत सिंह ( से नि) की उपस्थिति में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इगास हमारी सांस्कृतिक अस्मिता, लोक आस्था और सामूहिक भावना का प्रतीक है।

    कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों, गायकों और विभिन्न क्षेत्रों से आए सांस्कृतिक दलों ने पारंपरिक लोकगीत व लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हारुल, झूमेंलो, चांचरी, थड़िया, जागर और अन्य पारंपरिक नृत्य–गायन ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया और पूरा परिसर लोकधुनों की गूंज से सराबोर हो उठा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं भी कलाकारों के बीच उपस्थित होकर उनकी प्रस्तुति का आनंद लिया एवं उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “हमारी लोक संस्कृति और परंपराएँ हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं, उन्हें बचाना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।”

    कार्यक्रम में शामिल सभी आमंत्रित अतिथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, प्रवासी उत्तराखंडियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और प्रदेश के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों को मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से शुभकामनाएँ दीं और उनसे भेंट की।

    इगास उत्सव के पारंपरिक क्रम में मुख्यमंत्री ने लोक मान्यताओं के अनुसार परंपरागत रूप से “भेलों” भी खेला, जिससे वहां मौजूद बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया। पूरा वातावरण पर्वतीय संस्कृति की खुशियों, लोकगीतों और लोकनृत्य से भर गया।

    कार्यक्रम में सभी कलाकारों व प्रतिभागियों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया और कहा कि उत्तराखंड सरकार लोक कलाकारों के उत्थान, लोक परंपराओं को बढ़ावा देने और ‘कल्चर बेस्ड रोजगार’ को प्रोत्साहित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

    इगास, बूढ़ी दीवाली और देव दीपावली के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराएँ, वेश–भूषा और व्यंजन हमारी अनमोल धरोहर हैं और इन्हें संरक्षित करना हम सभी का दायित्व है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इगास लोक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सामूहिकता, प्रकृति के प्रति आभार और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक है। उन्होंने लोकगीत, ढोल-दमाऊ की थाप और पारंपरिक मांडणे का उल्लेख करते हुए कहा कि जब घर-आंगन में लोक संस्कृति प्रफुल्लित होती है, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं देवभूमि मुस्कुरा रही हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रवासी उत्तराखंडियों का सक्रिय योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि प्रवासी उत्तराखंडी अब इगास पर अपने पैतृक गांवों का रुख कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने विश्वभर में बसे उत्तराखंडियों से अपील की कि वे भी अपने गांवों और परिवारों के साथ लोक पर्व मनाएं और अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

    मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि हम सब मिलकर न सिर्फ अपनी संस्कृति को समृद्ध करें, बल्कि “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने में योगदान दें।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए इस संकल्प–वाक्य को याद करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा” यह केवल घोषणा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की इस पवित्र भूमि के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है। प्रधानमंत्री जी ने जो विश्वास उत्तराखंड पर जताया है, उसे साकार करना हम सभी का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दशक उत्तराखंड के समग्र विकास, रोजगार-सृजन, पर्यटन और आध्यात्मिक-पर्यटन विस्तार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा युवा शक्ति के सशक्तिकरण का दशक होगा। हम सभी को मिलकर ‘विकल्प रहित संकल्प’ की भावना के साथ कार्य करते हुए इस विज़न को धरातल पर उतारना है, ताकि उत्तराखंड विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश–दुनिया में अपने स्थान को और अधिक मजबूत कर सके।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा “ इस इगास पर संकल्प लें कि न केवल अपने घरों में दीप जलाएँ, बल्कि अपने मन में भी अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का दीप प्रज्ज्वलित रखें।”

    कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोशियारी, रमेश पोखरियाल निशंक, राजयसभा सांसद नरेश बंसल, मुख्य सचिव एवं अन्य अधिकारी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि व विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित रहे |

  • लंबे समय से लंबित मांग को मिली मंजूरी, एसडीएसीपी लाभ से दंत चिकित्साधिकारियों का बढ़ेगा मनोबल

    लंबे समय से लंबित मांग को मिली मंजूरी, एसडीएसीपी लाभ से दंत चिकित्साधिकारियों का बढ़ेगा मनोबल

    देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने दंत चिकित्साधिकारियों (Dental Surgeons) को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एसडीएसीपी (SDACP) लाभ देने की औपचारिक मंजूरी प्रदान की है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि
    प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के दंत शल्य चिकित्साधिकारियों को एसडीएसीपी का लाभ प्रदान किया जाएगा।

    यह निर्णय शासन के पूर्व के आदेश संख्या-654 (जुलाई 2016) और संख्या-154 (4 फरवरी 2019) के आधार पर लिया गया है। स्वास्थ्य सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की गई संस्तुति के आधार पर दंत शल्य चिकित्साधिकारियों को यह लाभ अनुमन्य किया जाता है।
    इसमें चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-1, देहरादून की संस्तुति को स्वीकार करते हुए
    एसडीएसीपी (Special Duty Allowance Cum Promotion) का लाभ प्रदान करने की अनुमति दी गई है।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। दंत चिकित्साधिकारियों को एसडीएसीपी लाभ देने की मांग लंबे समय से लंबित थी।
    यह निर्णय न केवल वित्तीय रूप से उन्हें लाभान्वित करेगा, बल्कि विभागीय मनोबल को भी ऊँचा करेगा। सरकार का उद्देश्य है कि हर स्वास्थ्य अधिकारी को उसका अधिकार और सम्मान मिले।

    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस निर्णय से राज्यभर के दंत चिकित्साधिकारियों को न केवल पदोन्नति संबंधी लाभ प्राप्त होंगे, बल्कि उन्हें विशेष भत्ता (Special Duty Allowance) का आर्थिक फायदा भी मिलेगा। इससे चिकित्सकों की सेवा भावना को बल मिलेगा और ग्रामीण तथा शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यकुशलता बढ़ेगी।

    जानकारी के मुताबिक, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग से जुड़े कई दंत चिकित्सक पिछले कई वर्षों से इस लाभ की प्रतीक्षा कर रहे थे। एसडीएसीपी स्वीकृति के बाद उन्हें अब वित्तीय और पदोन्नति दोनों स्तरों पर समान अवसर प्राप्त होंगे। यह फैसला राज्य में चिकित्सकों की सेवा संतुलन व्यवस्था (Service Parity) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार का कहना है कि यह कदम चिकित्सा सेवा में पारदर्शिता, प्रेरणा और स्थायित्व लाने में मदद करेगा।दंत चिकित्सक समुदाय ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सरकार ने वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त की है, यह निर्णय वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उत्साहजनक है।

  • रुद्रप्रयाग में सहकारिता मेला 2025 का तीसरा दिन रहा आकर्षण का केंद्र

    रुद्रप्रयाग में सहकारिता मेला 2025 का तीसरा दिन रहा आकर्षण का केंद्र

    रुद्रप्रयाग

    गुलाबराय खेल मैदान रुद्रप्रयाग में चल रहे सहकारिता मेला 2025 के तीसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि चण्डी प्रसाद भट्ट, उपाध्यक्ष सीमांत अनुश्रवण परिषद, उत्तराखण्ड द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता ऋतु नेगी, उपाध्यक्ष, जिला पंचायत रुद्रप्रयाग ने की।।

    अपने संबोधन में चण्डी प्रसाद भट्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में सहकारिता आंदोलन ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन ला रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारिता मेलों के माध्यम से सीमान्त गांवों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है और नई समितियों के गठन से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि सहकारिता विभाग द्वारा अब एमपैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं आसानी से मिल सकें। विभाग द्वारा ₹5 लाख तक का शून्य ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

    श्रीमती किरण नौटियाल ने मुख्यमंत्री एवं सहकारिता मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं और किसानों को सरकार निरंतर प्रोत्साहन दे रही है।

    वहीं, श्री अनूप सेमवाल ने अपने संबोधन में दीनदयाल योजना के अंतर्गत शून्य ब्याज दर पर दिए जा रहे ऋणों की जानकारी दी।

    श्रीमती ऋतु नेगी ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत कृषक एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मान और सहयोग के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

    मेले में कलश संस्था द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रीमती वेदिका सेमवाल, श्रीमती उपासना सेमवाल, श्री मुरली दिवान, श्री जगदम्बा चमोला, श्री अश्विन गौड़, श्री ओमप्रकाश सेमवाल एवं श्री अनूप नेगी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

    जी.आई.सी. जवाड़ी एवं अटल आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग के विद्यार्थियों ने देशभक्ति और लोकनृत्य प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बना दिया।
    लोक गायिका श्रीमती सीमा गुसाईं ने जागर और लोकगीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

    तकनीकी सत्र में पुलिस विभाग के इंस्पेक्टर श्री मनोज सिंह नेगी ने साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने हैकिंग, फिशिंग, साइबर ठगी, पहचान चोरी, साइबर बुलिंग और रैनसमवेयर हमलों से बचाव के उपाय बताए।
    इसके साथ ही सहकारिता विभाग के श्री रणजीत सिंह राणा (जिला सहायक निबंधक) एवं श्री सूर्य प्रकाश सिंह (महाप्रबंधक) ने प्रतिभागियों को सहकारिता योजनाओं जैसे — मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री ई-रिक्शा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना आदि की विस्तृत जानकारी दी।

    मेले के दौरान 6 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के माध्यम से 24 कृषकों को ₹26.65 लाख तथा 1 महिला समूह को ₹4 लाख के चेक वितरित किए गए।
    इसके अतिरिक्त राउरासी, मनसूना, ऊखीमठ, मयकोटी एवं चोपड़ा एमपैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम मशीनें भी प्रदान की गईं।

    कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में किरण नौटियाल, जिला पंचायत सदस्य सौराजवाड़ी, अनूप सेमवाल, प्रतिनिधि माननीय सहकारिता मंत्री, मनोज राणा एवं दलवीर नेगी, मण्डल अध्यक्ष, मीना राणा, पूर्व प्रधान, राजेन्द्र नौटियाल, सामाजिक कार्यकर्ता, तथा गजेन्द्र रावत, निवर्तमान अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक चमोली सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता ऋतु नेगी द्वारा एवं मंच संचालन किशन सिंह रावत, अनुदेशक, कार्यालय जिला सेवायोजन अधिकारी रुद्रप्रयाग ने किया।

  • नैनीताल की सोनिया और टिहरी के जसपाल रावत ने जीती इलेक्ट्रिक कार

    नैनीताल की सोनिया और टिहरी के जसपाल रावत ने जीती इलेक्ट्रिक कार

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना रजत जयंती समारोह का शुभारंभ करते हुए शुक्रवार को सचिवालय में ‘बिल लाओ, ईनाम पाओ’ के अंतर्गत मेगा लकी ड्रॉ निकाला। राज्य कर विभाग, उत्तराखंड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 1888 लकी ड्रॉ विजेता चुने गए। नैनीताल जनपद की सोनिया और टिहरी जनपद के जसपाल रावत ने प्रथम विजेता के रूप में एक-एक इलेक्ट्रिक कार जीती।

    मुख्यमंत्री ने दोनों विजेताओं से फोन पर बात कर उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बिल लाओ, ईनाम पाओ’ योजना राज्य में जारी रहेगी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस नवाचार ने राज्य के राजस्व संग्रहण को एक नई चेतना और ऊर्जा दी है। वर्ष 2022 में शुरू की गई इस योजना के माध्यम से जनभागीदारी को कर प्रणाली से सीधे जोड़ने का प्रयास किया गया।

    इस योजना के तहत 6 लाख 50 हजार बिलों के माध्यम से 263 करोड़ रुपये का लेनदेन लोगों द्वारा अपलोड किया गया। इससे व्यापारी वर्ग में कर अनुपालन की संस्कृति को बढ़ावा मिला है और राज्य की राजस्व प्राप्ति में निरंतर वृद्धि दर्ज हुई है। यह योजना आज एक ओर जहां उपभोक्ता जागरूकता का सशक्त माध्यम बन चुकी है, वहीं साझा जिम्मेदारी का प्रतीक भी बनकर उभरी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से व्यवसायियों को भी सहूलियत मिली है। राज्य सरकार व्यापार तंत्र को और अधिक कुशल व पारदर्शी बनाने के लिए सतत प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में व्यापार, उद्यम और रचनात्मकता को साथ लेकर लोगों में नया विश्वास पैदा किया जा रहा है। भ्रष्टाचार मुक्त व भयमुक्त वातावरण में आज व्यापारी वर्ग पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस कर रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “वार्षिक व्यापार सुधार कार्य योजना” के माध्यम से राज्य में निवेश और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। राज्य के राजस्व वृद्धि की दिशा में विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    राज्य में वित्तीय प्रबंधन में नवाचार, संसाधनों के मितव्ययी उपयोग और नवाचारों के अधिकतम प्रयोग पर बल दिया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से अपील की कि प्रत्येक खरीदारी पर बिल अवश्य मांगें और लेनदेन को पारदर्शी बनाकर राज्य के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

    मेगा लकी ड्रॉ में 2 विजेताओं ने इलेक्ट्रिक कार, 16 विजेताओं ने कार, 20 विजेताओं ने ई-स्कूटर, 50 विजेताओं ने मोटरसाइकिल, 100 विजेताओं ने लैपटॉप, 200 विजेताओं ने स्मार्ट टीवी, 500 विजेताओं ने टैब, तथा 1000 विजेताओं ने माइक्रोवेव एवं अन्य पुरस्कार जीते।

    इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, सचिव वित्त श्री दिलीप जावलकर, आयुक्त राज्य कर श्रीमती सोनिका, अपर सचिव श्री नवनीत पांडेय, अपर सचिव श्री मनमोहन मैनाली, उद्योग व्यापार समूह से श्री पंकज गुप्ता, श्री राजीव अग्रवाल, श्री सुनील मैसन, चार्टर्ड एकाउंटेंट श्री रवि माहेश्वरी, श्री संजीव गोयल, टैक्स बार एसोसिएशन से श्री सुमित ग्रोवर, श्री योगेश चोपड़ा एवं राज्य कर विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।