उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती समारोह के अवसर पर आज देहरादून आगमन पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड डाक परिमंडल द्वारा राज्य के प्रमुख तीर्थ स्थलों एवं सांस्कृतिक प्रतीकों पर आधारित विशेष डाक टिकट श्रृंखला का विमोचन किया। इस विशेष डाक टिकट श्रृंखला के माध्यम से देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान की गई है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राज्य के 28,000 से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹62 करोड़ से अधिक की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (क्ठज्) के माध्यम से जारी की। इस पहल से राज्य के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल क्षति से सुरक्षा का लाभ प्राप्त होगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ पर आधारित एक विशेष प्रतीक चिन्ह भेंट किया।
उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के रजत जयंती उत्सव के मुख्य समारोह में आज देहरादून पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने लगभग ₹8,260 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। उन्होंने उत्तराखण्ड की गत 25 वर्षों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए, अगले 25 वर्षो के लिए रोडमैप के साथ आगे बढ़ने हेतु प्रेरित किया।
FRI परिसर में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री जी ने गढ़वाली–कुमांऊनी में प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि नौ नवंबर का दिन उत्तराखण्डवासियों की लंबी तपस्या का फल है। ये दिन प्रत्येक उत्तराखण्डवासी को गर्व का अहसास कराता है। प्रधानमंत्री ने राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ ही, सभी आंदोलनकारियों को भी नमन किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल पहले केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने जिन उम्मीदों एवं आकांक्षाओं के साथ उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण किया, आज वो सभी सपने पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड से अपने लगाव को व्यक्त करते हुए कहा कि, जब वो अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर यहां आते थे तो पहाड़ों पर रहने वाले भाई -बहनों का संघर्ष और परिश्रम उन्हें प्रेरित करता था, यहां बिताए दिनों ने उन्हें उत्तराखण्ड के सामर्थ्य से परिचय कराया। इसी भरोसे के साथ उन्होंने बाबा केदार के दर्शन के बाद कहा था कि ये दशक उत्तराखण्ड का होगा। अब उनका ये भरोसा और भी दृढ़ हो गया है कि इस वक्त उत्तराखण्ड के उत्कर्ष का कालखण्ड चल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल पहले, जब नया- नया उत्तराखण्ड बना था तो उस वक्त कई चुनौतियां थीं, राज्य के संसाधन सीमित थे, बजट भी छोटा था, आय के स्रोत भी कम थे। तब ज्यादातर जरूरतें केंद्रीय सहायता से पूरी होती थीं। लेकिन आज, तस्वीर पूरी तरह से बदली हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 25 साल पहले उत्तराखण्ड का बजट सिर्फ चार हजार करोड़ रुपए था, जो आज बढ़कर एक लाख करोड़ के पार चला गया है। 25 साल में राज्य का बिजली उत्पादन, चार गुना बढ़ा और सड़कों की लंबाई दोगुनी हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय छह महीने में चार हजार यात्री ही हवाई सेवाओं का इस्तेमाल कर पाते थे, आज यहां अकेले एक दिन में चार हजार से अधिक यात्री हवाई सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। इन 25 वर्षों में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या 10 से ज्यादा बढ़ी है। तब राज्य में एक मेडिकल कॉलेज था, जो आज 10 हो चुके हैं। 25 साल पहले राज्य का वैक्सीन कवरेज 25 प्रतिशत भी नहीं था, आज हर गांव वैक्सीन कवरेज के दायरे में है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आज समारोह स्थल पर, कई युवाओं, उद्यमियों से बात की है, वो सभी राज्य की प्रगति को लेकर उत्साहित और आशांवित हैं। इससे साफ है कि उत्तराखण्ड का प्रत्येक नागरिक, अपने योगदान से भारत को विकसित देश की पंक्ति शामिल करने के लिए तैयार है।
प्रधानमंत्री ने आज शुरू किए गए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं, उत्तराखण्ड की विकास यात्रा को गति देने का काम करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार सेब-कीवी के किसानों को अब डिजिटल करेंसी में अनुदान दे रही है। इस आधुनिक तकनीकी से आर्थिक मदद की ट्रैकिंग संभव है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का कनेक्टिवी से गहरा नाता है। राज्य में इस समय दो लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना प्रगति पर है, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे तैयार हो चुका है। गौरीकुण्ड-केदारनाथ और गोविंदघाट- हेमकुंट साहिब रोपवे का शिलान्यास हो चुका है। ये सभी परियोजनाएं उत्तराखण्ड में विकास को नई गति दे रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड ने गत 25 वर्षों में विकास की लंबी यात्रा तय की है, लेकिन अब राज्य को अगले 25 वर्ष का रोडमैप तय करना है। इसके लिए राज्य को जहां चाह – वहां राह के मूलमंत्र को अपनाना होगा। इसलिए अपने लक्ष्यों पर चर्चा के लिए नौ नवंबर से बेहतर दिन और क्या होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अगर ठान ले तो अगले कुछ ही वर्षों में खुद को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के तौर पर स्थापित कर सकता है। यहां के पवित्र मंदिर, आश्रम, योग को ग्लोबल नेटवर्क से जोड़ा जा सकता है।
यहां हर विधानसभा क्षेत्र में योग केंद्र विकसित किए जाने की जरूरत है। इसी तरह वाइब्रेंट विलेज को छोटे- छोटे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब पयर्टक यहां होमस्टे के घरेलू माहौल में डुबके, चुडकानी, रोट, अरसा और झंगोरा की खीर खाएंगे तो तो फिर दूसरी- तीसरी बार भी यहां आना चाहेंगे। इसलिए उत्तराखण्ड को अपने अंदर छुपी हुई संभावना पर फोकस करना होगा। हरेला, फुलदेई, भिटोली जैसे त्योहारों से पयर्टकों को जोड़े जाने की जरूरत है। इसी तरह नंदादेवी, जौलजीवी, बागेश्वर उत्तरायणी, देवीधुरा, श्रावणी और बटर फेस्टिवल जैसे जीवंत मेलों में यहां की आत्मा बसती हैं। इसके लिए यहां वन डिस्ट्रिक – वन फेस्टिवल के जरिए उत्तराखण्ड को विश्व मानचित्र पर लाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड में विंटर टूरिज्म शुरू करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि सर्दियों में आने वाले पयर्टकों की संख्या बढ़ने से आर्थिकी मजबूत होगी। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड सरकार द्वारा आदि कैलाश में आयोजित हाई ऑल्टीट्यूट मैराथन और आदि कैलाश परिक्रमा रन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि तीन साल पहले तक आदि कैलाश में साल में दो हजार से कम पर्यटक आते थे, आज यह संख्या बढ़कर 30 हजार हो चुकी है। इसी तरह बाबा केदार के धाम में आने वाले यात्रियों की संख्या भी 17 लाख तक पहुंच चुकी है। उत्तराखण्ड में ईको टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म विकास की नई ऊंचाई छू सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड अब फिल्म डेस्टिनेशन बन चुका है, राज्य की नई फिल्म नीति से यहां शूटिंग आसान हो गई है। इसी तरह उत्तराखण्ड वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित हो रहा है। वेड इन इंडिया मुहिम का लाभ उठाने के लिए उत्तराखण्ड को आलीशान सुविधाओं के साथ कुछ डेस्टिनेशन विकसित करने होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पाद ‘वोकल फॉर लोकल’ मुहिम से जुड़ रहे हैं। राज्य के 15 कृषि उत्पादों को जीआई टैग मिला है। बेडू फल और बदरी घी को हाल के दिनों में जीआई टैग मिलना गौरव की बात है। इसी तरह हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड, उत्तराखण्ड के उत्पादों को एक मंच पर ला रहा है। डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए उत्तराखण्ड के उत्पाद ग्लोबल मार्केट में जुड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक की विकास यात्रा में कई रुकावटें आई, लेकिन सरकार ने मजबूत संकल्प के साथ इन बाधाओं को दूर किया।
प्रधानमंत्री जी ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रही सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार ने UCC को गंभीरता से लागू करते हुए, दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल प्रस्तुत की है। इसी तरह राज्य सरकार ने धर्मांतरण विरोधी, दंगा नियंत्रण कानून से भी राष्ट्र-हित को लेकर साहसिक नीति अपनाई है।
प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन के समापन में प्रदेशवासियों को पुन: शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य स्थापना की रजत जयंती से उत्तराखण्ड विकास की नई उंचाई छूते हुए, गर्व के साथ आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि देश जब देश आजादी का 100 साल मनाएगा, तब उत्तराखण्ड किस ऊंचाई पर होगा, हमें यह रास्ता चुनना है। इसलिए इंतजार किए बिना, हमें अपने रास्ते पर चल पड़ना होगा, भारत सरकार इस यात्रा में हमेशा उत्तराखण्ड सरकार के साथ खड़ी रहेगी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन, वंदे मातरम के संबोधन के साथ किया।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य स्थापना दिवस, रजत जयंती वर्ष की बधाई देने के साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का स्वागत करते हुए कहा कि ये हम सभी उत्तराखण्डवासियों का सौभाग्य है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमें यशस्वी प्रधानमंत्री जी का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्रों में भी कहा गया है…”राजा धर्मस्य कारणम्”.. यानी राजा ही धर्म का कारण और रक्षक होता है, जब राजा धर्मपरायण होता है, तब राज्य में सबका कल्याण होता है। ये सूत्र वाक्य आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दिव्य, प्रेरणादायी और कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व का साक्षात प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी तीनों सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को कड़ा सबक सिखाने का काम किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत रत्न परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा पुष्पित – पल्लवित उत्तराखण्ड, वर्ष 2047 तक “विकसित भारत के लिए विकसित उत्तराखण्ड” के मंत्र पर चलते हुए, एक समृद्ध और आत्मनिर्भर प्रदेश बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। साथ ही प्रधानमंत्री जी के प्रेरणादायी नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, G-20 सम्मेलन की बैठकों सहित 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य आयोजनों द्वारा भी बदलते उत्तराखण्ड की सुनहरी तस्वीर विश्व पटल पर प्रस्तुत की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ त्रासदी, सिलक्यारा टनल हादसा, ज्योतिर्मठ भूधंसाव या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रधानमंत्री जी ने संवेदनशीलता के साथ उत्तराखण्ड की जनता का साथ दिया है। प्रधानमंत्री जी के इसी स्नेहपूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन से उत्तराखण्ड कठिनाईयों से उबरकर एक नई शक्ति, नए संकल्प और नई ऊर्जा के साथ आज आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास के साथ – साथ राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता, पारंपरिक पहचान और डेमोग्राफिक संतुलन को संरक्षित रखने के लिए भी कार्य कर रही है। इसी क्रम में समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून, मदरसा बोर्ड की समाप्ति जैसे कार्यों से उत्तराखण्ड एक समरस समाज के निर्माण की दिशा में अग्रसर है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले हमारे वीर जवानों के साथ ही उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों को नमन करते हुए, प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की बधाई देने के साथ की।
इस मौके पर राज्यपाल ले. ज. श्री गुरमीत सिंह(से.नि.), केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टम्टा, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूड़ी, राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून स्थित शहीद स्थल कचहरी परिसर में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इसी क्रम मेंउत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस लाइन में आयोजित राज्य आंदोलनकारी सम्मान समारोह में राज्य आंदोलनकारियों और शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारजनों को सम्मानित किया। कचहरी परिसर शहीद स्थल और पुलिस लाइन देहरादून में इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारियों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण केवल राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि देवभूमि के लाखों लोगों के बलिदान, संघर्ष और तप का परिणाम है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी दर्दनाक घटनाएं हमारे इतिहास के अमर अध्याय हैं। राज्य निर्माण में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात बलिदानियों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देती रही है और देती रहेगी। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के लिए संचालित पेंशन एवं अन्य सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सहायता नहीं, बल्कि हमारी कृतज्ञता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री घोषणा
1.शहीद राज्य आन्दोलनकारियों के नाम पर उनके क्षेत्र की मुख्य अवस्थापना सुविधाओं का नामकरण किया जायेगा।
2 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान 7 दिन जेल गये अथवा राज्य आन्दोलन के दौरान घायल हुये आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 6 हजार रुपए से बढ़ाकर 7 हजार रुपए प्रतिमाह की जाएगी।
3 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान जेल गये या घायल श्रेणी से भिन्न अन्य राज्य आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 4500 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए प्रतिमाह की जाएगी।
4 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान विकलांग होकर पूर्णतः शय्याग्रस्त हुए राज्य आन्दोलनकारियों की पेंशन प्रतिमाह 20,000 हजार रूपए से बढ़ाकर 30,000 हजार रुपए की जाएगी और उनकी देखभाल के लिए मेडिकल अटेंडेंड की व्यवस्था भी की जाएगी।
5 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के दौरान शहीद हुये राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रितों की पेंशन प्रतिमाह 3000 रुपए से बढ़ाकर 5500 रुपए की जाएगी।
6 उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण हेतु वर्ष 2021 तक जिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्त लम्बित आवेदन पत्रों के निस्तारण हेतु छः माह का समय विस्तार प्रदान किया जायेगा।
7 समस्त शहीद स्मारकों का सौंदर्यीकरण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के योगदान को सदैव सम्मानपूर्वक याद रखेगी और उनकी भावना को प्रत्येक नीति एवं निर्णय में स्थान देगी। उन्होंने अपील की कि राज्य स्थापना दिवस पर प्रदेशवासी अपने घरों में पाँच दीपक राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति में अवश्य जलाएँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य आंदोलन की भावना ही हमारी प्रेरणा है। उन्होंने सभी से इस प्रयास में सहभागिता का आह्वान किया।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। इस टीम में उत्तराखंड की बेटी स्नेह राणा भी थी, जिन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन किया। सीएम धामी ने टीम की स्टार प्लेयर स्नेह राणा को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड की बेटियां देश को गौरवान्वित कर रही हैं और स्नेहा राणा का प्रदर्शन इसी का उज्ज्वल उदाहरण है। आज स्नेह दून पहुंची हैं।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी टीम के साथ उन्होंने मुलाकात की है। उनके साथ काफी अच्छा अनुभव उनका रहा है। उन्होंने टीम का हौसला बढ़ाया। वहीं राज्य स्थापना दिवस पर वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से भी मिल सकती हैं।
उन्हें लेने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे उनके बड़े भाई कमल राणा और उनकी भाभी ऋचा राणा ने कहा कि वर्ल्ड कप के लिए स्नेहा राणा ने काफी तैयारी की थी। कुछ समय पहले स्नेहाको चोट भी लगी थी। लेकिन इस चोट से उभर कर उन्होंने भारत को वर्ल्ड कप जिताया है। और पूरे विश्व में देहरादून और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
गर्मी बढ़ रही है, बिमारियाँ भी। मगर इलाज के लिए पैसा नहीं। adelphi की नई रिपोर्ट बताती है कि जिस वक्त जलवायु संकट हमारी सांसें, हमारी धड़कनें और हमारे शरीरों पर असर डाल रहा है, उसी वक्त दुनिया की हेल्थ फंडिंग अब भी ‘क्लाइमेट ब्लाइंड’ बनी हुई है।
रिपोर्ट का कहना है कि 2050 तक क्लाइमेट चेंज से 1.56 करोड़ लोगों की जान जा सकती है, लेकिन अब तक वैश्विक क्लाइमेट फाइनेंस का सिर्फ 0.5% हिस्सा ही हेल्थ सेक्टर तक पहुँचा है। 2004 से अब तक यह रकम कुल मिलाकर सिर्फ 173 मिलियन डॉलर रही है। यह कुल अनुकूलन फाइनेंस का महज़ 2% है।
मतलब साफ़ है, गर्मी तेज़ हो रही है, लेकिन फंडिंग की रफ़्तार अब भी सुस्त है।
जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ़ तापमान का मसला नहीं रहा, यह अब हमारे शरीरों तक पहुँच चुका है। adelphi की नई रिपोर्ट बताती है कि अगर दुनिया ने अब भी स्वास्थ्य व्यवस्था को जलवायु संकट के केंद्र में नहीं रखा, तो आने वाले समय में इसकी कीमत जानों से चुकानी पड़ सकती है।
adelphi की नई स्टडी “The Nexus of Adaptation and Health Finance” बताती है कि दुनिया के सबसे संवेदनशील देश, खासकर सब-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया, पहले से ही हीटवेव, संक्रमण और ढहते स्वास्थ्य तंत्र के बीच झूल रहे हैं।
“क्लाइमेट संकट अब हमारी सेहत के लिए सीधा खतरा है,” रिपोर्ट की सह-लेखिका मैथिल्ड विल्केन्स ने कहा। “हमें यह समझना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस ही हेल्थ फाइनेंस है। जब तक जलवायु फंडिंग को देशों की हेल्थ प्राथमिकताओं से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक रेज़िलिएंट हेल्थ सिस्टम्स बनाना असंभव है।”
देशों ने मांगा फंड, लेकिन पैसा नहीं पहुँचा
रिपोर्ट ने 2025 तक जमा हुए 67 नेशनल अडॉप्टेशन प्लान (NAPs) और उनके हेल्थ हिस्सों (HNAPs) का विश्लेषण किया। नतीजे चौंकाने वाले हैं
87% NAPs में हेल्थ प्राथमिकताएं शामिल हैं, 39% में हेल्थ के लिए अलग बजट तय है, लेकिन कुल 2.54 बिलियन डॉलर की इस ज़रूरत का सिर्फ 0.1% ही अब तक फाइनेंस हुआ है।
नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों ने जलवायु-तैयार स्वास्थ्य ढांचे की मजबूत योजना तो बनाई है, लेकिन फंडिंग की कमी से अमल अटका हुआ है।
बांग्लादेश के Center for Participatory Research and Development के प्रमुख एम.डी. शम्सुद्दोहा ने कहा, “हमारे जैसे देशों के लिए जलवायु संकट का मतलब है, नई बीमारियाँ, हीट स्ट्रेस, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और तबाह होती ज़िंदगियाँ। अगर ग्लोबल हेल्थ सेक्टर में निवेश नहीं बढ़ाया गया, तो हमारी नेशनल अडॉप्टेशन योजनाएँ सिर्फ़ कागज़ पर रह जाएँगी।”
कमज़ोर इलाकों तक नहीं पहुँच रहा पैसा
adelphi की रिपोर्ट दिखाती है कि जबकि कुल फाइनेंस का आधा हिस्सा Least Developed Countries तक तो पहुँचा, मगर सिर्फ 4% ही उन क्षेत्रों में गया जो संघर्ष या अस्थिरता से जूझ रहे हैं, यानी वहाँ जहाँ हेल्थ सिस्टम सबसे नाज़ुक हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि दक्षिण एशिया में एक भी देश-विशेष हेल्थ अडॉप्टेशन प्रोजेक्ट को अब तक फंडिंग नहीं मिली, जबकि यह क्षेत्र भविष्य के क्लाइमेट-रिलेटेड हेल्थ इम्पैक्ट्स का 18% झेलने वाला है।
कॉप30 से उम्मीदें: ‘अडॉप्टेशन कॉप’ में हेल्थ पर फोकस जरूरी
रिपोर्ट ऐसे वक्त पर आई है जब अगले हफ़्ते ब्राज़ील के बेलें में COP30 की शुरुआत होने वाली है, जिसे “अडॉप्टेशन कॉप” कहा जा रहा है। इस बार ब्राज़ील की प्रेसीडेंसी Belém Health Action Plan लॉन्च करने जा रही है, यानी जलवायु और स्वास्थ्य को जोड़ने की ठोस रूपरेखा।
adelphi ने रिपोर्ट में पाँच अहम सिफ़ारिशें दी हैं
1. हेल्थ और क्लाइमेट निवेश प्राथमिकताओं का पूरा संरेखण,
2. अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस तक बेहतर पहुंच,
3. ग्रांट-आधारित फाइनेंस ताकि कर्ज़ का बोझ न बढ़े,
4. सेक्टरों और संगठनों के बीच तालमेल,
5. और COP30 में Global Goal on Adaptation के लिए महत्वाकांक्षी संकेतक तय करना।
जहाँ सेहत है, वहीं भविष्य है
दुनिया अब उस मोड़ पर है जहाँ क्लाइमेट और हेल्थ का रिश्ता सिर्फ़ वैज्ञानिक नहीं, अस्तित्व का है।
अगर जलवायु फाइनेंस हेल्थ फाइनेंस नहीं बना, तो अस्पतालों की दीवारें तो खड़ी रहेंगी, लेकिन उनके भीतर इलाज की उम्मीदें ढह जाएँगी।
ब्राज़ील में होने वाला COP30 अब सिर्फ़ नेताओं की बातचीत नहीं, बल्कि करोड़ों जिंदगियों का सवाल है, कि क्या हम अपनी धरती को ही नहीं, अपनी सेहत को भी बचा पाएँगे?
गर्मी बढ़ रही है, बिमारियाँ भी। मगर इलाज के लिए पैसा नहीं। adelphi की नई रिपोर्ट बताती है कि जिस वक्त जलवायु संकट हमारी सांसें, हमारी धड़कनें और हमारे शरीरों पर असर डाल रहा है, उसी वक्त दुनिया की हेल्थ फंडिंग अब भी ‘क्लाइमेट ब्लाइंड’ बनी हुई है।
रिपोर्ट का कहना है कि 2050 तक क्लाइमेट चेंज से 1.56 करोड़ लोगों की जान जा सकती है, लेकिन अब तक वैश्विक क्लाइमेट फाइनेंस का सिर्फ 0.5% हिस्सा ही हेल्थ सेक्टर तक पहुँचा है। 2004 से अब तक यह रकम कुल मिलाकर सिर्फ 173 मिलियन डॉलर रही है। यह कुल अनुकूलन फाइनेंस का महज़ 2% है।
मतलब साफ़ है, गर्मी तेज़ हो रही है, लेकिन फंडिंग की रफ़्तार अब भी सुस्त है।
जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ़ तापमान का मसला नहीं रहा, यह अब हमारे शरीरों तक पहुँच चुका है। adelphi की नई रिपोर्ट बताती है कि अगर दुनिया ने अब भी स्वास्थ्य व्यवस्था को जलवायु संकट के केंद्र में नहीं रखा, तो आने वाले समय में इसकी कीमत जानों से चुकानी पड़ सकती है।
adelphi की नई स्टडी “The Nexus of Adaptation and Health Finance” बताती है कि दुनिया के सबसे संवेदनशील देश, खासकर सब-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया, पहले से ही हीटवेव, संक्रमण और ढहते स्वास्थ्य तंत्र के बीच झूल रहे हैं।
“क्लाइमेट संकट अब हमारी सेहत के लिए सीधा खतरा है,” रिपोर्ट की सह-लेखिका मैथिल्ड विल्केन्स ने कहा। “हमें यह समझना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस ही हेल्थ फाइनेंस है। जब तक जलवायु फंडिंग को देशों की हेल्थ प्राथमिकताओं से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक रेज़िलिएंट हेल्थ सिस्टम्स बनाना असंभव है।”
देशों ने मांगा फंड, लेकिन पैसा नहीं पहुँचा
रिपोर्ट ने 2025 तक जमा हुए 67 नेशनल अडॉप्टेशन प्लान (NAPs) और उनके हेल्थ हिस्सों (HNAPs) का विश्लेषण किया। नतीजे चौंकाने वाले हैं
87% NAPs में हेल्थ प्राथमिकताएं शामिल हैं, 39% में हेल्थ के लिए अलग बजट तय है, लेकिन कुल 2.54 बिलियन डॉलर की इस ज़रूरत का सिर्फ 0.1% ही अब तक फाइनेंस हुआ है।
नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों ने जलवायु-तैयार स्वास्थ्य ढांचे की मजबूत योजना तो बनाई है, लेकिन फंडिंग की कमी से अमल अटका हुआ है।
बांग्लादेश के Center for Participatory Research and Development के प्रमुख एम.डी. शम्सुद्दोहा ने कहा, “हमारे जैसे देशों के लिए जलवायु संकट का मतलब है, नई बीमारियाँ, हीट स्ट्रेस, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और तबाह होती ज़िंदगियाँ। अगर ग्लोबल हेल्थ सेक्टर में निवेश नहीं बढ़ाया गया, तो हमारी नेशनल अडॉप्टेशन योजनाएँ सिर्फ़ कागज़ पर रह जाएँगी।”
कमज़ोर इलाकों तक नहीं पहुँच रहा पैसा
adelphi की रिपोर्ट दिखाती है कि जबकि कुल फाइनेंस का आधा हिस्सा Least Developed Countries तक तो पहुँचा, मगर सिर्फ 4% ही उन क्षेत्रों में गया जो संघर्ष या अस्थिरता से जूझ रहे हैं, यानी वहाँ जहाँ हेल्थ सिस्टम सबसे नाज़ुक हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि दक्षिण एशिया में एक भी देश-विशेष हेल्थ अडॉप्टेशन प्रोजेक्ट को अब तक फंडिंग नहीं मिली, जबकि यह क्षेत्र भविष्य के क्लाइमेट-रिलेटेड हेल्थ इम्पैक्ट्स का 18% झेलने वाला है।
कॉप30 से उम्मीदें: ‘अडॉप्टेशन कॉप’ में हेल्थ पर फोकस जरूरी
रिपोर्ट ऐसे वक्त पर आई है जब अगले हफ़्ते ब्राज़ील के बेलें में COP30 की शुरुआत होने वाली है, जिसे “अडॉप्टेशन कॉप” कहा जा रहा है। इस बार ब्राज़ील की प्रेसीडेंसी Belém Health Action Plan लॉन्च करने जा रही है, यानी जलवायु और स्वास्थ्य को जोड़ने की ठोस रूपरेखा।
adelphi ने रिपोर्ट में पाँच अहम सिफ़ारिशें दी हैं
1. हेल्थ और क्लाइमेट निवेश प्राथमिकताओं का पूरा संरेखण,
2. अंतरराष्ट्रीय फाइनेंस तक बेहतर पहुंच,
3. ग्रांट-आधारित फाइनेंस ताकि कर्ज़ का बोझ न बढ़े,
4. सेक्टरों और संगठनों के बीच तालमेल,
5. और COP30 में Global Goal on Adaptation के लिए महत्वाकांक्षी संकेतक तय करना।
जहाँ सेहत है, वहीं भविष्य है
दुनिया अब उस मोड़ पर है जहाँ क्लाइमेट और हेल्थ का रिश्ता सिर्फ़ वैज्ञानिक नहीं, अस्तित्व का है।
अगर जलवायु फाइनेंस हेल्थ फाइनेंस नहीं बना, तो अस्पतालों की दीवारें तो खड़ी रहेंगी, लेकिन उनके भीतर इलाज की उम्मीदें ढह जाएँगी।
ब्राज़ील में होने वाला COP30 अब सिर्फ़ नेताओं की बातचीत नहीं, बल्कि करोड़ों जिंदगियों का सवाल है, कि क्या हम अपनी धरती को ही नहीं, अपनी सेहत को भी बचा पाएँगे?
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चल रही शीतलहर ने ठंड बढ़ा दी है। पिछले दिनों ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट आई है और शीत लहर चल रही है। मैदानी क्षेत्रों में भी सुबह के समय उथला कोहरा छा रहा है। जिसकी वजह से ठंड में बढ़ोतरी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार आज मैदानी इलाकों में सुबह हल्का कोहरा छाए रहने में संभावना है। जबकि 13 नवंबर तक प्रदेश भर में मौसम शुष्क रहेगा।
बता दें कि पर्वतीय जिलों में सामान्य तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है जिससे ठंड में बढ़ोतरी हुई है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने ठंड और शीत लहर से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है।
अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) आनंद स्वरूप ने सभी जनपदों के अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) ने निर्देश जारी किए हैं कि बेसहारा और जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए पर्याप्त संख्या में रैन बसेरों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रमुख स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जाए। रैन बसेरों में साफ सफाई के साथ ही हीटर, पानी गर्म करने की रॉड, बिस्तर और कंबल उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफ आर आई पहुंचकर राज्य के रजत उत्सव आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए हर्ष का विषय है कि हम राज्य स्थापना दिवस के रजत वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं। कहा कि हमारे राज्य को पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल जी ने बनाया और आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी इसको संवार रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री जी हमारे राज्य के इस रजत उत्सव में प्रतिभाग करने आ रहे हैं और हमारे राज्य को हमेशा से उनका सानिध्य मिलता रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने इन 25 वर्षों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और 2047 के विकसित भारत निर्माण की दिशा में हमारा राज्य अग्रणी भूमिका निभाने को तत्पर है।
उन्होंने जिला प्रशासन देहरादून, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों को रजत उत्सव की तैयारियों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजानदास, सहदेव पुंडीर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफ आर आई पहुंचकर राज्य के रजत उत्सव आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए हर्ष का विषय है कि हम राज्य स्थापना दिवस के रजत वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं। कहा कि हमारे राज्य को पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल जी ने बनाया और आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी इसको संवार रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि माननीय प्रधानमंत्री जी हमारे राज्य के इस रजत उत्सव में प्रतिभाग करने आ रहे हैं और हमारे राज्य को हमेशा से उनका सानिध्य मिलता रहता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने इन 25 वर्षों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और 2047 के विकसित भारत निर्माण की दिशा में हमारा राज्य अग्रणी भूमिका निभाने को तत्पर है।
उन्होंने जिला प्रशासन देहरादून, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों को रजत उत्सव की तैयारियों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजानदास, सहदेव पुंडीर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को राज्य के रजत जयंती उत्सव के अवसर पर पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वृहद कृषक सम्मेलन का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम में कृषि, उद्यान, दुग्ध, मत्स्य, सहकारिता के प्रगतिशील कृषक व लखपति दीदीयों को मुख्यमंत्री द्वारा प्रतीक चिन्ह, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र भेटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी भी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में आये सभी किसानों को उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती पर्व की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि किसान भाईयों का परिश्रम और त्याग ही हमारी सच्ची पूंजी है और उनका पसीना हमारी ताकत है।
उन्होंने उत्तराखंड निर्माण के सपने को साकार करने में अपना योगदान देने वाले और बीते 25 वर्षों में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले किसानो को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल कृषि संबंधी योजनाओं की चर्चा हेतु एक आम कार्यकम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के हमारे सभी किसान भाईयों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का भी अवसर है।
कहा कि देश व प्रदेश के संतुलित विकास के लिए यह आवश्यक है कि हमारे किसान भाइयों की परेशानियां कम हों, वे सशक्त बनें। किसानों के सशक्तिकरण के बिना राष्ट्र का सशक्तिकरण अधूरा है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विकसित भारत के निर्माण का सपना भी तभी साकार हो सकता है, जब हमारा किसान विकसित हो। हम सभी जानते हैं कि भारत आदि काल से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है।
कृषि मानव जीवन का आधार है-
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी के इर्द-गिर्द ही हमारा समाज विकसित हुआ, हमारी परम्पराएं पोषित हुईं और हमारे पर्व व त्योहार निर्धारित हुए। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में भी लिखा है कि कृषि संपत्ति और मेधा प्रदान करती है और कृषि ही मानव जीवन का आधार है। उन्होंने कहा कि उनके लिए तो खेती करना देव उपासना जैसा है, क्योंकि उनके पिता एक जवान भी थे और एक किसान भी। खेती द्वारा, लोगों का पेट भरने से जो संतुष्टि प्राप्त होती है, उसकी व्याख्या नहीं की जा सकती। यही कारण है कि वे आज भी खेती से जुड़े हैं और जब भी उन्हें समय मिलता है तो अपने गांव में खेती करने भी जाते हैं। उन्होंने कहा कि खेती से उन्हें आत्मिक शांति तो मिलती ही है साथ ही अपनी जमीन से भी जोड़े रखती है। माटी से ये जुड़ाव उन्हें सदैव उनके अस्तित्व, वांछित कर्म और कर्तव्य का बोध कराता है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना बनी किसानों के लिए वरदान-
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से आदरणीय प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों का जितना सशक्तिकरण हुआ है वो अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री जी का मत है कि देश के किसान का आत्मविश्वास देश का सबसे बड़ा सामर्थ्य है, और इसी को मूल मानकर केंद्र सरकार किसानों की दशा सुधारने और कृषि नीतियों को किसान केंद्रित बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर ये प्रयास है कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों के किसानों को जो आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं वो भारत के किसान को भी मिलें। प्रधानमंत्री जी का संकल्प है कि हमारे किसान के लिए बीज से बाजार तक की यात्रा ना केवल सुगम हो बल्कि ये उसकी आय में वृद्धि करने वाली भी हो। आज, देशभर के 11 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके अंतर्गत उत्तराखंड के भी लगभग 9 लाख के करीब अन्नदाताओं को सहायता राशि प्रदान की जा रही है।
किसानों का कल्याण हमारा संकल्प-
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना् के माध्यम से किसान को प्राकृतिक आपदाओं, फसल रोगों और कीटों से होने वाले नुकसान हेतु सुरक्षा कवच भी प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के द्वारा खेतों की मिट्टी की वैज्ञानिक जांच कर किसानों को पोषक तत्त्वों की कमी और आवश्यक उर्वरकों की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे उनकी उपज की गुणवत्ता और भूमि की उर्वरता दोनों में सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में हमारी राज्य सरकार भी प्रदेश के किसानों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु संकल्पित होकर निरंतर कार्य कर रही है। हम एक ओर जहां प्रदेश में किसानों को तीन लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं कृषि उपकरण खरीदेने हेतु फार्म मशीनरी बैंक योजना के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी प्रदान कर रहे हैं। यहीं नहीं, हमने किसानों के हित में नहरों से सिंचाई को पूरी तरह मुफ्त करने का काम किया है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए किये जा रहे प्रयास-
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पॉलीहाउस के निर्माण हेतु 200 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान भी किया है। इसके अंतर्गत अब तक राज्य में लगभग 115 करोड़ रुपए की सहायता से करीब 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम जहां एक ओर गेहूं खरीद पर किसानों को 20 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस प्रदान रहे हैं, वहीं हमने गन्ने के रेट में भी 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की है। इसके अतिरिक्त, हमने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सब्जियों की तरह ही फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। हमारी सरकार ने 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब नीति, कीवी नीति, स्टेट मिलेट मिशन और ड्रैगन फ्रूट नीति जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं को लागू किया है। उन्होंने कहा कि इन नीतियों के तहत बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों की उपज की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग-सॉर्टिंग यूनिट के निर्माण के लिए भी अनुदान प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 50 से अधिक मशरूम इकाईयां, 30 से अधिक मौनपालन इकाइयाँ, 30 कोल्ड चेन इकाइयाँ, 18 कोल्ड स्टोरेज, 5 सी.ए. स्टोरेज, 128 बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ, 1030 सूक्ष्म खाद्य उद्यम और 2 मेगा फूड पार्क स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि बागवानी मिशन योजना के अंतर्गत प्रदेश के कृषकों को पौधशाला स्थापना, संरक्षित खेती, औद्यानिक यंत्रीकरण, तुड़ाई उपरान्त प्रबंधन व प्रसंस्करण हेतु 50 से 55 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से फलों की उत्पादकता में ढाई गुना वृद्धि हुई है, जो पहले 1.82 मैट्रिक टन प्रति हैक्टेयर थी, वह अब 4.52 मैट्रिक टन हो गई है। मशरूम उत्पादन में आज उत्तराखण्ड देश में पाँचवें स्थान पर है। राज्य गठन के समय जहाँ मशरूम का उत्पादन मात्र 500 मैट्रिक टन उत्पादन था, वहीं आज यह बढ़कर 27,390 मैट्रिक टन हो गया है। इसी प्रकार शहद उत्पादन में भी राज्य देश में आठवें स्थान पर पहुँचा है और अब 3,320 मैट्रिक टन शहद का उत्पादन किया जा रहा है।
टी टूरिज्म को दिया जा रहा है बढ़ावा-
मुख्यमंत्री ने कहा कि बागवानी के समग्र विकास हेतु जापान सहयोगित उत्तराखण्ड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना के तहत 526 करोड़ रुपये की बाह्य सहायतित परियोजना टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपदों में लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सगंध पौधा केन्द्र द्वारा लैमनग्रास, मिन्ट, गुलाब, तेजपात, कैमोमिल जैसी फसलों को प्रोत्साहन देकर 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध खेती विकसित की गई है, जिससे 28,000 से अधिक कृषक 109 एरोमा क्लस्टरों के माध्यम से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि चाय उत्पादन में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य गठन के समय जहाँ केवल 196 हेक्टेयर में चाय की खेती होती थी, वहीं आज यह 1,585 हेक्टेयर तक विस्तृत हो चुकी है। अब प्रदेश में छः लाख किलोग्राम हरी पत्तियाँ उत्पादित हो रही हैं और लगभग डेढ़ लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि टी-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए चम्पावत के सिलिंगटॉग, नैनीताल के श्यामखेत व घोड़ाखाल, तथा बागेश्वर के कौसानी में चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ा गया है, जिससे स्थानीय युवाओं को नए रोजगार अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में हमारा प्रयास आत्मनिर्भर बने भारत-
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती वर्ष में हम उत्तराखंड का किसान-उत्तराखंड का गौरव के संदेश के साथ एक नई शुरुआत कर रहे हैं। उन्होंने सबसे आह्वान करते हुए कहा कि आइए, हम सभी मिलकर उत्तराखंड को समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक कृषि राज्य बनाएं। क्योंकि आपका परिश्रम, हमारी नीतियां और केंद्र सरकार का सहयोग, यही मिलकर हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ, समृद्ध और स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करेंगे, और उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के हमारे विकल्प रहित संकल्प को पोषित करने में सार्थक सिद्ध होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टालो का निरीक्षण भी किया।
किसान सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने अपने संबोधन में सभी को रजत जयंती की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितनी चिंता सीमा पर खड़े जवान की करते हैं, उतनी ही चिंता किसान की भी करते हैं। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में कृषि का अहम योगदान है और प्रधानमंत्री ने 10 करोड़ किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि भेजने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बागवानी के क्षेत्र में उत्तराखंड अब कश्मीर और हिमाचल के बाद तीसरे स्थान पर है। मंत्री जोशी ने कहा कि राज्य सरकार ने ड्रैगन फ्रूट, एप्पल, कीवी और मिलेट के लिए विशेष नीतियां तैयार की हैं ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि “किसान हमारे अन्नदाता हैं, किसान मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि धामी सरकार किसानों के कल्याण और उनकी आजीविका को दोगुना करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। समूहों के माध्यम से महिलाएं आजीविका संवर्धन का कार्य कर रही हैं और अब तक 1.65 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश दिनो दिन प्रगति कर रहा है व मुख्यमंत्री निरंतर कृषकों के बीच जाते रहते है व संवाद करते है। उन्होने कहा कि हमे दलगत राजनीति से उपर उठकर जनसमस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण करना होगा। उन्होने किच्छा में में औद्योगिक पार्क बनाये जाने के लिए आभार व्यक्त किया साथ ही उन्होने पंतनगर की जर्जर सड़कों की मरम्मत की घोषणा करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर दायित्वधारी अनिल कपूर डब्बू, बलराज पासी, उत्तम दत्ता, खतीब अहमद, महापौर विकास शर्मा, दीपक बाली, सचिव मुख्यमंत्री एवं कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, सचिव एसएन पाण्डे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल मंजूनाथ टीसी, सहित अनेक जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में कृषक बन्धु मौजूद थे।