रुद्रप्रयाग: जनपद रुद्रप्रयाग के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं को सूचित किया जाता है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर छात्रवृत्ति आवेदन की प्रक्रिया 30 सितम्बर 2025 तक खुली है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी टी०आर० मलेठा ने बताया कि पात्र छात्र-छात्राएँ समय पर पोर्टल के माध्यम से आवेदन करें ताकि किसी को भी छात्रवृत्ति से वंचित न रहना पड़े। उन्होंने जनपद के सभी शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों से भी अपेक्षा की है कि वे व्यक्तिगत रुचि रखते हुए छात्रों को छात्रवृत्ति आवेदन कराने में हर संभव सहयोग प्रदान करें।
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में जिन छात्र-छात्राओं का छात्रवृत्ति भुगतान आधार सीडिंग अथवा डीबीटी (DBT) एनेबल न होने के कारण लंबित है, वे शीघ्र ही अपने बैंक से सम्पर्क कर खाते को आधार सीडिंग एवं DBT एनेबल करा लें। संबंधित छात्र-छात्राओं की सूची शिक्षा विभाग एवं शैक्षणिक संस्थाओं को उपलब्ध करा दी गई है।
उत्तराखंड में आफत बनकर बरस रही बारिश से आगे भी कुछ दिनों तक राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। बारिश से सबसे ज्यादा पर्वतीय जिले प्रभावित हैं। कई जिलों में बारिश से नदी-नाले उफान पर पहुंच चुके हैं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए कुछ जिलों में बारिश का रेड अलर्ट और कुछ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। ऐसे में कुछ जिलों में 2 सितंबर मंगलवार को स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी के आदेश दिए गए हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने प्रदेश के देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल, उधम सिंह नगर जिलों में कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश होने के साथ कुछ स्थानों में भारी से भारी बारिश व गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना जताई है। जबकि उत्तरकाशी जिले के कुछ स्थानों में भारी से बहुत भारी बारिश गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना जताई है। ऐसे में इन जिलों में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है।
इन जिलों में छुट्टी के आदेश: बारिश की संभावना के चलते पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, उधमसिंह नगर, रुद्रप्रयाग, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, टिहरी, नैनीताल और चमोली जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 12 तक सरकारी, गैर सरकारी, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 2 सितंबर मंगलवार को बंद रखने के आदेश दिए हैं।
उत्तराखंड हाईकोर्ट में 14 अगस्त को नैनीताल जिला अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद के चुनाव में हुए बवाल, 5 सदस्यों का अपहरण, चुनाव में डाले गए एक मतपत्र में ओवरराइटिंग की शिकायत और जिला पंचायत चुनाव में री-पोलिंग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आयोग के द्वारा दायर शपथपत्र पर एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 9 सिंतबर की तिथि नियत की है।
आज मामले की सुनावई मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंजपीठ में हुई। मामले को लेकर दायर याचिका पर कहा गया कि एक मतपत्र में छेड़छाड़ हुई है। उसके क्रमांक 1 में ओवरराइटिंग कर उसे क्रमांक 2 लिख दिया गया, जिससे मतपत्र अमान्य घोषित कर दिया गया।
गुरुवार (28 अगस्त, 2025) को जारी नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स, जो 31 शहरों में 12,770 महिलाओं के सर्वेक्षण पर आधारित है, इसमें महिलाओं का राष्ट्रीय सुरक्षा स्कोर 65% रखा है जो कि एक कंपनी का निजी व स्वयं का आंकड़ा है। महिला आयोग का इस आंकड़े से कोई सम्बन्ध नही है।
बीते 28 अगस्त को दिल्ली में आयोजित एक निजी कम्पनी के नारी 2025 कार्यक्रम में पीवैल्यू एनालिटिक्स द्वारा तैयार सर्वे के आधार ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुअल्स एंड एकेडमिशियंस द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘नारी 2025’ का विमोचन किया गया है। पुस्तक में महिलाओं के लिए असुरक्षित शहरों की जारी सूची, जिस सर्वे यक आंकड़ों के आधार पर की गई है उससे महिला आयोग का राष्ट्रीय स्तर पर या राज्य स्तर पर कोई भी सम्बन्ध या ताल्लुक नही है।
इस मामले में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि यह बहुत ही निंदापूर्ण है कि केवल 12770 महिलाओं के आधार पर 31 शहरों में महिला असुरक्षा की स्तिथि को दर्शाया गया है, जिसे महिला आयोग नकारता है। क्योंकि देहरादून की महिलाएं अच्छे से जानती है कि यहां महिला सुरक्षा को लेकर सरकार, शासन प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अत्यंत संवेदनशील हैं और महिलाओं व बेटियों के साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि महिला असुरक्षा के नाम पर देहरादून की छवि को धूमिल करना पूरी तरह गलत है। महिला सुरक्षा की एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स (एनएआरआइ) का महिला आयोग से कोई ताल्लुक नही है।
अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने बताया कि इस पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर उपस्थित थी परंतु उन्होंने किसी भी प्रकार से सर्वे का समर्थन नही किया है। इस मामले में कुसुम कण्डवाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रहाटकर से फोन पर वार्ता कर जानकारी भी ली है जिस पर विजय किशोर रहाटकर का कहना है कि इस सर्वे या आंकड़ो से राष्ट्रीय महिला आयोग का कोई सम्बन्ध नही है ना ही यह रिपोर्ट राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा जारी की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि इस प्रकार के आंकड़ों के सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर देहरादून का नाम इस सूची में जोड़ा गया है उसकी रिपोर्ट आयोग तलब करेगा और इसमें आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।
जनपद रुद्रप्रयाग के आपदा प्रभावित क्षेत्र तालजामण में आज प्रभावित परिवारों को UREDA (उत्तराखण्ड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) द्वारा सोलर लालटेन उपलब्ध कराए गए। यह वितरण ग्राम प्रधान की उपस्थिति में किया गया। इस पहल से प्रभावित परिवारों को आपातकालीन स्थिति में ऊर्जा की सुविधा मिलेगी एवं रात्रि समय दैनिक जीवन में सहूलियत होगी।
जिला प्रशासन द्वारा आपदा प्रभावित गांवों में विद्युत व्यवस्था बाधित होने के कारण वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में सोलर लालटेन और सोलर होम लाइटिंग सिस्टम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र तालजामण में भी सोलर लाइटिंग सिस्टम लगाया गया है जिससे बच्चों एवं महिलाओं को राहत मिलेगी।
राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति
NDRF, SDRF एवं DDRF की टीमें छेनागढ़ क्षेत्र में लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
लगातार वर्षा के बीच राहत शिविरों में ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। प्रशासन एवं बचाव दल प्रभावितों को लगातार आश्वस्त कर रहे हैं कि हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
तालजामण में स्वास्थ्य शिविर लगातार संचालित है, जहां ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया जा रहा है।
कौशलपुर बसुकेदार एवं डांकोट में पेयजल आपूर्ति बहाली का कार्य जारी है।
डुंगर, बडेथ व तालजामण में आपदा प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण एवं क्षति का आंकलन तेजी से किया जा रहा है।
प्रशासन का संकल्प
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा।
एम्स के सिक्योरिटी गार्ड अब अपनी नियमित ड्यूटी करने के अलावा पाइप बैंड की शानदार धुन भी बजाते नजर आएंगे। हांलाकि बैंड द्वारा जोश और मनोबल बढ़ाने वाली देशभक्ति की यह मधुर धुन किसी विशिष्ट अतिथि के आगमन या राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर ही सुनने को मिलेगी।
हाल ही में 15 अगस्त को संस्थान की अपनी बैंड टोली इसका कुशल प्रदर्शन कर चुकी है। टोली में शामिल सभी पाइपर और ड्रमर उत्तराखण्ड के पूर्व सैनिक हैं और वर्तमान में एम्स के सुरक्षा विभाग में तैनात हैं।
राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर एम्स ऋषिकेश अब स्वयं का आर्मी बैंड उपयोग करेगा। इस बैंड में संस्थान के सिक्योरिटी विभाग में सेवाएं दे रहे 12 सुरक्षा कर्मी शामिल किए गए हैं जो भारतीय सेना में अपने सेवाकाल के दौरान से ही इस कला में निपुण रहे हैं। इस पाइप बैंड टोली में 2 बैंड मास्टर, 6 पाइपर, 2 बिगुलर, 1 बेस ड्रमर और 1 ट्रैनर ड्रमर शामिल हैं।
हाल ही में पिछले पखवाड़े 15 अगस्त को इस पाइप बैंड द्वारा अपनी पहली शानदार प्रस्तुति दी गयी। मौका था स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर संस्थान द्वारा परिसर के अंदरूनी मार्गों में निकाली गयी तिरंगा यात्रा का। इस दौरान संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो0 मीनू सिंह ने यात्रा की अगुवाई कर न केवल स्टाफ सदस्यों में जोश भरा अपितु पाइप बैंड टोली का भी उन्होंने भरपूर उत्साह वर्धन किया।
संस्थान के उप मुख्य सुरक्षा अधिकारी कमान्डेंट अनिल चन्द्र सिंह ने बताया कि बैंड में शामिल टोली के सदस्यों को ड्यूटी टाइम के अतिरिक्त समय में बैंड अभ्यास का अतिरिक्त प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशन में बैंड टोली को पूरी तरह निपुण बना दिया गया है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय पर्वों और अधिकारिक कार्यक्रमों के अवसर पर एम्स प्रशासन अभी तक आर्मी अथवा आईटीबीपी के माध्यम से पाइप बैन्ड की व्यवस्था करता था। बैंड टीम में बैगपाइपर व ड्रम आदि वाद्ययंत्रों के माध्यम से जोशपूर्ण मनमोहक धुन बजाने की विशेष कला होती है।
’’विशेष अवसरों पर आर्मी बैंड की आवश्यकता को देखते हुए यह व्यवस्था की गयी है। संस्थान में सेवा दे रहे सभी सुरक्षा गार्ड पूर्व में भारतीय सेना के अंग रहे हैं और इनमें से कुछ पाइप बैंड वाद्य यंत्रों के ज्ञाता हैं। सुरक्षा विभाग द्वारा पाइप बैंड के प्रति उत्साह और अनुभव को देखते हुए बैंड टोली बनाने का निर्णय लिया गया। ’’
आज़ादपुर मंडी की तंग गलियों में कदम रखते ही आपको सब्ज़ियों की गंध और गहमागहमी का शोर सुनाई देगा। ठेलेवाले दाम लगाते हैं, खरीदार झुंझलाते हैं—“भाई, ये टमाटर इतना महंगा क्यों?” दुकानदार कंधे उचकाता है, “साहब, बारिश ने सब चौपट कर दिया, माल ही नहीं आ रहा।”
यानी दामों के पीछे की असली कहानी कहीं खेतों में है, जहाँ जलवायु संकट अब सबसे बड़ा सौदागर बन बैठा है।
2023 का टमाटर झटका
हिमाचल और कर्नाटक—ये दोनों राज्य गर्मियों और बरसात में दिल्ली की थालियों को टमाटर सप्लाई करते हैं। लेकिन 2023 में यहाँ या तो बेमौसम बारिश हुई या फिर तेज़ धूप और फिर अचानक बाढ़।
हिमाचल में 10.9% टमाटर की पैदावार घटी।
कर्नाटक में 12.9% की गिरावट आई।
नतीजा ये हुआ कि जून में जो टमाटर दिल्ली में 18 रुपये किलो बिक रहा था, वो जुलाई आते-आते 67 रुपये किलो हो गया। मंडी में सप्लाई 400-500 टन से घटकर सिर्फ 318 टन रह गई।
आजादपुर मंडी के एक आढ़ती बताते हैं,
“बारिश में खेतों में ही फसल सड़ गई। जो माल आया भी, उसका रंग-रूप बिगड़ गया था। खराब क्वालिटी के कारण दाम गिरने चाहिए थे, पर सप्लाई इतनी कम थी कि दाम आसमान छू गए।”
प्याज़ की कड़वाहट
नवंबर 2023 में महाराष्ट्र में ओलावृष्टि और बारिश ने प्याज़ की खड़ी फसल बर्बाद कर दी।
उत्पादन में 28.5% की गिरावट आई।
दाम 30 रुपये से चढ़कर 39 रुपये किलो तक पहुँच गए।
याद कीजिए, यही प्याज़ 2010 और 2019 में भी सियासी संकट तक ला चुका है। इस बार भी गरीब परिवारों ने प्याज़ का इस्तेमाल कम कर दिया। कई घरों में चटनी, रायता और सब्ज़ी का स्वाद फीका पड़ गया।
आलू का ठंडा संकट
आलू को आमतौर पर “गरीब की थाली का सहारा” कहा जाता है। लेकिन 2023-24 में आलू भी महंगा हो गया।
पश्चिम बंगाल में बेमौसम बारिश,
उत्तर प्रदेश में ठंड और पाले ने 7% उत्पादन कम कर दिया।
आलू अगस्त 2024 में आज़ादपुर मंडी में औसतन 21 रुपये किलो बिका, जबकि पिछले तीन सालों में यही दाम 10-14 रुपये रहता था।
2024: सबसे गर्म साल
2024 ने तो जैसे सब्ज़ी बाजार को हिला दिया।
गर्मी का रिकॉर्ड टूटा।
बरसात बेमौसम हुई।
ओले और बाढ़ ने खेत उजाड़ दिए।
जुलाई 2023 में सब्ज़ी महंगाई 37% थी, तो अक्टूबर 2024 में यह 42% पहुँच गई। उपभोक्ता खाद्य महंगाई भी 11% तक चढ़ गई।
यानी जलवायु संकट ने सीधे-सीधे हमारी रसोई पर वार किया।
सबसे बड़ी चोट छोटे किसानों पर
भारत के ज़्यादातर टमाटर, प्याज़ और आलू छोटे और सीमांत किसान ही उगाते हैं। इनके पास न तो कोल्ड स्टोरेज है, न ट्रक, न ही बीमा।
एक किसान का कहना है,
“बारिश ज़्यादा हुई तो फसल गल जाती है, गर्मी पड़ी तो फूल ही झड़ जाते हैं। ऐसे में हम क्या करें? कर्ज़ लेकर बीज बोते हैं और कर्ज़ में ही दब जाते हैं।”
रसोई से निकलकर नीति तक
तो सवाल है—आखिर क्या किया जाए?
टमाटर जैसी फ़सलें ग्रीनहाउस में उगाई जा सकती हैं ताकि बारिश-धूप का असर कम हो।
किसानों को ठंडा गोदाम, रेफ़्रिजरेटेड ट्रांसपोर्ट और मंडियों तक तेज़ सप्लाई चेन मिले।
सरकार समय पर मौसम की जानकारी और दामों का अंदाज़ा किसानों तक पहुँचाए।
छोटे किसानों के लिए बीमा और पोषण सुरक्षा ज़रूरी है, ताकि नुकसान के बाद उनका घर-चूल्हा चल सके।
नतीजा
टमाटर, प्याज़ और आलू अब सिर्फ सब्ज़ियाँ नहीं रह गईं। ये मौसम की मार और जलवायु संकट की कहानियाँ हैं, जो हर घर की थाली तक पहुँच चुकी हैं। जिस तरह बारिश और गर्मी का खेल चल रहा है, आने वाले सालों में हमारी रसोई की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए रेलवे में शामिल होने का सुनहरा मौका है। रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) 2800 से ज्यादा वैकेंसी के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
रेलवे में कुल 2865 रिक्तियों के लिए आवेदन शुरू
दरअसल, रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) पश्चिम-मध्य रेलवे (WCR) 10वीं पास युवाओं की भर्ती करने जा रहा है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से अप्रेंटिस पदों पर कुल 2865 रिक्तियों को भरा जाएगा। आवदेन प्रक्रिया 30 अगस्त 2025 से शुरू हो चुकी है। योग्य उम्मीदवार आरआरसी की आधिकारिक वेबसाइट wcr.indianrailways.gov.in पर आवेदन कर सकते हैं।
मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम 50% अंकों के साथ 10वीं पास या इसके समकक्ष योग्यता रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। बशर्ते उनके पास संबंधित ट्रेड में ITI सर्टिफिकेट होना चाहिए। अगर आयु सीमा की बात करें तो 20 अगस्त 2025 तक उम्मीदवारों की उम्र 15 साल से अधिक और 24 साल से कम होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों के लिए प्रदेश के अधिकांश जनपदों के लिए जारी रेड तथा ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए शासन तथा जनपद स्तरीय अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने तथा 24×7 अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए।
इस दौरान उन्होंने कहा कि अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के सामने लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए समुचित कदम उठाए जाएं। भूस्खलन के दृष्टिगत मार्गों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा मैदानी क्षेत्रों में जल भराव की आशंका को देखते हुए सभी एहतियाती कदम उठाए जाएं। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से हर स्थिति पर नजर रखी जाए।
अब तक 11 जिलों में स्कूल की छुट्टी घोषित-
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए अब तक 11 जिलों में सोमवार को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, गैर-सरकारी/निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। पौड़ी, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, अल्मोड़ा, चमोली, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और उत्तरकाशी जिले में अब तक छुट्टी घोषित की गई है।
रविवार को मुख्यमंत्री ने शासन तथा जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत बचाव कार्यों का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आपदाओं में बेघर हो गए हैं, सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उनके बेहतर से बेहतर पुनर्वास के लिए हर स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दोनों मंडलायुक्तों को निर्देश दिए कि आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए शीघ्रता से कार्य करते हुए मैदानी जनपदों में पुनर्वास किए जाने के विकल्पों पर भी कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में हम सभी प्रभावित भाइयों-बहनों की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। राज्य सरकार केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि हम उनकी भावनाओं और संवेदनाओं से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से भी अपेक्षा की कि उनके दुख को अपना दुख मानकर, उनके पुनर्वास और जीवन को सामान्य बनाने के लिए पूर्ण मनोयोग से कार्य करें।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनपदों में अधिकारी फील्ड में रहें और राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित करें। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में सचिव गृह श्री शैलेश बगौली, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव श्री आनंद स्वरूप, एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, श्री हेमंत बिष्ट, रोहित कुमार आदि मौजूद रहे। वहीं प्रमुख सचिव श्री आरके सुधांशु, सचिव लोनिवि पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार, मंडलायुक्त श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री दीपक रावत बैठक में वर्चुअल शामिल हुए।
तमक में बैली ब्रिज जल्द बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ-मलारी नेशनल हाईवे में तमक नाले में बहे पुल को लेकर बीआरओ के अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह पुल राज्य के साथ ही देश के लिए भी सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां जल्द से जल्द बैली ब्रिज बनाकर यातायात को सुचारू किया जाए। उन्होंने कहा बीआरओ को यदि राज्य के स्तर से किसी भी प्रकार की मदद की दरकार है तो वह तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग श्री पंकज कुमार पांडेय को बीआरओ के अधिकारियों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए।
गंगोत्री हाईवे को यातायात के लिए सुरक्षित बनाया जाए
मुख्यमंत्री ने यात्रा प्रारंभ होने से पहले गंगोत्री हाइवे को सुरक्षित बनाने तथा बेहतर स्थिति में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से यात्री एक भरोसे के साथ चार धाम यात्रा के लिए आते हैं, उनकी यात्रा को सुरक्षित बनाना हमारा कर्तव्य है, इसमें ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनः दोहराया कि बरसात समाप्त होने के बाद सभी सड़कों में पेचवर्क तथा नई सड़क बनाने का कार्य हर हाल में प्रारंभ हो जाए। इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि टेंडर तथा अन्य जो भी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं, उन्हें इसी बीच पूरा कर लिया जाए।
हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में रिवर चैनेलाइजेशन जरूरी
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी के हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में बनी झीलों की स्थिति तथा जल निकासी के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्यानाचट्टी में झील के जलस्तर में पुनः वृद्धि की सूचना मिली है, वहां 24×7 नजर रखी जाए तथा राहत एवं बचाव दल हर वक्त वहां तैनात रहें। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुल को किसी प्रकार का खतरा न हो। उन्होंने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को निर्देश दिए कि झील के जलस्तर को कम करने तथा अधिक मात्रा में झील से जल निकासी के लिए समुचित प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्यानाचट्टी के लोगों की सभी आवश्यकताओं का ख्याल रखने तथा बिजली पानी की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। माननीय मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिसे नदी से हटाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने सुरक्षित स्थानों पर मड डिस्पोजेबल साइट्स बनाने तथा वहां मलबे को डंप करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजने को भी कहा है।
नदियों के जलस्तर पर रात्रि में भी रखी जाए नजर
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अगले कुछ दिनों में नदियों के जलस्तर पर गहन निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय भी पहाड़ी तथा मैदानी इलाकों में नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखी जाए। लोगों को सचेत किया जाए और कोई भी खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।
देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार के लिए रेड अलर्ट
दिनांक 01.09.2025 को राज्य के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, तथा हरिद्वार जनपदों में कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने के साथ कुछ स्थानों में भारी से बहुत भारी वर्षा/गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने/वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (रेड अलर्ट)। साथ ही राज्य के शेष जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा / गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने /वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (ऑरेंज अलर्ट)। वहीं दिनांक 02.09.2025 को राज्य के देहरादून, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली एवं बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा/गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने/ वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (ऑरेंज अलर्ट)।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों के लिए प्रदेश के अधिकांश जनपदों के लिए जारी रेड तथा ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए शासन तथा जनपद स्तरीय अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने तथा 24×7 अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए।
इस दौरान उन्होंने कहा कि अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के सामने लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले कुछ दिन चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए समुचित कदम उठाए जाएं। भूस्खलन के दृष्टिगत मार्गों में विशेष सतर्कता बरती जाए तथा मैदानी क्षेत्रों में जल भराव की आशंका को देखते हुए सभी एहतियाती कदम उठाए जाएं। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से हर स्थिति पर नजर रखी जाए।
अब तक 11 जिलों में स्कूल की छुट्टी घोषित-
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए अब तक 11 जिलों में सोमवार को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, गैर-सरकारी/निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। पौड़ी, टिहरी, नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, अल्मोड़ा, चमोली, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और उत्तरकाशी जिले में अब तक छुट्टी घोषित की गई है।
रविवार को मुख्यमंत्री ने शासन तथा जिले के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत बचाव कार्यों का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग आपदाओं में बेघर हो गए हैं, सरकार उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और उनके बेहतर से बेहतर पुनर्वास के लिए हर स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दोनों मंडलायुक्तों को निर्देश दिए कि आपदा प्रभावितों के पुनर्वास के लिए शीघ्रता से कार्य करते हुए मैदानी जनपदों में पुनर्वास किए जाने के विकल्पों पर भी कार्य करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस कठिन घड़ी में हम सभी प्रभावित भाइयों-बहनों की पीड़ा को गहराई से समझते हैं। राज्य सरकार केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि हम उनकी भावनाओं और संवेदनाओं से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से भी अपेक्षा की कि उनके दुख को अपना दुख मानकर, उनके पुनर्वास और जीवन को सामान्य बनाने के लिए पूर्ण मनोयोग से कार्य करें।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनपदों में अधिकारी फील्ड में रहें और राहत और बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित करें। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में सचिव गृह श्री शैलेश बगौली, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव श्री आनंद स्वरूप, एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, श्री हेमंत बिष्ट, रोहित कुमार आदि मौजूद रहे। वहीं प्रमुख सचिव श्री आरके सुधांशु, सचिव लोनिवि पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर राजेश कुमार, मंडलायुक्त श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री दीपक रावत बैठक में वर्चुअल शामिल हुए।
तमक में बैली ब्रिज जल्द बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ-मलारी नेशनल हाईवे में तमक नाले में बहे पुल को लेकर बीआरओ के अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह पुल राज्य के साथ ही देश के लिए भी सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां जल्द से जल्द बैली ब्रिज बनाकर यातायात को सुचारू किया जाए। उन्होंने कहा बीआरओ को यदि राज्य के स्तर से किसी भी प्रकार की मदद की दरकार है तो वह तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने सचिव लोक निर्माण विभाग श्री पंकज कुमार पांडेय को बीआरओ के अधिकारियों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए।
गंगोत्री हाईवे को यातायात के लिए सुरक्षित बनाया जाए
मुख्यमंत्री ने यात्रा प्रारंभ होने से पहले गंगोत्री हाइवे को सुरक्षित बनाने तथा बेहतर स्थिति में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से यात्री एक भरोसे के साथ चार धाम यात्रा के लिए आते हैं, उनकी यात्रा को सुरक्षित बनाना हमारा कर्तव्य है, इसमें ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पुनः दोहराया कि बरसात समाप्त होने के बाद सभी सड़कों में पेचवर्क तथा नई सड़क बनाने का कार्य हर हाल में प्रारंभ हो जाए। इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि टेंडर तथा अन्य जो भी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं, उन्हें इसी बीच पूरा कर लिया जाए।
हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में रिवर चैनेलाइजेशन जरूरी
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी के हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में बनी झीलों की स्थिति तथा जल निकासी के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्यानाचट्टी में झील के जलस्तर में पुनः वृद्धि की सूचना मिली है, वहां 24×7 नजर रखी जाए तथा राहत एवं बचाव दल हर वक्त वहां तैनात रहें। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुल को किसी प्रकार का खतरा न हो। उन्होंने जिलाधिकारी उत्तरकाशी को निर्देश दिए कि झील के जलस्तर को कम करने तथा अधिक मात्रा में झील से जल निकासी के लिए समुचित प्रयास किए जाएं। उन्होंने स्यानाचट्टी के लोगों की सभी आवश्यकताओं का ख्याल रखने तथा बिजली पानी की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। माननीय मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दोहराया कि हर्षिल तथा स्यानाचट्टी में काफी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिसे नदी से हटाया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने सुरक्षित स्थानों पर मड डिस्पोजेबल साइट्स बनाने तथा वहां मलबे को डंप करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजने को भी कहा है।
नदियों के जलस्तर पर रात्रि में भी रखी जाए नजर
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अगले कुछ दिनों में नदियों के जलस्तर पर गहन निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात्रि के समय भी पहाड़ी तथा मैदानी इलाकों में नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखी जाए। लोगों को सचेत किया जाए और कोई भी खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।
देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार के लिए रेड अलर्ट
दिनांक 01.09.2025 को राज्य के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, तथा हरिद्वार जनपदों में कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने के साथ कुछ स्थानों में भारी से बहुत भारी वर्षा/गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने/वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (रेड अलर्ट)। साथ ही राज्य के शेष जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा / गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने /वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (ऑरेंज अलर्ट)। वहीं दिनांक 02.09.2025 को राज्य के देहरादून, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, चमोली एवं बागेश्वर जनपदों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा/गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने/ वर्षा के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर होने की संभावना है (ऑरेंज अलर्ट)।