Category: उत्तराखंड

  • आपदा प्रभावित कनलगढ़ घाटी का दौरा – सरकार पीड़ितों के साथ, राहत व पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

    आपदा प्रभावित कनलगढ़ घाटी का दौरा – सरकार पीड़ितों के साथ, राहत व पुनर्वास कार्य युद्धस्तर पर जारी

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी शनिवार को दोपहर 1 बजे हेली से अस्थाई हेलीपैड मालूखेत पहुंचे। वहां से लंबी पैदल यात्रा कर वे सड़क मार्ग तक पहुंचे और तत्पश्चात कार द्वारा सीधे आपदा प्रभावित क्षेत्र पौंसरी पहुंचे। मुख्यमंत्री जी ने ग्रामीणों से भेंट कर उनका हालचाल जाना तथा आश्वासन दिया कि प्रभावितों को नियमानुसार हर संभव सहायता दी जाएगी।

    उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी मजबूती से आप सभी के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बागेश्वर के आपदा प्रभावित क्षेत्र पौंसरी में ग्रामीणों से भेंट कर उनका हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावितों को हर संभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी मजबूती से प्रभावितों के साथ खड़ी है। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बैसानी में आपदा प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना।

    मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी बागेश्वर आशीष भटगांई से प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे राहत कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि 29 अगस्त को अतिवृष्टि से पौंसरी के खाईजर तोक में 05 मकान मलबे में दब गए। वहां रहने वाले 06 व्यक्तियों में से 05 मलबे में दब गए और 01 व्यक्ति सुरक्षित मिला।

    अब तक तीन शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि शेष दो की खोज में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर टीम, ड्रोन, डॉग स्क्वाड और विक्टिम लोकेटिंग कैमरे की मदद से अभियान जारी है। प्रभावितों को राहत राशि वितरित कर दी गई है तथा सभी आवश्यक सेवाएं सुचारू कर दी गई हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में नुकसान का आकलन कर पुनर्वास प्रक्रिया को गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त पिटकुल के 132 केवी सब स्टेशन को दुरुस्त करने के लिए 52 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    इस अवसर पर विधायक श्री सुरेश गढ़िया, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर घोड़के, प्रभागीय वनाधिकारी आदित्य रत्ना, मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी, अपर जिलाधिकारी एन.एस. नबियाल, उपजिलाधिकारी प्रियंका रानी, अनिल सिंह रावत, ललित मोहन तिवारी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: मुख्यमंत्री

    जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा: मुख्यमंत्री

    देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में उच्चस्तरीय बैठक के दौरान निर्देश दिये कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने प्रदेश में नकली दवाइयों के निर्माण और बिक्री को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए जिलाधिकारियों, पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग को संयुक्त रूप से सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि नकली दवाओं का कारोबार करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि धराली आपदा से प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान तथा उनके पुनर्वास, राहत और आजीविका की व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि सचिव राजस्व की अध्यक्षता में गठित समिति अपनी रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करे। समिति की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश के अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर पुनर्वास और राहत कार्य किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में व्यापक स्तर पर स्वदेशी अभियान चलाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यह अभियान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रिगण, प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों से भी स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

    उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी खरीद में स्वदेशी उत्पादों और उपकरणों को प्राथमिकता दी जाए। सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में स्थानीय उत्पादों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित किया जाए। जीएसटी स्लैब में हाल ही में हुए परिवर्तनों से स्वदेशी उत्पादों को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अग्निवीरों के लिए समुचित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। इसके लिए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने किये जाएं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अपने दृष्टि पत्र में प्रदेश की जनता के समक्ष जो वायदे किये थे, उनको पूरा करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जनहित में लिये गये सभी संकल्पों को पूरा करने के लिए और तेजी से कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि जन भावनाओं और और जन आंकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार दृढ़ संकल्प होकर कार्य कर रही है।

    बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, सचिव एवं गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी मौजूद थे।

  • देहरादून में जिला पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न

    देहरादून में जिला पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों का शपथ ग्रहण समारोह संपन्न

    देहरादून जिला पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सुखविंदर कौर, उपाध्यक्ष अभिषेक सिंह सहित नव निर्वाचित जिला पंचायत सदस्यों ने शुक्रवार को अपने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

    जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिला पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष को शपथ दिलाई। इसके बाद जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली। समारोह में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सदस्यों को शुभकामनाएं दी। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चकराता विधायक प्रीतम सिंह आदि मौजूद थे।

  • शिक्षक दिवस पर भाजपा कैंट विधानसभा द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षकों को किया गया सम्मानित

    शिक्षक दिवस पर भाजपा कैंट विधानसभा द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षकों को किया गया सम्मानित

    भारतीय जनता पार्टी कैंट विधानसभा के सरदार पटेल मंडल द्वारा शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर मंडल अध्यक्ष आशीष शर्मा के नेतृत्व में एक भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। दीप प्रज्वलन मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विशिष्ट अतिथि कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर एवं भाजपा महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ उमेश अग्रवाल द्वारा किया गया।

    कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिससे वातावरण श्रद्धा और ज्ञान से ओतप्रोत हो गया।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी जी के द्वारा सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि शिक्षक का जीवन में महत्व शिक्षकों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक शिक्षक न केवल ज्ञान का संचार करता है, बल्कि छात्रों में नैतिक मूल्यों की स्थापना, सही-गलत का भेद समझाने और उन्हें जीवन की दिशा देने में भी अहम भूमिका निभाता है। “शिक्षक ही समाज की नींव हैं, जिनके प्रयासों से राष्ट्र का भविष्य आकार लेता है।”

    महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि “हमें अपने गुरुजनों के साथ संपर्क बनाए रखना चाहिए और जीवन के विशेष पलों में उन्हें शामिल कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। पूर्व समय से ही समाज की सही रचना में शिक्षकों का अपना एक अहम योगदान देता है एक शिक्षक के द्वारा एक सही पीढ़ी सही समाज की रचना होती है।

    कार्यक्रम में कैंट विधानसभा विधायक समिति सभी का कपूर ने भी सभी अतिथियों का अभिनंदन किया एवं सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज शिक्षक कल की भविष्य को जन्म देता है और सही शिक्षक की जीवन की सही रहा बताते हैं।

    इस अवसर पर सभी उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं (रूपवती देवी, नीरज मेहता, सलेक चन्द्र, नीरजा पांडे, के ऐन सिंह, प्रभा रानी, राजरानी अग्रवाल, सुदेश आनंद आदि)को शाल ओढ़ाकर तथा प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया।

    कार्यक्रम में महानगर उपाध्यक्ष राजेंद्र ढिल्लो, महामंत्री विजेन्द्र थपलियाल, सुमन सिंह महानगर उपाध्यक्ष महिला मोर्चा सुमन सिंह, महानगर अध्यक्ष किसान मोर्चा प्रदीप दुग्गल, मंडल महामंत्री मनोज कंबोज, अजय सिंह उपाध्यक्ष, विनोद तोमर, रेखा निगम, संजू गुप्ता, मंत्री सुंदरेश्वर ठाकुर, रवि राठौर , शिखा वशिष्ठ, सुषमा पंवारमंडल मीडिया प्रभारी राज डिमरी, आईटी संयोजक जगमोहन जी सोशल मीडिया संयोजक ऐश्वर्या खंडूरी , कुलदीप पंत, राहुल जुयाल, नीरज रतूड़ी मुकेश डबराल, राकेश चौहान तथा मंडल के सभीवर्तमान और पूर्व पदाधिकारीगण, तथा पार्षदगण बबीता गुप्ता, रजनी देवी, मीनाक्षी मौर्य,शक्ति केंद्र संयोजक, बूथ अध्यक्ष और पार्टी के सभी ज्येष्ठ , श्रेष्ठ कार्यकर्तागण उपस्थित रहे।

  • डेमोग्रॉफी बदलाव से सुरक्षा की दृष्टि से सजग होने की जरूरत : बजाज

    डेमोग्रॉफी बदलाव से सुरक्षा की दृष्टि से सजग होने की जरूरत : बजाज

    सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्रॉफी बदलाव सामरिक एवं सुरक्षा की दृष्टि से एक गंभीर चुनौती सिद्ध हो सकती है। उत्तर पूर्व के क्षेत्रों में आज हिंदू आबादी पूर्णतः अल्पसंख्यक हो चुकी है। बिहार, बंगाल और बांग्लादेश सीमा का त्रिकोण जिसको चिकननेक कहा जाता है, वहां डेमोग्रॉफी तेजी से परिवर्तित हो रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी तेजी से बदलाव हुआ है जो सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भी कई गंभीर प्रश्न उत्पन्न करता है। इसका नियंत्रण सरकार के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे क्योंकि ऐसे बदलावों से कोस्टल एरिया भी अछूता नहीं है।
    यह बातें सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडी के निदेशक पद्मश्री डॉ जतिंदर कुमार बजाज ने कही।

    वह शुक्रवार को गंगा शोध केन्द्र द्वारा आर्यावर्त संस्था एवं देवभूमि विचार मंच (प्रज्ञा प्रवाह) के संयुक्त तत्वावधान में दून विश्वविद्यालय में “जनसांख्यिकी असंतुलन : वर्तमान और भविष्य हिमालयी राज्यों के विशेष सन्दर्भ में विषय पर आयोजित कार्यशाला को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। बजाज ने बताया कि जनसंख्या बदलाव को ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो इसकी शुरुआत मुगलकाल से हुई, जो लगातार बढ़ता गया। ब्रिटिश शासनकाल में यह और तेजी से बढ़ा। विभाजन के समय इसमें थोड़ी गिरावट आई लेकिन उसके बाद यह स्थिति तेजी से बदलती रही, बढ़ती रही।
    उन्होंने कहा कि भारतीय धर्मों (हिन्दू, सिक्ख, जैन, बौद्ध) की प्रजनन दर मुस्लिम जनसंख्या की प्रजनन दर के अनुपात में लगातार बहुत घट रही है। मुस्लिम जनसंख्या का अधिकांश घनत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी बिहार, झारखंड का कुछ भाग, पश्चिम बंगाल का उत्तर-पूर्वी भाग, असम का पश्चिमी एवं दक्षिण-पूर्वी भाग में है।

    इसाई जनसंख्या की बहुतायत एवं प्रतिशत वृद्धि दर में पूर्वोत्तर के राज्य, केरल एवं तमिलनाड़ू प्रमुख हैं। भारत का स्थानीय परिवेश पूर्व से ही स्वशासन पर कार्य करने वाला और व्यवसाय में मात्र कृषि केंद्रित नहीं रहा है। उन्होने डेमोग्रॉफी बदलाव के एक सदी के आंकड़े पेश किए।
    इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान व अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता दून विश्वविद्यालय कुलपति की प्रो० सुरेखा डंगवाल ने की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या असंतुलन एक बड़ी गंभीर समस्या है। जनसंख्या असंतुलन के आँकड़ों का वैज्ञानिक रूप से निरीक्षण एवं अध्ययन किया जाना अत्यंत आवश्यक है। जनसंख्या असंतुलन लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।

    विशिष्ट वक्ता सुरेश सुयाल रहे। कार्यक्रम में भगवती प्रसाद ‘राघव’ (क्षेत्र संयोजक, उत्तरप्रदेश व उत्तराखण्ड, प्रज्ञा प्रवाह) एवं डॉ देवेन्द्र भसीन (उपाध्यक्ष, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति) रहे। कार्यक्रम संयोजक प्रो० रीना चन्द्रा ने मंच संचालन किया।

    डॉ० अंजलि वर्मा (प्रान्त संयोजक, देवभूमि विचार मंच) ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह राष्ट्रीय पुनर्जागरण, भारतीयता के भाव को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। भारत की सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक स्तर पर प्रकट करना इसका प्रमुख कार्य है। उत्तराखंड में चार शोध केंद्रों के माध्यम से पर्यावरण, पलायन, जनसंख्या असंतुलन, महिला एवं युवा इत्यादि विषयों पर कार्य किया जा रहा है।

    डॉ० देवेंद्र भसीन ने कहा कि इस्लाम का होता विस्तार संपूर्ण विश्व के लिए बड़ा खतरा है। जनसंख्या असंतुलन लंबे समय से साजिश के तहत किया जा रहा है। उत्तराखंड में सरकार ने 400 से अधिक अवैध मजारे ध्वस्त की हैं। साथ ही 7500 हेक्टेयर से अधिक भूमि इसी तरह के अवैध कब्जे से मुक्त कराई है।

    सुरेश सुयाल ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन का प्रभाव उत्तराखंड में बढ़ रहा है। इसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन के साथ सामाजिक सजगता के साथ कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। दैशिक शास्त्र के सूत्र अधिजनन अर्थात् नई पीढ़ी का सदृढ़ विकास कैसे हो, अध्यापन अर्थात् नई पीढ़ी कैसे समाज-योग्य बने एवं अधिगमन अर्थात् नई पीढ़ी किस प्रकार जीवन में ब्रह्मचर्य, वानप्रस्थ, युद्ध आदि विषयों का प्रयोग कर सनातन संस्कृति को सशक्त करे, इस पर कार्य होना चाहिए।

    गंगा शोध केंद्र के निदेशक डॉक्टर विकास सारस्वत ने डेमोग्राफिक में परिवर्तन व पलायन पर अपने विचार रखें। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता देवभूमि विचार मंच के अध्यक्ष डा़ पृथ्वीधर काला ने की। उन्होंने डेमोग्राफिक परिवर्तन से वर्तमान और भविष्य के खतरों से रूबरू कराया।
    कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर डॉक्टर रीना चंद्रा ने किया।

    कार्यशाला में गंगा शोध केन्द्र के उप निदेशक डॉ रवि दीक्षित, डॉ एचएच पुरोहित, विशाल वर्मा, प्रो आरपी ममगाई, डॉ राजेश भटट, एकता त्रिपाठी, डॉ सुनेना रावत, प्रो विजय श्रीवास्तव, प्रो सुनित कुडियाल, प्रो एचडी भटट, डॉ देव जैसाली, डॉ बसुंधरा उपाध्याय रुद्रपुर सहित प्रदेश भर से बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में शोध छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

  • राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से किया सम्मानित

    राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से किया सम्मानित

    देहरादून: शिक्षक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राजभवन में ‘‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार’’ सम्मान समारोह आयोजित हुआ। समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने वर्ष-2024 में शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कारों के लिए चयनित 16 शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को सम्मानित किया। वर्ष-2024 में चयनित 09 प्रारम्भिक शिक्षक, 05 माध्यमिक शिक्षक, 01 शिक्षक प्रशिक्षक एवं 01 संस्कृत शिक्षक को यह सम्मान प्रदान किया गया है। (सूची संलग्न)

    राज्यपाल ने पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे शिक्षक समाज की मेहनत और तपस्या का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले ही नहीं, बल्कि चरित्र, नैतिकता और जीवन मूल्यों के निर्माता होते हैं। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, अध्यापक बच्चों को संस्कारवान, जिम्मेदार और राष्ट्रभक्त नागरिक बनाने में योगदान दें।

    राज्यपाल ने कहा कि माता-पिता के बाद गुरु ही बच्चों के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं और बच्चों का भविष्य सही दिशा में ले जाने में उनकी सबसे बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने में शिक्षकों का योगदान निर्णायक रहेगा। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड शिक्षा का एक प्रमुख केन्द्र रहा है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि हम इस परंपरा को और मजबूत बनाएं।

    राज्यपाल ने कहा कि आज के इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों को भटकाव से बचाने, उनमें विवेक और सही जीवन-दृष्टि विकसित करने का कार्य भी शिक्षक ही कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत विकसित करें और उन्हें खेल, संस्कृति तथा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें।

    मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने अनुभव, ज्ञान और परिश्रम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को संवारने की शिक्षकों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। मुख्यमंत्री ने शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शैलेश मटियानी पहाड़ के दर्द और संवेदनाओं को गहराई से समझने वाले कथाकार थे। उन्होंने कथा-साहित्य के साथ-साथ गद्य और सामयिक चिंतन में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। शैलेश मटियानी जी ने भी अपनी कहानियों और उपन्यासों में उत्तराखण्ड के पर्वतीय इलाकों और ग्रामीणों के संघर्ष को शब्दों के माध्यम से पिरोया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राचीन परंपरा से ही गुरु को केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पथ प्रदर्शक माना जाता है। वे शिष्यों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नैतिकता और संस्कारों के बीज को रोपित करने का कार्य करते हैं। आज इस डिजिटल युग के बदलते दौर में शिक्षकों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, जो हमारे बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों से परिचित कराते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए भी विशेष योजनाएं प्रारंभ की हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने का कार्य देश में सबसे पहले उत्तराखण्ड ने किया। राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत कर प्रदेश में शैक्षिक क्रांति प्रारंभ की। उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ बुनियादी शिक्षा के लिए ‘राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा’ तैयार की गई है। बच्चों में कौशल, उद्यमिता और भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित करने के लिए ’कौशलम कार्यक्रम’ भी प्रारंभ किया गया है।

    शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के 1340 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासें और 950 विद्यालयों में स्मार्ट क्लासें शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सभी जिलों में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। इस वर्ष 550 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू कर दिया गया और प्रदेश के 22 हजार प्राथमिक शिक्षकों को टेबलेट प्रदान किए गए है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस वर्ष शिक्षा विभाग में लगभग 9500 भर्तियां की जा रही है।

    कार्यक्रम में सचिव विद्यालयी शिक्षा रविनाथ रामन ने सम्मान समारोह में उपस्थित लोगों का स्वागत किया और सम्मान समारोह की विस्तृत जानकारी दी। अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा रंजना राजगुरु ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में स्वर्गीय शैलेश मटियानी के सुपुत्र श्री राकेश मटियानी एवं श्रीमती गीता मटियानी, शिक्षा विभाग के अन्य उच्च अधिकारीगण और पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री धामी ने डॉ. राधाकृष्णन की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

    मुख्यमंत्री धामी ने डॉ. राधाकृष्णन की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

    देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं विचारक भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन ने शिक्षा के माध्यम से समाज में मूल्यों, संस्कारों और ज्ञान का आलोक फैलाया। उनका जीवन दर्शन हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देशभर के समर्पित शिक्षकों को भी शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण के सशक्त स्तंभ हैं और आने वाली पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 12.5% की कमी, मुख्यमंत्री धामी ने जताई प्रसन्नता

    मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) में 12.5% की कमी, मुख्यमंत्री धामी ने जताई प्रसन्नता

    राज्य ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। भारत में मातृ मृत्यु पर विशेष बुलेटिन के अनुसार, उत्तराखण्ड का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2020–22 में 104 से घटकर 2021–23 में 91 पर आ गया है। विगत वर्षों में 13 अंकों की कमी और मातृ मृत्यु में 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह राज्य सरकार की समर्पित नीतियों, स्वास्थ्यकर्मियों के अथक प्रयासों और सामुदायिक सहभागिता का परिणाम है। उन्होंने मातृ स्वास्थ्य को और मजबूत बनाने के लिए सतत प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।

    इस अवसर पर डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा उत्तराखण्ड शासन ने कहा “मातृ स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह उपलब्धि हमारे समर्पित स्वास्थ्यकर्मियों, सरकारी संस्थानों और सामुदायिक भागीदारों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। हमारा दृढ़ संकल्प है कि मातृ मृत्यु दर को और कम किया जाए तथा प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित और सम्मानजनक प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराई जाएँ।”

    मुख्य पहल एवं हस्तक्षेप

    मातृ मृत्यु निगरानी एवं प्रतिक्रिया (MDSR): प्रत्येक मातृ मृत्यु की समयबद्ध सूचना और गहन विश्लेषण के आधार पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई।

    जन्म-तैयारी एवं जटिलता प्रबंधन (BPCR): गर्भवती महिलाओं व परिवारों में जोखिम-चिन्हों की शीघ्र पहचान और आपात स्थितियों में तत्परता।

    गुणवत्ता सुधार: लक्ष्य-प्रमाणित प्रसव कक्ष और मातृत्व OT के विस्तार से सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक सेवाएँ।

    संस्थान-आधारित प्रसव को प्रोत्साहन: JSY और JSSK के सुदृढ़ क्रियान्वयन से निःशुल्क और समावेशी मातृ एवं नवजात सेवाएँ।

    आपातकालीन परिवहन व्यवस्था: 108/102 एम्बुलेंस सेवाओं का सशक्तिकरण और GPS आधारित रेफरल प्रोटोकॉल।

    पल्स एनीमिया मेगा अभियान: 57,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं की हीमोग्लोबिन जाँच और स्थिति-विशिष्ट उपचार; दूसरे चरण में सामुदायिक स्तर पर व्यापक स्क्रीनिंग।

    सामुदायिक सहभागिता: आशा, एएनएम और सीएचओ के नेटवर्क से अंतिम छोर तक ANC/PNC सेवाओं की उपलब्धता।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा यह उपलब्धि राज्य सरकार की मातृ स्वास्थ्य के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है। राज्य का लक्ष्य है कि कोई भी माँ रोके जा सकने वाले कारणों से जीवन न खोए और उत्तराखण्ड सुरक्षित मातृत्व का आदर्श राज्य बने।

  • सरकारी सस्ते गल्ले राशन की दुकानों पर जिला प्रशासन की रेड

    सरकारी सस्ते गल्ले राशन की दुकानों पर जिला प्रशासन की रेड

    देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशों के अनुपालन में आज जिला प्रशासन की टीम द्वारा जनपद के तहसील सदर चकराता, विकासनगर, मसूरी , डोईवाला एवं ऋषिकेश में 19 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर छापेमारी करते हुए नमक के नमूने लिए।

    जिला प्रशासन को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर खराब गुणवत्ता वाले नमक वितरित करने की शिकायत प्राप्त हो रही थी जिस पर जिलाधिकारी ने अपर जिला अधिकारी प्रशासन को समस्त उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदारों के माध्यम से जांच के निर्देश दिए थे।

    डीएम के निर्देश के अनुपालन में समस्त उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदारो ने अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत सरकारी सस्ते राशन की दुकानों पर छापेमारी करते हुए नमक के नमूने एकत्रित किए।

    जिला प्रशासन द्वारा छापेमारी के दौरान एकत्रित किए गए नमक के नमूनों को सैंपल जांच हेतु खाद्य सुरक्षा अधिकारी को जांच हेतु भेजे गए हैं तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी को आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों से किया संवाद

    मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों से किया संवाद

    मुख्यमंत्री धामी ने गुरूवार को मुख्य सेवक संवाद के तहत वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने दिव्यांग शादी अनुदान एवं राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का सॉफ्टवेयर लॉच किया एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत दी जा रही पेंशन की इस वित्तीय वर्ष की 5वीं किश्त का ऑनलाइन भुगतान किया।

    मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि दिव्यांग युवक-युवती से विवाह करने पर प्रोत्साहन अनुदान धनराशि 25 हजार रूपये से बढ़ाकर 50 हजार रूपये किया जायेगा। दिव्यांग छात्रवृत्ति योजनान्तर्गत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति हेतु आय सीमा को समाप्त किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जनपदों में एक-एक वृद्धाश्रम की व्यवस्था की जायेगी।

    मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांगजनों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबके आशीर्वाद से ही उन्हें राज्य के मुख्य सेवक के रूप में कार्य करने की ऊर्जा मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवाद के पीछे भी उनका यही मंतव्य था कि वो सबकी समस्याओं, आवश्यकताओं को सीधे तौर पर जान सकें, जिससे उनके समाधान के लिए और अधिक ठोस कदम उठाए जा सकें।

    कहा कि कई बार सरकार के स्तर पर नीतियाँ और योजनाएँ तो बन जाती हैं, परन्तु उन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिल पाता है जब वे जमीनी स्तर तक पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से पहुँचें। साथ ही लाभार्थी भी ये महसूस करें कि सरकार ने उनकी ज़िंदगी को आसान और बेहतर बनाने का कार्य किया है।

    मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तिकरण के निरंतर प्रयास किए जा रहें हैं। प्रधानमंत्री ने ही सर्वप्रथम “विकलांग” की जगह “दिव्यांग” शब्द को अपनाकर दिव्यांगजनों में आत्मसम्मान का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

    आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दिव्यांग सशक्तिकरण अधिनियम 2016, सुगम्य भारत अभियान, ए.डी.आई.पी. योजना, दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना, दिव्यांगजन स्वालम्बन योजना तथा दिव्यांगजन छात्रवृत्ति एवं पेंशन योजना जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजनों के कल्याण हेतु ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में 96 हज़ार से अधिक दिव्यांगजनों को पेंशन प्रदान की जा रही है। जहां एक ओर 18 वर्ष से अधिक आयु के 86 हज़ार से अधिक दिव्यांगजनों को 1500 रुपए की मासिक पेंशन प्रदान की जा रही है, वहीं 18 वर्ष से कम आयु के 8 हज़ार से अधिक दिव्यांग बच्चों के भरण-पोषण एवं देखभाल हेतु प्रतिमाह 700 रुपए की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
    इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य के दौरान दिव्यांग हुए लोगों को तीलू रौतेली पेंशन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 12 सौ रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ ही, 4 फुट से कम ऊँचाई वाले व्यक्तियों को बौना पेंशन के माध्यम से प्रतिमाह 12 सौ रुपए भी प्रदान किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में “दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना” के अंतर्गत दिव्यांग व्यक्ति से विवाह करने पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। आज इस योजना से जुड़े सॉफ्टवेयर के लोकार्पण से योजना का लाभ पारदर्शिता के साथ पात्र लाभार्थियों को मिल सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दिन पहले ही देहरादून में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र का शुभारंभ किया गया है। जहां दिव्यांगजनों विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों को Early Intervention की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले समय में ऐसे दिव्याशा केंद्र राज्य के समस्त जनपदों में खोलने का प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इस योजना के अंतर्गत राज्य के लगभग 6 लाख वृद्धजनों को डीबीटी के माध्यम से पेंशन की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है। इसके साथ ही सरकार राज्य के सभी जनपदों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था भी सुदृढ़ कर रही है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं, जबकि देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में नए भवन निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल सहित विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित वृद्धाश्रम भी कार्यरत हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बदलते समय के साथ रिश्तों में आई चुनौतियों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया है। इसके माध्यम से हमारे बुजुर्गों को यह कानूनी अधिकार प्राप्त हो जाता है कि वे अपने बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण की मांग कर सकें। उन्होंने वरिष्ठजनों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि आपका ये बेटा कभी आपके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने देगा।

    कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, विधायक श्री खजानदास, श्रीमती सविता कपूर, मेयर देहरादून श्री सौरभ थपलियाल, उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद श्री नवीन वर्मा, श्रीमती शांति मेहरा, सचिव समाज कल्याण श्री श्रीधर बाबू अदह्यांकी, अपर सचिव श्री प्रकाश चन्द्र, निदेशक समाज कल्याण श्री चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, निदेशक जनजाति कल्याण श्री संजय टोलिया उपस्थित रहे।