Category: उत्तराखंड

  • राजनीति: लैंसडौन विधायक रावत का हरक पर तीखे तंज,डॉ को राजनीति का शियार बताया…

    राजनीति: लैंसडौन विधायक रावत का हरक पर तीखे तंज,डॉ को राजनीति का शियार बताया…

    पौड़ी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं को मिली हार के बाद अब हरक पर हमला तेज हो गया है। बीजेपी प्रदेश मुख्यालय पहुंचे लैंसडौन विधायक दिलीप सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत में हरक सिंह रावत पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत अब तक लहर के साथ चुनाव लड़े है। जिसमें उन्हें जीत भी मिली लेकिन मौजूदा विधानसभा चुनाव में विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ने के बाद हरक सिंह रावत की हकीकत सामने आ गई है। कि वह कितने बड़े नेता है।

    उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत अपनी विश्वसनीयता को खो चुके हैं राजनीति में ईमानदारी, निष्ठा, चरित्र और समर्पण की भावना होनी चाहिए जोकि हरक सिंह रावत में नहीं है इसलिए अब जनता उनपर विश्वास नहीं करने वाली है इतना ही नहीं दिलीप सिंह रावत ने कहा कि हरक सिंह रावत खुद को शेर ए गढ़वाल बताते हैं जबकि वह शियार हैं।

    बता दें कि लैंसडाउन सीट पर बीजेपी उम्मीदवार दिलीप सिंह रावत ने जीत दर्ज की है। यह दिलीप सिंह रावत की लगातार तीसरी जीत रही है। उन्होंने बीजेपी के बागी विधायक हरक सिंह रावत की बहू और कांग्रेस प्रत्याशी अनुकृति गुसाईं  को 9 हज़ार 868 वोटों के अंतर से हराया है। अनुकृति गुसाईं की हार को हरक सिंह रावत की हार के रूप में देखा जा रहा है।

  • परम्परा: आखिर क्या है फूलदेई, क्यों मनाई जाती है फूलदेई, क्या है महत्वत्ता, पढ़िए इस विशेषांक को…

    परम्परा: आखिर क्या है फूलदेई, क्यों मनाई जाती है फूलदेई, क्या है महत्वत्ता, पढ़िए इस विशेषांक को…

    सर्दी और गर्मी के बीच का खूबसूरत मौसम, फ्यूंली, बुरांश और बासिंग के पीले, लाल, सफेद फूल और बच्चों के खिले हुए चेहरे ‘फूलदेई’ से यही तस्वीरें सबसे पहले ज़ेहन में आती हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों का लोक पर्व है फूलदेई। नए साल का, नई ऋतुओं का, नए फूलों के आने का संदेश लाने वाला ये त्योहार आज उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में मनाया जा रहा है।

    -प्रकृति को आभार प्रकट करने वाला लोकपर्व है ‘फूलदेई’

    चैत के महीने की संक्रांति को, जब ऊंची पहाड़ियों से बर्फ पिघल जाती है, सर्दियों के मुश्किल दिन बीत जाते हैं, उत्तराखंड के पहाड़ बुरांश के लाल फूलों की चादर ओढ़ने लगते हैं, तब पूरे इलाके की खुशहाली के लिए फूलदेई का त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार आमतौर पर किशोरी लड़कियों और छोटे बच्चों का पर्व है। वक्त के साथ तरीके बदले, लेकिन अब भी ज़िंदा है परंपरा फूल और चावलों को गांव के घर की देहरी, यानी मुख्यद्वार पर डालकर लड़कियां उस घर की खुशहाली की दुआ मांगती हैं। इस दौरान एक गाना भी गाया जाता है।

    -फूलदेई, छम्मा देई…जतुकै देला, उतुकै सही…दैणी द्वार, भर भकार

     

    फूलदेई के दिन लड़कियां और बच्चे सुबह-सुबह उठकर फ्यूंली, बुरांश, बासिंग और कचनार जैसे जंगली फूल इकट्ठा करते हैं। इन फूलों को रिंगाल (बांस जैसी दिखने वाली लकड़ी) की टोकरी में सजाया जाता है। टोकरी में फूलों-पत्तों के साथ गुड़, चावल और नारियल रखकर बच्चे अपने गांव और मुहल्ले की ओर निकल जाते हैं। इन फूलों और चावलों को गांव के घर की देहरी, यानी मुख्यद्वार पर डालकर लड़कियां उस घर की खुशहाली की दुआ मांगती हैं। इस दौरान एक गाना भी गाया जाता है।

     

    -फूलदेई से जुड़ी हैं लोककथाएं :

    फूलदेई त्योहार में एक द्वारपूजा के लिए एक जंगली फूल का इस्तेमाल होता है, जिसे फ्यूली कहते हैं। इस फूल और फूलदेई के त्योहार को लेकर उत्तराखंड में कई लोक कथाएं मशहूर हैं। जिनमें से एक लोककथा कुछ यूं है।

     

    फ्यूंली के पीले फूलों से जुड़ी हैं, फूलदेई पर्व की कहानियां

    एक वनकन्या से जुड़ी है। जिसका नाम था फ्यूंली। फ्यूली जंगल में रहती थी। जंगल के पेड़ पौधे और जानवर ही उसका परिवार भी थे और दोस्त भी। फ्यूंली की वजह से जंगल और पहाड़ों में हरियाली थी, खुशहाली। एक दिन दूर देश का एक राजकुमार जंगल में आया। फ्यूंली को राजकुमार से प्रेम हो गया। राजकुमार के कहने पर फ्यूंली ने उससे शादी कर ली और पहाड़ों को छोड़कर उसके साथ महल चली गई।

     

    फ्यूंली के जाते ही पेड़-पौधे मुरझाने लगे, नदियां सूखने लगीं और पहाड़ बरबाद होने लगे। उधर महल में फ्यूंली ख़ुद बहुत बीमार रहने लगी। उसने राजकुमार से उसे वापस पहाड़ छोड़ देने की विनती की लेकिन राजकुमार उसे छोड़ने को तैयार नहीं था और एक दिन फ्यूंली मर गई। मरते-मरते उसने राजकुमार से गुज़ारिश की थी कि उसका शव पहाड़ में ही कहीं दफना दे। फ्यूंली का शरीर राजकुमार ने पहाड़ की उसी चोटी पर जाकर दफनाया जहां से वो उसे लेकर आया था। जिस जगह पर फ्यूंली को दफनाया गया, कुछ महीनों बाद वहां एक फूल खिला, जिसे फ्यूंली नाम दिया गया। इस फूल के खिलते ही पहाड़ फिर हरे होने लगे, नदियों में पानी फिर लबालब भर गया, पहाड़ की खुशहाली फ्यूंली के फूल के रूप में लौट आई।

     

    इसी फ्यूंली के फूल से द्वारपूजा करके लड़कियां फूलदेई में अपने घर और पूरे गांव की खुशहाली की दुआ करती हैं।

  • उत्तराखंडः वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत बने प्रोटेम स्पीकर, आदेश जारी…

    उत्तराखंडः वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत बने प्रोटेम स्पीकर, आदेश जारी…

    देहरादून: उत्तराखंड में वरिष्ठ विधायक बंशीधर भगत को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया है। भगत पांचवी विधानसभा के लिए चयनित हुए विधायकों को शपथ दिलाने के लिए। जिसके आदेश जारी कर दिए गए है। बता दें कि  राजभवन के निर्देश पर विधानसभा सचिवालय की तरफ से आदेश जारी किए गए हैं। बंशीधर भगत प्रोटेम स्पीकर पद की शपथ लेने के बाद सभी नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाएंगे। इसके साथ ही उत्तराखंड की नई विधानसभा का गठन हो जाएगा।

    मीडिया रिपोर्टस के अनुसार आमतौर पर प्रोटेम स्पीकर का काम नए सदस्यों को शपथ दिलाना और स्पीकर (विधानसभा अध्यक्ष) का चुनाव कराना होता है। सबसे सीनियर मोस्ट विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया जाता है। विधानसभा सचिवालय की तरफ से राज्यपाल को सीनियर मोस्ट विधायकों के नाम भेजे जाते हैं और राज्यपाल उनसे से एक सीनियर मोस्ट विधायक को चुनता है। ये राज्यपाल का विशेषाधिकार है कि वो किसे चुने। इस बार राज्यपाल ने नव निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी की जिम्मेदारी भगत को सौंपी गई है। भगत ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद कैबिनेट मंत्री के रूप में 2022 के चुनाव में सातवीं बार कालाढूंगी से इस बार भी जीत दर्ज की है।

    गौरतलब है कि उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा के लिए विगत 14 फरवरी को चुनाव हुए थे। 10 मार्च को चुनाव नतीजे आने के बाद बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पाया और सरकार बनाने की तैयारियों में जुट गई है। चर्चा है कि होली के बाद नई सरकार का गठन होगा। बीजेपी की सत्ता में जोरदार वापसी के बाद जहां मुख्यमंत्री पद को लेकर अटकलों का दौर जारी है, वहीं नई कैबिनेट में शामिल होने वाले चेहरों को लेकर भी चर्चा का दौर शुरू हो गया है।
  • GOOD NEWS: ऋषिकेश में शुरू हुई घुड़सवारी, सैलानी उठा रहे लुफ़्त…

    GOOD NEWS: ऋषिकेश में शुरू हुई घुड़सवारी, सैलानी उठा रहे लुफ़्त…

    देहरादून। घुड़सवारी करने वालों के लिए खुशखबरी है। ऋषिकेश में भी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रोमांचित शौक घुड़सवारी शुरू हो गई है। यह घुड़सवारी ऋषिकेश पास जानकी सेतु के पास शुरू की गई है। जिसमें घुड़सवारी करवाने वाले व्यवसाई पांच सौ मीटर तक घुड़सवारी करवाएंगे, जिसका एक सीमित शुल्क रखा गया है।

    जानकारी के लिए बता दें अभी तक भारत में 6 खास स्थानों पर घुड़सवारी हुआ करती थी, जिनमें लद्दाख, सिक्किम, महाराष्ट्र के महाबलेश्वर, दार्जिलिंग, राजस्थान के पुष्कर, कश्मीर के गुलमर्ग शामिल हैं।

    तीर्थनगरी ऋषिकेश में पर्यटक अब हॉर्स राइडिंग के रोमांच का लुत्फ उठा सकते हैं। 50 रुपये में पांच सौ मीटर घोड़े की सवारी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। घोड़े पर बैठकर लोग फोटो शूट भी कर रहे हैं।

    ऋषिकेश के मुनिकीरेती क्षेत्र में जानकी सेतु के पास हॉर्स राइडिंग शुरू होने से पर्यटक जमकर लुफ्त उठा रहें है। हॉर्स राइडिंग शुरू करने वाले हरिद्वार रोड निवासी सागर ने बताया कि उनका शादियों का काम है लेकिन, शादी का सीजन पूरे साल नहीं होने से उन्हें खाली रहना पड़ता है।

    अतिरिक्त कमाई के लिए पर्यटकों के लिए हॉर्स राइडिंग शुरू का निर्णय लिया। बकौल सागर एक सप्ताह पहले हार्स राइडिंग आरंभ की, अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। हॉर्स राइडिंग का शौक रखने वाले स्थानीय और बाहर से आने वाले पर्यटक सवारी का लुत्फ उठा रहे हैं। बताया कि पांच सौ मीटर चक्कर के प्रति व्यक्ति 50 रुपये शुल्क ले रहे हैं।

  • एक और सियासी पारी: शत्रुघ्न सिन्हा को ममता ने उतारा चुनाव मैदान में, टीएमसी की टिकट पर इस सीट से ठोकेंगे ताल

    एक और सियासी पारी: शत्रुघ्न सिन्हा को ममता ने उतारा चुनाव मैदान में, टीएमसी की टिकट पर इस सीट से ठोकेंगे ताल

    पिछले काफी समय से सक्रिय राजनीति से दूर चल रहे भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री और बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म अभिनेता शत्रुघन सिन्हा की फिर से राजनीति हसरतें जवां हो गई । पहले भाजपा फिर कांग्रेस और अब एक और नई राजनीतिक दल के साथ अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा अपनी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं। ‌बता दें कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा को आसनसोल लोकसभा उपचुनाव से टीएमसी का उम्मीदवार बनाया है। शत्रुघ्न कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। ‌साल 2020 में उन्होंने विधानसभा चुनाव पटना से अपने बेटे को कांग्रेस के टिकट पर लड़ाया था।

    लेकिन वह हार गए थे। उसके बाद बिहारी बाबू कांग्रेस से भी दूरी बनाए हुए थे। वहीं उन्होंने पिछले साल ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का दामन थाम लिया था। अब ममता ने शत्रुघ्न सिन्हा को टीएमसी की ओर से आसनसोल में हो रहे लोकसभा के उपचुनाव में टिकट दिया है। बता दें कि कुछ महीनों पहले मोदी सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिंगर बाबुल सुप्रियो ने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब बाबुल सुप्रियो को भी बंगाल के बालीगंज विधानसभा उपचुनाव में टिकट देने की घोषणा की है। बता दें कि बंगाल में एक लोकसभा और चार विधानसभा सीटों पर 12 अप्रैल को उपचुनाव होना है। इसमें बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट भी शामिल है, जो बाबुल सुप्रियो की वजह से खाली हुई है। फिल्म एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा को अचानक टीएमसी का प्रत्याशी बनाना ममता बनर्जी का साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को भी जोड़ कर देखा जा रहा है। अगर सिन्हा यह उपचुनाव टीएमसी से जीतते हैं तो वह लोकसभा में दीदी की बात को और तेजी से बुलंद रख सकेंगे। बता दें कि बंगाल में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद ममता और भाजपा के बीच मनमुटाव बना हुआ है।

    यूपी विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी ने समाजवादी पार्टी के समर्थन में दो चुनावी जनसभाएं की थी। हालांकि ममता बनर्जी का समर्थन अखिलेश यादव को कोई खास फायदा नहीं करा सका। सपा फिर यूपी की सत्ता में नहीं आ सकी। ‌भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार वापसी की है।

  • राजनीति: लैंसडौन विधायक रावत का हरक पर तीखे तंज,डॉ को राजनीति का शियार बताया…

    राजनीति: लैंसडौन विधायक रावत का हरक पर तीखे तंज,डॉ को राजनीति का शियार बताया…

    पौड़ी। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं को मिली हार के बाद अब हरक पर हमला तेज हो गया है। बीजेपी प्रदेश मुख्यालय पहुंचे लैंसडौन विधायक दिलीप सिंह रावत ने मीडिया से बातचीत में हरक सिंह रावत पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत अब तक लहर के साथ चुनाव लड़े है। जिसमें उन्हें जीत भी मिली लेकिन मौजूदा विधानसभा चुनाव में विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ने के बाद हरक सिंह रावत की हकीकत सामने आ गई है। कि वह कितने बड़े नेता है।

    उन्होंने कहा कि हरक सिंह रावत अपनी विश्वसनीयता को खो चुके हैं राजनीति में ईमानदारी, निष्ठा, चरित्र और समर्पण की भावना होनी चाहिए जोकि हरक सिंह रावत में नहीं है इसलिए अब जनता उनपर विश्वास नहीं करने वाली है इतना ही नहीं दिलीप सिंह रावत ने कहा कि हरक सिंह रावत खुद को शेर ए गढ़वाल बताते हैं जबकि वह शियार हैं।

    बता दें कि लैंसडाउन सीट पर बीजेपी उम्मीदवार दिलीप सिंह रावत ने जीत दर्ज की है। यह दिलीप सिंह रावत की लगातार तीसरी जीत रही है। उन्होंने बीजेपी के बागी विधायक हरक सिंह रावत की बहू और कांग्रेस प्रत्याशी अनुकृति गुसाईं  को 9 हज़ार 868 वोटों के अंतर से हराया है। अनुकृति गुसाईं की हार को हरक सिंह रावत की हार के रूप में देखा जा रहा है।

  • परम्परा: आखिर क्या है फूलदेई, क्यों मनाई जाती है फूलदेई, क्या है महत्वत्ता, पढ़िए इस विशेषांक को…

    परम्परा: आखिर क्या है फूलदेई, क्यों मनाई जाती है फूलदेई, क्या है महत्वत्ता, पढ़िए इस विशेषांक को…

    सर्दी और गर्मी के बीच का खूबसूरत मौसम, फ्यूंली, बुरांश और बासिंग के पीले, लाल, सफेद फूल और बच्चों के खिले हुए चेहरे ‘फूलदेई’ से यही तस्वीरें सबसे पहले ज़ेहन में आती हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों का लोक पर्व है फूलदेई। नए साल का, नई ऋतुओं का, नए फूलों के आने का संदेश लाने वाला ये त्योहार आज उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में मनाया जा रहा है।

    -प्रकृति को आभार प्रकट करने वाला लोकपर्व है ‘फूलदेई’

    चैत के महीने की संक्रांति को, जब ऊंची पहाड़ियों से बर्फ पिघल जाती है, सर्दियों के मुश्किल दिन बीत जाते हैं, उत्तराखंड के पहाड़ बुरांश के लाल फूलों की चादर ओढ़ने लगते हैं, तब पूरे इलाके की खुशहाली के लिए फूलदेई का त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार आमतौर पर किशोरी लड़कियों और छोटे बच्चों का पर्व है। वक्त के साथ तरीके बदले, लेकिन अब भी ज़िंदा है परंपरा फूल और चावलों को गांव के घर की देहरी, यानी मुख्यद्वार पर डालकर लड़कियां उस घर की खुशहाली की दुआ मांगती हैं। इस दौरान एक गाना भी गाया जाता है।

    -फूलदेई, छम्मा देई…जतुकै देला, उतुकै सही…दैणी द्वार, भर भकार

     

    फूलदेई के दिन लड़कियां और बच्चे सुबह-सुबह उठकर फ्यूंली, बुरांश, बासिंग और कचनार जैसे जंगली फूल इकट्ठा करते हैं। इन फूलों को रिंगाल (बांस जैसी दिखने वाली लकड़ी) की टोकरी में सजाया जाता है। टोकरी में फूलों-पत्तों के साथ गुड़, चावल और नारियल रखकर बच्चे अपने गांव और मुहल्ले की ओर निकल जाते हैं। इन फूलों और चावलों को गांव के घर की देहरी, यानी मुख्यद्वार पर डालकर लड़कियां उस घर की खुशहाली की दुआ मांगती हैं। इस दौरान एक गाना भी गाया जाता है।

     

    -फूलदेई से जुड़ी हैं लोककथाएं :

    फूलदेई त्योहार में एक द्वारपूजा के लिए एक जंगली फूल का इस्तेमाल होता है, जिसे फ्यूली कहते हैं। इस फूल और फूलदेई के त्योहार को लेकर उत्तराखंड में कई लोक कथाएं मशहूर हैं। जिनमें से एक लोककथा कुछ यूं है।

     

    फ्यूंली के पीले फूलों से जुड़ी हैं, फूलदेई पर्व की कहानियां

    एक वनकन्या से जुड़ी है। जिसका नाम था फ्यूंली। फ्यूली जंगल में रहती थी। जंगल के पेड़ पौधे और जानवर ही उसका परिवार भी थे और दोस्त भी। फ्यूंली की वजह से जंगल और पहाड़ों में हरियाली थी, खुशहाली। एक दिन दूर देश का एक राजकुमार जंगल में आया। फ्यूंली को राजकुमार से प्रेम हो गया। राजकुमार के कहने पर फ्यूंली ने उससे शादी कर ली और पहाड़ों को छोड़कर उसके साथ महल चली गई।

     

    फ्यूंली के जाते ही पेड़-पौधे मुरझाने लगे, नदियां सूखने लगीं और पहाड़ बरबाद होने लगे। उधर महल में फ्यूंली ख़ुद बहुत बीमार रहने लगी। उसने राजकुमार से उसे वापस पहाड़ छोड़ देने की विनती की लेकिन राजकुमार उसे छोड़ने को तैयार नहीं था और एक दिन फ्यूंली मर गई। मरते-मरते उसने राजकुमार से गुज़ारिश की थी कि उसका शव पहाड़ में ही कहीं दफना दे। फ्यूंली का शरीर राजकुमार ने पहाड़ की उसी चोटी पर जाकर दफनाया जहां से वो उसे लेकर आया था। जिस जगह पर फ्यूंली को दफनाया गया, कुछ महीनों बाद वहां एक फूल खिला, जिसे फ्यूंली नाम दिया गया। इस फूल के खिलते ही पहाड़ फिर हरे होने लगे, नदियों में पानी फिर लबालब भर गया, पहाड़ की खुशहाली फ्यूंली के फूल के रूप में लौट आई।

     

    इसी फ्यूंली के फूल से द्वारपूजा करके लड़कियां फूलदेई में अपने घर और पूरे गांव की खुशहाली की दुआ करती हैं।

  • GOOD NEWS: ऋषिकेश में शुरू हुई घुड़सवारी, सैलानी उठा रहे लुफ़्त…

    GOOD NEWS: ऋषिकेश में शुरू हुई घुड़सवारी, सैलानी उठा रहे लुफ़्त…

    देहरादून। घुड़सवारी करने वालों के लिए खुशखबरी है। ऋषिकेश में भी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रोमांचित शौक घुड़सवारी शुरू हो गई है। यह घुड़सवारी ऋषिकेश पास जानकी सेतु के पास शुरू की गई है। जिसमें घुड़सवारी करवाने वाले व्यवसाई पांच सौ मीटर तक घुड़सवारी करवाएंगे, जिसका एक सीमित शुल्क रखा गया है।

    जानकारी के लिए बता दें अभी तक भारत में 6 खास स्थानों पर घुड़सवारी हुआ करती थी, जिनमें लद्दाख, सिक्किम, महाराष्ट्र के महाबलेश्वर, दार्जिलिंग, राजस्थान के पुष्कर, कश्मीर के गुलमर्ग शामिल हैं।

    तीर्थनगरी ऋषिकेश में पर्यटक अब हॉर्स राइडिंग के रोमांच का लुत्फ उठा सकते हैं। 50 रुपये में पांच सौ मीटर घोड़े की सवारी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। घोड़े पर बैठकर लोग फोटो शूट भी कर रहे हैं।

    ऋषिकेश के मुनिकीरेती क्षेत्र में जानकी सेतु के पास हॉर्स राइडिंग शुरू होने से पर्यटक जमकर लुफ्त उठा रहें है। हॉर्स राइडिंग शुरू करने वाले हरिद्वार रोड निवासी सागर ने बताया कि उनका शादियों का काम है लेकिन, शादी का सीजन पूरे साल नहीं होने से उन्हें खाली रहना पड़ता है।

    अतिरिक्त कमाई के लिए पर्यटकों के लिए हॉर्स राइडिंग शुरू का निर्णय लिया। बकौल सागर एक सप्ताह पहले हार्स राइडिंग आरंभ की, अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। हॉर्स राइडिंग का शौक रखने वाले स्थानीय और बाहर से आने वाले पर्यटक सवारी का लुत्फ उठा रहे हैं। बताया कि पांच सौ मीटर चक्कर के प्रति व्यक्ति 50 रुपये शुल्क ले रहे हैं।

  • एक और सियासी पारी: शत्रुघ्न सिन्हा को ममता ने उतारा चुनाव मैदान में, टीएमसी की टिकट पर इस सीट से ठोकेंगे ताल

    एक और सियासी पारी: शत्रुघ्न सिन्हा को ममता ने उतारा चुनाव मैदान में, टीएमसी की टिकट पर इस सीट से ठोकेंगे ताल

    पिछले काफी समय से सक्रिय राजनीति से दूर चल रहे भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री और बॉलीवुड के दिग्गज फिल्म अभिनेता शत्रुघन सिन्हा की फिर से राजनीति हसरतें जवां हो गई । पहले भाजपा फिर कांग्रेस और अब एक और नई राजनीतिक दल के साथ अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा अपनी सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं। ‌बता दें कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शत्रुघ्न सिन्हा को आसनसोल लोकसभा उपचुनाव से टीएमसी का उम्मीदवार बनाया है। शत्रुघ्न कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। ‌साल 2020 में उन्होंने विधानसभा चुनाव पटना से अपने बेटे को कांग्रेस के टिकट पर लड़ाया था।

    लेकिन वह हार गए थे। उसके बाद बिहारी बाबू कांग्रेस से भी दूरी बनाए हुए थे। वहीं उन्होंने पिछले साल ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का दामन थाम लिया था। अब ममता ने शत्रुघ्न सिन्हा को टीएमसी की ओर से आसनसोल में हो रहे लोकसभा के उपचुनाव में टिकट दिया है। बता दें कि कुछ महीनों पहले मोदी सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री और सिंगर बाबुल सुप्रियो ने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब बाबुल सुप्रियो को भी बंगाल के बालीगंज विधानसभा उपचुनाव में टिकट देने की घोषणा की है। बता दें कि बंगाल में एक लोकसभा और चार विधानसभा सीटों पर 12 अप्रैल को उपचुनाव होना है। इसमें बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट भी शामिल है, जो बाबुल सुप्रियो की वजह से खाली हुई है। फिल्म एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा को अचानक टीएमसी का प्रत्याशी बनाना ममता बनर्जी का साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को भी जोड़ कर देखा जा रहा है। अगर सिन्हा यह उपचुनाव टीएमसी से जीतते हैं तो वह लोकसभा में दीदी की बात को और तेजी से बुलंद रख सकेंगे। बता दें कि बंगाल में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद ममता और भाजपा के बीच मनमुटाव बना हुआ है।

    यूपी विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी ने समाजवादी पार्टी के समर्थन में दो चुनावी जनसभाएं की थी। हालांकि ममता बनर्जी का समर्थन अखिलेश यादव को कोई खास फायदा नहीं करा सका। सपा फिर यूपी की सत्ता में नहीं आ सकी। ‌भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार वापसी की है।

  • Big breaking: हरीश रावत की हार पर प्रदेश सचिव के तीखे बोल,नदेखिए किसे ठहरा रहे गुनहगार…

    Big breaking: हरीश रावत की हार पर प्रदेश सचिव के तीखे बोल,नदेखिए किसे ठहरा रहे गुनहगार…

    कुमांऊ। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार पर कांग्रेस के प्रदेश सचिव गोपाल रावत  ने  बड़ा  बयान  देते हुए बड़ा  खुलासा  किया  है।  गोपाल  रावत  ने    कहा    कि  हरीश  रावत लालकुआं  विधानसभा  सीट से हारने वाले नहीं थे, लेकिन उनके साथ घूमने वाले कुछ लोगों ने उन्हें हराने का काम  किया,  गोपाल  रावत ने कहा कि वो लोग उनके साथ  कार में  घूमे और जहां   वोट थे वहां  उनको   उतरने नहीं दिया।

    आरोप है कि हरीश  रावत के साथ चुनाव में घूम रहे कुछ नेताओं ने जमीन में कार्यकर्ताओं से मिलाने के बजाय हरीश   रावत को गोल  घेरे    में  उलझाए   रखा हरीश रावत को लालकुआं से मोहन सिंह बिष्ट ने पराजित किया इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत 2017 में भी 2 सीटों से चुनाव हारे थे।

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