Category: उत्तराखंड

  • शीतकालीन सत्र में राज्यसभा से 12 सांसद निलंबित, विपक्ष ने कल बुलाई बैठक

    शीतकालीन सत्र में राज्यसभा से 12 सांसद निलंबित, विपक्ष ने कल बुलाई बैठक

    दिल्लीः संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार पहले दिन ही एक्शन में दिखाई दी। पिछले मॉनसून सत्र में हंगामा करने के मामले में राज्यसभा से कांग्रेस, शिवसेना और टीएमसी समेत पांच पार्टियों के 12 सांसदों को शीतकालीन सत्र से निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार ने विपक्ष को आगाह भी किया है कि इस बार शीतकालीन सत्र में संसद भवन में आचरण और मर्यादा तोड़ने वाले सांसदों पर इसी प्रकार का का एक्शन लिया जाएगा । हालांकि विपक्ष ने 12 सांसदों को सस्पेंड करने के मामले में कड़ा एतराज जताया है। वहीं केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापसी बिल दोनों सदनों (लोकसभा, राज्यसभा) में पास करा लिया है । जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है, उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं।

    बता दें कि इन सांसदों को पिछले मॉनसून सत्र के दौरान हुए हंगामे के चलते निलंबित किया गया है। उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी। राज्यसभा से निलंबित किए जाने पर शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि हमारा पक्ष जाने बिना कार्रवाई की गई है। वहीं दूसरी ओर संसद के शीतकालीन सेशन के पहले दिन ही कृषि कानून वापसी बिल दोनों सदनों में पास हो गया है। यह बिल अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के हंगामे के बीच ही बिल राज्यसभा में पास हुआ।

    राज्यसभा से 12 सांसदों के निलंबन के बाद विपक्ष ने कल बुलाई बैठक–

    निलंबन के बाद विपक्षी पार्टियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में विपक्ष ने 12 सांसदों के निलंबन के फैसले की निंदा की है और इसे अलोकतांत्रिक निलंबन करार दिया है। विपक्षी पार्टियों ने 12 सांसदों के निलंबन के फैसले पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को बैठक बुलाई है। कल आयोजित बैठक में विपक्ष आगे की रणनीति तय करेगा। कांग्रेस के राहुल गांधी ने कहा कि हमनें कहा था कि 3 काले कानूनों को वापस लेना पड़ेगा। हमें पता था कि 3-4 बड़े पूंजीपतियों की शक्ति हिंदुस्तान के किसानों के सामने खड़ी नहीं हो सकती और वही हुआ। काले कानूनों को रद करना पड़ा। राहुल गांधी ने आगे कहा कृषि कानूनों का निरस्त करना किसानों और मजदूरों की जीत है। सरकार को अब एमएसपी की मांग भी स्वीकार करनी चाहिए। इन कानूनों को जिस प्रकार से बिना चर्चा के रद किया गया वह दिखाता है कि सरकार चर्चा से डरती है। आंदोलन के दौरान 700 किसानों की मौत हुई उनके बारे में चर्चा होनी चाहिए थी। दूसरी ओर राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा कि उन्होंने संसद में ऐसा माहौल कभी नहीं देखा जहां विपक्ष को बोलने की भी अनुमति नहीं दी गई। इतना महत्वपूर्ण बिल राज्यसभा में बिना किसी चर्चा के पारित हो गया।

  • देहरादून में कुत्ता पालना पड़ सकता है भारी, जल्द करा लें यहां रेजिस्ट्रेशन,

    देहरादून में कुत्ता पालना पड़ सकता है भारी, जल्द करा लें यहां रेजिस्ट्रेशन,

    देहरादूनः कुत्ता पालना कई लोगों का शौक होता है। हर कोई इसे पालता है, लेकिन देहरादून में कुत्ता पालने के लिए अब आपको लाइसेंस लेना पड़ेगा। अगर आप ऐसा नहीं करते है तो आपको परेशानियों को सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन आप के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है। जी हां अगर आप कुत्ता पालने के शौकीन हैं तो आपको नगर निगम में उसका पंजीकरण कराना होगा। नहीं तो आपको भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। पालतू कुत्ते का लाइसेंस न बनवाने वालों पर नगर निगम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की और 50 व्यक्तियों का चालान किया।

    आपको बता दें कि निगम ने कुत्ता मालिकों पर जुर्माने की कार्रवाई के लिए चार टीम मैदान में उतार दी हैं। सुबह व शाम को यह टीमें शहरभर में घूमकर पालतू कुत्तों की तलाश करेंगी और पंजीकरण नहीं होने पर संबंधित मालिक का पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये का चालान किया जाएगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर 5000 रुपये का चालान व तीसरी बार मुकदमे की कार्रवाई की तैयारी की गई है।इसके साथ-साथ अब निगम ने रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी में शिविर लगाकर पालतू कुत्तों का पंजीकरण करना भी शुरू कर दिया है।

    पंजीकरण के लिए प्रविधान

    • पंजीकरण फार्म के साथ पशु चिकित्सक से रैबीज से बचाने को लगने वाले टीके के लगे होने का प्रमाण-पत्र लाना होगा।
    • जीवाणुनाशक का प्रमाण पत्र भी साथ लाना होगा।
    • पंजीकरण के बाद नगर निगम संबंधित व्यक्ति को उसके नाम और पते वाला एक टोकन देगा।
    • पंजीकरण के लिए 200 रुपये शुल्क जमा होगा।
    • पालतू कुत्ते के किसी को काटने पर नुकसान की प्रतिपूर्ति उसके मालिक को करनी पड़ेगी।

    गौरतलब है कि देहरादून नगर निगम क्षेत्र में करीब 20 हजार पालतू कुत्ते हैं।जिन्होंने पिछले वर्ष पंजीकरण कराया था, वह नवीनीकरण कराने नहीं आ रहे। पिछले वर्ष नगर निगम में लगभग 4000 कुत्तों का पंजीकरण हुआ था, जिसमें इस वर्ष अभी तक केवल 800 कुत्तों का पंजीकरण नवीनीकरण कराया गया है। ऐसे में अब जिन लोगों ने अपने पालतू कुत्तों का नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है और न ही निर्धारित शुल्क 200 रुपए जमा कराए हैं तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम ऐसे तमाम कुत्तों को चिन्हित कर रहा है, जिनका पंजीकरण नहीं कराया गया है।

  • देहरादून में कुत्ता पालना पड़ सकता है भारी, जल्द करा लें यहां रेजिस्ट्रेशन,

    देहरादून में कुत्ता पालना पड़ सकता है भारी, जल्द करा लें यहां रेजिस्ट्रेशन,

    देहरादूनः कुत्ता पालना कई लोगों का शौक होता है। हर कोई इसे पालता है, लेकिन देहरादून में कुत्ता पालने के लिए अब आपको लाइसेंस लेना पड़ेगा। अगर आप ऐसा नहीं करते है तो आपको परेशानियों को सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन आप के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है। जी हां अगर आप कुत्ता पालने के शौकीन हैं तो आपको नगर निगम में उसका पंजीकरण कराना होगा। नहीं तो आपको भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। पालतू कुत्ते का लाइसेंस न बनवाने वालों पर नगर निगम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की और 50 व्यक्तियों का चालान किया।

    आपको बता दें कि निगम ने कुत्ता मालिकों पर जुर्माने की कार्रवाई के लिए चार टीम मैदान में उतार दी हैं। सुबह व शाम को यह टीमें शहरभर में घूमकर पालतू कुत्तों की तलाश करेंगी और पंजीकरण नहीं होने पर संबंधित मालिक का पहली बार पकड़े जाने पर 500 रुपये का चालान किया जाएगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर 5000 रुपये का चालान व तीसरी बार मुकदमे की कार्रवाई की तैयारी की गई है।इसके साथ-साथ अब निगम ने रेजीडेंट वेलफेयर सोसाइटी में शिविर लगाकर पालतू कुत्तों का पंजीकरण करना भी शुरू कर दिया है।

    पंजीकरण के लिए प्रविधान

    • पंजीकरण फार्म के साथ पशु चिकित्सक से रैबीज से बचाने को लगने वाले टीके के लगे होने का प्रमाण-पत्र लाना होगा।
    • जीवाणुनाशक का प्रमाण पत्र भी साथ लाना होगा।
    • पंजीकरण के बाद नगर निगम संबंधित व्यक्ति को उसके नाम और पते वाला एक टोकन देगा।
    • पंजीकरण के लिए 200 रुपये शुल्क जमा होगा।
    • पालतू कुत्ते के किसी को काटने पर नुकसान की प्रतिपूर्ति उसके मालिक को करनी पड़ेगी।

    गौरतलब है कि देहरादून नगर निगम क्षेत्र में करीब 20 हजार पालतू कुत्ते हैं।जिन्होंने पिछले वर्ष पंजीकरण कराया था, वह नवीनीकरण कराने नहीं आ रहे। पिछले वर्ष नगर निगम में लगभग 4000 कुत्तों का पंजीकरण हुआ था, जिसमें इस वर्ष अभी तक केवल 800 कुत्तों का पंजीकरण नवीनीकरण कराया गया है। ऐसे में अब जिन लोगों ने अपने पालतू कुत्तों का नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है और न ही निर्धारित शुल्क 200 रुपए जमा कराए हैं तो ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम ऐसे तमाम कुत्तों को चिन्हित कर रहा है, जिनका पंजीकरण नहीं कराया गया है।

  • मोबाइल फोन से कोसो दूर है उत्तराखडं के ये गांव, अब चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रखी ये मांग

    मोबाइल फोन से कोसो दूर है उत्तराखडं के ये गांव, अब चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रखी ये मांग

    पिथौरागढ़: देशभर में जहां डिजिटल इंडिया का बोलबाला है। वहीं उत्तराखंड में आज भी ऐसी जगह है जहां लोग डिजिटल सेवा तो क्या मोबाइल फोन से भी दूर है। मुनस्यारी तहसील का होकरा गांव संचार सेवा से पूरी तरह अछूता है,होकरा से लगे 4 अन्य गांव जरथी, खोयम, गोला और नामिक में भी संचार सेवा का नामोनिशान नहीं है। जिस कारण हजारों की आबादी को डिजिटल सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम ये है कि ग्रामीणों को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। यहीं नहीं शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी यहां राम भरोसे चल रही हैं, जबकि होकरा को जोड़ने वाली सड़क मॉनसून सीजन में बन्द रहती है। अब विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही चुनाव बहिष्कार की मांग उठने लगी है।

    आपको बता दें कि ग्रामीणों सिलेंडर की बुकिंग करने के लिए भी 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है,होकरा के ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार की अव्यवस्थाओं को लेकर 3 महीने लंबा क्रमिक अनशन भी किया था, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने गांव पहुंच कर सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभीतक हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीण कई बार संचार सेवा बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है, जिस कारण लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही क्षेत्र में संचार सेवा बहाल नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।

     

  • मोबाइल फोन से कोसो दूर है उत्तराखडं के ये गांव, अब चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रखी ये मांग

    मोबाइल फोन से कोसो दूर है उत्तराखडं के ये गांव, अब चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर रखी ये मांग

    पिथौरागढ़: देशभर में जहां डिजिटल इंडिया का बोलबाला है। वहीं उत्तराखंड में आज भी ऐसी जगह है जहां लोग डिजिटल सेवा तो क्या मोबाइल फोन से भी दूर है। मुनस्यारी तहसील का होकरा गांव संचार सेवा से पूरी तरह अछूता है,होकरा से लगे 4 अन्य गांव जरथी, खोयम, गोला और नामिक में भी संचार सेवा का नामोनिशान नहीं है। जिस कारण हजारों की आबादी को डिजिटल सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम ये है कि ग्रामीणों को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने के लिए 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। यहीं नहीं शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं भी यहां राम भरोसे चल रही हैं, जबकि होकरा को जोड़ने वाली सड़क मॉनसून सीजन में बन्द रहती है। अब विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही चुनाव बहिष्कार की मांग उठने लगी है।

    आपको बता दें कि ग्रामीणों सिलेंडर की बुकिंग करने के लिए भी 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है,होकरा के ग्रामीणों ने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार की अव्यवस्थाओं को लेकर 3 महीने लंबा क्रमिक अनशन भी किया था, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों ने गांव पहुंच कर सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभीतक हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीण कई बार संचार सेवा बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है, जिस कारण लोगों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही क्षेत्र में संचार सेवा बहाल नहीं हुई तो विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।

     

  • देहरादूनः अनाथ अश्राम में शर्मनाक वारदात, नाबालिग बनी हवस का शिकार

    देहरादूनः अनाथ अश्राम में शर्मनाक वारदात, नाबालिग बनी हवस का शिकार

    देहरादून: राजधानी देहरादून को शर्मसार करती वारदात सामने आई है। यहां  खुड़बुड़ा पुलिस चौकी इलाके में स्थित एक अनाथ आश्रम में नाबालिग लड़की को हवस का शिकार बनाया गया है। लड़की की तबियत खराब बताई जा रही है। आरोपी आश्रम का ही लड़का बताया जा रहा है। आश्रम में इस तरह की वारदात सामने आने के बाद प्रशासन में आश्रम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल उपचार के लिए भेजा है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अनाथ आश्रम प्रशासन की तहरीर के आधार पर दुष्कर्म मामले का खुलासा तब हुआ जब काफी दिनों से पीड़िता की तबीयत खराब हो रही थी। 4 महीने से मासिक धर्म न होने के चलते तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ। बताया जा रहा है कि आश्रम का ही लड़का काफी समय से पीड़िता के साथ दुष्कर्म कर रहा था। वह भी नाबालिग बताया जा रहा है। आरोपी को आश्रम में ही फिलहाल नजरबंद रखा गया है। मेडिकल जांच, साक्ष्य सबूत के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।फिलहाल पुलिस मेडिकल जांच रिपोर्ट और पूछताछ के अनुसार कार्रवाई में जुटी है।

  • देहरादूनः अनाथ अश्राम में शर्मनाक वारदात, नाबालिग बनी हवस का शिकार

    देहरादूनः अनाथ अश्राम में शर्मनाक वारदात, नाबालिग बनी हवस का शिकार

    देहरादून: राजधानी देहरादून को शर्मसार करती वारदात सामने आई है। यहां  खुड़बुड़ा पुलिस चौकी इलाके में स्थित एक अनाथ आश्रम में नाबालिग लड़की को हवस का शिकार बनाया गया है। लड़की की तबियत खराब बताई जा रही है। आरोपी आश्रम का ही लड़का बताया जा रहा है। आश्रम में इस तरह की वारदात सामने आने के बाद प्रशासन में आश्रम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल उपचार के लिए भेजा है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अनाथ आश्रम प्रशासन की तहरीर के आधार पर दुष्कर्म मामले का खुलासा तब हुआ जब काफी दिनों से पीड़िता की तबीयत खराब हो रही थी। 4 महीने से मासिक धर्म न होने के चलते तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद इस मामले का खुलासा हुआ। बताया जा रहा है कि आश्रम का ही लड़का काफी समय से पीड़िता के साथ दुष्कर्म कर रहा था। वह भी नाबालिग बताया जा रहा है। आरोपी को आश्रम में ही फिलहाल नजरबंद रखा गया है। मेडिकल जांच, साक्ष्य सबूत के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।फिलहाल पुलिस मेडिकल जांच रिपोर्ट और पूछताछ के अनुसार कार्रवाई में जुटी है।

  • उत्तराखंडः शिक्षा विभाग का आदेश , स्कूलों में अब पहले की तरह होगी पढ़ाई

    उत्तराखंडः शिक्षा विभाग का आदेश , स्कूलों में अब पहले की तरह होगी पढ़ाई

    देहरादून: उत्तराखंड के छठीं से 12 वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा आदेश जारी किया है। राज्य में अब सभी स्कूल अब सामान्य रूप से खुलेंगे।  शिक्षा विभाग ने केवल तीन और चार घंटे तक ही स्कूल खोलने की बंदिश को खत्म कर दिया गया है। शिक्षा सचिव डॉ. बीवीआरसी पुरूषोत्तम ने इसके आदेश जारी कर दिए है। हालांकि बाकी कोरोना संक्रमण आदि से सुरक्षा के लिए तय सभी मानकों को कड़ाई से पालन करना होगा।

    आपको बता दें कि अब तक कोविड 19 संक्रमण की वजह से राज्य के आठवीं तक के स्कूलों को केवल तीन घंटे और नवीं से 12वीं तक के स्कूलों को चार घंटे खोलने की अनुमति थी। जिसे अब खत्म कर दिया गया है। अब स्कूल पहले जैसे ही खुलेंगे।वर्तमान में मैदानी जिलों में सरकारी स्कूल सुबह 9.30 बजे से दोपहर 3.30 तक खुलते हैं। मौजूदा स्थितियों के लिए हादसे छात्रों की पढ़ाई पर कोई व्यवधान ना पड़े इसके लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अब इसी प्रकार स्कूलों में पूरी पढ़ाई कराई जाएगी। लेकिन वहीं दूसरी और कोरोना के बढ़ते मामले में परेशानी का सबब साबित हो रहे है।

  • शहीद के परिवार ने नहीं उठाने दी आंगन से मिट्टी, शहीद सम्मान यात्रा का किया विरोध

    शहीद के परिवार ने नहीं उठाने दी आंगन से मिट्टी, शहीद सम्मान यात्रा का किया विरोध

    पिथौरागढ़ः उत्तराखंड में राज्य सरकार जहां पांचवें सैन्य धाम का निर्माण के लिए प्रत्येक शहीद परिवार से मिट्टी ली जा रही है। भाजपा द्वारा उत्तराखंड में सैन्य धाम बनाए जाने को लेकर निकाली गई शहीद सम्मान यात्रा की शुरुआत  की गई है। तो वहीं अब शहीद के परिवार सरकार पर वादे पूरे न करने और अनदेखी का आरोप लगाकर अपने आंगन की मिट्टी देने से इंकार कर रहे है। पिथौरागढ़ जिले से ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां एकमात्र अशोक चक्र विजेता शहीद बहादुर सिंह रावल के परिजनों और ग्रामीणों ने शहीद सम्मान यात्रा का विरोध करते हुए सैन्य धाम निर्माण के लिए आंगन की मिट्टी उठाने से मना कर दिया। मिट्टी लेने गए अधिकारियों के सामने परिजन व ग्रामीण धरने पर बैठ गए।

    शहीद के परिवार का कहना है कि शहादत के समय उनसे बड़े-बड़े वादे कर शहीद के नाम की सड़क बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन सालों बाद भी सड़क नहीं बन सकी।इतना ही नहीं शहीद के नाम पर स्कूल का नाम रखे जाने, मिनी स्टेडियम बनाए जाने और उनकी पत्नी को नौकरी देने की बात कही गई थी, लेकिन 6 साल बाद अभी तक उनके बेटे की शहादत को श्रद्धांजलि नहीं मिली, क्योंकि जो घोषणाएं सरकार ने की थीं वो आज हवा हवाई हो गई हैं। ऐसे में वो अपने आंगन से मिट्टी उठाने की इजाजत नहीं देंगे। राज्य सरकार शहीद का सम्मान करना भूल गई है।

    वहीं शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की मां राधिका देवी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 6 साल पहले उसके बेटे ने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर किया, उस दौरान कई नेता, अधिकारी, मंत्री और खुद मुख्यमंत्री उनके घर पहुंचे थे और कई घोषणाएं की थीं, जो आज तक पूरी नहीं हुई हैं। वहां पहुंचे अधिकारी लंबे समय तक परिजनों व ग्रामीणों को मनाते रहे, लेकिन वे सड़क निर्माण की मांग पर अड़े रहे। अंत में अधिकारियों को मायूस होकर लौटना पड़ा।विरोध बढ़ता देख उच्च अधिकारियों और सरकार के जनप्रतिनिधियों ने फोन पर सांसद अजय टम्टा और शहीद की मां की वार्ता करवाई, सांसद टम्टा ने उनकी मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया, तब शहीद के घर से मिट्टी उठाई जा सकी।

     

     

  • डिजिटल इण्डिया लैण्ड रिकार्ड मॉडनाईजेशन के लिए कमेटियों का गठन, देखें आदेश

    डिजिटल इण्डिया लैण्ड रिकार्ड मॉडनाईजेशन के लिए कमेटियों का गठन, देखें आदेश

    देहरादूनः उत्तराखंड सरकार ने डिजिटल इण्डिया लैण्ड रिकार्ड मॉडनाईजेशन प्रोग्राम के तहत बड़ा कदम बड़ा दिया है। सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए शासन और जिला स्तर पर कमेटियों का गठन कर दिया है। जिसका आदेश जारी कर दिया गया है। इस योजना के भली प्रकार काम करने पर लोगों को उत्तराखंड भूमि जानकारी ( खसरा खतौनी नकल ROR, भू नक्शा) की ऑनलाइन सुविधा मिलेगी।सरकार ने DILRMP के अन्तर्गत शासनादेश एवं भारत सरकार द्वारा जारी गाईडलाईन के आधार पर प्रदेश स्तर पर योजना की सफलता के लिए टीम का गठन कर राज्यपाल ने आदेश जारी कर दिए है। आदेश में अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। देखें आदेश…