Category: उत्तराखंड

  • धामी सरकार की बड़ी पहल, खाद्य तेल के ‘री-यूज़’ पर कड़ी निगरानी

    धामी सरकार की बड़ी पहल, खाद्य तेल के ‘री-यूज़’ पर कड़ी निगरानी

    देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा निर्देशों व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में FDA आम जनता को स्वास्थ्य वर्धक व सुरक्षित भोजन मुहैया कराने को लेकर लगातार प्रयासरत है।

    फूड डिलीवरी एप्स और रेडी-टू-ईट संस्कृति के इस दौर में घर में बना ताज़ा भोजन एक विकल्प से अधिक आदत और जिम्मेदारी दोनों है। लेकिन बदलती लाइफस्टाइल के चलते बड़ी आबादी बाजार के खाने पर निर्भर होती जा रही है। खासकर युवा पीढ़ी में बाहर के खाने का चलन तेज़ी से बढ़ा है, जिसका दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

    सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में एक बार इस्तेमाल हो चुके खाद्य तेल को पुनः पकाने में उपयोग करने की प्रवृत्ति आम होती जा रही है। शोध बताते हैं कि बार-बार गर्म किए गए तेल में हानिकारक रसायन बनते हैं, जो हृदय रोग, कैंसर और उच्च ट्रांस फैट जैसी स्थितियों का खतरा कई गुना बढ़ाते हैं।

    इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने वर्ष 2018 में देशव्यापी RUCO (Repurpose Used Cooking Oil) मिशन की शुरुआत की। इसका उद्देश्य प्रयोग किए गए तेल को खाद्य श्रृंखला में वापस जाने से रोकना तथा उसे बायोफ्यूल जैसे गैर-खाद्य उपयोगों में परिवर्तित करना है।

    RUCO मिशन की ज़रूरत और उत्तराखंड की सफलता
    अपर आयुक्त एफडीए ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार तेल को दुबारा गर्म करने पर उसमें एल्डिहाइड्स और अन्य जहरीले यौगिक तेजी से बनते हैं। इन रसायनों से शरीर की कोशिकाएं नष्ट होती हैं और कैंसर सहित कई बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा यह ट्रांस फैट की मात्रा में भी तीव्र वृद्धि करता है, जो हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का एक बड़ा कारण है।

    ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की 2022 की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शहरी भारत में लगभग 60 प्रतिशत खाना पकाने वाला तेल एक बार उपयोग होने के बाद भी दोबारा बिक्री या पुनः उपयोग के माध्यम से खाद्य श्रृंखला में वापस आ जाता है। यह आंकड़ा स्वास्थ्य संकट की गंभीर चेतावनी है।

    अपर आयुक्त एफडीए ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार 2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति इस समस्या से निपटने के लिए इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल को बायोडीज़ल में बदलने को प्रोत्साहित करती है। RUCO इसी नीति के अंतर्गत एक मजबूत आपूर्ति तंत्र तैयार कर रहा है। उत्तराखंड ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपने आप को मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त एफडीए डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में राज्य ने इसे मिशन मोड में लागू किया। इस दौरान फूड बिजनेस ऑपरेटरों, एफडीए अधिकारियों, एग्रीगेटर, रीसायकलर, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों, छात्र समूहों और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए गए। कैफे टॉक्स, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण सत्र और मीडिया संवादों ने इस अभियान को सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दिया।

    अपर आयुक्त एफडीए ताजबर सिंह जग्गी के अनुसार 2019 में शुरू हुए RUCO मॉडल में जहां पहले चरण में महज 600 लीटर इस्तेमाल किया गया तेल एकत्र हुआ था, वहीं पांच वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1,06,414 किलो तक पहुंच गई। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड ने इस मिशन को न सिर्फ अपनाया बल्कि इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू भी किया। 2025 की चारधाम यात्रा को भी इसी थीम पर आयोजित किया गया।

    यात्रा मार्ग पर खाद्य तेल के पुनः उपयोग को रोकने के लिए खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया गया, जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए और इसमें कुल 1,200 किलो इस्तेमाल किया गया तेल एकत्र कर इसे बायोफ्यूल में परिवर्तित किया गया। इस पूरी पहल ने न सिर्फ स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।इस अभियान की सफलता का श्रेय सरकारी तंत्र के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों और आम जनता की सक्रिय भागीदारी को भी जाता है।

    उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन आगामी वर्षों में इस मुहिम को और तीव्र गति से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यह दून मॉडल ईट राइट इंडिया और RUCO पहल के तहत विकसित एक अभिनव प्रणाली है, जिसकी सराहना FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी की। राज्य FDA अब इसे गढ़वाल और कुमाऊँ में चरणबद्ध तरीके से लागू करने जा रहा है। मॉडल का लक्ष्य खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और उपयोग किए गए खाना पकाने के तेल के सुरक्षित पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है।

    इस प्रभावी पहल को आगे बढ़ाने में उप आयुक्त एवं नोडल अधिकारी (Eat Right India – RUCO Initiative) गणेश कंडवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनके नेतृत्व में यह मॉडल उत्तराखंड के लिए एक मिसाल बन रहा है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
    राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी स्थिति में जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस्तेमाल किए गए तेल का दोबारा उपयोग रोकने का अभियान केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सेहत बचाने का संकल्प है। उत्तराखंड ने RUCO को न सिर्फ सफल बनाया है, बल्कि इसे सामाजिक जागरूकता की मुहिम में बदलकर देश के सामने एक नया मानक स्थापित किया है। हम इस अभियान को और व्यापक रूप में आगे बढ़ाएंगे, ताकि स्वस्थ उत्तराखंड का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सके।

    स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त FDA डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में RUCO मिशन को उत्तराखंड में मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि एक बार इस्तेमाल होने वाला खाद्य तेल किसी भी हालत में खाद्य श्रृंखला में वापस न जाए। इसके लिए फूड बिजनेस ऑपरेटरों, होटलों, रेस्टोरेंट्स, ढाबों और सभी खाद्य कारोबारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। आम जनता भी अब इस मुद्दे के प्रति अधिक संवेदनशील हो रही है। अगले चरण में हम तकनीकी निगरानी, बड़े पैमाने पर संग्रहण तंत्र और बायोफ्यूल निर्माण क्षमता को और मजबूत करेंगे। यह मुहिम केवल स्वास्थ्य सुरक्षा ही नहीं, पर्यावरण संरक्षण का भी महत्वपूर्ण कदम है।

  • आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी ने 6 दिसंबर 2025 को मनाया अपना 9वां दीक्षांत समारोह

    आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी ने 6 दिसंबर 2025 को मनाया अपना 9वां दीक्षांत समारोह

    देहरादून, उत्तराखंड – 6 दिसंबर 2025: आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी ने आज अपने 9वें दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह समारोह विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट हुए छात्रों की वर्षों की शैक्षणिक उत्कृष्टता और परिश्रम का उत्सव था। समारोह की शुरुआत सुबह 10:30 बजे वेदांता हॉल, डीआईटी यूनिवर्सिटी, देहरादून में हुआ।

    प्रसिद्ध उद्यमी, समाजसेवी और पर्यावरणविद श्रीमती रेवती कामथ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वास्तुकला और ग्रामीण विकास में उनके योगदान ने ग्रेजुएट हुए छात्रों को काफ़ी प्रोत्साहित किया। डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, आईएएस, सचिव, सामाजिक कल्याण, श्रम एवं योजना विभाग, उत्तराखंड सरकार, समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    समारोह की शुरुआत पारंपरिक ऐकडेमिक प्रोसेशन से हुई, जो विश्वविद्यालय की विरासत, मूल्यों और शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाता है। इसके बाद मुख्य अतिथि ने औपचारिक रूप से दीक्षांत समारोह के आरंभ की घोषणा की। इसके बाद विश्वविद्यालय ने विशिष्ट अतिथियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।

    अपने प्रेरणादायी संबोधन में माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अनिल सुब्बाराव पायला ने विश्वविद्यालय के दर्शन की पुनः व्यख्या कि जिसमें छात्रों को न केवल शैक्षणिक और पेशेवर उत्कृष्टता के लिए बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए भी तैयार किया जाता है। सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती रेवती कामथ ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह इस बात का सशक्त स्मरण है कि अपने ज्ञान का उपयोग सतत विकास, नेतृत्व और समाज के सामूहिक कल्याण के लिए करना हमारी जिम्मेदारी है।

    डॉ. श्रीधर ने जोर देकर कहा कि राष्ट्र का भविष्य उन युवा स्नातकों के हाथों में है जो कौशल के साथ ईमानदारी, नवाचार के साथ संवेदनशीलता और महत्वाकांक्षा के साथ लोक सेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हैं।

    समारोह में कुल 549 स्नातक हुए छात्रों को विभिन्न कार्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें: प्रबंधन में पीएचडी, विधि में पीएचडी, होटल मैनेजमेंट में पीएचडी, एमबीए, इंटीग्रेटेड बीबीए–एमबीए, एलएलएम, बीबीए, बी.कॉम (ऑनर्स), बीबीए एलएलबी, बीए एलएलबी, बीए (मीडिया एंड कम्युनिकेशन डिजाइन), बैचलर ऑफ होटल मैनेजमेंट और बैचलर ऑफ आर्ट्स।

    उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि और अनुशासन के लिए फाउंडर चेयरमैन मेडल इंटीग्रेटेड बीबीए–एमबीए की छात्रा राधिका सूरी को प्रदान किया गया, जबकि ऑलराउंड परफॉरमेंस के लिए प्रेसिडेंट मेडल बैचलर ऑफ आर्ट्स (मीडिया एंड कम्युनिकेशन डिजाइन) की छात्रा वेदांशी ओली को दिया गया। इसके अतिरिक्त, दस छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक प्रदान किए गए और पाँच छात्रों को पीएचडी की उपाधि दी गई, जो उनके उन्नत शोध और विद्वता में योगदान का प्रतीक है।

    विश्वविद्यालय ने निम्नलिखित छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किया: ज्योति (एमबीए); सृजन बंसिल (एलएलएम); समीक्षा जैन (बीबीए.एलएलबी.); कर्मा कुंसांग (बीएचएम); राधिका सूरी (इंटीग्रेटेड बीबीए–एमबीए); अनुष्का गुप्ता (बीए.एलएलबी.); वेदांशी ओली (बीए–मीडिया एंड कम्युनिकेशन डिजाइन); किरण (बीए–ऑनर्स); कनिष्का अग्रवाल (बीबीए); और स्तुति गुप्ता (बी.कॉम–ऑनर्स)।

    आईएमएस यूनिसन यूनिवर्सिटी का 9वां दीक्षांत समारोह शिक्षा, नेतृत्व, नैतिकता और नवाचार में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की उसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह आयोजन न केवल शैक्षणिक सफलता का उत्सव है, बल्कि सामाजिक रूप से जागरूक और वैश्विक स्तर पर सक्षम पेशेवर तैयार करने के विश्वविद्यालय के मिशन को भी पुनः अंकित करता है।

  • मुख्यमंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर याद किया

    मुख्यमंत्री ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर याद किया

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री आवास में उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनका भावपूर्ण स्मरण किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने जीवन पर्यंत शिक्षा, समानता और स्वाभिमान की अलख जगाई। उन्हीं के मार्ग का अनुसरण करते हुए उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर, सामाजिक समरसता और न्याय के सपने को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

  • जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने किया ईवीएम एवं वीवीपैट वेयरहाउस का त्रैमासिक निरीक्षण

    जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने किया ईवीएम एवं वीवीपैट वेयरहाउस का त्रैमासिक निरीक्षण

    भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में कल दिनांक 04 दिसंबर, 2025 को मध्यान्ह 12:00 बजे निकट बहुउद्देशीय क्रीड़ा भवन, अगस्त्यमुनि स्थित ई.वी.एम. एवं वीवीपैट वेयरहाउस का जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन द्वारा त्रैमासिक निरीक्षण किया गया।

    निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वेयरहाउस में रखी गई ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था, रिकॉर्ड रख-रखाव, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था तथा प्रवेश नियंत्रण प्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने निर्देश दिए कि वेयरहाउस परिसर में सुरक्षा मानकों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा निर्वाचन से संबंधित उपकरणों के रख-रखाव और दस्तावेजीकरण में पारदर्शिता बनाए रखी जाए।

    जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वेयरहाउस परिसर में नियमित सफाई, सुरक्षा घेरा, विद्युत व्यवस्था, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता एवं मशीनों की स्थिति का समय-समय पर परीक्षण किया जाए।

    निरीक्षण टीम ने सभी अभिलेखों एवं मशीनों की स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किए। साथ ही जिलाधिकारी ने उपस्थित राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी वेयरहाउस संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी प्रदान की।

    निरीक्षण के दौरान हरीश गुसांई एवं मोहन सिंह रौतेला (प्रतिनिधि, इंडियन नेशनल कांग्रेस रुद्रप्रयाग), श्रीनन्द जमलोकी एवं मनोज राणा (प्रतिनिधि, भारतीय जनता पार्टी रुद्रप्रयाग), उप जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग सोहन सिंह, तहसीलदार रुद्रप्रयाग, जिला निर्वाचन कार्यालय रुद्रप्रयाग के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • डीएम ने किया EVM–VVPAT वेयरहाउस का निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप त्रैमासिक निरीक्षण

    डीएम ने किया EVM–VVPAT वेयरहाउस का निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप त्रैमासिक निरीक्षण

    देहरादून: भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड, देहरादून के निर्देशानुसार जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी सविन बंसल ने रायपुर ब्लॉक के आवासीय परिसर, तपोवन रोड स्थित EVM–VVPAT वेयरहाउस का निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप त्रैमासिक निरीक्षण किया गया।

    निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वेयरहाउस में रखी सभी EVM एवं VVPAT मशीनों के भौतिक सत्यापन, सुरक्षा प्रोटोकॉल, द्विस्तरीय लॉकिंग सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा प्रबंधन तथा रख-रखाव की स्थिति का विस्तृत परीक्षण किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा किसी भी प्रकार की तकनीकी या भौतिक त्रुटि पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आयोजित निरीक्षण के समय राजनैतिक दलों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने निरीक्षण की पारदर्शिता एवं आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के पालन को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

    इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी / उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी भी उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वीकृति के क्रम में गन्ना की मूल्य वृद्धि का शासनादेश हुआ जारी

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वीकृति के क्रम में गन्ना की मूल्य वृद्धि का शासनादेश हुआ जारी

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उत्तराखण्ड गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य बढ़ाने की स्वीकृति के अनुपालन में शासन के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग अनुभाग के द्वारा शासनादेश निर्गत कर दिया गया है।

    मुख्यमंत्री की स्वीकृति के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश की समस्त चीनी मिलों द्वारा क्रय किये जाने वाले गन्ने की अगेती प्रजातियों हेतु रू. 405 प्रति कुन्तल (मिल गेट पर) तथा सामान्य प्रजातियों हेतु रू. 395 प्रति कुन्तल (मिल गेट पर) का राज्य परामर्शित मूल्य निर्धारित किया गया है।

    उल्लेखनीय है कि गत पेराई सत्र में राज्य में गन्ना की अगेती प्रजाति का राज्य परामर्शित मूल्य रू. 375 प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य रू. 365 प्रति कुंतल निर्धारित था। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के गन्ना किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ ही पेराई सत्र 2025-26 हेतु गन्ना का मूल्य बढ़ाए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई थी।

    मुख्यमंत्री धामी ने किसान हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के अपनी प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा था कि गन्ना किसानों की आय बढ़ाना, उनकी उपज का उचित सम्मान सुनिश्चित करना तथा उन्हें सुविधाजनक, पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान उपलब्ध कराना राज्य सरकार का दायित्व है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि क्रय केंद्रों पर किसी प्रकार की असुविधा न हो और भुगतान बिना देरी के सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना का बढ़ा हुआ मूल्य न केवल गन्ना किसानों को राहत देगा, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा तथा गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन देने में सहायक सिद्ध होगा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग रणवीर सिंह चौहान ने गन्ना का राज्य परामर्शित मूल्य बढ़ाए जाने के संबंध में शासनादेश जारी करते हुए कहा है कि चीनी मिलों के बाह्य क्रय केन्द्रों से गन्ने का परिवहन मिल तक कराये जाने के मद में होने वाली कटौती रू. 11 प्रति कुन्तल निर्धारित की जाएगी। पेराई सत्र 2025-26 हेतु उपरोक्तानुसार निर्धारित गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य राज्य की समस्त चीनी मिलों द्वारा देय होगा। पेराई सत्र 2025-26 हेतु निर्धारित उक्त दरों के अनुसार ही प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा किसानों को भुगतान कराया जायेगा तथा भुगतान की सूचना मासिक रूप से शासन को उपलब्ध करायी जाएगी।

  • सीएम ने किया वन क्लिक से 13982.92 लाख की पेंशन किश्त का भुगतान-9.38 लाख लाभार्थी हुए लाभान्वित

    सीएम ने किया वन क्लिक से 13982.92 लाख की पेंशन किश्त का भुगतान-9.38 लाख लाभार्थी हुए लाभान्वित

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री आवास में समाज कल्याण विभाग द्वारा “पेंशन किश्त का वितरण” कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने राज्यभर के पेंशन लाभार्थियों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

    मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत दी जाने वाली सभी पेंशन राशि प्रत्येक माह की 5 तारीख तक अनिवार्य रूप से लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुँचना सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी वृद्धजन, दिव्यांगजन, विधवा, किसान या कमजोर वर्ग को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी।

    मुख्यमंत्री ने आज कार्यक्रम में वन क्लिक के माध्यम से माह नवंबर 2025 की 13982.92 लाख रुपये की पेंशन किस्त का भुगतान करते हुए 9,38,999 लाभार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया।

    उन्होंने विभाग को पेंशन योजनाओं की पूरी प्रणाली को और अधिक सरल, तेज़, समयबद्ध और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य की सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ समाज के सबसे कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों के लिए जीवनरेखा हैं; इसलिए इन योजनाओं की पारदर्शिता, सत्यापन और क्रियान्वयन सर्वाेच्च प्राथमिकता पर होना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं का आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) नियमित रूप से किया जाए, ताकि किसी भी अयोग्य व्यक्ति को लाभ न मिले। उन्होंने कहा कि सरकार की सहायता उसी तक पहुँचे जो वास्तव में उसका पात्र है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि समान प्रकृति वाली सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को इंटीग्रेशन के माध्यम से एकीकृत किया जाए, जिससे डुप्लीकेसी समाप्त हो और योजनाओं का लाभ तेज़ी से सही व्यक्ति तक पहुँचना सुनिश्चित हो सके।

    मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सरकारी समारोहों और कार्यक्रमों में स्थानीय उत्पादों को पूर्ण प्राथमिकता देने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के स्मृति-चिह्न, उपहार या सम्मान सामग्री में उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों का ही उपयोग किया जाए। उन्होंने बुके की जगह “बुक” देने की नई परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इसे समय, धन और संसाधन बचत वाला नवाचार बताया। मुख्यमंत्री ने सभी कार्यक्रमों को अधिक सादगीपूर्ण बनाने की बात कहते हुए कहा कि यह न सिर्फ एक अच्छी प्रशासनिक परंपरा है बल्कि सुशासन व उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला कदम भी है।

    समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, किसान पेंशन, परित्यक्ता पेंशन, भरण-पोषण अनुदान, तीर्थ पुरोहित पेंशन तथा बौना पेंशन-इन आठों योजनाओं के अंतर्गत 9.38 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रतिमाह पेंशन डीबीटी प्रणाली से सीधे खाते में भेजी जा रही है। डिजिटल लेन-देन की यह व्यवस्था न केवल पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि इससे लाभार्थियों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिलती है।

    विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं के लिए प्रतिवर्ष 13982.92 लाख रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है, जो सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया की सोच के अनुरूप उत्तराखंड की पेंशन प्रणाली अब एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो रही है, जहाँ पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर सेवा-तीनों सुनिश्चित हो रहे हैं।

    कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान पेंशन भुगतान व्यवस्था राज्य में सुशासन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है और सरकार के निर्देशों के अनुरूप इसे और अधिक मजबूत और जन-केंद्रित बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और कहा कि जनसेवा ही शासन का वास्तविक उद्देश्य है, तथा पेंशन योजनाओं को बेहतर बनाना सरकार की निरंतर प्राथमिकता रहेगी।

    कार्यक्रम में सचिव श्री श्रीधर बाबू अदाकी, अपर सचिव श्री बंशीधर तिवारी सहित समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

  • हर्बल व जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर दिया जाए जोर- मुख्यमंत्री

    हर्बल व जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर दिया जाए जोर- मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में क्लस्टर बनाकर हर्बल क्षेत्र में व्यवस्थित रूप से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उपलब्ध हर्बल एवं औषधीय उत्पादों के संवर्धन और प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जड़ी-बूटी और एरोमा सेक्टर में अग्रणी दो राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज़ का अध्ययन करने हेतु राज्य से विषय विशेषज्ञों की टीम भेजी जाए, जिससे उत्तराखंड में भी इन नवाचारों को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी क्षेत्र में टर्नओवर बढ़ाने के लिए अनुसंधान, नवाचार, उत्पादन, विपणन और ब्रांडिंग पर समन्वित रूप से कार्य हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक हर्बल संपदा का केंद्र है। राज्य में इसकी अपार संभावनाओं को देखते हुए हर्बल इकोनॉमी को विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। किसानों को उनके उत्पाद का अधिकतम लाभ दिलाने, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा महिलाओं को आर्थिकी से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि हर्बल उत्पादों की वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये पंतनगर विश्वविद्यालय के सहयोग भी लिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में भालू सहित अन्य जंगली जीवों से जनजीवन और फसलों को नुकसान पहुँच रहा है, वहाँ कृषि एवं वन विभागों की संयुक्त टीमें भेजी जाएं। ये टीमें लोगों को सुरक्षा उपायों और फसल संरक्षण के लिए जानकारी प्रदान करें।

    बैठक में जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निदेशक डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों, दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण, उत्पादन, और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।

    बैठक में कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी, उपाध्यक्ष जड़ी-बूटी सलाहकार समिति श्री भुवन विक्रम डबराल, श्री बलवीर घुनियाल, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री एस.एन. पांडेय, श्री वी. षणमुगम, अपर सचिव श्री विजय कुमार जोगदंडे, सुश्री वंदना, सुश्री अनुराधा पाल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

  • एम्स में विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह का समापन उल्लेखनीय कार्य एवं प्रतिस्पर्धाओं के प्रतिभागी हुए सम्मानित

    एम्स में विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह का समापन उल्लेखनीय कार्य एवं प्रतिस्पर्धाओं के प्रतिभागी हुए सम्मानित

    एम्स, ऋषिकेश के तत्वावधान में एम्स हरसाल नवंबर माह में आने वाले विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह के तहत जनजागरूकता आधारित साइक्लोथॉन, पब्लिक टॉक, स्लोगन लेखन, क्विज, पोस्टर, स्टोन पेंटिंग, फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिनके माध्यम से जनमानस को संदेश दिया गया।
    साथ ही समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर नवजात शिशुओं की माताओं, उनके तीमारदारों को संस्थान की ओर से सम्मानित भी किया गया।

    बतौर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक एवं सीइओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह ) के समापन समारोह में कहा कि नवजात शिशुओं की हॉस्पिटल में रहते हुए प्रिमैचुअर शिशुओं की देखभाल की गुणवत्ता एवं संख्या में वृद्धि हुई है।

    उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर जनता को जागरूक करने की आवश्यकता है। कि समय से पहले जन्मे बच्चे वास्तव में आगे चलकर भविष्य में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। इसके कई उदाहरण मौजूद हैं।

    निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि इन शिशओं की देखभाल के नतीजों में सुधार लाने के लिए कई व्यवस्थाओं और सुविधाओें में वृद्धि (progress) विभिन्न अवस्था में संस्थान में जारी है, जिनमें वृहद मिल्क बैंक, मदर एंड चाइल्ड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मदर नियोनेटल आईसीयू, Tele-NICU और Tele-PICU आदि शामिल हैं।

    इस अवसर पर उन्होंने वृहद जनजागरुकता कार्यक्रम के आयोजन पर नवजात शिशु विभाग, कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं नर्सिंग सर्विसेस की प्रशंसा की और आयोजकों के साथ साथ प्रतिभागियों को भी बधाई दी।

    संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर डॉ. जया चतुर्वेदी एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. बी. सत्याश्री ने प्रिमैचुअर शिशुओं की माताओं के मनोबल के बारे में निजी अनुभव साझा किए व उनके प्रोत्साहन के उपाय सुझाए।

    नवजात शिशु विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. श्रीपर्णा बासू ने संस्थान में जन्मे सबसे कम वजन वाले (571g), सबसे जटिल अवस्थाओं से पार कर बचने वाले व सर्वाधिक समय (6 माह) अस्पताल में व्यतीत कर छुट्टी होने वाला 30 हफ्ते से कम गर्भावस्था वाले प्रिमैचुअर बच्चों को बचाने की निक्कू NICU की उपलब्धि के बारे में जानकारी दी ।

    नवजात शिशु विभाग से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमन चौरसिया ने बताया कि इसी कार्यक्रम में इस वर्ष आठ 8 विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, आयोजित प्रतिस्पर्धाओं में विद्यार्थियों, नर्सिंग ऑफिसरों एवं चिकित्सकों ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया।


    यह हुए आयोजन, इन्हें मिला सम्मान

    विश्व प्रिमैचुअरली अवेरनैस माह के अंतर्गत एम्स,ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रमों में बीते 15 नवंबर को दो किमी. लंबी साइकिल रेस में 40 प्रतिभागी सम्मिलित हुए, जिनमें ब्ल्यू राइडर ग्रुप का भी विशेष योगदान रहा। इसी प्रकार 19 नवंबर को आयोजित बेसिक NRP ट्रेनिंग कोर्स में नवजात शिशुओं को पुनर्जीवन प्रदान करने की ट्रेनिंग में 28 नर्सेस और डॉक्टर्स को प्रशिक्षण दिया गया। जनसंवाद के तहत निक्कू के नर्सिंग ऑफिसर्स दीपिका और चांदनी ने 21 नवंबर को एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में जाकर 30-35 स्वास्थ्यकर्मियों एवं तीमारदारों का ज्ञानवर्धन किया।
    जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम में गिटार प्रदर्शन करते हुए 2022 बैच के एमबीबीएस के विद्यार्थियों आयुष एवं अथर्व के साथ ही कुचीपुड़ी नृत्य प्रदर्शन करते हुए निक्कू की सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर वर्षा व डॉक्टर रक्षिता द्वारा प्रस्तुत प्रिमैचुअर शिशुओं के जीवन की लड़ाई के सफर को सभी ने खूब सराहा।
    समारोह में नियोनेटोलॉजी विभाग की अपर आचार्य डॉ. पूनम सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मयंक प्रियदर्शी, कॉलेज ऑफ नर्सिंग से कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. जैवियर वैल्सियाल, एसोसिएट प्रोफेसर डा. मलार कोडी, नर्सिंग सर्विसेस विभाग से डीएनएस कमलेश एवं निक्कू से एएनएस आशीष शिनोय, सुमन कंवर, संत लाल, ज्योति आदि ने प्रतिभाग किया।

    विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के प्रतिभागियों एवं विजेताओं को संस्थान की निदेशक प्रो. मीनू सिंह व डीन अकादमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया।

    विश्व स्तनपान प्रिमैचुअर्टी जागरूकता माह के तहत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में नर्सिंग ऑफिसर एनआईसीयू प्राभलीन कौर ने प्रथम, बीएससी 2024 बैच नर्सिंग की सताक्षी चौहान ने द्वितीय व सीनियर नर्सिंग ऑफिसर मंजू शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
    इसी प्रकार स्टोन पेंटिंग प्रतियोगिता में बीएससी नर्सिंग की सताक्षी चौहान ने प्रथम, नर्सिंग ऑफिसर निक्कू अमीषा रावत ने द्वितीय व बीएससी नर्सिंग की ध्रुवता शारषी ने तृतीय स्थान पर रही।

    वहीं नर्सिंग क्विज में दिनेश परिहार व प्रीति आनंद और पीजी क्विज में मनीष व सूर्या अव्वल रहे। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में नर्सिंग ऑफिसर एनआईसीयू काजल ने पहला, एसएनओ (SNO) निक्कू संत लाल ने दूसरा और एसआर निक्कू डॉक्टर भाग्यश्री ने तीसरा स्थान प्राप्त किया जबकि स्लोगन लेखन में आईटी विभाग से अनुराग कृष्ण शुक्ला ने प्रथम, बीएससी 2023 बैच की आकांक्षा गौतम ने द्वितीय व बीएससी 2024 बैच की सताक्षी चौहान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

  • एम्स में विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह का समापन उल्लेखनीय कार्य एवं प्रतिस्पर्धाओं के प्रतिभागी हुए सम्मानित

    एम्स में विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह का समापन उल्लेखनीय कार्य एवं प्रतिस्पर्धाओं के प्रतिभागी हुए सम्मानित

    एम्स, ऋषिकेश के तत्वावधान में एम्स हरसाल नवंबर माह में आने वाले विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह के तहत जनजागरूकता आधारित साइक्लोथॉन, पब्लिक टॉक, स्लोगन लेखन, क्विज, पोस्टर, स्टोन पेंटिंग, फोटोग्राफी प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिनके माध्यम से जनमानस को संदेश दिया गया।
    साथ ही समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर नवजात शिशुओं की माताओं, उनके तीमारदारों को संस्थान की ओर से सम्मानित भी किया गया।

    बतौर मुख्य अतिथि एम्स निदेशक एवं सीइओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने विश्व प्रिमैचुअर्टी अवेरनैस माह ) के समापन समारोह में कहा कि नवजात शिशुओं की हॉस्पिटल में रहते हुए प्रिमैचुअर शिशुओं की देखभाल की गुणवत्ता एवं संख्या में वृद्धि हुई है।

    उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर जनता को जागरूक करने की आवश्यकता है। कि समय से पहले जन्मे बच्चे वास्तव में आगे चलकर भविष्य में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। इसके कई उदाहरण मौजूद हैं।

    निदेशक एम्स प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि इन शिशओं की देखभाल के नतीजों में सुधार लाने के लिए कई व्यवस्थाओं और सुविधाओें में वृद्धि (progress) विभिन्न अवस्था में संस्थान में जारी है, जिनमें वृहद मिल्क बैंक, मदर एंड चाइल्ड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, मदर नियोनेटल आईसीयू, Tele-NICU और Tele-PICU आदि शामिल हैं।

    इस अवसर पर उन्होंने वृहद जनजागरुकता कार्यक्रम के आयोजन पर नवजात शिशु विभाग, कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं नर्सिंग सर्विसेस की प्रशंसा की और आयोजकों के साथ साथ प्रतिभागियों को भी बधाई दी।

    संकायाध्यक्ष अकादमिक प्रोफेसर डॉ. जया चतुर्वेदी एवं चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. बी. सत्याश्री ने प्रिमैचुअर शिशुओं की माताओं के मनोबल के बारे में निजी अनुभव साझा किए व उनके प्रोत्साहन के उपाय सुझाए।

    नवजात शिशु विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. श्रीपर्णा बासू ने संस्थान में जन्मे सबसे कम वजन वाले (571g), सबसे जटिल अवस्थाओं से पार कर बचने वाले व सर्वाधिक समय (6 माह) अस्पताल में व्यतीत कर छुट्टी होने वाला 30 हफ्ते से कम गर्भावस्था वाले प्रिमैचुअर बच्चों को बचाने की निक्कू NICU की उपलब्धि के बारे में जानकारी दी ।

    नवजात शिशु विभाग से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमन चौरसिया ने बताया कि इसी कार्यक्रम में इस वर्ष आठ 8 विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, आयोजित प्रतिस्पर्धाओं में विद्यार्थियों, नर्सिंग ऑफिसरों एवं चिकित्सकों ने बढ़चढ़कर प्रतिभाग किया।


    यह हुए आयोजन, इन्हें मिला सम्मान

    विश्व प्रिमैचुअरली अवेरनैस माह के अंतर्गत एम्स,ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रमों में बीते 15 नवंबर को दो किमी. लंबी साइकिल रेस में 40 प्रतिभागी सम्मिलित हुए, जिनमें ब्ल्यू राइडर ग्रुप का भी विशेष योगदान रहा। इसी प्रकार 19 नवंबर को आयोजित बेसिक NRP ट्रेनिंग कोर्स में नवजात शिशुओं को पुनर्जीवन प्रदान करने की ट्रेनिंग में 28 नर्सेस और डॉक्टर्स को प्रशिक्षण दिया गया। जनसंवाद के तहत निक्कू के नर्सिंग ऑफिसर्स दीपिका और चांदनी ने 21 नवंबर को एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में जाकर 30-35 स्वास्थ्यकर्मियों एवं तीमारदारों का ज्ञानवर्धन किया।
    जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रम में गिटार प्रदर्शन करते हुए 2022 बैच के एमबीबीएस के विद्यार्थियों आयुष एवं अथर्व के साथ ही कुचीपुड़ी नृत्य प्रदर्शन करते हुए निक्कू की सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर वर्षा व डॉक्टर रक्षिता द्वारा प्रस्तुत प्रिमैचुअर शिशुओं के जीवन की लड़ाई के सफर को सभी ने खूब सराहा।
    समारोह में नियोनेटोलॉजी विभाग की अपर आचार्य डॉ. पूनम सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मयंक प्रियदर्शी, कॉलेज ऑफ नर्सिंग से कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. जैवियर वैल्सियाल, एसोसिएट प्रोफेसर डा. मलार कोडी, नर्सिंग सर्विसेस विभाग से डीएनएस कमलेश एवं निक्कू से एएनएस आशीष शिनोय, सुमन कंवर, संत लाल, ज्योति आदि ने प्रतिभाग किया।

    विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं के प्रतिभागियों एवं विजेताओं को संस्थान की निदेशक प्रो. मीनू सिंह व डीन अकादमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र भेंटकर सम्मानित किया।

    विश्व स्तनपान प्रिमैचुअर्टी जागरूकता माह के तहत आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में नर्सिंग ऑफिसर एनआईसीयू प्राभलीन कौर ने प्रथम, बीएससी 2024 बैच नर्सिंग की सताक्षी चौहान ने द्वितीय व सीनियर नर्सिंग ऑफिसर मंजू शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
    इसी प्रकार स्टोन पेंटिंग प्रतियोगिता में बीएससी नर्सिंग की सताक्षी चौहान ने प्रथम, नर्सिंग ऑफिसर निक्कू अमीषा रावत ने द्वितीय व बीएससी नर्सिंग की ध्रुवता शारषी ने तृतीय स्थान पर रही।

    वहीं नर्सिंग क्विज में दिनेश परिहार व प्रीति आनंद और पीजी क्विज में मनीष व सूर्या अव्वल रहे। फोटोग्राफी प्रतियोगिता में नर्सिंग ऑफिसर एनआईसीयू काजल ने पहला, एसएनओ (SNO) निक्कू संत लाल ने दूसरा और एसआर निक्कू डॉक्टर भाग्यश्री ने तीसरा स्थान प्राप्त किया जबकि स्लोगन लेखन में आईटी विभाग से अनुराग कृष्ण शुक्ला ने प्रथम, बीएससी 2023 बैच की आकांक्षा गौतम ने द्वितीय व बीएससी 2024 बैच की सताक्षी चौहान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।