Category: उत्तराखंड

  • एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन के सम्बन्ध में दिया प्रशिक्षण

    एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन के सम्बन्ध में दिया प्रशिक्षण

    भारत सरकार की युवा आपदा योजना के तहत भारत सरकार तथा सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग, उत्तराखंड शासन एवं जिलाधिकारी महोदय से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में जनपद चमोली के एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन जागरूकता से संबंधित विभिन्न जानकारियां एवं प्रशिक्षण संबंधी कार्यक्रम का समापन किया गया।

    उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 14 नवंबर 2025 से प्रारंभ हुआ था तथा आज दिनांक 20 नवंबर 2025 को समाप्त हो गया है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान एनसीसी कैडेट्स को आपदा प्रबंधन के अंतर्गत विभिन्न विषयों जैसे आपदा प्रबंधन, आपदा अधिनियम 2005 आपदाओं से तैयारी, भूकंप से सुरक्षा, भूस्खलन, बाढ़, त्वरित बाढ़, सूखा की जानकारी, फर्स्ट एड की जानकारी, केमिकल, न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल डिजास्टर की जानकारी, रोड सेफ्टी, रस्सी की गांठे तथा रस्सी को लपेटना, गहरी खाइयो में चढ़ना उतरना, नदियों को पार करने के तरीके, स्ट्रेचर बनाना, सैटेलाइट फोन का उपयोग, आग का प्रबंध करना, जंगल की आग का प्रबंध करना, पेशेंट को स्टेचर में शिफ्ट करना, किसी भारी वस्तु को एक स्थान से दूसरे स्थान में हस्तांतरित करना आदि विषयों पर जानकारी प्रदान की गई।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों के प्रति भाग किए जाने से आपदा के दौरान उक्त प्रशिक्षित एनसीसी कैडेट्स फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में स्थानीय प्रशासन को अपना सहयोग दे सकते हैं। जिससे त्वरित गति से राहत एवं बचाव कार्य संचालित किया जा सकेंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन दिवस पर *आपदा प्रबंधन मास्टर ट्रेनर राजू शाही / श्री सुशील सिंह कैन्तुरा एवं श्री किशन राजगुरु, मास्टर ट्रेनर युवा आपदा मित्र तथा कर्नल श्राजेश रावत कमान अधिकारी 01 यूके बटालियन गोपेश्वर, सूबेदार समर सिंह, सूबेदार जगदीश सिंह, हवलदार वीरेंद्र, हवलदार ललित, हवलदार साजिद अली, हवलदार अजय तथा जनपद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण देहरादून की ओर से श्री ऋषभ कुमार, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी उपस्थित रहे।

  • वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार सचिवालय देहरादून में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन प्रारम्भ हुआ

    वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार सचिवालय देहरादून में दो दिवसीय प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन प्रारम्भ हुआ

    उत्तराखंड सरकार ने आज अपनी दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं को पुनः रेखांकित करते हुए नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासकों और जिला अधिकारियों को विकसित उत्तराखंड@2047 के रोडमैप को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ लाया।

    अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने एओसी (AOC) को क्षेत्रीय अधिकारियों और नीति-निर्माताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि आमने-सामने की भागीदारी समन्वय को मजबूत करती है और उन क्षेत्रीय मुद्दों पर स्पष्टता लाती है, जिनके समाधान के लिए नीति-स्तरीय हस्तक्षेप आवश्यक है। मुख्य सचिव ने पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य एवं वेलनेस और शहरी विकास को राज्य की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभों के रूप में चिन्हित करते हुए अनियोजित शहरी विस्तार को रोकने हेतु नियोजित एवं सतत शहरीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखंड 2047 तभी साकार होगा जब नीति निर्माण में जमीनी वास्तविकताओं का समुचित प्रतिबिंब हो। आशा है कि यह विचार-विमर्श हमारे साझा दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए ठोस और समन्वित समाधान प्रदान करेगा।”

    प्रमुख सचिव डा. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने विकसित उत्तराखंड 2047 की विजनिंग प्रक्रिया प्रस्तुत की और 2025 से 2047 तक सतत विकास प्राप्त करने हेतु प्रस्तावित व्यापक आर्थिक मार्गों का विवरण दिया। बताया गया कि राज्य का जीएसडीपी 3.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2047 तक 28.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। उन्होंने उच्च-मूल्य कृषि की ओर संक्रमण, सेवा क्षेत्र के विस्तार, डिजिटल पहुँच एवं गुणवत्ता के सुदृढ़ीकरण, साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने राज्य की वित्तीय स्थिति प्रस्तुत करते हुए उभरती चुनौतियों जैसे अनुदानों की समाप्ति, राजस्व वृद्धि में मंदी और व्यय में बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण, यथार्थवादी अनुमान, लाइफ-साइकिल लागत आकलन और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

    इंफ्रास्ट्रक्चर एवं मोबिलिटी रोडमैप प्रस्तुत करते हुए सचिव पंकज पांडे ने पिछले 25 वर्षों में बेहतर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित किया और डी-कंजेशन उपायों, मजबूत एवं लचीले बुनियादी ढांचे, तथा सार्वजनिक परिवहन के बेहतर एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया, विशेषकर पर्यटन तथा आर्थिक विकास को गति देने के लिए।

    पर्यटन विभाग की अतिरिक्त सचिव ने विंटर टूरिज्म की अवधारणा प्रस्तुत की। इस संबंध में कुछ सर्किट चिन्हित किए गए हैं तथा इसे क्रियाशील बनाने के लिए नीतियों एवं प्रभावी अभिसरण की आवश्यकता पर बल दिया।

    इसके अतिरिक्त, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उधम सिंह नगर और हरिद्वार के जिलाधिकारियों द्वारा क्रमशः हर्बल एवं औषधीय पौधों, वाइब्रेंट विलेजेज, बागवानी की संभावनाएँ, आकांक्षी जिला पहल तथा कचरा प्रबंधन से संबंधित जिला-स्तरीय उत्कृष्ट कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया। विभिन्न जिला-स्तरीय चुनौतियों को भी जिलाधिकारियों द्वारा साझा किया गया। इस पर मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि चुनौतियों के समाधान एवं राज्य के त्वरित विकास हेतु कुछ संस्थागत ढाँचे विकसित किए जाने आवश्यक हैं।

    बैठक में अपर सचिव नवनीत पांडेय ने सम्मेलन का सफल संचालन किया।

    इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु व एल एल फैनई सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पटना (बिहार) में नवनिर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुए सम्मिलित

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पटना (बिहार) में नवनिर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में हुए सम्मिलित

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज बिहार के गांधी मैदान, पटना में आयोजित बिहार की नवनिर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिभाग करने पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बिहार और उत्तराखंड के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई सरकार के नेतृत्व में बिहार राज्य नई ऊर्जा और संकल्प के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने देशभर से पहुंचे विभिन्न राज्यों के गणमान्य नेताओं से भी शिष्टाचार भेंट की और उनसे राष्ट्रीय विकास, सुशासन तथा समन्वित प्रगतिशील नीतियों पर विचार-विमर्श किया।

  • एम्स ऋषिकेश के केन्द्रीय पुस्तकालय में बुद्धवार को तीन दिवसीय मेडिकल पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया

    एम्स ऋषिकेश के केन्द्रीय पुस्तकालय में बुद्धवार को तीन दिवसीय मेडिकल पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया

    एम्स ऋषिकेश के केन्द्रीय पुस्तकालय में बुद्धवार को तीन दिवसीय मेडिकल पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। छात्रों को उच्च गुणवत्ता की पुस्तकें उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रदर्शनी में चिकिसा शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल और स्वास्थ्य विज्ञान से संबन्धित उच्च गुणवत्ता की पुस्तकें प्रदर्शित की गयीं।

    मेडिकल, नर्सिंग व पैरामेडिकल के छात्रों के लाभार्थ नवीनतम पाठ्यपुस्तकें, मानक संदर्भ पुस्तकें और स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी हेतु विभिन्न नवीनतम पुस्तकें उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश के केन्द्रीय पुस्तकालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का बुद्धवार को शुभारम्भ हो गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह और डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया।

    इस दौरान संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि यह प्रदर्शनी छात्रों और संकायगणों को नवीनतम, साक्ष्य-आधारित व पाठ्यक्रम से संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाने का अवसर प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि इससे न केवल मेडिकल के छात्र लाभान्वित होंगे बल्कि संकाय सदस्यों व अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों को भी लाभ प्राप्त होगा। डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने छात्रों और शिक्षकों के बीच पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने में पुस्तकालय टीम के प्रयासों की सराहना की। कहा कि पुस्तकालय में पुस्तकों के महत्व को रचनात्मक और आकर्षक तरीके से संजोया गया है।

    संस्थान के वरिष्ठ पुस्तकालयाध्यक्ष व सूचना अधिकारी संदीप कुमार सिंह ने बताया कि मेडिकल बुक प्रदर्शनी में मेडिकल, शल्य चिकित्सा, बाल रोग, प्रसूति एवं स्त्री रोग, रेडियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, ऑर्थो, पल्मोनरी, गायनी, मेडिसिन जैसे विभिन्न विशिष्ट विषयों की नवीनतम पाठ्यपुस्तकें, संदर्भ पुस्तकें, नैदानिक नियमावली और अद्यतन संस्करण उपलब्ध हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध बनाना, नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति से छात्रों और संकायगणों को परिचित कराना और मुद्रित प्रारूप में उच्च-गुणवत्ता वाली पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराना है। उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शनी में स्प्रिंगर नेचर, वाॅल्टर्स क्लूवर, मेग्राहिल, एल्जिवेयर, जेपी बद्रर्श, सीबीएस पब्लिशर्स, एनावेटिव, लिपिकाॅट इत्यादि मेडिकल क्षेत्र के प्रमुख प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की गयी हैं।

    इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री, डीन रिसर्च प्रो. शैलेन्द्र हाण्डू, प्रो. लतिका मोहन, प्रो. रजनीश अरोड़ा, प्रो. आशी चुग, डाॅ. अमित त्यागी, डाॅ. विकास पंवार, डाॅ. उदित चौहान, डाॅ. रवि कुमार, मुख्य नर्सिंग अधिकारी डाॅ. अनिता रानी कंसल सहित विधि अधिकारी प्रदीप चन्द्र पाण्डेय, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी व विभिन्न विभागों के फेकल्टी सदस्य, मेडिकल व नर्सिंग के छात्र और लाईबे्ररी स्टाफ मौजूद रहे।

  • केंद्र ने उत्तराखंड को खनन के क्षेत्रों में सुधार कार्यो पर फिर दिया ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि ,खनन सुधार में राज्य नंबर-1 पर

    केंद्र ने उत्तराखंड को खनन के क्षेत्रों में सुधार कार्यो पर फिर दिया ₹100 करोड़ की प्रोत्साहन राशि ,खनन सुधार में राज्य नंबर-1 पर

    देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन और लगातार सुधारों के चलते उत्तराखंड एक बार फिर केंद्र सरकार से बड़ी प्रोत्साहन राशि हासिल करने में सफल रहा है। केंद्र के खान मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 की विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत उत्तराखंड को माइनर मिनरल्स रिफॉर्म्स मैं 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की है।

    इससे पहले भी माह अक्टूबर 2025 मैं राज्य को एसएमआरआई रैंकिंग मैं दूसरा स्थान प्राप्त होने पर 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। इस प्रकार खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट सुधारों और बेहतर नीतियों की बदौलत उत्तराखंड को कुल 200 करोड़ रुपये की प्रोहोत्सन राशि प्राप्त हो चुकी है।

    राज्य ने हाल के वर्षों में खनन सुधारों पर जोर देते हुए बेहतर नीतियां लागू की हैं, जिसका परिणाम यह है कि उत्तराखंड ने खनन सेक्टर में देश में नंबर-1 स्थान हासिल किया है। केंद्र द्वारा जारी ताज़ा कार्यालय ज्ञाप दिनांक 18.11.2025 में बताया गया है कि राज्य ने खनन क्षेत्र से जुड़ी अधिकांश सुधारात्मक कार्यवाहियों को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू किया है। खासतौर पर माइनर मिनरल रिफॉर्म्स से संबंधित 7 में से 6 प्रमुख सुधारों के मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे राज्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया गया है!

    खनन क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी और व्यवसाय-हितैषी नीतियों ने सरकार की आय में अभूतपूर्व वृद्धि की है। खनन विभाग के सुदृढ़ प्रबंधन तथा नई नीतियों ने न केवल सरकारी खजाने को मजबूती दी है, बल्कि प्रदेश में खनन कारोबार से लाखो लोगो को रोजगार प्राप्त हो रहा है और इससे जुड़े लाखों व्यापारियों और उद्यमियों को भी आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। स्थानीय लोगो और सरकारी कार्यदायी संस्था को सस्ते दाम पर निर्माण सामग्री मिल रही है खनन गतिविधियों के चलते राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है।

    केंद्र सरकार ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि उत्तराखंड खनन क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और सुधारों को तेजी से लागू कर रहा है। इसी प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र ने वित्त मंत्रालय से राज्य को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का आदेश जारी किया गया है है।

    उक्त आदेश में शामिल राज्यों—नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड—में उत्तराखंड का प्रदर्शन सबसे बेहतर दर्ज किया गया है। मंत्रालय के आदेश के अनुसार, सभी राज्यों ने खनन मैं सुधार प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनाई गई है।

    इस उपलब्धि के साथ यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड का खनन क्षेत्र राज्य सरकार के लिए राजस्व का एक मुख्य स्रोत साबित हो रहा है। बढ़ती पारदर्शिता, बेहतर नीति निर्माण और समयबद्ध सुधारों की वजह से उत्तराखंड अब देश के खनन परिदृश्य में एक मजबूत और विश्वसनीय पहचान बना रहा है!
    उत्तर प्रदेश,हिमाचल ,जम्मू कश्मीर आदि राज्य भी उत्तराखंड की खनन नीतियों का अनुसरण कर रहे है।

    प्रदेश में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ई नीलामी प्रणाली, सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए हैं। सरकार पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, अवैध खनन पर लगाम कस रही है। जिसके सकारात्मक परिणाम नज़र आने लगे हैं।

  • मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन निगरानी समिति की बैठक आयोजित

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन निगरानी समिति की बैठक आयोजित

    मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में भागीरथी इको सेंसेटिव जोन निगरानी समिति की बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि इको सेंसेटिव जोन की परिधि में तत्काल सुरक्षात्मक और उपचारात्मक कार्य किए जा सकते हैं।

    उन्होंने सिंचाई विभाग और संबंधित विभागों और एजेंसियों को नदी से सटे क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण और अन्य सुरक्षात्मक कार्यों को करने के निर्देश दिए।

    मुख्य सचिव ने गैर कृषि और कमर्शियल गतिविधियों की अनुमतियों के संबंध में जिलाधिकारी उत्तरकाशी और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस संबंध में संबंधित जोनल मास्टर प्लान, पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़े विभिन्न प्रावधानों का व्यापक अध्ययन कर लें। इस संबंध में यदि आईआईटी रुड़की/ हाइड्रोलॉजी संस्थान / वाडिया जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक स्टडी की आवश्यकता अपेक्षित होती है तो उसको भी प्लान में शामिल करें।

    उन्होंने निर्देशित किया कि निगरानी समिति की अगली बैठक में क्षेत्र का जोनल मास्टर प्लान के साथ-साथ यदि किसी कमर्शियल एक्टिविटी की परमिशन देने योग्य हो तो संबंधित प्रावधान तथा संबंधित नियामकीय निकाय की एन.ओ.सी. इत्यादि का संपूर्ण विवरण बैठक में प्रस्तुत करें।

    उन्होंने जोन में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का महत्व बताते हुए कहा कि इस संबंध में विभिन्न विभागों और एजेंसियों से समन्वय स्थापित करते हुए धरातलीय स्थिति के अनुरूप प्लान बनाकर अगली बैठक में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।

    मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि समिति के सदस्य और संबंधित विभागों और एजेंसियों के अधिकारी निर्धारित की गई विभिन्न साइट का स्थलीय निरीक्षण भी कर सकते हैं। उन्होंने इसके लिए निश्चित तिथि निर्धारण के भी निर्देश दिए।

    बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, इंडिपेंडेंट सदस्य राज्य निगरानी समिति मलिका भनोत, जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य,
    निदेशक यूटीडीबी (इंफ्रास्ट्रक्चर) दीपक खंडूरी, अधिशासी अभियंता सिंचाई संजय राय सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

  • मैक्स अस्पताल, देहरादून, ने विश्व सीओपीडी दिवस पर जागरूकता फैलाई

    मैक्स अस्पताल, देहरादून, ने विश्व सीओपीडी दिवस पर जागरूकता फैलाई

    देहरादून, नवंबर 19, 2025: विश्व सीओपीडी दिवस के अवसर पर, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, देहरादून, ने आज लोगों को क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के बारे में शिक्षित करने और इसके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया। सीओपीडी (COPD) एक गंभीर लेकिन रोकी जा सकने वाली फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें सांस लेने में दिक्कत होती है और जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है।

    इस वर्ष का विषय, “साँस लेना ही जीवन है – समय रहते कदम उठाएँ”, सीओपीडी की प्रभावी रोकथाम और प्रबंधन के लिए शीघ्र निदान, समय पर उपचार और स्वस्थ जीवनशैली की आदतों के महत्व पर केंद्रित है।

    इस अवसर पर बोलते हुए, डॉ. वैभव चाचरा, प्रिंसिपल कंसल्टेंट – पल्मोनोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून, ने कहा, “सीओपीडी धीरे-धीरे विकसित होता है, अक्सर धूम्रपान, वायु प्रदूषण या धूल और धुएं के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण। कई लोग लगातार खांसी, घरघराहट या सांस लेने में तकलीफ जैसे शुरुआती लक्षणों को यह मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि ये मामूली समस्याएँ हैं। इन चेतावनी संकेतों को समय पर पहचानना और किसी विशेषज्ञ से जल्दी परामर्श लेना फेफड़ों को और अधिक नुकसान से बचाने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद कर सकता है।”

    उत्तर भारत में, खासकर सर्दियों के महीनों में, जब वायु प्रदूषण का स्तर अपने उच्चतम स्तर पर होता है, सीओपीडी के मामले बढ़ जाते हैं। खराब वायु गुणवत्ता, धुएँ के संपर्क में आना और बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमण, फेफड़ों की मौजूदा बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए साँस लेना और भी मुश्किल बना देते हैं। ये रुझान इस बात पर ज़ोर देते हैं कि लोगों को फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक होने और समय पर किसी भी साँस लेने की समस्या का पता लगाने के लिए नियमित जाँच और प्रारंभिक जाँच करवाने की तत्काल आवश्यकता है।

    डॉ. चाचरा, ने आगे कहा, “सीओपीडी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका धूम्रपान छोड़ना, प्रदूषित या धुएँ वाले वातावरण से बचना, संतुलित आहार लेना और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना है। धूल भरे इलाकों में मास्क पहनना, फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाना और चिकित्सीय सलाह का पालन करना जैसे सरल उपाय साँस लेना आसान बना सकते हैं और फेफड़ों को स्वस्थ रख सकते हैं। सही देखभाल और पुनर्वास के साथ, सीओपीडी के मरीज़ पूर्ण और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।”

    मैक्स हॉस्पिटल, देहरादून लगातार जागरूकता कार्यक्रमों, फेफड़ों की जांच (लंग फंक्शन टेस्ट) और उन्नत श्वास संबंधी उपचार सुविधाओं के जरिए फेफड़ों की सेहत को बढ़ावा दे रहा है। अस्पताल सभी लोगों, खासकर धूम्रपान करने वालों और धूल-प्रदूषण में काम करने वाले लोगों से अपील करता है कि वे फेफड़ों की जांच को प्राथमिकता दें और अगर सांस फूलने या सांस लेने में दिक्कत हो तो समय पर डॉक्टर से संपर्क करें।

  • कपकोट में तहसील दिवस: 49 शिकायतों का त्वरित निस्तारण, आपदा क्षेत्र की विकास योजनाओं पर कड़े निर्देश

    बागेश्वर : तहसील कपकोट में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में तहसील दिवस आयोजित किया गया। कुल 49 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान हेतु अग्रसारित किया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी शिकायत के समाधान में देरी न हो तथा सभी विभाग नियमित रूप से शिकायत पंजी संधारित कर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।

    तहसील दिवस न मुख्यत: स्वास्थ्य, सड़क, विद्युत, कनेक्टिविटी, जलापूर्ति, ब्रिज, भूमि प्रबंधन एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कपकोट आपदा-प्रभावित क्षेत्र है, अतः आपदा संबंधी सभी प्रस्ताव समय से जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को भेजे जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर प्रॉजेक्ट डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में हो तो ठेकेदार की जिम्मेदारी तय की जाए। आपदा से संबंधित कोई भी क्षतिपूर्ति लंबित न रखी जाए, तथा किसी ठेकेदार द्वारा जनहित कार्यों में बाधा स्वीकार्य नहीं होगी।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वे के आधार पर किसी भी पात्र वव्यक्ति को आवास उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की देरी न हो, साथ ही अधिकारियों के फील्ड में सक्रिय रहने के आदेश भी दिए। जिलाधिकारी ने सभी योजनाओं के 100% बोर्ड सुनिश्चित करके एक माह के भीतर पुष्टि प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

    माननीय विधायक सुरेश गड़िया ने भी तहसील दिवस में प्रतिभाग किया, साथ ही उन्होंने कहा कि कपकोट आपदा प्रभावी क्षेत्र होने के कारण अधिकारियों को दुगुनी मेहनत से कार्य करना होगा।

    जिलाधिकारी द्वारा एसटीओ BSNL के अनुपस्थित रहने पर स्पष्टीकरण इश्यू करने का लिए निर्देश दिए गए।

    कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष विशाखा खेतवाल, नगर पंचायत अध्यक्ष गीता ऐठानी, एसपी चंद्रशेखर घोड़खे, सीडीओ आर.सी. तिवारी, पूर्व दर्जा मंत्री गोविंद कोरंगा, उपजिलाधिकारी अनिल चिन्याल, परियोजना निदेशक शिल्पी पंत तथा समस्त जिला स्तरीय अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

  • शीतकालीन चारधाम यात्रा तैयारियों की समीक्षा,मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर जोर

    शीतकालीन चारधाम यात्रा तैयारियों की समीक्षा,मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर जोर

    उत्तरकाशी: शीतकालीन चारधाम यात्रा को सफल और सुरक्षित बनाने की तैयारियों को लेकर मंगलवार को जिलाधिकारी प्रशान्त आर्य की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में यात्रा प्रबंधन से जुड़े विभागीय अधिकारियों के साथ ही मंदिर समिति एवं होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

    जिलाधिकारी ने कहा कि शीतकालीन यात्रा जिले की आर्थिकी और पर्यटन संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण है,इसलिए यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करना सभी विभागों की प्राथमिकता होनी चाहिए। जिलाधिकारी ने शीतकालीन चारधाम यात्रा प्रमुख पड़ावों पर स्वच्छ पेयजल,शौचालय,विद्युत आपूर्ति,पार्किंग तथा चिकित्सा सहायता जैसी मूलभूत सुविधाओं को समय रहते दुरुस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

    कड़ाके की ठंड से राहत के लिए विशेष इंतज़ाम सुनिश्चित करें।

    शीतकालीन यात्रा के दौरान मौसम को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रमुख पड़ावों पर अलाव जलाने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। ताकि यात्रियों को ठंड से बचाव मिल सके। साथ ही स्थानीय निकायों को अलाव के लिए सुरक्षित स्थान नियत करने और पर्याप्त ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    हिमपात व पाले से निपटने की तैयारी रखने के साथ ही विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश

    ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात और सड़क मार्गों पर पाला जमने की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने सड़क निर्माण विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि पाला हटाने के लिए नमक,चुना आदि की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मार्गों पर मशीनरी और कर्मियों को 24×7 अलर्ट मोड पर रखा जाए,ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। जिलाधिकारी ने यात्रा से जुड़े विभागों के अधिकारियों को समयबद्ध रूप से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा की विभाग आपसी समन्वय स्थापित करते शीतकालीन चारधाम यात्रा को सुचारू और व्यवस्थित बनाना सुनिश्चित करें।

    बैठक में चारधाम यात्रा होटल एसोसिएशन अध्यक्ष अजय पुरी,जिला होटल एसोसिएशन अध्यक्ष शैलेन्द्र मटूड़ा,सीएमएस डॉ.बीएस रावत,जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी,सीओ जनक पंवार,जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाई आदि उपस्थित एवं अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे।

  • नेत्रदान जनजागरूकता में अभूतपूर्व उपलब्धि

    नेत्रदान जनजागरूकता में अभूतपूर्व उपलब्धि

    एम्स, ऋषिकेश के अमूल्य मार्गदर्शन और सहयोग से उत्तराखंड में नेत्रदान जनजागरूकता तथा मानव सेवा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं समाजसेवियों के सामूहिक प्रयास के परिणामस्वरूप अब तक 1174 नेत्रदाता परिवारों द्वारा कॉर्निया (नेत्र पुतली) दान किए गए, जिनसे 880 जरूरतमंद व्यक्तियों को पुनः नेत्रज्योति प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि प्रदेश में नेत्रदान अभियान को नई दिशा और गति प्रदान कर रही है।

    एम्स, ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी सहयोगी संस्थाओं और स्वयंसेवकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता बढ़ाने में समाज के विभिन्न वर्गों का योगदान अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने अधिक से अधिक संस्थाओं और लोगों से इस पुण्य अभियान से जुड़ने का आह्वान किया, ताकि हम सब मिलकर नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला ला सकें।

    डॉ. मीनू सिंह ने विशेष रूप से सुप्रयास कल्याण संस्थान के डॉ. सत्या नारायण एवं डॉ. शिवम शर्मा, लायंस क्लब ऋषिकेश के गोपाल नारंग, देह दान समिति हरिद्वार के सुभाष चंद्र, मुस्कान फाउंडेशन की नेहा मालिक, तथा मारवाड़ी महिला सम्मेलन (ऋषिकेश शाखा) की नूतन अग्रवाल सहित कई संस्थाओं और समाजसेवियों के उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।
    इसके साथ ही समाजसेवी अनिल कक्कड़, संगीता आनंद (ऋषिकेश), अनिल अरोड़ा, समीर चावला, अशोक कालरा (हरिद्वार) विवेक अग्रवाल, हरदीप सिंह( देहरादून)तथा सीमा जैन (रुड़की) द्वारा नेत्रदान जागरूकता के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया।

    इस सफलता के पीछे एम्स ऋषिकेश के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) संजीव कुमार मित्तल,
    नेत्र बैंक की डायरेक्टर डॉ. नीति गुप्ता,आई बैंक टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके नेतृत्व में आई बैंक टीम ने नेत्रदान की प्रक्रिया को संवेदनशील, व्यवस्थित एवं समयबद्ध तरीके से संचालित किया, जिससे यह अभूतपूर्व उपलब्धि संभव हो सकी।

    प्रो. मित्तल ने बताया कि इस उपलब्धि में उल्लेखनीय यह है कि इनमें से 32% नेत्रदान स्वैच्छिक रूप से उक्त सामाजिक संस्थानों द्वारा कराए गए, जो कि समाज में नेत्रदान महादान के प्रति बढ़ती जागरूकता और लोगों की मानवीय संवेदना का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि किसी एक संस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सतत जनसहभागिता का प्रेरक उदाहरण है।

    880 लोगों की आंखों में पुनः रोशनी लौटना न केवल चिकित्सा विज्ञान की बड़ी सफलता है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी अमूल्य आशा है, जो वर्षों से इस प्रकाश की प्रतीक्षा कर रहे थे।