Category: उत्तराखंड

  • बारातियों से भरा वाहन हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 2 गंभीर घायलों को किया गया हायर सेंटर रेफर

    बारातियों से भरा वाहन हुआ दुर्घटनाग्रस्त, 2 गंभीर घायलों को किया गया हायर सेंटर रेफर

    गैरसैंण नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या-06 धुनारघाट के समीप बरातियों से भरा एक ईको वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें सवार सभी लोग घायल हो गए। जिन्हें स्थानीय लोगों व पुलिस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण में भर्ती करवाया गया है,जहां सभी घायलों का उपचार जारी है।
    पहाड़ों में सड़क हादसे थमने का नाम नही ले रहे हैं।

    कभी ड्राइवरों की लापरवाही तो कभी ओवर स्पीड व कभी खराब सड़कों के चलते आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. जहां एक और पुलिस विभाग भी समय समय पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाकर लोगों व वाहन स्वामियों को जागरूक करने का काम कर रहें हैं तो वहीं सड़क हादसे भी रुकने का नाम नही ले रहे हैं.जिस कारण आये दिन कई लोगों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ रहा है.

    वही आज दोपहर गैरसैंण नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 06 में धुनारघाट नामक स्थान पर एक बस व एक ईको वाहन की पास लेते समय जोरदार भिड़ंत हो गई, जानकारी के अनुसार दोनों वाहन जब एक दूसरे से पास हो रहे थे तो बस के पिछले हिस्से से टकराने के बाद बारातियों से भरा ईको वाहन सड़क से लगभग 30 मीटर नीचे गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें ड्राइवर सहित सवार सभी 8 बाराती घायल हो गए। जिन्हें स्थानीय लोगों व एसआई सुमित बंदूनि के नेतृत्व में घटना स्थल पर पहुंची पुलिस टीम द्वारा रेस्क्यू कर सड़क मार्ग तक लाने के बाद 108 एम्बुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण पहुंचाया गया।

    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ अर्जुन रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद सामान्य रूप से ड्राइवर सहित घायल 6 बारातियों को घर भेज दिया गया तो वहीं गंभीर रूप से घायल 2 बाराती पूजा देवी व कविता को उपचार के लिए हायर सेंटर श्रीनगर रेफर किया गया है।

    वहीं घटना की जानकारी देते हुए एसआई कोतवाली गैरसैंण सुमित बंदूनी ने बताया कि ईको वाहन बारातियों को लेकर नोगांव (पंचाली) से गैरसैंण विकासखण्ड के फर्कण्डे गांव बारात में जा रहा था जो धुनारघाट में बस से साइड लेते समय अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिसमें सवार सभी बारातियों का रेस्क्यू कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गैरसैंण में उपचार हेतु भर्ती करवा दिया गया है, व अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
    गंभीर रूप से घायल–
    1-कविता पुत्री पुष्कर सिंह उम्र 23 वर्ष
    2- पूजा पत्नी केदार सिंह उम्र 29 वर्ष
    सामान्य घायलो के नाम–
    1- संगीता पुत्री जवाहर सिंह नौगांव उम्र 18 वर्ष
    2- दीपा पत्नी भुवन सिंह उम्र 30 वर्ष
    3- रोशनी पत्नी राकेश उम्र 30 वर्ष
    4- प्रीति पुत्री जवाहर सिंह उम्र 20 वर्ष
    5- रविन्द्र विष्ट पुत्र पुष्कर सिंह उम्र 19 वर्ष
    6- प्रताप सिंह पुत्र जमन सिंह उम्र 30 वर्ष (ड्राइवर)

  • आदि गौरव महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री धामी, भगवान बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

    आदि गौरव महोत्सव में पहुंचे मुख्यमंत्री धामी, भगवान बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

    शनिवार को रेंजर ग्राउंड्स, देहरादून में आयोजित आदि गौरव महोत्सव में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी को जनजातीय गौरव दिवस की शुभकामनाएं दीं और भगवान बिरसा मुंडा जी को कोटि-कोटि नमन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि गौरव महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं, वीरता, संस्कृति और आस्था का उत्सव है। ऐसे आयोजन जनजातीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करते हैं तथा समाज के अन्य वर्गों को जनजातीय समुदाय की समृद्ध कला और संस्कृति से परिचित कराते हैं।

    जनजातीय समाज देश की विविधता की सबसे बड़ी ताकत-मुख्यमंत्री
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी संघर्ष, स्वाभिमान और संगठित शक्ति के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि जब तक समाज की सबसे कमजोर कड़ी मजबूत नहीं होती, तब तक देश वास्तविक रूप से मजबूत नहीं हो सकता।

    उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार जनजातीय समाज के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय बजट को तीन गुना तक बढ़ाना, जनजातीय समुदाय के प्रति उनकी संवेदनशीलता का परिचायक है।

    128 जनजातीय गांवों का चयन-शिक्षा, स्वास्थ्य व आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत उत्तराखंड के 128 जनजातीय गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष कार्य किए जा रहे हैं।

    राज्य सरकार द्वारा जनजातीय समाज के लिए चल रही प्रमुख पहलें
    मुख्यमंत्री ने जनजातीय समुदाय के कल्याण हेतु राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों का विवरण भी साझा किया द्य उन्होंने बताया कि प्रदेश में चार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय कृ कालसी, मेहरावना, बाजपुर व खटीमा में संचालित हैं, पिथौरागढ़ जिले में भोटिया तथा राजी जनजाति के लिए नया एकलव्य विद्यालय खोलने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। प्राथमिक से स्नातकोत्तर तक छात्रवृत्ति योजना, जिससे हजारों जनजातीय छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।

    प्रदेश में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं। शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए 3 आईटीआई कॉलेज, तकनीकी प्रशिक्षण हेतु समर्पित हैं।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग व छात्रवृत्ति, जनजातीय समाज की बेटियों के विवाह हेतु ₹50,000 अनुदान, जनजातीय कला, संस्कृति व खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य जनजाति महोत्सव व खेल महोत्सव का नियमित आयोजन,
    जनजातीय शोध संस्थान के लिए ₹1 करोड़ का कॉर्पस फंड की व्यवस्था है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रयास जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

    जनजातीय गौरव दिवस का महत्व
    मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि वर्ष 2021 में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। यह दिवस केवल भगवान बिरसा मुंडा जी के योगदान को याद करने का ही नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी अवसर है।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार इस महोत्सव के आयोजन के लिए 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करती है ताकि जनजातीय संस्कृति का संरक्षण और विस्तार सुनिश्चित हो सके।

    पहली बार जनजातीय इतिहास को मिला राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने जनजातीय समाज के स्वतंत्रता संग्राम तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान को कभी पर्याप्त स्थान नहीं दिया। लेकिन आज मोदी जी के नेतृत्व में देश जागृत है और जनजातीय नायकों के महान योगदान को इतिहास में उचित सम्मान मिल रहा है।

    जनजातीय समाज के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई
    मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा, “मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि हमारी सरकार उत्तराखंड के आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर संकल्पित है। हम ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सतत प्रयत्नशील हैं।”

    कार्यक्रम में देशभर और राज्य के विभिन्न जनजातिया एवं सांस्कृतिक समूहों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

    कार्यक्रम में राज्य सभा सांसद श्री नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, विधायक श्री खजान दास, श्री मुन्ना सिंह चौहान, श्रीमती सविता कपूर, सचिव एवं अपर सचिव समाज कल्याण व विभाग के अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

  • राज्य के सभी 13 जनपदों में 80 से अधिक स्थानों पर हुई मॉक ड्रिल

    राज्य के सभी 13 जनपदों में 80 से अधिक स्थानों पर हुई मॉक ड्रिल

    भूकंप तथा भूकंप जनित आपदाओं से बचाव तथा भूकंप आने पर विभिन्न रेखीय विभागों की तैयारियों को परखने के लिए शनिवार को राज्य के सभी 13 जनपदों में 80 से भी अधिक स्थानों पर राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह पहला अवसर है जब यूएसडीएमए द्वारा इतने बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित मॉक ड्रिल की निगरानी राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से की गई। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने एसईओसी पहुंचकर मॉक ड्रिल का निरीक्षण किया। उन्होंने जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद कर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति, टीमों की तैनाती, क्षति तथा विभागीय समन्वय की वास्तविक तैयारियों की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने ग्राउंड जीरो पर मौजूद इंसीडेंट कमाण्डरों तथा राहत एवं बचाव कार्य में जुटे कर्मियों से भी बात की। इस दौरान उन्होंने जनपदों से पूछा कि राज्य स्तर पर उन्हें किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता है।

    मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का उद्देश्य भूकम्प जैसी आपदा में प्रशासनिक तत्परता का परीक्षण, विभिन्न विभागों के मध्य आपसी समन्वय को मजबूत करना, संचार एवं समन्वय तंत्र की खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करना तथा फील्ड स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में किसी प्रकार की देरी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

    मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि मॉक अभ्यास का विस्तृत डाक्यूमेंटेशन तैयार किया जाए और अभ्यास के दौरान जिन कार्यों में कमी या सुधार की आवश्यकता महसूस हुई है, उन्हें जिला स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि शासन द्वारा इन सुधारात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन, तकनीकी सहायता और सभी तरह का सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

    निरीक्षण के दौरान उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि रेस्क्यू एवं रिलीफ टीमों के रिस्पांस टाइम को और बेहतर किया जाए, आईआरएस प्रणाली के तहत अधिकारियों द्वारा अपने-अपने दायित्वों की पुनः समीक्षा की जाए, एसईओसी और डीईओसी के बीच संचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा अस्पतालों, स्कूलों, विद्युत परियोजनाओं और अन्य महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं से जुड़े विभाग अपने एसओपी को दोबारा परखकर उनकी तत्परता सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉक अभ्यास राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करते हैं और वास्तविक संकट के समय सुव्यवस्थित कार्रवाई सुनिश्चित करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।

    मा0 उपाध्यक्ष राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग श्री विनय कुमार रुहेला ने कहा कि भूकम्प मॉक ड्रिल राज्य की वास्तविक तैयारी का महत्वपूर्ण परीक्षण है और इस अभ्यास से मिली सीख को तुरंत लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ड्रिल के दौरान जिन बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता सामने आई है, उन्हें विभागीय स्तर पर शीघ्रता से दूर किया जाए तथा फील्ड में तैनात सभी टीमें अपने-अपने दायित्वों के अनुरूप तत्परता बढ़ाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन, यूएसडीएमए और सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय को और मजबूत करें, क्योंकि किसी भी आपदा में त्वरित और संगठित प्रतिक्रिया ही जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। श्री रुहेला ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपकरण, जनशक्ति और संचार व्यवस्थाओं की समीक्षा नियमित रूप से होती रहे।

    सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा कि जिन उद्देश्यों को लेकर मॉक ड्रिल आयोजित की गई, उन्हें हासिल करने में सफलता प्राप्त हुई है। कुछ कमियां मिलीं हैं, जिन्हें दूर किया जाएगा ताकि वास्तविक आपदा के समय किसी प्रकार की दिक्कत न आए। उन्होंने कहा कि अभ्यास में जो भी कमियां सामने आई हैं, उन्हें बिना किसी देरी के दूर किया जाए और सभी विभाग अपने सुझाव एवं अवलोकन यूएसडीएमए के साथ साझा करें, ताकि ड्रिल के वास्तविक अनुभव आगे की तैयारी में उपयोगी साबित हों।

    उन्होंने यह निर्देश दिया कि आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी न रहे और जिन उपकरणों का उपयोग फील्ड में किया जाना है, उनके संचालन का पूर्ण प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाए, ताकि किसी भी आपदा स्थिति में टीमें तुरंत और कुशलतापूर्वक कार्य कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि मॉक ड्रिल में शामिल सभी विभाग अपने रिस्पांस का व्यवस्थित डाक्यूमेंटेशन तैयार करें, जिससे प्रतिक्रिया समय, समन्वय और संसाधनों के उपयोग का गहन विश्लेषण हो सके।

    सचिव सुमन ने क्विक रिस्पांस टीमों को और अधिक सक्षम, संसाधनयुक्त और त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार रखने पर बल दिया, साथ ही स्वयंसेवकों की संख्या बढ़ाकर उन्हें नियमित प्रशिक्षण प्रदान करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है-आपदा में शून्य मृत्यु और इसे वास्तविकता में बदलने के लिए सभी विभागों को अपनी तैयारियों को और मजबूत, अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना होगा।

    इस अवसर पर आईजी फायर श्री मुख्तार मोहसिन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन श्री आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, डॉ बिमलेश जोशी आदि मौजूद थे।

  • राष्ट्रीय हेमेटोलाॅजी क्विज में एम्स ऋषिकेश बना सिरमौर

    राष्ट्रीय हेमेटोलाॅजी क्विज में एम्स ऋषिकेश बना सिरमौर

    शैक्षणिक स्तर पर आयोजित राष्ट्रीय हेमटोलॉजी क्विज में एम्स ऋषिकेश ने खिताब अपने नाम दर्ज कराकर गौरव हासिल किया है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक और डीन एकेडेमिक ने प्रतिभागी टीम को बधाई देते हुए इस उपलब्धि को संस्थान की अकादमिक उत्कृष्टता बताया।

    एम्स ऋषिकेश के पैथोलॉजी और मेडिसिन विभागों के स्नातकोत्तर रेजिडेंट्स की एक टीम ने हाल ही में 9 नवम्बर को यह प्रतियोगिता जीती है। इंडियन सोसाइटी ऑफ हेमटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन (आई.एस.एच.बी.टी) के 66वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान यह प्रतियोगिता लखनऊ में आयोजित की गयी थी। इस 17वीं राष्ट्रीय हेमटोलॉजी क्विज प्रतियोगिता में एम्स ऋषिकेश सहित राज्य स्तर पर विजयी होकर आए देश भर के मेडिकल काॅलेजों की टीमों ने प्रतिभाग किया था।
    उल्लेखनीय है कि यह प्रतियोगिता काॅलेज स्तर पर 4 जुलाई 2025 को जनरल मेडिसिन, पैथोलॉजी और बाल रोग विभागों के प्रतिभागियों के मध्य संपन्न हुई थी। अगली कड़ी में 8 अगस्त को क्षेत्रीय स्तर पर इस प्रतियोगिता का आयोजन होने पर एम्स ऋषिकेश इसमें चैंपियन बनकर उभरा था और 17 सितंबर को पीजीआई चंडीगढ़ में आयोजित नॉर्थ जोन प्रतियोगिता के फाइनल में एम्स ऋषिकेश, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़,एम्स बठिंडा, एमएमआईएसआर सोलन और एसकेआईएमएस श्रीनगर की टीमें प्रतिस्पर्धा में शामिल हुई थी। जबकि हाल ही में 9 नवंबर, 2025 को लखनऊ में आयोजित एक रोमांचक फाइनल में एलएचएमसी नई दिल्ली (मध्य क्षेत्र), जेआईपीएमईआर, पुडुचेरी (दक्षिण क्षेत्र), जीएमसी हैदराबाद (पश्चिम क्षेत्र) और एससीबी, कटक (पूर्वी क्षेत्र) व नाॅर्थ जोन की कुल 205 टीमों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए एम्स ऋषिकेश की टीम ने यह राष्ट्रीय खिताब जीतने में कामयाबी पायी। कार्यक्रम के दौरान आईएसएचबीटी के अध्यक्ष ब्रिगेडियर डॉ. तथागत चटर्जी और इंडियन कॉलेज ऑफ हेमेटोलॉजी के सचिव प्रो. आर.के. जेना ने विजेताओं को प्रमाण पत्र देकर नकद पुरस्कार से सम्मानित किया।

    जानकारी देते हुए संस्थान की डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के फाइनल में एम्स ऋषिकेश की टीम विजेता रही। उन्होंने बताया कि क्विज की स्टेट कॉर्डिनेटर एम्स ऋषिकेश पैथोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियवधना थी। विजेता टीम में पैथोलाॅजी विभाग के तृतीय वर्ष के जूनियर रेजिडेंट्स डॉ. एर्ना अहसन और डॉ. गायत्री तथा मेडिसिन विभाग के द्वितीय वर्ष के जेआर डॉ. बिक्की दत्ता शामिल हैं। इस सफलता पर संस्थान के उच्चाधिकारियों सहित पैथोलॉजी विभाग के हेड प्रो. संजीव किशोर, जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत, डॉ. वेंकटेश पाई और डॉ. हरीश चंद्रा आदि फेकल्टी सदस्यों ने विजेता टीम को बधाई दी। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने इस उपलब्धि को अकादमिक उत्कृष्टता से जोड़ा और टीम को बधाई देते हुए इसे अनुसंधान और नवाचार के प्रति संस्थान की दृढ़ प्रतिबद्धता बताया।

  • वंचित असहाय बालिका ही हमारे जीवन की वास्तविक नंदा-सुनंदा देवियांः डीएम

    वंचित असहाय बालिका ही हमारे जीवन की वास्तविक नंदा-सुनंदा देवियांः डीएम

    देहरादून: जिला कार्यालय परिसर देहरादून में आज प्रोजेक्ट नंदा सुनंदा के 10वें संस्करण का आयोजन में मुख्य अतिथि विधायक राजपुर खजान दास एवं जिलाधिकारी सविन बंसल ने गरीब, अनाथ और असहाय बालिकाओं को स्नातक, स्नातकोत्तर और कौशल शिक्षा में आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह सहायता धनराशि का चेक प्रदान किया। आज 32 बालिकाओं को 13 लाख धनराशि के चेक वितरित किए गए।

    मुख्य अतिथि राजपुर विधायक खजान दास ने जनहित में संचालित प्रोजेक्ट नंदा सुनंदा को अभिनव पहल बताते हुए जिला प्रशासन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि मां भवानी के नाम से शुरू इस प्रोजेक्ट से अब तक जिले में लगभग 32 लाख रू0 से 90 असहाय, निर्धन एवं अनाथ बालिकाओं की शिक्षा दोबारा से पुनर्जीवित हुई है। विधायक ने कहा कि डीएम सविन बंसल जनहित के कार्याे को आगे बढ़ाने के लिए पूरे समपर्ण के साथ जिले में बेहतर काम कर रहे है। इस दौरान विधायक ने नंदा सुनंदा के तहत लाभान्वित हो रही बेटियों को सहायत राशि चेक प्रदान करते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी किया। उन्होंने जिलाधिकारी के विभिन्न जनहित के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जब कार्य सराहनीय हों तो सराहना तो होनी ही चाहिए। उन्होंने विभिन्न प्रोजेक्ट सहित जनता दर्शन में किये जा निर्णयों की सराहना की तथा कहा कि अभिभावक बच्चों की रूचि न घटायें।

    जिलाधिकारी ने कहा कि प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा का यही उद्देश्य है कि पात्र बालिकाओं की शिक्षा को पुनर्जीवित किया जा सके। हमारे वास्तविक जीवन की नंदा-सुनंदा ये बालिकाएं ही हैं। उन्होंने कहा कि बालिकाएं अपनी शिक्षा की स्पार्क को बनाये रखें तथा लक्ष्य प्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत करें जब हम लक्ष्य निर्धारित कर रास्ते पर निकल पड़ते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं आगे की ढगर में कहीं न कही सहयोग प्राप्त होता है। डीएम ने कहा कोई भी योजना तभी सफल होती है जब उच्चस्तर पर सहयोग हो। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा एवं जिले में संचालित सभी जन कल्याणकारी प्रोजेक्ट मा0 मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार के सहयोग एवं मार्गदर्शन में आगे बढ रहे है। उन्होंने स्थानीय विधायक का कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में निर्धन, अनाथ, असहाय और आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड चुकी बालिकाओं की शिक्षा को पुर्नजीवित करने के लिए जिले में प्रोजेक्ट नंदा सुनंदा लाया गया है। जीवन में सफलता के लिए शिक्षा सबसे बडा हथियार है। उन्होंने निर्धन असहाय बेटियों को प्रोत्साहित करते हुए जीवन में आगे बढ़ने की चिंगारी को हमेशा जिंदा रखने का आवाह्न किया। डीएम ने बेटियों से कहा कि जो इच्छा शक्ति है, उसको बनाए रखे। किसी भी परिस्थिति में निराश ना हो। यदि जीवन में कुछ बनने का लक्ष्य तय है तो कही न कही से मदद अवश्य मिलती रहेगी। डीएम ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपनी बेटियों को प्रोत्साहित करते रहे, उनको आगे बढ़ाने में हर संभव मदद करें और एक सशक्त समाज निर्माण में योगदान करें।

    कार्यक्रम के दौरान एसडीएम कुमकुम जोशी, एसडीएम अपूर्वा सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेन्द्र कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट सहित नंदा सुनंदा के तहत चयनित बेटियां एवं उनके अभिभावक मौजूद थे।

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ऐतिहासिक जौलजीबी मेला का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ऐतिहासिक जौलजीबी मेला का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार, जौलजीबी, पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल सीमा पर काली और गोरी नदी के संगम पर आयोजित होने वाले ऐतिहासिक जौलजीबी मेला का शुभारंभ किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न घोषणाएं की। विकासखण्ड मुनस्यारी अन्तर्गत ग्राम हूपली में झलूड़ी से पल्याती तक मार्ग निर्माण किया जायेगा। बगीचा से धारचूला कोट ट्रैकिंग मार्ग एवं मेला स्थल का विकास कार्य कराया जायेगा। ग्राम पय्या पौड़ी से नालालेख शिव मंदिर तक ट्रैक रूट निर्माण कराया जायेगा। विकासखण्ड मुनस्यारी अन्तर्गत कालापानी से दशरथ पर्वत कुण्ड तक सम्पर्क मार्ग का निर्माण कार्य कराया जायेगा। विकासखण्ड मुनस्यारी के अन्तर्गत ग्राम सुरिंग में आन्तरिक सी०सी० मार्ग का निर्माण किया जायेगा। सिमगड़ नदी भैंसकोट में आर०सी०सी० पुलिया एंव सम्पर्क मार्ग का निर्माण कराया जायेगा एवं धारचूला में सैनिक विश्राम भवन बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मेला सदियों से भारत और नेपाल की सांस्कृतिक, आर्थिक और पारंपरिक मित्रता का प्रतीक है। जौलजीबी मेला केवल आयोजन नहीं, भारत-नेपाल की पारंपरिक मित्रता और आर्थिक-सामाजिक एकरूपता का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री ने कहा वो स्वयं भी बचपन में इस मेले में आते थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत नेपाल की मित्रता और अधिक सुदृढ़ हुई है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखंड की रजत जयंती के अवसर पर कहा था कि उत्तराखंड की आत्मा उसके मेलों और त्योहारों में बसती है और उन्होंने आह्वान किया कि राज्य में एक जिला-एक मेला कार्यक्रम प्रारंभ किया जाए। जिसमें जिले के एक प्रमुख मेले को विशेष सहयोग दिया जाएगा जिससे उस मेले के सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को बल मिलेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से पिथौरागढ़ जनपद सहित इस क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने हेतु पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आज पिथौरगढ़ में साढ़े सात सौ करोड़ रूपए से अधिक की लागत से मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। 34 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से स्पोर्ट्स कॉलेज में आधुनिक मल्टीपर्पज हॉल का निर्माण कार्य भी कराया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा विकासखंड बेरीनाग में शीघ्र ही लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत से एक भव्य स्टेडियम का निर्माण कार्य भी प्रारंभ होने जा रहा है। पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत से 50-बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक का भी निर्माण करा रहे हैं। जिले में 25 करोड़ रुपए की लागत से अस्कोट, गंगोलीहाट और धारचूला में नए बस स्टेशनों के निर्माण के साथ ही, पिथौरागढ़ में रोडवेज वर्कशॉप का निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 327 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विभिन्न सड़कों का निर्माण कार्य भी गतिमान है। पिथौरागढ़ में कनेक्टिवी को बढ़ावा देने के लिए नैनी सैनी एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का कार्य तेज गति से आगे चल रहा है। जिसके लिए 450 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी गतिमान है।
    मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, रोजगार एवं स्वरोजगार के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ा रही है। प्रदेश में आज रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। अब प्रदेश में सरकारी भर्तियां पारदर्शी तरीके से हो रहीं हैं। जो प्रदेश के युवा प्रतिभा और परिश्रम के आधार पर सरकारी नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने इससे पहले राष्ट्रीय एकता पद यात्रा में प्रतिभाग किया।

    इस अवसर पर विधायक श्री हरीश धामी, विधायक श्री बिशन सिंह चुफाल, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री गिरीश बिष्ट एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

  • गौचर में पिथौरागढ़ की तर्ज पर 18-सीटर हेलीसेवा प्रारम्भ किये जाने की मुख्यमंत्री ने की घोषणा

    गौचर में पिथौरागढ़ की तर्ज पर 18-सीटर हेलीसेवा प्रारम्भ किये जाने की मुख्यमंत्री ने की घोषणा

    चमोली: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को 73वॉं राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का उद्घाटन किया। गौचर मेले में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह मेला उत्तराखंड के प्रमुख मेलों में से एक है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का प्रभावी माध्यम होने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिकी को भी सशक्त बनाता है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जहां एक ओर हमारी सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा रहा है,वहीं लोकल फॉर वोकल, मेड इन इंडिया जैसी योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में प्रदेश में कई योजनाओं और नीतियों को सफलतापूर्वक लागू किया गया है, जिससे राज्य का चहुमुखी विकास सुनिश्चित हो रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा आज तमाम परेशानियों और चुनौतियों के बाद भी हमारी मातृशक्ति द्वारा तैयार किये जा रहे उत्पाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भी पीछे छोड़ रही है। उन्होंने आमजन से स्वदेशी अपनाने की अपील करते हुए कहा यदि हम स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देंगे तो हमारा यह कदम आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा हमारी सरकार के प्रयासों से आज उत्तराखंड फिल्म शूटिंग का बेस्ट डेस्टिनेशन बन रहा है। अब उत्तराखंड तेजी से वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

    मुख्यमंत्री ने गौचर में पिथौरागढ़ की तर्ज पर 18-सीटर हेलीसेवा प्रारम्भ किये जाने, नगर क्षेत्र के चार प्रमुख स्थलों पर पार्किंग सुविधाओं का विकास किये जाने और साकेत नगर – रघुनाथ मंदिर -चटवापीपल मोटर मार्ग निर्माण की घोषणा की। उन्होंने बताया की गौचर में स्टेडियम निर्माण हेतु धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है शीघ्र ही इसका कार्य शुरू करवाया जायेगा।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्री हरीश मैखुरी को गोविन्द प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान और शिक्षा के क्षेत्र में वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. नन्द किशोर हटवाल को पंडित महेशानंद नौटियाल शिक्षा और साहित्य प्रसार सम्मान से सम्मानित किया।

    क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल एवं मेला उपाध्यक्ष संदीप नेगी ने गौचर मेले का शुभारंभ करने पर मुख्यमंत्री का हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत किया और मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्या से अवगत कराते हुए समस्याओं के निदान के लिए मांग पत्र भी सौंपा।

    प्रसिद्ध गौचर मेले में पहले दिन ईष्ट रावल देवता की पूजा के बाद प्रातः स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। मेलाध्यक्ष द्वारा झंडारोहण कर मार्चपास की सलामी ली गई। गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक एवं वापसी उसी रूट से होते हुये मुख्य मेला द्वार तक क्रास कण्ट्री दौड़ का आयोजन किया गया। खेल मैदान में बालक एवं बालिकाओं की दौड़, नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता, शिशु प्रदर्शनी और शिक्षण संस्थाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। मेले की पहली सांस्कृतिक संध्या पर रात्रि को डॉ. पम्मी नवल लोक गायिका द्वारा जागर संध्या की प्रस्तुति दी जाएगी। गौचर मेले में पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति से सजा पांडाल मेलार्थियों के बीच खासे आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।

    इस अवसर पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण खत्री, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, महामंत्री अरुण मैठाणी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय जनता उपस्थित रहे।

  • टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए उत्तराखंड बना उम्मीद का केंद्र, धामी सरकार की एक अनूठी पहल

    टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए उत्तराखंड बना उम्मीद का केंद्र, धामी सरकार की एक अनूठी पहल

    उत्तराखंड की धामी सरकार बच्चों, किशोरों और युवाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही है। इसी दिशा में आज विश्व मधुमेह दिवस पर राज्य ने टाइप-1 डायबिटीज (T1D) प्रबंधन के लिए अपनी पहली राज्य स्तरीय तकनीकी एवं संचालन संबंधी गाइडलाइन जारी की। यह कदम टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्थित, वैज्ञानिक और मानवीय स्वास्थ्य प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।

    देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), चिकित्सक विशेषज्ञ और विकास भागीदार शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं में पाई जाती है, और उपचार में थोड़ी सी भी देरी या कमी जीवन को खतरे में डाल सकती है। राज्य की चुनौतीपूर्ण पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एक मानकीकृत, सुचारू और समग्र मॉडल की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी—आज वह आवश्यकता पूरी हो गई।

    गुबारा क्लीनिक : बच्चों के लिए समग्र डायबिटीज देखभाल
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने देश के सबसे संवेदनशील और प्रभावी-डायबिटीज देखभाल मॉडल – “GUBARA Clinics” स्थापित किया है। यह मॉडल टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों को एक ही छत के नीचे हर जरूरी सेवा उपलब्ध कराता है।

    GUBARA क्लीनिकों में उपलब्ध मुख्य सेवाएँ—
    • नियमित इंसुलिन थेरेपी
    • शुगर मॉनिटरिंग
    • निर्धारित अंतराल पर मेडिकल चेकअप
    • पोषण विशेषज्ञों द्वारा डाइट परामर्श
    • मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग
    • परिवार परामर्श
    • मासिक फॉलो-अप

    टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित 200 लोगों को चिन्हित कर नामांकित किया गया है। देहरादून ज़िले में 200 लोगों की पहचान की गई है और उन्हें गुबारा क्लीनिकों में नामांकित किया गया है। सरकार का लक्ष्य 2026-27 तक राज्य में टाइप 1 मधुमेह से प्रभावित 1,120 लोगों तक इस कार्यक्रम की सेवाएं पहुंचाना है। देहरादून, हरिद्वार, बागेश्वर और उधमसिंहनगर सहित कई जिलों में GUBARA क्लीनिक सक्रिय हैं और लोगों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। उपचार, रोकथाम और परामर्श को एकीकृत करने वाला ढांचा जारी की गई राज्य गाइडलाइन ने टाइप-1 डायबिटीज प्रबंधन को एक पेशेवर, सरल और समान रूप से लागू होने वाली प्रणाली में बदल दिया है।
    गाइडलाइन की प्रमुख बातें—
    T1D के निदान व उपचार के लिए मानकीकृत चिकित्सकीय प्रोटोकॉल
    सभी जिला अस्पतालों में GUBARA क्लीनिक चलाने हेतु संचालन संबंधी दिशा-निर्देश
    ASHA, CHO, MO सहित स्वास्थ्य कर्मियों की स्पष्ट भूमिका
    RBSK एवं सामुदायिक टीमों के माध्यम से मज़बूत स्क्रीनिंग
    नि:शुल्क इंसुलिन व शुगर मॉनिटरिंग उपकरणों की निरंतर उपलब्धता
    टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों व परिवारों के लिए संरचित परामर्श मॉड्यूल
    राज्यभर में एक समान मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग प्रणाली
    यह गाइडलाइन आने वाले वर्षों में सभी जिलों में T1D कार्यक्रम के सुचारू विस्तार की आधारशिला बनेगी।

    गाइडलाइन जारी होने के बाद—
    सभी जिलों में ओरिएंटेशन कार्यक्रम शुरू होंगे
    स्वास्थ्य प्रदाताओं का प्रशिक्षण बढ़ेगा
    GUBARA क्लीनिकों का राज्यभर में विस्तार किया जाएगा
    समुदाय स्तर पर जागरूकता और शुरुआती पहचान पर विशेष फोकस रखा जाएगा
    इस प्रयास से उत्तराखंड आने वाले वर्षों में टाइप-1 डायबिटीज प्रबंधन में एक राष्ट्रीय मॉडल राज्य के रूप में स्थापित होने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
    हमारा संकल्प है कि उत्तराखंड का कोई भी बच्चा इलाज के अभाव में पीड़ा नहीं झेले। ‘GUBARA क्लीनिक’टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों के लिए एक संवेदनशील और मानवीय पहल है। यह कार्यक्रम आने वाले समय में पूरे राज्य में लागू होगा और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
    मुख्यमंत्री धामी जी के नेतृत्व में उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाओं में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। टाइप-1 डायबिटीज जैसे जटिल विषय को लेकर राज्य ने जो समग्र मॉडल अपनाया है, वह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा। हम सर्वेक्षण, प्रशिक्षण, उपचार और परिवार समर्थन तंत्र को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए उत्तराखंड बना उम्मीद का केंद्र, धामी सरकार की एक अनूठी पहल

    टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए उत्तराखंड बना उम्मीद का केंद्र, धामी सरकार की एक अनूठी पहल

    उत्तराखंड की धामी सरकार बच्चों, किशोरों और युवाओं के स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही है। इसी दिशा में आज विश्व मधुमेह दिवस पर राज्य ने टाइप-1 डायबिटीज (T1D) प्रबंधन के लिए अपनी पहली राज्य स्तरीय तकनीकी एवं संचालन संबंधी गाइडलाइन जारी की। यह कदम टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्थित, वैज्ञानिक और मानवीय स्वास्थ्य प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।

    देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), चिकित्सक विशेषज्ञ और विकास भागीदार शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि टाइप-1 डायबिटीज मुख्य रूप से बच्चों और युवाओं में पाई जाती है, और उपचार में थोड़ी सी भी देरी या कमी जीवन को खतरे में डाल सकती है। राज्य की चुनौतीपूर्ण पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एक मानकीकृत, सुचारू और समग्र मॉडल की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी—आज वह आवश्यकता पूरी हो गई।

    गुबारा क्लीनिक : बच्चों के लिए समग्र डायबिटीज देखभाल
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य ने देश के सबसे संवेदनशील और प्रभावी-डायबिटीज देखभाल मॉडल – “GUBARA Clinics” स्थापित किया है। यह मॉडल टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों को एक ही छत के नीचे हर जरूरी सेवा उपलब्ध कराता है।

    GUBARA क्लीनिकों में उपलब्ध मुख्य सेवाएँ—
    • नियमित इंसुलिन थेरेपी
    • शुगर मॉनिटरिंग
    • निर्धारित अंतराल पर मेडिकल चेकअप
    • पोषण विशेषज्ञों द्वारा डाइट परामर्श
    • मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग
    • परिवार परामर्श
    • मासिक फॉलो-अप

    टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित 200 लोगों को चिन्हित कर नामांकित किया गया है। देहरादून ज़िले में 200 लोगों की पहचान की गई है और उन्हें गुबारा क्लीनिकों में नामांकित किया गया है। सरकार का लक्ष्य 2026-27 तक राज्य में टाइप 1 मधुमेह से प्रभावित 1,120 लोगों तक इस कार्यक्रम की सेवाएं पहुंचाना है। देहरादून, हरिद्वार, बागेश्वर और उधमसिंहनगर सहित कई जिलों में GUBARA क्लीनिक सक्रिय हैं और लोगों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। उपचार, रोकथाम और परामर्श को एकीकृत करने वाला ढांचा जारी की गई राज्य गाइडलाइन ने टाइप-1 डायबिटीज प्रबंधन को एक पेशेवर, सरल और समान रूप से लागू होने वाली प्रणाली में बदल दिया है।
    गाइडलाइन की प्रमुख बातें—
    T1D के निदान व उपचार के लिए मानकीकृत चिकित्सकीय प्रोटोकॉल
    सभी जिला अस्पतालों में GUBARA क्लीनिक चलाने हेतु संचालन संबंधी दिशा-निर्देश
    ASHA, CHO, MO सहित स्वास्थ्य कर्मियों की स्पष्ट भूमिका
    RBSK एवं सामुदायिक टीमों के माध्यम से मज़बूत स्क्रीनिंग
    नि:शुल्क इंसुलिन व शुगर मॉनिटरिंग उपकरणों की निरंतर उपलब्धता
    टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित लोगों व परिवारों के लिए संरचित परामर्श मॉड्यूल
    राज्यभर में एक समान मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग प्रणाली
    यह गाइडलाइन आने वाले वर्षों में सभी जिलों में T1D कार्यक्रम के सुचारू विस्तार की आधारशिला बनेगी।

    गाइडलाइन जारी होने के बाद—
    सभी जिलों में ओरिएंटेशन कार्यक्रम शुरू होंगे
    स्वास्थ्य प्रदाताओं का प्रशिक्षण बढ़ेगा
    GUBARA क्लीनिकों का राज्यभर में विस्तार किया जाएगा
    समुदाय स्तर पर जागरूकता और शुरुआती पहचान पर विशेष फोकस रखा जाएगा
    इस प्रयास से उत्तराखंड आने वाले वर्षों में टाइप-1 डायबिटीज प्रबंधन में एक राष्ट्रीय मॉडल राज्य के रूप में स्थापित होने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
    हमारा संकल्प है कि उत्तराखंड का कोई भी बच्चा इलाज के अभाव में पीड़ा नहीं झेले। ‘GUBARA क्लीनिक’टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित बच्चों के लिए एक संवेदनशील और मानवीय पहल है। यह कार्यक्रम आने वाले समय में पूरे राज्य में लागू होगा और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
    मुख्यमंत्री धामी जी के नेतृत्व में उत्तराखंड स्वास्थ्य सेवाओं में तेज़ी से प्रगति कर रहा है। टाइप-1 डायबिटीज जैसे जटिल विषय को लेकर राज्य ने जो समग्र मॉडल अपनाया है, वह पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगा। हम सर्वेक्षण, प्रशिक्षण, उपचार और परिवार समर्थन तंत्र को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • मां के साथ पैतृक गांव पहुंच भावुक हुए सीएम धामी

    मां के साथ पैतृक गांव पहुंच भावुक हुए सीएम धामी

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को अपनी माता जी के साथ, पिथौरागढ़ जनपद स्थित अपने पैतृक गांव टुंडी–बारमौं पहुंच कर, स्थानीय लोगों से भेंट की। इस दौरान उन्होंने गांव के मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली के लिए कामना की है।

    मुख्यमंत्री श्री धामी ने गांव में बिताए अनुभव साझा करते हुए कहा कि मां के साथ अपने पैतृक क्षेत्र, कनालीछीना के टुंडी–बारमौं पहुंचना उनके लिए बेहद भावुक क्षण रहा। यह वही गांव है जहां उन्होंने बचपन बिताया, पहली बार विद्यालय की राह पकड़ी और जहां गांव के स्नेह, संस्कृति और परम्पराओं की समृद्ध छाया ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव पहुंचते ही बुजुर्गों का स्नेहिल आशीर्वाद और मातृशक्ति का अथाह प्रेम मन को भावनाओं से भर गया। कई बुजुर्गों ने इस मुलाकात में भी उन्हें बचपन के नाम से पुकारा, इस अपनत्व को शब्दों में समाना मुश्किल है। नौनिहालों और युवाओं की मुस्कुराहटों में वह सारी स्मृतियां फिर जीवंत हो उठीं, जिन्होंने मुझे मूल्य सिखाए और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुलाकात के दौरान हर चेहरा अपना लगा, हर आंगन स्मृतियों से भरा और हर कदम बचपन की गलियों से होकर गुजरता हुआ महसूस हुआ। टुंडी–बारमौं उनके लिए सिर्फ एक गांव नहीं बल्कि उनकी जड़, संस्कार और पहचान भी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आग्रह के अनुसार, प्रत्येक उत्तराखंडवासी को अपने पैतृक गांव में अपने घरों को फिर से संवारना होगा। उन्होंने कहा कि गांव से बाहर निवास करने वाले उत्तराखंड के प्रत्येक व्यक्ति को अपने गांव के विकास में योगदान देना होगा। प्रवासी गांव के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं।