जिला प्रशासन देहरादून की रायफल क्लब फंड से जरूरतमंदों को नई उम्मीद मिली है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सोमवार को छह असहाय, अक्षम और निर्धन व्यक्तियों को कुल 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक प्रदान किए। प्रत्येक लाभार्थी को 25-25 हजार रुपये की सहायता दी गई।
डीएम ने बताया कि रायफल क्लब एक लग्जरी ट्रांजेक्शन फंड है, जिसका अब उपयोग सीएसआर गतिविधियों और जनकल्याण के कार्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार इस फंड से गरीब, असहाय और निर्बलों को राहत प्रदान की जा रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि इस पहल के तहत अब तक 12.55 लाख रुपये की सहायता राशि जरूरतमंदों तक पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने इस कार्य में लगे ग्राउंड स्टाफ और अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है।
शमशेर सिंह 75 वर्ष, गुलरघाटी जीर्ण-शीर्ण मकान की मरम्मत हेतु सहायता।प्रियंका चन्द्रबनी पिता के निधन व दिव्यांग भाइयों की जिम्मेदारी के बीच अब उनकी उच्च शिक्षा मास्टर कोर्स का खर्च जिला प्रशासन उठाएगा।
आनंदी देवी बनियावाला गुमशुदा पति और आर्थिक तंगी से जूझ रहीं आनंदी देवी को आजीविका हेतु सहायता।सूरज शिव एन्क्लेव, मेहूवाला माफी दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग।मनीष सहस्त्रधारा दुर्घटना में आंख खोने के बाद कृत्रिम आंख प्रत्यारोपण हेतु सहायता।किरण धीमान आईटीबीपी रोड किडनी की बीमारी और मानसिक रूप से बीमार पति के उपचार के लिए सहयोग के लिए आर्थिक सहायता मिली। बुजुर्ग शमशेर सिंह ने भावुक होकर कहा, साहब, क्या यह पैसा वापस करना है?” जिस पर डीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह प्रशासन की ओर से एक छोटी सी मदद है, जिसे रोजगार शुरू करने में उपयोग करें।
डीएम बंसल ने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप है, जिसके तहत समाज के वंचित वर्ग को सरकारी योजनाओं और उपलब्ध स्रोतों से अधिकतम लाभ पहुंचाया जा रहा है।इस अवसर पर उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कपिल कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
देहरादून, 06 अक्टूबर। जिला प्रशासन देहरादून की रायफल क्लब फंड से जरूरतमंदों को नई उम्मीद मिली है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सोमवार को छह असहाय, अक्षम और निर्धन व्यक्तियों को कुल 1.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक प्रदान किए। प्रत्येक लाभार्थी को 25-25 हजार रुपये की सहायता दी गई।
डीएम ने बताया कि रायफल क्लब एक लग्जरी ट्रांजेक्शन फंड है, जिसका अब उपयोग सीएसआर गतिविधियों और जनकल्याण के कार्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार इस फंड से गरीब, असहाय और निर्बलों को राहत प्रदान की जा रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि इस पहल के तहत अब तक 12.55 लाख रुपये की सहायता राशि जरूरतमंदों तक पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने इस कार्य में लगे ग्राउंड स्टाफ और अधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन का लक्ष्य समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है। शमशेर सिंह 75 वर्ष, गुलरघाटी जीर्ण-शीर्ण मकान की मरम्मत हेतु सहायता।प्रियंका चन्द्रबनी पिता के निधन व दिव्यांग भाइयों की जिम्मेदारी के बीच अब उनकी उच्च शिक्षा मास्टर कोर्स का खर्च जिला प्रशासन उठाएगा।
आनंदी देवी बनियावाला गुमशुदा पति और आर्थिक तंगी से जूझ रहीं आनंदी देवी को आजीविका हेतु सहायता।सूरज शिव एन्क्लेव, मेहूवाला माफी दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहयोग।मनीष सहस्त्रधारा दुर्घटना में आंख खोने के बाद कृत्रिम आंख प्रत्यारोपण हेतु सहायता।किरण धीमान आईटीबीपी रोड किडनी की बीमारी और मानसिक रूप से बीमार पति के उपचार के लिए सहयोग के लिए आर्थिक सहायता मिली। बुजुर्ग शमशेर सिंह ने भावुक होकर कहा, साहब, क्या यह पैसा वापस करना है?” जिस पर डीएम ने मुस्कुराते हुए कहा कि यह प्रशासन की ओर से एक छोटी सी मदद है, जिसे रोजगार शुरू करने में उपयोग करें।
डीएम बंसल ने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री के संकल्प के अनुरूप है, जिसके तहत समाज के वंचित वर्ग को सरकारी योजनाओं और उपलब्ध स्रोतों से अधिकतम लाभ पहुंचाया जा रहा है।इस अवसर पर उप जिलाधिकारी (न्याय) कुमकुम जोशी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कपिल कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
पौड़ी गढ़वाल : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को लैंसडाउन, पौड़ी गढ़वाल में आयोजित शहीद सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने लैंसडाउन की पावन धरती से शहीदों की अमर वीरगाथाओं और उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
मुख्यमंत्री ने शहीदों के परिजनों एवं आश्रितों को ताम्रपत्र और अंगवस्त्र भेंटकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने आर्मी बैंड का निरीक्षण कर आर्मी जवानों को शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने अमर शहीद गब्बर सिंह नेगी मेमोरियल में उनकी प्रतिमा पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा वीर गब्बर सिंह नेगी जैसे अमर सपूतों के कारण ही आज देश सुरक्षित है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न जनपदों के शहीदों के आंगन की पवित्र मिट्टी से भरे ताम्र कलशों के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर वीर शहीदों की स्मृति में पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान सभी ने मौन रखकर शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। गौरतलब है कि इन ताम्र कलशों में एकत्रित शहीदों के आंगन की पावन माटी को देहरादून में बन रहे भव्य सैन्य धाम में ले जाया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सैनिकों और उनके परिजनों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोटद्वार में स्थित सैनिक विश्राम गृह का जीर्णोद्धार कर उसे आधुनिक सुविधाओं से युक्त किए जाने, निदेशालय सैनिक कल्याण तथा जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालयों में वीर नारियों एवं पूर्व सैनिकों की नियुक्ति कर निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जाने, गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर लैंसडाउन संग्रहालय के जीर्णोद्धार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जयहरीखाल का उच्चीकरण किए जाने, राजकीय इंटर कॉलेज कर्तिया का नाम शहीद कमल सिंह रावत के नाम पर, हाईस्कूल डोबरियासार का नाम शहीद अनुज सिंह नेगी के नाम पर, बरुआ-चिणबो मार्ग का नामकरण शहीद केशवानंद ध्यानी के नाम पर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नामकरण शहीद हरीश जोशी के नाम पर एवं जयहरीखाल-गुमखाल मार्ग का नामकरण शहीद खुशाल सिंह नेगी के नाम पर किए जाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि अन्य स्रोतों से अनुदान प्राप्त न करने की बाध्यता को समाप्त करते हुए सभी द्वितीय विश्व युद्ध के पूर्व सैनिकों और विधवाओं को सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्य धाम केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं बल्कि अमर आत्माओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा शहीदों के आंगन की पावन मिट्टी को सैन्य धाम में लाया जा रहा है। यह कार्यक्रम उन वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया है। उन्होंने कहा 25 सितंबर से 04 अक्टूबर तक चली शहीद सम्मान यात्रा 2.0 शहीदों के परिजनों के आंसुओं का सम्मान है। यह निर्माणाधीन सैन्य धाम आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा। यह उन शहीदों के लिए हमारी श्रद्धांजलि है, जिन्होंने हमारे भविष्य के लिए अपना वर्तमान बलिदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में लगभग हर घर का सदस्य सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़ा है। राज्य सरकार सैनिकों एवं उनके परिजनों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शहीदों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को रूपए 50 लाख से बढ़ाकर रुपए 1 करोड़ किया गया है। शहीद के अंतिम संस्कार हेतु 10 हजार की सहायता राशि दी जाती है। सैनिकों को भूमि खरीद पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी के रूप में 25 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।शहीदों के परिजनों को सरकारी सेवा में संयोजन के तहत 28 परिजनों को अब तक नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है तथा 13 मामलों की प्रक्रिया गतिमान है। पूर्व में आवेदन हेतु 02 वर्ष का समय सीमा थी, जिसे बढ़ाकर 05 वर्ष कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन, आधुनिक उपकरण, जैकेट एवं जूते जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में निर्यात में अग्रणी देशों में शामिल हो गया है और दुश्मन देश को मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तरह ही “एक पेड़ शहीदों के नाम” लगाने का आग्रह भी किया।
सैनिक कल्याण मंत्री श्री गणेश जोशी ने कहा कि शहीद सम्मान यात्रा 2.0 का आज लैंसडाउन में सफल समापन हुआ है। उन्होंने बताया कि यात्रा का दूसरा चरण 25 सितंबर को देहरादून से प्रारंभ हुआ था, जो आज लैंसडाउन में सम्पन्न हुआ। उन्होंने बताया कि शेष 71 शहीदों के आंगन की पवित्र मिट्टी लायी जा चुकी है, जिसे सैन्य धाम के लोकार्पण से पूर्व अमर जवान ज्योति में स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री सदैव सैनिकों और वीर नारियों के सम्मान एवं कल्याण के प्रति संवेदनशील रहते हैं, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी है। हम शहीदों को मृतक नहीं, बल्कि अमर वीर मानते हैं। आज हम खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं तो यह हमारे वीर सैनिकों के अदम्य साहस और बलिदान का परिणाम है। सैनिकों एवं उनके परिवारों का सम्मान और सहयोग केंद्र तथा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेश सरकार द्वारा सैनिकों एवं अग्निवीरों को समूह ‘ग’ की वर्दीधारी राजकीय सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना एक सराहनीय कदम है।
विधायक दिलीप सिंह रावत ने वीर सपूतों के पराक्रम और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शहीद सम्मान यात्रा की झलकियों पर आधारित विशेष वीडियो क्लिप भी प्रदर्शित की गयी, जिसने उपस्थित जनसमूह को शहीदों के गौरवशाली इतिहास और योगदान से अवगत कराया।
सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र चौधरी ने सभी अतिथियों, शहीद परिवारों और नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा यह आयोजन न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर बना, बल्कि सैन्य धाम निर्माण की दिशा में जनता और सरकार की एकजुट की संकल्प शक्ति का प्रतीक भी रहा।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्षा रचना बुटोला, विधायक पौड़ी राजकुमार पोरी, कर्नल ऑफ द रेजिमेंट ले.ज. डी.एस राणा, ले. ज. शरत चंद्र (से.नि.), ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी, उपाध्यक्ष गौ सेवा आयोग पं. राजेंद्र अंथवाल, जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह, मेयर कोटद्वार शैलेन्द्र सिंह रावत, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।
टिहरी: सोमवार 06 अक्टूबर से शुरू हो रहे 10 दिवसीय सरस आजीविका मेले की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल ने आज रविवार को स्थलीय निरीक्षण किया।
जिलाधिकारी ने मेला स्थल पूर्णानन्द स्टेडियम, मुनिकीरेती, टिहरी गढ़वाल पहुंचकर समस्त व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने मंच व्यवस्था, मेला पांडाल, स्वयं सहायता समूहों एवं विभागीय स्टॉल्स, विद्युत, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रचार प्रसार आदि के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
सभी संबंधित अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि मेले की सभी तैयारियों पूर्ण कर ली गई है। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय बनाकर मेले को सफल बनाने की बात कही।
इस मौके पर सीडीओ वरुणा अग्रवाल, एडीएम ए.के. सिंह, पीडी डीआरडीए पी.एस. चौहान, डीडीओ मो. असलम, एसडीएम आशीष घिल्डियाल, बीडीओ श्रुति वत्स, ईओ मुनिकीरेती अंकिता जोशी सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल के सम्मुख एक बुजुर्ग दम्पति ने अपने पुत्र एवं पुत्र वधु को बेदखली करने की फरियाद लगाई कि उनको अपने घर से बेदखल करने का डीएम से अनुरोध किया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने 2 सुनवाई में ही कैस समझते हुए परिजनों के आपसी विवाद जो परिवार के विखण्डन का कारण बन रहा था को अपनी सूजबूझ से बुजुर्ग दंपत्ति को समझाते हुए अपने तीन नौनिहालों वाले बेटे बहु को बेदखल न करने का आग्रह किया।
दोनों पक्षों को समझाया जिससे परिवार को टूटने से बचाने का प्रयास किया है। जहां जिलाधिकारी ने परिजनों को एक-दूसरे के कर्तव्य एवं जिम्मेदारियों का स्मरण कराया वहीं परिजनों को आपस में साथ रहने का अनुरोध किया।
जिलाधिकारी ने परिजनों को साथ-साथ रहने का अनुरोध किया था निर्धन बेटा-बहु को बुजुर्गों को साथ रखने तथा बुजुर्ग दम्पति को इस अवस्था में पुत्र एवं उसके परिवार का साथ नही छोड़ने के प्रेरित किया। बजुर्ग दम्पति ने बेटे-बह से नाराज होकर न्यायालय जिला मजिस्टेªट कोर्ट में भरणपोषण अधिनियम में वाद दर्ज कराया था।
22 अगस्त 2025 को खुड़बुड़ा निवासी बुजुर्ग दम्पति जसंवत सिंह व उनकी पत्नी जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में उनसे मिलकर जिल पुत्र तथा पुत्रवधु द्वारा प्रताड़ित करने की शिकायत की तथा पुत्रवधु को बेदखल करने का अनुरोध किया।
जिलाधिकारी सविन बसंल ने दोनो पक्षों को सुना तथा परिजनों का आपसी मनमुटाव दूर कराते हुए आपस में मिलजुलकर रहने की सलाह दी है। जिला प्रशासन की इसकी निरंतर माॅनिटिरिंग करेगा तथा दोनो पक्षों को आपस में मिलजुलकर रहने तथा एक- दूसरे के अधिकारों का अतिक्रमण नही करने का आग्रह किया गया। निर्धन पुत्र व पुत्रवधु एवं बुजुर्ग माता-पिता में सुलह से एक परिवार टूटने से बचने का प्रयास किया।
बुजुर्ग दंपति के 4 पुत्र है जिनमें दो पुत्र अपने परिवार संग अलग रहते हैं, तथा एक दिव्यांग पुत्र तथा पुत्र बंसी जिसके विरुद्ध दंपति ने भरण पोषण अधिनियम में केस दर्ज किया था, उसके 3 नाबालिग बच्चे हैं, जिनमें 2 बालिका तथा 1 बालक है, बेटे का कपड़े का अल्प व्यवसाय है तथा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिलाधिकारी ने बुजुर्ग दंपति से आग्रह किया कि अपने बेटे बहु तथा नाबालिग नौनिहालों को अपनी घर कुटिया से ना निकाले साथ ही बेटे बहु को बुजुर्गों के प्रति उनके कर्तव्य एवं जिम्मेदारियां भी स्मरण कराई।
टिहरी गढ़वाल: रेसकोर्स स्थित श्री गुरुनानक मैदान में 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक आयोजित “टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव देहरादून – 2025” में टिहरी के कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय और मंचीय कौशल से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रत्येक दृश्य में उनकी प्रतिभा, समर्पण और परंपरा के प्रति प्रेम झलकता रहा।
जयेंद्र मोहन पाण्डेय (मोंटी) जी ने रावण के दूत, दशरथ मंत्री, जनक मंत्री, ताड़का मंत्री, सुबाहु, बाणासुर, परशुराम, खर, निषाद राज केवट, रावण मुनि, मारीच, सुग्रीव, सुषेण वैद्य और वशिष्ठ जैसे अनेक पात्रों को जीवंत कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।
शिवम गिरी ने लक्ष्मण के मुख्य किरदार में ऐसी ऊर्जावान और भावनात्मक प्रस्तुति दी कि दर्शक “जय लक्ष्मण जी” के जयकारों से गूंज उठे। उन्होंने भाईचारे, निष्ठा और वीरता के भाव को बड़ी बारीकी से मंच पर उतारा। साथ ही नारद और ब्रह्मा के रूप में भी उनके सहज संवाद और जीवंत अभिनय ने मंच को भक्ति और हास्य के रंगों से भर दिया। शिवम गिरी का प्रदर्शन इस वर्ष की रामलीला के सर्वश्रेष्ठ अभिनय में गिना जा रहा है।
गबर राम ने भरत के महत्वपूर्ण किरदार में गहरी छाप छोड़ी और राम सेना व रावण सेना दोनों में अपने दमदार अभिनय से सभी का ध्यान खींचा।
जितेंद्र कुमार घई ने ताड़का और मेघनाद के जोशीले किरदारों से दर्शकों की खूब सराहना पाई।
महंत गोपाल गिरी और चरण सिंह नेगी ने भाट के रूप में हास्य और व्यंग्य से भरी जीवंत प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया।
अमित बहुगुणा ने अंगद के किरदार में अपनी दमदार आवाज़ और आत्मविश्वासपूर्ण मंच उपस्थिति से दर्शकों की वाहवाही लूटी।
वहीं तपेन्द्र चौहान ने हनुमान जी के रूप में ऐसा सजीव अभिनय किया कि पूरा मैदान “जय बजरंगबली” के नारों से गूंज उठा।
इस ऐतिहासिक रामलीला में टिहरी के कलाकारों की मेहनत, निष्ठा और कला ने यह सिद्ध कर दिया कि टिहरी की सांस्कृतिक परंपरा आज भी उतनी ही सशक्त और प्रेरक है, जितनी सदियों पहले थी।
भारत-चीन सीमा से लगे जनपद का सीमांत गांव जादूंग अब वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत पर्यटन की नई पहचान बनने की ओर अग्रसर है। यहां स्थानीय नागरिकों को सामाजिक-आर्थिक विकास और रोजगार से जोड़ने के साथ ही विभिन्न विकास कार्य तेजी से जारी हैं।
रविवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जादूंग गांव का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को समयबद्धता और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण से पूर्व जिलाधिकारी ने सीओ आईटीबीपी एवं अन्य अधिकारियों के साथ समसायिक विषयों पर भी चर्चा की।
जिलाधिकारी ने कहा कि योजना के प्रथम चरण में पारम्परिक शैली में 6 होम स्टे का निर्माण कार्य प्रगति पर है। तथा दूसरे चरण में 8 होम स्टे बनाए जाएंगे। कुल 14 होम स्टे के पूरा होने पर जादूंग गांव में आने वाले पर्यटकों को ठहरने की आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। इससे एक ओर जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा,वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।
उन्होंने कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान जादूंग गांव खाली कराया गया था। हालांकि स्थानीय ग्रामीण आज भी अपने देवस्थानों की पूजा के लिए गांव में आते रहे हैं। अब वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत यहां बुनियादी ढांचे के विकास,पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और गांव को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में जादूंग गांव सीमांत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इस दौरान सीडीओ एसएल सेमवाल,सीओ आईटीबीपी भानुप्रताप सिंह,जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी, समन्वयक आपदा जय पंवार,कपिल उपाध्याय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
भारत ने वेस्टइंडीज को पहले टेस्ट मैच में पारी और 140 रनों से हरा दिया है। अहमदाबाद में हुए इस मैच में भारत ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में शानदार प्रदर्शन किया। रवींद्र जडेजा ने टीम इंडिया के लिए दमदार ऑलराउंडर प्रदर्शन किया। भारत ने इस जीत के साथ दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है।
भारत ने दिन के खेल की शुरुआत से पहले अपनी पहली पारी पांच विकेट पर 448 रन पर घोषित की थी और 286 रनों की बढ़त हासिल कर ली थी। वेस्टइंडीज की टीम शनिवार को पूरे दो सत्र भी बल्लेबाजी नहीं कर सकी और उसकी दूसरी पारी 146 रन पर ऑलआउट हो गई।
भारत के लिए रवींद्र जडेजा और मोहम्मद सिराज ने शानदार गेंदबाजी की और चायकाल से पहले ही वेस्टइंडीज की पारी ढेर कर दी। दोनों टीमों के बीच टेस्ट सीरीज में यह 17वीं बार है जब कोई टीम पारी के अंतर से जीती है।
इसमें से 20वीं सदी में वेस्टइंडीज ने नौ बार जीत दर्ज की है, जबकि 21वीं सदी में भारत ने सभी आठ मैच जीते हैं। यानी भारत ने वेस्टइंडीज को आठवीं बार पारी के अंतर से हराया है। वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी दोनों ही पारी में काफी खराब रही है। पिछली 15 पारियों को देखें तो वेस्टइंडीज सिर्फ दो बार 200 रन का आंकड़ा पार कर पाया है और इस दौरान उसका सर्वोच्च टोटल 253 का रहा है।
भारत ने केएल राहुल, ध्रुव जुरेल और जडेजा के शतकों से पहली पारी में विशाल स्कोर खड़ा किया था और बढ़त लेने में सफल रही थी। गिल और राहुल ने दूसरे दिन बल्लेबाजी की शुरुआत की थी। शुभमन गिल ने जहां अर्धशतक लगाया, वहीं राहुल ने पहले सत्र में शतक पूरा किया था। राहुल 197 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 100 रन बनाकर आउट हुए।
राहुल और गिल के पवेलियन लौटने के बाद जुरेल और जडेजा ने भारतीय पारी को संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। इस दौरान जुरेल के बल्ले से करियर का पहला टेस्ट शतक निकला। जुरेल 210 गेंदों पर 15 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 125 रन बनाकर आउट हुए। जुरेल के आउट होने के बाद जडेजा ने भी गियर बदला और तेजी से खेलते हुए अपने टेस्ट करियर का छठा शतक पूरा किया। जडेजा अंत तक क्रीज पर टिके रहे और दूसरे दिन नाबाद रहकर पवेलियन लौटे थे। जडेजा ने 176 गेंदों पर छह चौकों और पांच छक्कों की मदद से नाबाद 104 रन बनाए।
बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशभर में प्रतिबंधित कफ सिरप और औषधियों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) की संयुक्त टीमें प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। यह अभियान हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की दवा (कफ सिरप) के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद शुरू किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए तत्परता से कार्रवाई प्रारंभ की है।
केंद्र की एडवाइजरी पर तुरंत कार्रवाई
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को आदेश जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार की एडवाइजरी को प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई विषय नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि औषधि निरीक्षक चरणबद्ध तरीके से कफ सिरपों के नमूने एकत्र करें और उनकी गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच कराएं, ताकि किसी भी दोषपूर्ण या हानिकारक दवा को बाजार से तत्काल हटाया जा सके।
बच्चों के लिए प्रतिबंधित सिरप न लिखें डॉक्टर
डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रदेश के सभी चिकित्सकों से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की एडवाइजरी का संज्ञान लेते हुए वे बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप न लिखें। डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा यदि चिकित्सक इन सिरपों को लिखेंगे तो मेडिकल स्टोर भी उन्हें बेचेंगे। इसलिए ज़रूरी है कि डॉक्टर स्वयं भी जिम्मेदारी दिखाएं और प्रतिबंधित दवाओं से परहेज़ करें।
कौन-सी दवाएं प्रतिबंधित हैं
भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुसार —
दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की खांसी या जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए।
पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है।
केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह, सही खुराक और न्यूनतम अवधि के लिए ही इनका उपयोग किया जा सकता है।
सरकार ने विशेष रूप से Dextromethorphan युक्त सिरप और Chlorpheniramine Maleate + Phenylephrine Hydrochloride संयोजन वाली दवाओं को चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया है।
प्रदेशभर में छापेमारी और सैंपलिंग अभियान
प्रदेश में इस आदेश के बाद अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में राज्यभर में युद्धस्तर पर छापेमारी की जा रही है। स्वयं अपर आयुक्त ने देहरादून के जोगीवाला, मोहकमपुर समेत कई क्षेत्रों में औषधि दुकानों का निरीक्षण किया। सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस माह के भीतर सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और खुदरा दुकानों से सिरपों के नमूने लेकर प्रयोगशाला परीक्षण करवाएँ। ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि एफ.डी.ए. की टीमें प्रदेशभर में सक्रिय हैं। यदि किसी भी स्तर पर दोष पाया गया तो संबंधित कंपनी या विक्रेता के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सख्त संदेश – जनस्वास्थ्य सर्वोपरि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रदेश में बिकने वाली हर दवा सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली हो। जनस्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और बच्चों की सुरक्षा पर किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार प्रदेश में औषधि गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी काम कर रही है।
बच्चों की दवा में लापरवाही अस्वीकार्य- डॉ. धन सिंह रावत
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा राज्य सरकार केंद्र की एडवाइजरी का पूरी गंभीरता से पालन कर रही है। बच्चों की दवाओं से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी चिकित्सकों और औषधि विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंधित सिरप को न लिखें और न बेचें। यह कदम बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जनता से अपील – डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवा न दें
एफ.डी.ए. ने राज्यभर में कफ सिरप की सैंपलिंग शुरू कर दी है। अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने जनता से अपील की है कि वे बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। यदि किसी दवा के सेवन से कोई प्रतिकूल प्रभाव दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल से संपर्क करें।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित ’’प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह’’ में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में योगदान देने पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी के कर्मियों को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ये सम्मान ऐसे कर्मियों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में अपनी जान की परवाह किए बिना योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम उत्तराखंड की बात करते हैं, तो केवल इसके प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता की ही नहीं, बल्कि इसकी भौगोलिक कठिनाइयों और प्रत्येक वर्ष होने वाली आपदाओं की चुनौती भी स्वतः ही सामने आ जाती है।
उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे हमारे राज्य में भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाएँ आना आम बात हैं। देवभूमि में रहते हुए हम ये जानते हैं कि प्रकृति का सौंदर्य जितना मनोहारी है, उतनी ही यहां चुनौतियाँ भी अप्रत्याशित हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम सबने 2013 की केदारनाथ आपदा की त्रासदी को देखा है, जब जय प्रलय में हजारों लोगों की जानें चले गईं थी। इसी प्रकार 2021 में चमोली की ऋषिगंगा और धौलीगंगा घाटी में आई आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 2023 में जोशीमठ का धंसाव भी एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने आया।
इस वर्ष भी उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की अनेक घटनाओं का हमने सामना करना पड़ा। इन आपदाओं में कई लोगों की मृत्यु हुई, कई लोग लापता हुए और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती मानव जीवन की रक्षा करने की थी, यही समय था जब एसडीआरएफ, एनडीआरएफ सहित पुलिस- प्रशासन के लोगों ने आपदा में घायल और मलबे में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए ग्राउंड जीरो पर लगातार काम किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा के समय हमारे राहत कर्मियों ने न केवल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, बल्कि पुनर्वास और राहत शिविरों का भी संचालन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिल्क्यारा टनल में फंसे मजूदरों के लिए चलाए गए अभियान को नहीं भूल सकते। तब दिन-रात चलने वाले बचाव अभियान पर पूरे देश की निगाह थी। परंतु बाबा बोखनाग के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन ने हमारे अभियान को सफल बनाया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वो जब भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हैं, तो बचाव और राहत कर्मियों के जज्बे को देखकर उन्हें विश्वास हो जाता है कि हम प्रत्येक चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं।
मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कार्यों में सहयोग प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं देहरादून आकर आपदा पीड़ितों से मिलकर उनका दर्द बाँटा, उनकी समस्याएँ सुनीं और समीक्षा बैठक कर त्वरित निर्णय भी लिए। उन्होंने उत्तराखंड की जनता के लिए 1200 करोड़ रुपये की विशेष राहत राशि की घोषणा भी की, जिससे पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य में हमें बड़ी सहायता मिली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा केवल इमारतें या सड़कें ही नहीं तोड़ती, आपदा लोगों के आत्मविश्वास और भविष्य को भी चोट पहुंचाती है। इसलिए राज्य सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि आपदा पीड़ितों को केवल मुआवज़ा ही न दिया जाए, बल्कि उनके पुनर्वास और उनकी आजीविका पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एसडीआरएफ जवानों को ड्रोन, सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग और अत्याधुनिक रेस्क्यू गियर जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, आपदा मित्र योजना के अंतर्गत गांव-गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही सड़क और पुल निर्माण में डिजास्टर रेज़िलिएंट तकनीक का उपयोग भी अनिवार्य किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को स्कूल-कॉलेजों में शामिल करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी आपदा के खतरों से और बेहतर तरीके से निपट सके। समारोह में नकल विरोधी कानून लागू करने के लिए छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री धामी का विशेष तौर पर स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।