देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून स्थित सहस्त्रधारा क्रॉसिंग बाजार का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने दुकानदारों एवं स्थानीय लोगों से मुलाकात कर स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में राज्य की भूमिका पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना न केवल हमारी परंपराओं और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करता है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराता है।
मुख्यमंत्री ने दुकानदारों से साफ-सफाई, ग्राहक सुविधा और बाजार व्यवस्थापन पर भी विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा हेतु प्रयासरत है तथा व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और विधायक उमेश शर्मा काऊ भी मौजूद थे।
बागेश्वर: जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला योजना की बैठक की। बैठक में जिला योजना, राज्य एवं केंद्र पोषित योजनाओं तथा बीस सूत्रीय कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला योजना में आवंटित बजट का समय पर व्यय सुनिश्चित करें। जिन विभागों द्वारा कार्य पूर्ण किए जा रहे हैं, वे बिल भुगतान करते हुए इसकी रिपोर्ट अर्थ एवं संख्या विभाग को उपलब्ध कराएं।
उन्होंने सभी विभागों को निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करने और निर्माणदायी संस्थाओं से कार्य तेजी से पूर्ण कराते हुए फोटोग्राफ सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जनहित में सही और पारदर्शी रिपोर्टिंग करने पर बल दिया।
माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया कि साइंस और गणित विषयों की ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को लाभ मिल सके। निर्माणदायी संस्था आरडब्ल्यूडी को टेंडरिंग प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
बीस सूत्रीय कार्यक्रम की समीक्षा में जिलाधिकारी ने डी श्रेणी में लघु सिंचाई, बाल विकास, उद्योग और लघु धातु उद्योग विभाग तथा सी श्रेणी में नगर निकाय और वन विभाग को लक्ष्य हासिल करते हुए प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने बाल विकास विभाग को कुपोषित बच्चों की प्रत्येक 15 दिन में मॉनिटरिंग करने और उद्योग विभाग को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में निर्धारित लक्ष्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि सी और डी श्रेणी वाले विभागों ने यदि अगले माह तक संतोषजनक प्रगति नहीं दिखाई तो विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी दिनेश रावत ने जानकारी दी कि जिला स्तर से अवमुक्त धनराशि के सापेक्ष व्यय की स्थिति इस प्रकार है—जिला योजना में 36.51 प्रतिशत तथा राज्य योजना में 53.00 प्रतिशत व्यय किया गया है।
इसके उपरांत जिलाधिकारी ने सीएम हेल्पलाइन संबंधी समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागीय अधिकारी सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर लंबित शिकायतों की नियमित समीक्षा करें, शिकायतों का समयबद्ध एवं सकारात्मक निस्तारण सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ताओं से सीधे संपर्क स्थापित कर उनकी संतुष्टि सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी, अपर जिलाधिकारी एन.एस. नबियाल सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर जिले में प्रथम बार जनपद के सभी कॉप्स (Common Service Points) को आधुनिक और हाईटेक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी द्वारा प्रत्येक कॉप्स को कंप्यूटर, प्रिंटर एवं अन्य आवश्यक उपकरण वितरित किए गए।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि “डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत कॉप्स को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करना आवश्यक है, ताकि आमजन को शासन-प्रशासन से जुड़ी सेवाओं के लिए असुविधा न हो और उन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध हो सकें।”
उन्होंने बताया कि अब कॉप्स के माध्यम से प्रमाण पत्र, विभिन्न प्रकार के आवेदन पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएँ एवं अन्य शासकीय सेवाएँ और भी सुगमता से प्राप्त की जा सकेंगी। इससे ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को सुविधा होगी तथा अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कॉप्स संचालकों को नई तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षण भी दिया जाए, जिससे वे आधुनिक उपकरणों का बेहतर उपयोग कर सकें और सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार हो।
इस अवसर पर प्रभारी सूचनाओं विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडे ई डिस्टिक मैनेजर हरेंद्र कुमार सहित अधिकारी एवं कॉप्स संचालक उपस्थित रहे।
देहरादून: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से उत्तराखण्ड में पोस्ट डिज़ास्टर नीड्स असेसमेंट की प्रक्रिया बुधवार से प्रारम्भ हो गई है। इस कार्य हेतु गठित टीमें आज प्रभावित जनपदों के लिए रवाना हो गई हैं। पहली टीम ने उत्तरकाशी पहुंचकर और दूसरी टीम ने चमोली पहुंचकर जिलाधिकारी के साथ बैठक कर पीडीएनए को लेकर चर्चा की। कल से टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर क्षति का आकलन किया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस वर्ष मानसून में अतिवृष्टि, भूस्खलन एवं आकस्मिक बाढ़ की घटनाओं से राज्य को भारी क्षति पहुंची है। अब तक 135 लोगों की मृत्यु हुई है। 148 लोग घायल हुए हैं तथा 90 लोग लापता हैं। पशुधन और संपत्ति की भी भारी हानि हुई। सड़क, बिजली, जल आपूर्ति, कृषि भूमि, आवासीय व वाणिज्यिक परिसरों समेत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
उन्होंने बताया कि एनडीएमए के दिशा-निर्देशन में पीडीएनए की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। एनडीएमए के सहयोग से सभी विभागों के अधिकारियों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन कर पीडीएनए को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी हो गए हैं तथा विभागों की शंकाओं का समाधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि पीडीएनए के लिए एनडीएमए, राज्य व जनपद स्तर पर विशेषज्ञों को सम्मिलित कर चार टीमें बनाई गई हैं। पहली टीम देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी, दूसरी टीम पौड़ी, चंपावत, रुद्रप्रयाग, तीसरी टीम पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर तथा चौथी टीम ऊधमसिंहनगर, नैनीताल और चंपावत में सर्वेक्षण करेगी। जिलों में पहुंचकर टीमें सबसे पहले जिलाधिकारियों के साथ बैठक करेंगी, तत्पश्चात प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण प्रारम्भ करेंगी।
एनडीएमए की ओर से सीबीआरआई के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार, सीबीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया, आईआईटी रुड़की के प्रो. डॉ. श्रीकृष्णन शिवा, प्रो. गगनदीप सिंह (एनआईडीएम), डॉ. महेश शर्मा (एनआईडीएम), सीबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. डीपी कानूनगो, श्री अशोक ठाकुर (सीनियर कंसलटेंट, एनडीएमए), डॉ. रूपम शुक्ला (आईआईटी रुड़की), रानू चौहान (सीनियर कंसलटेंट, एनडीएमए) तथा अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। राज्य सरकार की ओर से टीम में यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार तथा प्रधान सलाहकार डॉ. मोहित पूनिया सम्मिलित हैं। जनपदों में जिलाधिकारियों द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों को टीम में शामिल किया गया है।
बिल्ड बैक बैटर के सिद्धांत पर आधारित होगा पीडीएनएः सुमन
देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि पीडीएनए का मुख्य उद्देश्य आपदा से हुई क्षति का आकलन कर एक समग्र पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण रणनीति तैयार करना है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आपदा के समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जाएगा, ताकि प्रभावित जिलों और समुदायों की वास्तविक स्थिति को सामने लाया जा सके। पीडीएनए रिपोर्ट में अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण आवश्यकताओं को समाहित करते हुए एकीकृत रणनीति बनाई जाएगी। इसके लिए डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन और बिल्ड बैक बेटर सिद्धांतों को आधार बनाया जाएगा। साथ ही, लैंगिक और पर्यावरणीय पहलुओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी ताकि पुनर्निर्माण कार्य न केवल सुरक्षित बल्कि टिकाऊ भी हो सके। इसके साथ ही आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए ठोस सुझाव, संस्थागत तंत्र और नीतिगत विकल्पों की अनुशंसा भी की जाएगी। अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार द्वारा तैयार कर गृह मंत्रालय, भारत सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।
इन क्षेत्रों में किया जाएगा पीडीएनए
देहरादून। सामाजिक क्षेत्रों में आवास एवं बस्तियां, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तथा सार्वजनिक भवन और नागरिक सुविधाओं का आकलन किया जाएगा। बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में पेयजल एवं स्वच्छता, सड़कें और पुल (मुख्य जिला सड़कें, अन्य जिला सड़कें, ग्राम सड़कें और पुल), विद्युत आपूर्ति एवं अन्य बुनियादी ढांचे को शामिल किया गया है। उत्पादक क्षेत्रों में कृषि एवं बागवानी, पशुपालन एवं पशुधन, आजीविका, वानिकी एवं पर्यावरण तथा पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्रॉस-कटिंग क्षेत्रों के अंतर्गत आपदा जोखिम न्यूनीकरण और पर्यावरणीय पहलुओं को भी विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत उत्तराखण्ड में आयोजित “स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार” महाअभियान ने कम समय में व्यापक उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। प्रदेश में चल रहे स्वास्थ्य शिविरों और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की श्रृंखला में अब तक लाखों लोगों ने लाभ उठाया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्मदिवस 17 सितम्बर 2025 से लगातार आयोजित किए जा रहे इन शिविरों के जरिए जनता को मुफ्त जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह महाअभियान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती (02 अक्टूबर) तक जारी रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत के नेतृत्व में यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए एक संगठित आंदोलन का रूप ले चुका है।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ (17–24 सितम्बर, 2025)
प्रदेशभर में अब तक कुल 10,672 स्वास्थ्य शिविर (स्क्रीनिंग और स्पेशियलिटी कैंप) लगाए गए हैं। इनमें से 290 स्पेशियलिटी कैंप रहे। इन शिविरों के जरिए 5,45,233 लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँची हैं, जिनमें पुरुषों की संख्या 2,15,096 और महिलाओं की संख्या 3,30,137 रही।
गैर-संचारी रोगों (NCD) की स्क्रीनिंग के अंतर्गत उच्च रक्तचाप (हाईपरटेंशन) की जांच 2,65,701 लोगों की की गई। इसी तरह डायबिटीज़ के लिए 2,49,500 और कैंसर (मुख, गर्भाशय व स्तन) की जांच 2,39,703 लोगों की की गई।
प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) सेवाओं के अंतर्गत 54,461 गर्भवती महिलाओं की ANC जांच की गई। वहीं 93,601 लोगों की एनीमिया जांच की गई। बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान भी सफल रहा और अब तक 83,427 बच्चों को टीके लगाए जा चुके हैं।
क्षय रोग (टीबी) की रोकथाम के लिए Ni-Kshay पोर्टल पर अब तक 80,016 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जबकि 4,324 निक्षय मित्र पंजीकृत किए गए हैं। सिकल सेल रोग की जांच के अंतर्गत 61 लोगों की स्क्रीनिंग हुई और 23 सिकल सेल कार्ड वितरित किए गए। परामर्श सेवाओं के अंतर्गत अब तक 2,90,383 लोगों को विभिन्न कार्यक्रमों के लिए परामर्शित किया गया है।
अन्य सेवाओं के अंतर्गत आयुष्मान/PM-JAY कार्ड जारी करने की संख्या 8,408 रही। वहीं, 47,500 रक्तदाताओं का पंजीकरण हुआ और 6,498 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। केंद्रीय सरकारी संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और निजी संगठनों की सहभागिता भी महत्वपूर्ण रही है। इनके सहयोग से आयोजित 10 स्वास्थ्य शिविरों में 2,748 लोग लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार’ महाअभियान उत्तराखण्ड की महिलाओं और परिवारों के स्वास्थ्य की दिशा में ऐतिहासिक पहल है। हमारा संकल्प है कि हर ज़िले, हर गाँव तक गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर पहुँचे। यह केवल स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं बल्कि जन-भागीदारी की एक सशक्त मिसाल है। मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि वे नजदीकी स्वास्थ्य शिविरों में जाकर जांच, परामर्श और उपचार अवश्य प्राप्त करें।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान
यह महाअभियान महिलाओं को न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है बल्कि उन्हें जागरूक और सशक्त भी बना रहा है। सरकार इस कार्यक्रम को घर-घर, गाँव-गाँव तक पहुँचा रही है ताकि कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रह जाए। यह अभियान आने वाले समय में उत्तराखण्ड को मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा है कि इन स्वास्थ्य शिविरों का उद्देश्य आमजन तक निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है।
देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल ने बुधवार को आपदा प्रभावित दूरस्थ किमाडी-कंडरियाणा गांव का दौरा कर प्रभावितों की समस्या सुनी और आपदा से उपजे हालात एवं क्षति का जायजा लिया।
डीएम ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रशासन पूरी तरह से प्रभावित परिवारों के साथ खडा है। प्रभावित लोगों को मदद करने में कोई कोर कसर नहीं छोडी जाएगी। इस दौरान डीएम ने राहत कार्यो की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए।
आपदा प्रभावित पूर्ण रूप से कट आॅफ भितरली कंडरियाणा क्षेत्र में आज फिर पूरा प्रशासनिक अमला आॅन ग्राउण्ड हुआ। गाढ, गदेरे, ढौंड-ढंगार लांघते 05 किमी दुर्गम मार्ग पार कर डीएम प्रभावितों तक पंहुचे और उनकी पीड़ा साझा की इस दौरान उन्होंने आपदा से क्षति का जायजा भी लिया। जिलाधिकारी ने कहा कि अंतिम व्यक्ति को रिलिफ पहुंचाए बिना जिला प्रशासन चैन से नहीं बैठेगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि खेत, खलियान, निजी भवन, ग्रामीण मार्ग, पुलिया, बिजली-पानी 02 दिन अन्तर्गत दुरूस्त हो जाना चाहिए। जिलाधिकारी ने हसीलदार समेत वरिष्ठ अधिकारियों को क्षेत्र में ही कैम्प करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि अतिवृष्टि के कारण भीतरली कंडरियाणा में कुछ भवनों में दाररें आई है। दो गौशाला क्षतिग्रस्त हुई है। वही पहाडी के दोनों तरफ से मलबा आने से कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है।
गांव की पेयजल लाईन, सिंचाई गूल और सडक बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई है। गावं को जोडने वाला नदी पर बना पैदल पुल बह गया है। दोनों तरफ पहाडी से भारी भूस्खलन और नीचे नदी से कटान होने के कारण भीतरली कंडरियाणा तोक में करीब 11 भवनो को खतरा बन गया है। इसलिए गांव का विस्थापन किया जाना आवश्यक है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायत भी प्रमुखता से डीएम के समक्ष रखी।
जिलाधिकारी ने तहसीलदार और लोक निर्माण के जेई को गांव में आंशिक, तीक्ष्ण और पूर्ण क्षति वाले मकानों का सर्वे कराते हुए आज ही रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित को राहत राशि वितरित की जा सके।
साथ ही प्रभावितों की समस्याओ का पूरी तरह समाधान होने तक तहसीलदार को गांव क्षेत्र में ही स्टेशन रहने के निर्देश दिए। ग्रामीणों की विस्थापन की मांग पर जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि खतरे की जद में आए परिवारों के विस्थापन का प्रस्ताव शीघ्र ही शासन को भेजा जाएगा।
जिलाधिकारी ने एडीओ कृषि और उद्यान को गांव में स्टेशन रहते हुए क्षतिग्रस्त कृषि भूमि एवं फसल क्षति की रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। ताकि प्रभावितो को क्षति का मुआवजा वितरित किया जा सके।
अतिवृष्टि के कारण करीब 8.4 किलोमीटर किमाडी से भीतरली कंडरियाणा मोटर मार्ग 13 स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुआ है। पीएमजीएसवाई अधिशासी अभियंता ने बताया कि मोटर मार्ग पर दोनो तरफ से जेसीबी लगाए गए है। अब केवल 1.5 किलोमीटर मार्ग अवरुद्ध है। पूरे मोटर मार्ग को 28 सितंबर तक सूचारु कर लिया जाएगा। सडक की खराब गुणवत्ता की शिकायत पर डीएम ने ग्रमाणों से लिखित में शिकायत उपलब्ध कराने को कहा।
आपदा से गांव मे पेयजल लाईन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने पर जल संस्थान ने बताया कि पेयजल लाइन रेस्टोरेशन का काम प्रगति पर है। गांव में फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था से पानी आपूर्ति की जा रही है।
भीतरली कंडरियाणा में गूल क्षतिग्रस्त होने पर डीएम ने सिंचाई विभाग को गूल मरम्मत हेतु प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा। वही ब्लाक अधिकारियो को गांव के क्षतिग्रस्त रास्तों के पुनर्निमाण हेतु प्रस्ताव तैयार करने को कहा। राशन के बारे पूछे जाने पर ग्रामीणों ने बताया कि गांव की सस्ते गल्ले दुकान तक राशन मिल गया है। गांव में राशन कार्ड में नए नाम जोडने की समस्या पर डीएम ने डीएसओ को कल ही गांव में शिविर लगाकर समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए।
इस दौरान जिलाधिकारी ने आपदा प्रभावित किमाडी, भीतरली कंडरियाणा गावं का स्थलीय निरीक्षण कर आपदा से नुकसान एवं राहत कार्यों का विस्तृत जायजा लिया। डीएम ने कहा कि आपदा प्रभावितों की समस्याओ का प्राथमिकता पर निराकरण किया जाएगा। प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन-जीवन को जल्द सामान्य करने के लिए राहत एवं बुनियादी सुविधाओं की बहाली के कार्यों को पूरी क्षमता व तत्परता से संचालित राहत एवं रेस्टोरेशन कार्यो को पूरा करने के निर्देश दिए। प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की सुचारू आपूर्ति और सभी क्षेत्रों तक सड़क संपर्क बहाल करने के काम को प्राथकिता से पूरा किया जाय। |
इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, डीएसओ केके अग्रवाल सहित सडक, पेयजल, विद्युत, सिंचाई एवं तहसील व ब्लाक के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री घोषणा के तहत जनपद उत्तरकाशी के विधानसभा क्षेत्र पुरोला के अंतर्गत विकास खण्ड मोरी के ग्राम पंचायत ओडाठा के बामसू गांव में महासू देवता के पास सौन्दर्यीकरण एवं सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किये जाने हेतु 99 लाख तथा विकासखण्ड मोरी के महासू देवता मंदिर ठडियार के सौन्दर्यीकरण एवं सार्वजनिक शौचालय निर्माण कार्य हेतु 01 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री ने जनपद पिथौरागढ़ के विधानसभा क्षेत्र धारचूला के अंतर्गत ग्राम सभा मदकोट में शिव मंदिर सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु 27 लाख के साथ ही जनपद चमोली के विधानसभा क्षेत्र बद्रीनाथ के अंतर्गत सती शिरोमणी माता अनसूया मंदिर का सौन्दर्यीकरण किये जाने हेतु 1.50 करोड की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मानसून सत्र 2025 में अत्यधिक वर्षा/अतिवृष्टि के कारण विभिन्न क्षेत्रों में आयी प्राकृतिक आपदा के कारण हुई हानि से राज्य आपदा मोचन निधि के अन्तर्गत जनपद पिथौरागढ़ हेतु मरम्मत एवं पुनर्निर्माण मद में 15 करोड़ तथा जनपद चमोली हेतु राहत एवं बचाव मद में 05 करोड़ व मरम्मत एवं पुनर्निर्माण मद में 05 करोड़, इस प्रकार जनपद चमोली को कुल 10 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) के तहत उत्तराखण्ड को स्वास्थ्य क्षेत्र में केंद्र सरकार से बड़ा तोहफ़ा मिला है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC) की स्थापना को मंज़ूरी प्रदान की है।
यह सेंटर स्वास्थ्य आपदाओं के समय राज्य की तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को मज़बूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि HEOC के संचालन के लिए कुल नौ संविदा पदों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहकार, डेटा विश्लेषक, हब इंजीनियर और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद शामिल हैं।
मंत्रालय के अनुसार HEOC के लिए धनराशि PM-ABHIM परियोजना अवधि 2021–26 तक उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवधि के बाद आगे की निरंतरता योजना की स्वीकृति पर निर्भर करेगी। राज्य सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह इन पदों पर संविदा आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू करे और HEOC को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाए। निधि हस्तांतरण के लिए HEOC के नाम से एक अलग बैंक खाता भी खोला जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने उत्तराखण्ड को स्वास्थ्य सुरक्षा का बड़ा तोहफ़ा दिया है। “हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना से राज्य की स्वास्थ्य आपदा प्रबंधन क्षमता और मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से आपात स्थितियों में समय पर और समन्वित कार्रवाई संभव हो सकेगी। मैं प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का आभार व्यक्त करता हूँ,”।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उत्तराखण्ड के लिए हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर की स्थापना को मंज़ूरी दी है। हम जल्द ही संविदा पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेंगे और HEOC को क्रियाशील बनाएंगे। यह सेंटर स्वास्थ्य आपदाओं के दौरान समयबद्ध प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा, जिससे जनता को सीधे लाभ मिलेगा।
देश भर में HEOCs की स्थापना भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्वास्थ्य आपात स्थितियों के समय समयबद्ध कार्रवाई और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान, जीएसआई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, सेंट्रल वॉटर कमीशन आदि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ लैंड स्लाइड न्यूनीकरण के सम्बन्ध में बैठक की। बैठक के दौरान सभी वैज्ञानिक संस्थानों के साथ भूस्खलन न्यूनीकरण की समस्याओं के निराकरण पर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने सभी वैज्ञानिक संस्थानों को प्रदेश के अंतर्गत भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर एक प्रिडिक्शन मॉडल तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें एक इस प्रकार के मैकेनिज्म को तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो सैटेलाइट इमेज और धरातल परीक्षण के बाद तैयार मॉड्यूल के आधार पर यह पूर्वानुमान लगा सके कि कितनी वर्षा होने पर किसी विशेष स्थान के भूस्खलन की संभावना है, ताकि हम निचले स्थानों को खाली कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा सकें।
मुख्य सचिव ने इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान एवं सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को मिलकर इस दिशा पर कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में वृहत स्तर पर और तत्काल कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने प्रदेश की 13 ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगवाए जाने हेतु वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में प्रदेश की 6 संवेदनशील झीलों का सैटेलाइट एवं धरातलीय परीक्षण कर सेंसर स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील झीलों की संवेदनशीलता किस प्रकार से कम की जा सकती है, इस दिशा में भी कार्य किए जाना है। उन्होंने कहा कि वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल वॉटर कमीशन, यू-सैक आदि आवश्यक वैज्ञानिक संस्थानों की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने वाडिया संस्थान को आश्वासन दिया कि इस कार्य के लिए आवश्यक फंड्स की किसी प्रकार से कमी नहीं होने दी जाएगी और उपलब्ध करायी जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह एक मल्टी इंस्टीट्यूशनल टास्क है। इसे हम सभी को गंभीरता के साथ तत्काल इस दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, आईजी एसडीआरएफ श्री अरुण मोहन जोशी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल वॉटर कमीशन के वैज्ञानिक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
देहरादून: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान, जीएसआई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, सेंट्रल वॉटर कमीशन आदि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ लैंड स्लाइड न्यूनीकरण के सम्बन्ध में बैठक की। बैठक के दौरान सभी वैज्ञानिक संस्थानों के साथ भूस्खलन न्यूनीकरण की समस्याओं के निराकरण पर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने सभी वैज्ञानिक संस्थानों को प्रदेश के अंतर्गत भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर एक प्रिडिक्शन मॉडल तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें एक इस प्रकार के मैकेनिज्म को तैयार किए जाने की आवश्यकता है, जो सैटेलाइट इमेज और धरातल परीक्षण के बाद तैयार मॉड्यूल के आधार पर यह पूर्वानुमान लगा सके कि कितनी वर्षा होने पर किसी विशेष स्थान के भूस्खलन की संभावना है, ताकि हम निचले स्थानों को खाली कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा सकें।
मुख्य सचिव ने इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान एवं सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को मिलकर इस दिशा पर कार्य किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में वृहत स्तर पर और तत्काल कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
मुख्य सचिव ने प्रदेश की 13 ग्लेशियर झीलों में सेंसर लगवाए जाने हेतु वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को जिम्मेदारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में प्रदेश की 6 संवेदनशील झीलों का सैटेलाइट एवं धरातलीय परीक्षण कर सेंसर स्थापित किए जाएं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील झीलों की संवेदनशीलता किस प्रकार से कम की जा सकती है, इस दिशा में भी कार्य किए जाना है। उन्होंने कहा कि वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल वॉटर कमीशन, यू-सैक आदि आवश्यक वैज्ञानिक संस्थानों की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने वाडिया संस्थान को आश्वासन दिया कि इस कार्य के लिए आवश्यक फंड्स की किसी प्रकार से कमी नहीं होने दी जाएगी और उपलब्ध करायी जाएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह एक मल्टी इंस्टीट्यूशनल टास्क है। इसे हम सभी को गंभीरता के साथ तत्काल इस दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, आईजी एसडीआरएफ श्री अरुण मोहन जोशी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, सेंट्रल वॉटर कमीशन के वैज्ञानिक एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।